क्रिप्टो अपराधियों ने पुराने हथकंडे अपनाकर कैसे चुराए करीब 71 करोड़ डॉलर

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- Author, जो टाइडी
- पदनाम, वर्ल्ड सर्विस साइबर कॉरेस्पॉंडेंट
क्रिप्टोकरेंसी चोरी हो जाना एक अलग ही तरह का दर्द देता है. इसकी वजह यह है कि हर लेन-देन एक डिजिटल बहीखाते में दर्ज होता है, जिसे ब्लॉकचेन कहा जाता है. यानी अगर कोई आपका पैसा लेकर उसे अपने क्रिप्टो वॉलेट में डाल दे, तो भी वह पैसा ऑनलाइन सबको दिखाई देता रहता है.
हेलेन के लगभग 3 लाख 15 हज़ार डॉलर (करीब 29 करोड़ रुपये) के क्रिप्टो कॉइन चोरी हो गए हैं. वह कहती हैं, "आप सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर साफ़ देख सकते हैं कि आपका पैसा वहीं पड़ा है, लेकिन उसे वापस लेने के लिए आप कुछ भी नहीं कर सकते."
वह कहती हैं कि यह ऐसा ही है जैसे आप किसी चोर को अपनी सबसे कीमती चीज़ें उठाकर एक ऐसी खाई के उस पार जमा करते हुए देख रहे हों, जिसे आप किसी तरह पार नहीं कर सकते.
ब्रिटेन के रहने वाली हेलेन और उनके पति रिचर्ड (बदला हुआ नाम) पिछले सात साल से कार्डानो नाम की क्रिप्टो करेंसी ख़रीद कर और जमा कर रहे थे.
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पारंपरिक बचत के तरीकों के विपरीत उन्हें ऐसी डिजिटल संपत्ति में निवेश करने का विचार पसंद आया था जिसकी कीमत समय के साथ काफ़ी तेज़ी से बढ़ने की संभावना थी. वे जानते थे कि इसमें जोखिम है, लेकिन वे अपनी डिजिटल चाबियों (कीज़) को सुरक्षित रखने को लेकर काफ़ी सावधान रहते थे.
लेकिन किसी तरह हैकर्स उनके क्लाउड स्टोरेज अकाउंट तक पहुंच गए, जहां उन्होंने अपने क्रिप्टो वॉलेट से जुड़ी जानकारी और उन्हें खोलने का डेटा संभाल कर रखा हुआ था.
फ़रवरी 2024 में, पहले एक छोटा सा टेस्ट ट्रांस्फ़र करने के बाद, अपराधियों ने चुपचाप और बेहद तेज़ी से दंपती के सारे क्रिप्टो कॉइन्स अपने डिजिटल वॉलेट्स में भेज दिए.
पूरी तरह बेबस, बस देखते रहे

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इसके बाद कई महीनों तक हेलेन और रिचर्ड बस यह देखते रहे कि उनका पैसा एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर किया जा रहा है लेकिन वे पूरी तरह बेबस थे.
(क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सभी लेन-देन सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं, लेकिन अगर यूज़र्स चाहें, तो उनकी असली पहचान छिपी रह सकती है.)
हेलेन और रिचर्ड अमीर लोग नहीं हैं. हेलेन एक पर्सनल असिस्टेंट हैं और रिचर्ड एक संगीतकार. उन्हें अपने कार्डानो निवेश से बड़ी उम्मीदें थीं.
रिचर्ड कहते हैं, "हम बहुत लंबे वक्त से ये कॉइन्स खरीद रहे थे… हमारे पास जो भी थोड़ा-बहुत पैसा होता था, हम उससे और कॉइन्स खरीद लेते थे,"
वह कहते हैं, "मेरे माता-पिता की मौत के अलावा, यह चोरी मेरे जीवन में हुई सबसे बुरी घटना है."
