बिहारः ‘‘फिर से नीतीश जी के एैले सुशसनवा’’

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
नीतीश कुमार ने आज रिकाॅर्ड पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
पांच में से आज तीसरी बार उन्होंने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में पदभार संभाला.
समारोह के लिए कार्यक्रम स्थल के गेट आम लोगों के लिए आज क़रीब बारह बजे खोले गए.

इमेज स्रोत, Manish Shandilya
गेट खुलते ही गांधी मैदान में दाख़िल होकर आज के कार्यक्रम का गवाह बनने के लिए लोगों की लंबी क़तारें लग गईं.
शपथग्रहण समारोह अपने नियत समय दो बजे शुरू हुआ. हालांकि तब तक भी बड़ी संख्या में लोग मैदान में दाख़िल होने के लिए क़तारों में सड़कों पर थे.
मुख्य कार्यक्रम शुरु होते-होते अच्छी तादाद में लोग जमा हो चुके थे.
गांधी मैदान आए लोगों में ज़्यादा जोश और उत्साह नहीं दिखाई दे रहा था. मैदान के अंदर महागठबंधन के दलों के झंडे, बैनर भी काफ़ी कम संख्या में थे.

मैदान में नारे भी कम लग रहे थे. मंत्रियों के शपथ लेने के बाद तालियां भी कम ही बज रही थीं. हां, शपथग्रहण शुरू होने के बाद रह-रह कर पटाख़ों की आवाज़ ज़रूर गूंज रही थी.
जो आए थे उनमें से ज़्यादातर मंच से घोषित होने वाले मंत्रियों के नाम सुनने में ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे थे .
ऐसे में कभी ढोल-नगाड़ों के शोर में वे अगर कोई नाम नहीं सुन पाते तो वे ढोल-नगाड़ों वालों से दूर जाकर अपना हुनर दिखाने को कहते.

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इस बीच जब आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप ने शपथ लेते हुए ‘अपेक्षित’ को ‘उपेक्षित’ पढ़ डाला तो कुछ लोगों ने चुटकी भी ली.
लोग ये कहते हुए मिले कि तेजप्रताप भले ‘अपेक्षित’ ठीक से नहीं पढ़ पाएं हों लेकिन आशा है कि वे बिहार का अपेक्षित विकास करेंगे.
जिस तरह आज नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल के 28 मंत्रियों में से केवल दो महिलाओं को ही जगह मिली उसी तरह शपथ ग्रहण समारोह में भी महिलाएं बहुत कम संख्या में शामिल हुईं.

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साथ ही वह ‘ग़रीब-ग़ुरबा’ भी कम ही दिखा जिनकी सरकार होने का दावा महागठबंधन के नेता अक्सर करते हैं.
हालांकि युवा आज अच्छी तादाद में नई सरकार के शपथग्रहण समारोह का गवाह बनने जुटे थे.
गांधी मैदान में अंदर के ‘हीरो’ नीतीश थे तो मैदान के बाहर की सड़कों पर राहुल गांधी का ‘जलवा’ दिखा.
मैदान के बाहर राहुल गांधी के तस्वीरों से सजे बैनर-पोस्टर बाक़ी नेताओं की तुलना में ज़्यादा दिखाई दे रहे थे.

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ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि कांग्रेस को बिहार में वर्षों बाद अहम जीत मिली है.
वहीं मैदान के बाहर एक सजी-धजी गाड़ी में नीतीश कुमार की तारीफ़ में बजता गाना भी बार-बार यह अहसास करा रहा था कि आज का दिन किसका है.
गाने के बाले कुछ यूं थे, ‘‘जब से नीतीश जी के एैले सुशसनवा, बदल गैले जमनवा ना.’’
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