मौत की जगह फिर लौटा व्हेलों का झुंड
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जिन व्हेल मछलियों को सोमवार को तमिलनाडु के तूतीकोरिन समुद्र तट पर गहरे पानी में छोड़ा गया था, उनमें से पांच बुधवार सुबह फिर किनारे पहुँच गईं.
मंगलवार को 36 व्हेलों को मछली मारने वाले जाल में फंसाकर एक मोटरबोट के सहारे गहरे समुद्र में छोड़ा गया था.
फिर समुद्र किनारे पहुँचीं इन व्हेल मछलियों को तमिलनाडु के फिशरी विश्वविद्यालय के बचाव दल, मछुआरों और मत्स्य और वन विभाग के अधिकारियों और सुगंधी देवदासन समुद्री शोध संस्थान के अधिकारियों ने गहरे पानी में पहुँचाया था.

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तूतीकोरिन में मौजूद सुगंधी देवदासन समुद्री शोध संस्थान के निदेशक डॉक्टर पैटर्सन एडवर्ड ने बीबीसी को बताया, ''हमें उनकी वापसी की उम्मीद थी. हम उन्हें फिर से गहरे समुद्र में छोड़ने के लिए पहले वाला तरीक़ा अपनाएंगे.''
मनपड़ और अलाथुलई के बीच पांच किलोमीटर के समुद्री तट पर सोमवार शाम से मंगलवार तक 45 व्हेल मरी हुई मिली थीं. सोमवार शाम यहां क़रीब 100 व्हेल मछलियां पहुंची थीं. डॉक्टर एडवर्ड ने इन मरी हुई व्हेलों को दफ़नाने का इंतज़ाम किया.

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व्हेल के समुद्र तट पर आने की यह घटना काफ़ी दुर्लभ है. वैज्ञानिक इसका सही कारण पता लगाने की कोशिश में हैं.
तूतीकोरिन स्थित फ़िशरी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ फ़िशरीज़ रिसोर्सेज़ एंड एनवायर्नमेंट के प्रमुख डॉक्टर ए श्रीनिवासन का कहना है, ''हम नहीं बता सकते कि इसका असल कारण क्या है. हो सकता है कि वो किसी शिकार का पीछा करते हुए आ गई हों और रास्ता भूल गई हों.''

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उन्होंने कहा, ''यह भी हो सकता है कि ज्वार भाटा आने के समय पानी का बहाव बदल गया हो और वो रास्ता भूलकर कम गहरे पानी में पहुँच गई हों और वहां से समुद्री किनारे पर आ गई हों. ''
व्हेलों के विशेषज्ञ डॉक्टर कुमारन सतशिवम कहते हैं, ''व्हेल जब किनारे पर आती हैं, तो बहुत गर्म हो जाती हैं क्योंकि उनके शरीर के बाहरी हिस्से में चर्बी की मोटी परत होती है. ऐसे में उन्हें गहरे समुद्र में छोड़ने से पहले उन पर लगातार पानी डालते रहना होता है.''

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यहां अधिकांश व्हेलों की मौत ज़्यादा गर्मी की वजह से हुई है लेकिन वैज्ञानिकों को संतोष है कि मरने वाली व्हेलों की संख्या 1973 के मुक़ाबले कम है जब इसी तरह तट पर पहुँचीं 147 व्हेल मरी पाई गई थीं.
डॉक्टर एडवर्ड के मुताबिक़, ''मरी हुई व्हेलों को दफ़नाने के लिए कम से कम छह फ़ीट गहरी क़ब्र खोदी गई हैं जिसके लिए बुलडोज़र का इस्तेमाल किया गया है. ये अलग-अलग क़ब्रें तट के पास ही बनाई गई हैं.''
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