तब से हेलेन अपने पैसे वापस पाने की कोशिश में लगातार जुटी हुई हैं. उन्होंने अलग अलग पुलिस विभागों और कार्डानो के डेवलपर्स से विस्तृत रिपोर्टें हासिल की हैं. अब उनके पास चोरों के क्रिप्टो वॉलेट का पूरा पता भी है, लेकिन इसके बावजूद कोई भी उनकी असली पहचान सामने लाने के लिए कुछ नहीं कर सकता.
अब उनकी योजना है कि वे इतना पैसा जोड़े लें कि निजी जासूसों को रख सकें, जो हैकर्स तक पहुंचने की कोशिश करें.
वह कहती हैं, "यह आपको पूरी तरह बेबस होने का एहसास देता है, लेकिन मैं कोशिश करना छोड़ने वाली नहीं हूं."
क्रिप्टो अपराधों में ज़बरदस्त उछाल

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अगस्त 2024 में ब्रिटेन की फ़ाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी (एफ़सीए) के लिए कराए गए एक सर्वे के मुताबिक, ब्रिटेन के लगभग 12% वयस्कों, यानी करीब 70 लाख लोगों, के पास किसी न किसी तरह की क्रिप्टो संपत्ति थी.
अनुमान है कि दुनिया भर में अब लगभग 56 करोड़ लोग क्रिप्टो के मालिक हैं. लेकिन जैसे जैसे क्रिप्टो रखने वालों की संख्या बढ़ी, वैसे वैसे चोरी की घटनाएं भी बढ़ती चली गईं. महामारी के दौरान क्रिप्टो कॉइन्स की कीमतों में तेज़ उछाल आया, और इसी के साथ इस क्षेत्र पर हमलों का सिलसिला भी तेज़ हो गया.
ब्लॉकचेन एनालिसिस कंपनी चेनालिसिस के जांचकर्ताओं के मुताबिक साल 2025 क्रिप्टो अपराधियों के लिए एक और रिकॉर्ड तोड़ साल रहा. इस साल चोरी की कुल रकम 3.4 अरब डॉलर से ज़्यादा रही. 2020 से हर साल चोरी का आंकड़ा लगभग इसी स्तर के आस-पास बना हुआ है.
इनमें से ज़्यादातर पैसा, क्रिप्टो से जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाकर किए जाने वाले बड़े पैमाने के साइबर हमलों में चोरी होता है. उदाहरण के तौर पर, फरवरी 2025 में उत्तर कोरिया के हैकर्स ने क्रिप्टो एक्सचेंज बाइबिट (Bybit) से 1.5 अरब डॉलर उड़ा लिए.
इस तरह के मामलों में, और ज़्यादातर अन्य बड़े हैक्स में भी, नुक़सान की भरपाई बड़े और भरपूर पैसे वाले क्रिप्टो संस्थान करते हैं, इसलिए आम लोगों पर इसका सीधा असर कम पड़ता है. लेकिन 2025 में व्यक्तिगत क्रिप्टो निवेशकों पर हमले भी तेज़ी से बढ़े.
चेनालिसिस की रिसर्च के मुताबिक 2022 में व्यक्तिगत हमले 40 हज़ार थे, जो पिछले साल बढ़कर 80 हज़ार तक पहुंच गए.
कंपनी का अनुमान है कि हैकिंग, ठगी या धमकाकर की गई ये वारदातें, कुल चोरी हुई क्रिप्टो वैल्यू का लगभग 20% हिस्सा थीं और यह रकम करीब 71.3 करोड़ डॉलर बैठती है.
हालांकि कंपनी का यह भी कहना है कि असली संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि सभी पीड़ित सार्वजनिक रूप से चोरी की रिपोर्ट नहीं करते. और जब ऐसा होता है, तो आप पूरी तरह अकेले पड़ जाते हैं.
पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था में होने वाली कई तरह की चोरियां या धोखाधड़ी आमतौर पर बैंकों या कार्ड कंपनियों द्वारा कवर कर ली जाती हैं. ब्रिटेन में आप वित्तीय लोकपाल सर्विस में शिकायत कर सकते हैं और कई मामलों में वित्तीय सेवा मुआवज़ा योजना के तहत हर्जाना भी मिल सकता है.
