मोदी की नरमी पर पाक मीडिया 'हैरान'

सरताज अजीज और सुषमा स्वाराज

इमेज स्रोत, PTI

इमेज कैप्शन, इस्लामाबाद पहुंचने पर पाकिस्तान के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज़ भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का स्वागत करते हुए.
    • Author, अदिति माल्या
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

कुछ उच्चस्तरीय कूटनीतिक हलचलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद पर पाकिस्तानी मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं.

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस समय अफ़ग़ानिस्तान को लेकर 'हार्ट ऑफ़ एशिया' सम्मेलन के लिए पाकिस्तान दौरे पर हैं.

इस सम्मेलन से इतर, दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच बातचीत की संभावनाएं सुर्खियों में ज़्यादा हैं.

अगर इस दौरान दोनों देशों में बातचीत होती है तो ताज़ा कूटनीतिक हलचल में यह नया मोड़ होगा.

दोनों देशों के प्रधानमंत्री पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से अलग मिले थे. इसके बाद बैंकॉक में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत की 'हैरान' करने वाली ख़बर आई.

तब दोनों तरफ़ से कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें चरमपंथ और कश्मीर में संघर्ष विराम के उल्लंघन के मामले भी थे.

पाकिस्तानी मीडिया में भारत और पाकिस्तान के रिश्ते फिर सुर्ख़ियों में हैं.

नवाज़ शरीफ़ और नरेंद्र मोदी, उफ़ा मीटिंग के दौरान

इमेज स्रोत, AFP

अंग्रेज़ी अख़बार 'पाकिस्तान टुडे' लिखता है, ''भारत को अपने आक्रामक रुख से पीछे हटना पड़ा है और अन्य मामलों समेत कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा है. हालांकि कई लोग अधिक सावधानी बरतते हुए, इतनी आसानी से नरम दिख रहे मोदी को लेकर संदेह में हैं. इस बारे में स्थिति तब और साफ़ हो पाएगी जब सुषमा स्वराज पाकिस्तानी विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज़ से सम्मलेन से अलग बातचीत करेंगी. फ़िलहाल, बैंकॉक एक क़दम आगे बढ़ने वाली घटना है और भारत पाकिस्तान संबंधों में एक नया ढर्रा देखने को मिल सकता है.''

लोकप्रिय उर्दू दैनिक 'जंग' लिखता है, ''भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकारों ने बैंकॉक में शांति, सुरक्षा, चरमपंथ और कश्मीर पर बात की और बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमत हुए. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पाकिस्तान दौरे का स्वागत किया जाना चाहिए. यह इस उपमहाद्वीप और उस क्षेत्र के हित में है, जहां भारत और पाकिस्तान कश्मीर समेत अपने सारे विवाद हल कर सकते हैं. दोनों को विवाद से बचना चाहिए और सहयोग बढ़ाना चाहिए.''

सुषमा स्वराज

इमेज स्रोत, MEA INDIA

अंग्रेज़ी दैनिक 'द न्यूज़' के मुताबिक़, ''बहुत ज़्यादा उम्मीद करना मुश्किल है. भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध इतने ख़राब हो चुके हैं कि विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे हालात युद्ध के अलावा कभी देखने को नहीं मिले. कड़वापन दिल्ली की ओर से अधिक रहा है. संबंध सुधारने में अगर आगे जाना है, तो दोनों को अच्छी मंशा रखने की ज़रूरत है लेकिन सरहद के दोनों तरफ़ इसके कोई संकेत दिखाई नहीं देते.''

उर्दू दैनिक 'नवा-ए-वक़्त' लिखता है, ''अगर भारत वाक़ई बातचीत से कश्मीर समेत सभी मुद्दों का हल चाहता है तो यह निश्चित ही बड़ी बात है. लेकिन अतीत में भारत के साथ अपने कड़वे अनुभव देखते हुए हमें हर क़दम फूंक-फूंककर उठाना चाहिए.''

उर्दू दैनिक 'एक्सप्रेस' के अनुसार, ''…जब तक दोनों देश कश्मीर विवाद का हल नहीं निकालते, तब तक दोनों पड़ोसियों के बीच बेहतर संबंध नहीं रहेगा.''

नवाज़ शरीफ़ और रहील शरीफ़

इमेज स्रोत, AFP

इस्लामाबाद का उर्दू दैनिक 'पाकिस्तान' लिखता है, ''बातचीत के रास्ते में बहुत सी बाधाएं हैं. बातचीत की सफलता के लिए बहुत ही संजीदगी की ज़रूरत पड़ेगी.''

अंग्रेज़ी अख़बार 'डॉन' के मुताबिक़, ''स्वराज का इस्लामाबाद दौरा एक सकारात्मक माहौल का सबब बन सकता है.. भारत और दुनिया पाकिस्तान से जो चाहती है, वो ये कि मुंबई हमले से संबंधित सुनवाइयों में तेज़ी लाई जाए. यह ऐसा मामला है जिसकी सुनवाई रावलपिंडी की एंटी टेरर कोर्ट में लगभग ठप पड़ी है. इस मोर्चे पर पाकिस्तान को और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.''

<bold>(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप <link type="page"><caption> बीबीसी मॉनिटरिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/world-18190302" platform="highweb"/></link> की ख़बरें <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> फेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/BBCMonitoring/?fref=ts" platform="highweb"/></link> पर भी पढ़ सकते हैं.)</bold>

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi " platform="highweb"/></link> क्लिक करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href=" https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>