बिहार: महिला एमएलए अनेक, पर मंत्री…?

नीतीश कुमार

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

क्या आपको पता है कि पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार की 28 सदस्यीय कैबिनेट में मात्र दो महिलाएं हैं?

और क्या आपको किसी ने बताया कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने पुरुषों से ज़्यादा प्रतिशत में वोट दिया?

आंकड़े और हक़ीक़त वाकई में कान खड़े करने वाले हैं क्योंकि सच्चाई यही है कि नीतीश कुमार की कैबिनेट में महिलाओं का प्रतिशत मात्र 7.14 प्रतिशत है.

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ग़ौरतलब ये भी है कि बिहार चुनावों में पुरुष मतदाताओं ने 54 प्रतिशत, जबकि कुल महिला मतदाताओं में 59 प्रतिशत घरों से बाहर निकल कर वोट डाला.

लेकिन इसके बावजूद मंत्रिमंडल में ज़्यादा जगह न मिलने से थोड़ी हताशा भी दिख रही है.

राष्ट्रीय जनता दल की टिकट पर चुनी गईं विधायक प्रेमा चौधरी ने इस विषय पर थोड़ा कतराते हुए जवाब दिया.

लालू नीतीश

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प्रेमा चौधरी ने कहा, "इस सवाल का जवाब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछ्ते तो बेहतर रहता. हमने भी पार्टी के लिए काम किया है और आगे भी करेंगे ही. मंत्री न बनने पर मायूसी तो होगी ही, क्योंकि इच्छा तो होती ही है. लेकिन अभी मंत्रिमंडल का विस्तार होना है और पांच सीटें आरजेडी से भरी जाएंगी. उम्मीद है कि लालू जी इस पर अमल करेंगे".

अगर आप आंकड़ों पर नज़र डालेंगे तो एक बार लगेगा कि बिहार में नतीजे भी महिलाओं के ही पक्ष में रहे.

भारतीय जनता पार्टी ने जिन 151 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमे से 15 टिकट महिलाओं को दीं और चार की जीत भी हुई.

लालू की आरजेडी ने तो 101 में से 10 सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया और सभी अपना चुनाव जीत गईं.

तेजस्वी यादव

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नीतीश की जदयू ने भी 10 महिलाओं को टिकट दिया और उनमें से नौ को जीत हासिल हुई.

और तो और, कांग्रेस पार्टी की ओर से पांच सीटों पर चुनाव लड़ने वाली महिलाओं में से चार विजयी हुईं.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अदिति फड़नीस को उम्मीद थी कि नीतीश ज़्यादा महिलाओं को आगे लाएंगे, लेकिन उन्हें कोई अफ़सोस भी नहीं.

उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार ने बतौर मुख्यमंत्री महिलाओं के लिए बहुत बेहतरीन काम किए हैं और उन्हें आगे लाने में एक सक्रिय भूमिका निभाई है. चाहे वो पंचायत स्तर पर हो या स्कूल-कॉलेजों के स्तर पर. इसलिए मुझे नहीं लगता कि फिलहाल के मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व का कोई विपरीत असर दिखेगा".

राबड़ी देवी

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लेकिन अदिति चेताती भी हैं कि चूंकि ये एक गठबंधन सरकार है इसलिए भविष्य के बारे में पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "लालू जी ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को भी मुख्यमंत्री बनाया था लेकिन महिलाओं की स्थिति में कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा था. कुल मिलाकर हमें उस तरह की सोच से डर लगना चाहिए, न कि इस बात से कि कितनी महिलाएं कैबिनेट में हैं और कितनी नहीं. नीतीश एक मंझे हुए नेता हैं और शायद चीज़ें बेहतर ही होती रहेंगी".

बहराल नीतीश मंत्रिमंडल में जहाँ पुराने दिग्गज राजनेताओं का बोलबाला है, वहीँ जदयू और राजद की एक-एक महिला विधायक को भी शामिल किया गया है.

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लेकिन भविष्य में क्या होगा इसके बारे में आरजेडी विधायक प्रेमा चौधरी की टिप्पणी सटीक बैठती है.

प्रेमा चौधरी कहती हैं, "नीतीश जी पर बिहार की महिलाओं का बहुत भरोसा है. इसी वजह से इस बार भी वोट मिला है".

आप समझ ही गए होंगे कि गेंद अब किसके पाले में है!

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