लेकिन एफ़सीए (फ़ाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी) साफ़ शब्दों में चेतावनी देती है, "यूके में अब भी काफ़ी हद तक क्रिप्टो पर नियमन लागू नहीं होते और यह बेहद जोखिम भरा है. अगर कुछ गलत हो जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपको कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी. इसलिए आपको मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए कि आप अपना सारा पैसा भी खो सकते हैं."
अगर आप ऑनलाइन "बाइनेंस अकाउंट हैक्ड" खोजेंगे तो यह सच्चाई कठोरता से याद आएगी. बाइनेंस दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज है, जिसके ब्रिटेन में लगभग 14 लाख यूज़र बताए जाते हैं, लेकिन चोरी के शिकार लोगों के लिए सलाह देने वाला उसका वेबपेज यूके में ब्लॉक किया गया है.
साल 2023 से बाइनेंस यूके में नए ग्राहक नहीं बना रहा है, क्योंकि एफ़सीए ने उसे यहां काम करने की अनुमति नहीं दी है. मगर अपराधियों को इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि पीड़ित किस देश का है - लोग दुनिया के हर कोने में बिना किसी भेदभाव के निशाने पर हैं.
चेनालिसिस ने व्यक्तिगत लोगों पर होने वाले इन हमलों को 'क्रिप्टो अपराध का कम दर्ज किया गया मोर्चा' बताया है.
कंपनी का कहना है कि ऐसे अपराधों की संख्या बढ़ने की बड़ी वजह यह है कि जैसे जैसे क्रिप्टो कॉइनों की कीमत बढ़ी, वैसे वैसे निवेशक के रूप में इस दुनिया में आने वाले लोगों की तादाद भी बढ़ती गई. साथ ही, बड़े प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत होने से हमलावरों का रुख उन लोगों की तरफ़ हो गया, जिन्हें वे 'आसान शिकार' समझते हैं - यानी आम व्यक्तिगत निवेशक.
एक और सच्चाई यह है कि जितने ज़्यादा क्रिप्टो आपके पास होते हैं, और जितना ज़्यादा आप उसके बारे में खुले तौर पर बताते हैं, उतना ही ज़्यादा आप अपराधियों की नज़र में आते हैं. इसके उलट छोटे निवेशकों, जिन्हें क्रिप्टो समुदाय में 'हॉडलर' कहा जाता है, के इन हमलों से प्रभावित होने की संभावना कम होती है.
सेंधमारी और लूट

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जहां तक चोरों का सवाल है, वे दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं.
अक्टूबर में, क्रिप्टो विश्लेषण कंपनी एलिप्टिक के ब्लॉकचेन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया की सरकार के समर्थन वाले हैकर्स अमीर क्रिप्टो धारकों को अब पहले से ज़्यादा निशाना बना रहे हैं. इसके अलावा दूसरे देशों में भी बड़ी तादाद में युवा स्कैमर्स और हैकर्स सक्रिय हैं.
दिसंबर में अमेरिका में 22 साल के इवान टैंगेमन ने यह स्वीकार किया कि वह 'सोशल इंजीनियरिंग एंटरप्राइज़' नाम के एक क्रिप्टो चोर गिरोह का हिस्सा था. इस समूह पर आरोप है कि उसने अक्टूबर 2023 से मई 2025 के बीच 26 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की क्रिप्टो चोरी की.
अभियोजकों का कहना है कि इस गिरोह ने हैक किए गए डेटाबेस का इस्तेमाल करके अमीर क्रिप्टो निवेशकों को निशाना बनाया. वे पीड़ितों को यह यक़ीन दिलाते थे कि वे किसी असली क्रिप्टो एक्सचेंज से बात कर रहे हैं, और फिर उन्हें अपने क्रिप्टो कॉइन्स ट्रांस्फ़र करने के लिए मना लेते थे.
बताया जाता है कि इस गिरोह के सदस्यों, जो ज़्यादातर अमेरिका में रहने वाले युवक थे, ने चोरी किए गए क्रिप्टो को निजी जेट विमानों, महंगी कारों और लग्ज़री हैंडबैग्स पर उड़ा दिया, जिन्हें वे नाइटक्लब्स में बांट देते थे.
