आईआईटी निदेशक के इस्तीफ़े से उठे सवाल

स्मृति ईरानी

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आईआईटी दिल्ली के निदेशक रघुनाथ के शेवगांवकर के इस्तीफ़े के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय फिर विवादों में आ गया है.

आईआईटी दिल्ली के चेयरमैन के मुताबिक निदेशक आरके शिवगांवकर ने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दिया है और उनका इस्तीफ़ा स्वीकार भी कर लिया गया है.

खुद शिवगांवकर ने भी पत्रकारों के बार-बार पूछने पर सिर्फ इस्तीफ़े की ही पुष्टि की, लेकिन इस्तीफ़े की वजह नहीं बताई.

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ निदेशक के ऊपर कथित तौर पर सचिन की क्रिकेट एकेडमी के लिए ज़मीन देने और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को 70 लाख रुपए का बकाया देने का दबाव था.

स्पष्टीकरण

हालाँकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रेस नोट जारी कर तेंदुलकर को एकेडमी के लिए ज़मीन देने या स्वामी के बकाया मामला में किसी तरह के निर्देश देने से साफ़ इनकार किया है.

सचिन तेंदुलकर

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तेंदुलकर ने ट्विटर के ज़रिए एकेडमी खोलने और उसके लिए आईआईटी दिल्ली से ज़मीन मांगने की ख़बरों का खंडन किया.

सचिन ने ट्वीट किया, "आईआईटी दिल्ली से मेरे नाम पर एकेडमी खोलने के लिए ज़मीन मांगने संबधी ख़बरों से मैं चकित हूँ."

सचिन ने ट्वीट पर आगे कहा, "मैंने एकेडमी खोलने की कोई योजना नहीं बनाई है, न ही मैं किसी काम के लिए कोई ज़मीन चाहता हूँ."

स्वामी का बकाया

सुब्रमण्यम स्वामी

जहाँ तक सुब्रमण्यम स्वामी का बकाया देने संबंधी मामला है, उस पर स्वामी कहते हैं, "जब नई सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने कोर्ट ऑर्डर की फ़ाइल की जांच की जिसमें साफतौर पर लिखा था कि आईआईटी से निष्कासन ग़लत था और उन्हें उनका पैसा मिलना चाहिए. ये मामला कोर्ट में है और इससे निदेशक का कोई लेना-देना नहीं है."

दरअसल स्वामी ने आईआईटी में 1972 से 1991 तक पढ़ाया था. उसी के एवज में 70 लाख के पेमेंट की बात कही गई है.

उधर, कांग्रेस पार्टी का कहना है कि यदि आईआईटी के निदेशक को एचआरडी मंत्री से कोई शिकायत थी तो उन्हें लोगों को इसकी वजह बतानी थी.

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