'चूहों के सहारे बनी सरकार कितने दिन?'

- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
महाराष्ट्र में शिवसेना ने एक दिन पहले की गई कई चर्चाओं के विफल होने के बाद बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की खुलकर आलोचना शुरू कर दी है.
पृथक विदर्भ की माँग को सिरे से नकारते हुए शिवसेना मुखपत्र 'सामना' के बुधवार के संपादकीय में विदर्भ की तुलना पाकिस्तान से की गई है. इसके बाद विदर्भ में ख़ासा ग़ुस्सा उमड़ रहा है.
शिवसेना मुखपत्र 'सामना' में बुधवार के संपादकीय में लिखा गया है, "संसद में पाकिस्तान जिंदाबाद और महाराष्ट्र की विधान सभा में जय विदर्भ के नारे लगाना अपराध है. मुख्यमंत्री को चाहिए कि ऐसे विधायकों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें."
'जय विदर्भ' का नारा
मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया है, "लेकिन शपथ ग्रहण के तुरंत बाद नागपुर जाकर खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इन जहरीले सांपों को दूध पिलाया था, जिसके चलते उनकी हिम्मत बढ़ गई है."
संपादकीय में लिखा है, "मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने शिवसेना से कहा है कि मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करें. इसके लिए भाजपा को चाहिए कि इन मुद्दों के बारे में खुलकर बताएं."

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विदर्भ से चुनकर आए विधायकों की आलोचना करते हुए संपादकीय में कहा गया है, "विधानसभा में जय विदर्भ के नारे लगाना एक जहरीली प्रवृत्ति है और महाराष्ट्र की स्थापना के वक्त से ही यह सब चल रहा है."
संपादकीय में भाजपा समेत राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी को भी निशाना बनाया है.
संपादकीय में सरकार बचाने के लिए राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के साथ किए गए समझौते के बारे में जनता को बताने की माँग की गई है.
देवेंद्र फड़नवीस की तारीफ

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राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी को 'चूहा' बताते हुए, 'सामना' में सवाल उठाया गया है, "पिछले 15 सालों तक राज्य को लूटने वाले चूहों के समर्थन पर बनी सरकार कितने दिन चलेगी? राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी को महाराष्ट्र की जनता ने नकारा है और चौथे स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है."
सामना के अनुसार "भाजपा को ऐसी राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी का बाहरी समर्थन मंजूर है लेकिन शिवसेना को सरकार में शामिल करना मंजूर नहीं. ऐसी स्थिति में सरकार बचाना निकट भविष्य में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है."
संपादकीय में जहां एक और देवेन्द्र फड़नवीस की तारीफ़ करते हुए उन्हें ईमानदार और साफ़ छवि का बताया गया है, वहीं दूसरी ओर यह भी कहा गया कि सत्ता के लिए भाजपा एमआईएम का समर्थन ले सकती है.
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