कुछ मामलों में, अभियोजकों के मुताबिक, इस गिरोह ने लोगों के घरों में चोरी की वारदातें भी करवाईं, ताकि क्रिप्टो रखने वाली डिजिटल चाबियां (कीज़) रखने वाले हार्डवेयर चुरा सकें.
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सेंधमारी और लूटपाट इतनी आम हो चुकी हैं कि क्रिप्टो समुदाय में इनके लिए एक अलग नाम चल पड़ा है – 'रेंच अटैक'. यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि कई मामलों में अपराधी पीड़ितों को रिंच या पाना जैसे औज़ार दिखाकर धमकाते हैं.
पिछले साल अप्रैल में, स्पेन में क्रिप्टो अपराधियों ने एक पुरुष और एक महिला से जबरन उनकी क्रिप्टोकरेंसी हासिल करने की कोशिश की.
स्पेनी पुलिस के मुताबिक पुरुष को पैर में गोली मारी गई और उसे उसकी साथी के साथ कई घंटों तक बंदी बनाकर रखा गया. इस दौरान अपराधी उनके क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचने की कोशिश करते रहे. आख़िरकार महिला को छोड़ दिया गया, लेकिन उसके साथी का पता नहीं चला. बाद में उसका शव जंगल में मिला.

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इस मामले में स्पेन में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जबकि डेनमार्क में चार अन्य लोगों पर आरोप तय किए गए. फ़्रांस में भी इसी तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से एक घटना तब सुर्खियों में आई, जब अपहरण की कोशिश का वीडियो रिकॉर्ड हो गया.
2025 की शुरुआत में एक और गंभीर मामला सामने आया, जिसमें क्रिप्टो सिक्योरिटी कंपनी लेजर के सह संस्थापक डेविड बल्लांद को उनकी पत्नी के साथ मध्य फ़्रांस में उनके घर से अगवा कर लिया गया.
कुछ दिनों बाद पुलिस ने दोनों को छुड़ा लिया, लेकिन फिरौती के लिए दबाव बनाने के दौरान अपराधियों ने बल्लांद की एक उंगली काट दी थी.
इसके बाद, पिछले महीने यूके पुलिस ने छह लोगों को गिरफ़्तार किया. यह कार्रवाई तब हुई जब नकाबपोश लोगों ने ऑक्सफ़ोर्ड और लंदन के बीच जा रही एक कार को रोका और उसमें बैठे एक व्यक्ति को 15 लाख पाउंड की क्रिप्टोकरेंसी ट्रांस्फ़र करने के लिए मजबूर किया.
ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस कंपनी टीआरएम लैब्स में यूके पब्लिक सेक्टर रिलेशंस के डायरेक्टर फिल एरिस पहले ही कह चुके हैं कि जो आपराधिक समूह अपने मक़सद पूरे करने के लिए पहले से हिंसा का सहारा लेते रहे हैं, उनके लिए क्रिप्टो की दुनिया में आने की संभावना बनी हुई थी.
उनके मुताबिक, "जब तक चोरी की गई संपत्ति को ठिकाने लगाने या उसे नकद में बदलने का कोई कारगर ज़रिया मौजूद है, तब तक अपराधी को इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता कि उसका निशाना कोई महंगी घड़ी है या किसी का क्रिप्टो वॉलेट."
"क्योंकि अब क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह मुख्यधारा में आ चुकी है. ऐसे में शारीरिक धमकी और लूटपाट को लेकर हमारी पारंपरिक समझ को भी उसी हिसाब से बदलना होगा."
यह तय करना मुश्किल है कि तथाकथित 'रेंच अटैक' कितनी बड़ी संख्या में हो रहे हैं, क्योंकि इनमें से बहुत कम मामलों की रिपोर्ट की जाती है. लेकिन इतना साफ़ है कि इस तरह की घटनाएं, व्यक्तिगत स्तर पर बढ़ती क्रिप्टो चोरी की एक बड़े पैमाने वाली समस्या का सिर्फ़ छोटा सा हिस्सा हैं.
