तूतीकोरिन: 28 और व्हेल मरी हुई मिलीं

dead hales burial tuticorin

इमेज स्रोत, M Balamurugan

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में मरने वाली व्हेलों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है. बुधवार देर रात तक 28 और व्हेल के शव तट पर पाए गए.

तमिलनाडु वन विभाग के वन्य जीव संरक्षक दीपक बिलगी ने बीबीसी से कहा, ''सोमवार से अब तक तट पर आईं 81 में से 36 व्हेल को समुद्र में छोड़ दिया गया है. लेकिन बुधवार दोपहर बाद अब तक 28 मरी हुईं व्हेल किनारे पर आ लगीं.''

अपना नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, ''वन, मत्स्य और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय ग्राम पंचायत, फ़िशरीज यूनिवर्सिटी के छात्रों और कर्मचारियों और एक निजी शोध संस्थान के लोगों ने गुरुवार सुबह तट पर मरी हुई व्हेलों को दफ़नाया.''

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विशेषज्ञों का कहना है कि मरी हुई या ज़िंदा व्हेलों का तट की ओर लौटना असामान्य घटना नहीं है.

व्हेल विशेषज्ञ डॉक्टर कुमारन सतशिवम ने बीबीसी से कहा, ''यह एक जानी-मानी बात है कि जब व्हेल बड़ी संख्या में तट पर आकर फंस जाती हैं तो वे वापस लौटती हैं. पायलट व्हेल एक बहुत ही सामाजिक जीव है. वे समूह में रहती हैं और जब उन्हें पता चलता है कि उनके समूह के कुछ सदस्य तट पर संकट में हैं या कोई मर गया है तो वे समुद्र में अंदर नहीं जाना चाहतीं.''

कुमारन कहते हैं, ''इंसानी रिश्तों में आप इसे क़रीबी रिश्तेदार या दोस्त के रूप में देख सकते हैं. ये जीव अपने जीवन का अधिकांश समय एक साथ बिताते हैं. संकट के समय भी वे साथ ही रहना चाहते हैं. इस कोशिश में वे जान भी दे सकते हैं.''

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इस बात पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि 81 में से जिन आठ व्हेल को सोमवार और बुधवार को गहरे पानी में पहुंचाया गया है वे ज़िंदा या मरी हुई लौट न आएं.

कुमारन कहते हैं, ''इस बात संभावना तो स्पष्ट है. एक और आशंका यह है कि उनकी समुद्र में मौत हो गई हो.''

लेकिन क्या मरी हुई व्हेलों को दफ़नाने के अलावा कोई और भी उपाय है?

इस सवाल पर डॉक्टर सतशिवम कहते हैं, ''इसका कोई निश्चित और सर्वमान्य तरीक़ा नहीं है. हर एक व्हेल बहुत बड़ी है, ऐसे में उन्हें बहुत दूर तक खींचा नहीं जा सकता. शवों का सड़ना भी एक समस्या है. यह समस्या पूरी दुनिया में होती है."

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"दुनिया के कुछ हिस्सों में व्हेल के शवों को टुकड़ों में काटकर उन्हें दफ़नाया जाता है. या तो उन्हें दफ़नाया जा सकता है या उन्हें गहरे समुद्र में ले जाकर छोड़ा जा सकता है.''

व्हेलों के शवों को ठिकाने लगाने का एक प्राथमिक कारण यह है कि वन विभाग को स्थानीय लोगों से समुद्र किनारे से बदबू उठने की शिकायतें मिली थीं.

दीपक बिलगी कहते हैं, ''हां, ग्रामीणों ने हमसे इसकी शिकायत की थी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनमें से कुछ टूटी-फूटी अवस्था में किनारे पर आई थीं. इस वजह से दुर्गंध आ रही थी. हमें तत्काल उन्हें इसलिए दफ़नाना पड़ा, क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते तो शव फूलकर फूट सकते थे.''

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