और बहुत से अपराधी अब भी पुराने, आज़माए हुए हैकिंग और ठगी के तरीक़ों पर ही निर्भर हैं, जिन्हें अंजाम देना अब और आसान हो गया है, क्योंकि बड़े साइबर हमलों में कंपनियों से भारी मात्रा में डेटा पहले ही चोरी किया जा चुका है.
'बिटकॉइन करोड़पति आम बात'

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हेवन नाम की एक क्रिप्टो सिक्योरिटी कंपनी के संस्थापक मैथ्यू जोन्स कहते हैं, "डेटा सबसे बड़ी समस्या बन गया है, क्योंकि बिटकॉइन मिलिनेयर अब लगातार बढ़ रहे हैं. ऊपर से चोरी किए गए डेटाबेस लगातार अपराधियों की टारगेट लिस्ट को और समृद्ध करते जा रहे हैं."
बीबीसी ने एक हैकर से बात की. उसके मुताबिक लग्ज़री ब्रांड्स - जैसे गुच्ची और बालेन्सियागा - की पैरेंट कंपनी केरिंग में हुआ डेटा लीक इसका साफ़ उदाहरण है.
उन डेटाबेस में सिर्फ़ लाखों ग्राहकों के नाम और संपर्क की जानकारी ही नहीं थी, बल्कि यह भी दर्ज था कि किस ग्राहक ने स्टोर्स में कितना पैसा खर्च किया है.
बीबीसी से बात करने वाले हैकर का कहना है कि उसने ये स्प्रेडशीट्स 3 लाख डॉलर में खरीदी थीं, ताकि सबसे ज़्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों को निशाना बनाया जा सके.
उसका दावा है कि उसने इस जानकारी को एक और चोरी किए गए डेटाबेस के डेटा के साथ मिलाकर कई कॉइनबेस यूज़र्स से कम से कम 15 लाख डॉलर की क्रिप्टो ठगी की.
इस अपराधी ने इस बात की पुष्टि की कि उसके पास चोरी किया हुआ डेटा मौजूद है, और बीबीसी के सामने यह साबित भी किया कि उसके पास 7 लाख डॉलर (करीब 6 करोड़ 37 लाख रुपये) के बिटकॉइन हैं. उसका कहना है कि उसे वह रकम एक ही पीड़ित से मिली थी.
उसने कहा, "मैं हैक किए गए डेटाबेस खरीदता हूं और उनका दूसरे डेटाबेस के साथ मिलान करता हूं, ताकि अमीर लोगों और उनके लेटेस्ट फ़ोन नंबर और ईमेल आईडी की पहचान की जा सके. मैं अब भी लिस्ट खंगाल रहा हूं और बहुत तेज़ी से अपना पैसा तीन गुना कर लिया है."
उस हैकर ने अपने बारे में ज़्यादा कुछ बताने से इनकार किया. बस इतना कहा कि वह अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में छात्र है.
जब उससे पूछा गया कि वह खुद को हैकर मानता है या स्कैमर, तो उसका जवाब था, "न तो हैकर, न स्कैमर - मुझे सिर्फ़ पैसा कमाने से मतलब है."

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इस पूरे मामले पर टिप्पणी के लिए केरिंग से संपर्क किया गया, लेकिन कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया.
हालांकि, वह पहले बीबीसी से यह कह चुकी है कि डेटा लीक के बाद उसके आईटी सिस्टम सुरक्षित कर लिए गए थे. कंपनी ने यह भी ज़ोर देकर कहा था कि इस हमले में न तो किसी के बैंक अकाउंट नंबर, न क्रेडिट कार्ड की जानकारी और न ही सरकारी पहचान से जुड़े कोई दस्तावेज़ चोरी हुए थे.
हेवन के मैथ्यू जोन्स बताते हैं कि वह खुद भी क्रिप्टो चोरी का शिकार हो चुके हैं, और उसी अनुभव ने उन्हें ऐसा क्रिप्टो वॉलेट बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स हों.
उनके मुताबिक अब ऐसे फीचर्स बेहद ज़रूरी हो गए हैं - जैसे लगातार बायोमेट्रिक जांच, ताकि सिर्फ़ असली मालिक ही कॉइन्स ट्रांस्फ़र कर सके, और जियो फेंसिंग, जिससे किसी व्यक्ति के घर या कार्यस्थल से बाहर कोई भी ट्रांज़ैक्शन अपने आप ब्लॉक हो जाए. वह डिजिटल वॉलेट में एक पैनिक बटन भी जोड़ रहे हैं.
वह कहते हैं, "आजकल लोग अपने साथ करोड़ों डॉलर के क्रिप्टो लिए घूम रहे हैं, और वॉलेट्स में यह तय करने की कोई सीमा नहीं होती कि उसमें कितने के क्रिप्टो रखे जा सकते हैं - या एक बार में कितने चोरी हो सकते हैं."
'अपना खुद का बैंक बनना'

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मैथ्यू जोन्स का क्रिप्टो वॉलेट उसी सोच पर आधारित है, जिसे इंडस्ट्री में 'सेल्फ़ कस्टडी' कहा जाता है.
हेवन का ऐप मेटामास्क और ट्रस्टवॉलेट जैसे ऐप्स की तरह ही है. वहीं ट्रेज़र और लेजर जैसी कंपनियां यूएसबी पेन ड्राइव जैसे फ़िज़िकल डिवाइस देती हैं. लेकिन विचार सबका एक ही है - आप खुद अपने बैंक बन जाएं.
मगर इस अतिरिक्त आज़ादी के साथ ज़्यादा जोखिम भी जुड़ा है, क्योंकि इसमें आपको किसी भी तरह की सुरक्षा गारंटी नहीं मिलती.
अगर क्रिप्टो आपके अपने सेल्फ़ कस्टडी वॉलेट से चोरी हो जाती है, तो आप शिकायत लेकर किसी क्रिप्टो एक्सचेंज के पास भी नहीं जा सकते.
जब उनसे पूछा गया कि क्या 'अपना खुद का बैंक बनने' की आज़ादी, बढ़ते ख़तरों से ज़्यादा अहम है, तो जोन्स का जवाब साफ़ था - हां.
उनका तर्क है, "बैंक असल में अपने ग्राहकों के प्रति जवाबदेह नहीं होते. उनके पास व्यापक और अक्सर अस्पष्ट कारणों के आधार पर आपका अकाउंट फ़्रीज़ करने या बंद करने की ताकत होती है."
उनका यह भी कहना है कि पारंपरिक वित्तीय संस्थाओं द्वारा उनसे यह पूछना कि, वह अपने खाते से पैसा क्यों निकाल रहे हैं, उन्हें हमेशा खटकता रहा है.
हेलेन और रिचर्ड ने भी 'अपना खुद का बैंक' बनने का रास्ता चुना था, और उसी में उन्होंने अपने सारे कॉइन्स खो दिए. यह नुक़सान इस बात से और भी ज़्यादा तकलीफ़देह हो जाता है कि इस पैसे का बड़ा हिस्सा रिचर्ड की मां की मौत के बाद उनका घर बेचकर आया था.
रिचर्ड कहते हैं, "मेरी मां की सारी कमाई चली गई. उन्होंने मेरे भविष्य के लिए इतनी मेहनत की थी, और सब कुछ चोरी हो गया. हमें अपने संगीत के वाद्य यंत्र और अपनी कार बेचनी पड़ी, और कुछ समय के लिए हम बेघर भी हो गए."
हालांकि वह अब भी क्रिप्टो करेंसी से पूरी तरह निराश नहीं हुए हैं. अगर उन्हें कभी अपना खोया हुआ पैसा वापस मिल जाता है, या अपनी बचत से फिर से एक अच्छी रकम जोड़ पाते हैं, तो वे दोबारा बिना देर किए क्रिप्टो निवेश में लौटने की योजना बना रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.














