जमशेदपुर हिंसा में गिरफ़्तार अभय सिंह कौन हैं?

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- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जमशेदपुर से
रविवार शाम झारखंड में जमशेदपुर के शास्त्रीनगर में दो समुदायों के बीच हुई नारेबाज़ी और पथराव के बाद हालात तनावपूर्ण हैं.
इस मामले में साज़िश रचने के आरोप में भाजपा के वरिष्ठ नेता अभय सिंह को झारखंड पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.
एसपी सिटी विजय शंकर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि 'सोमवार सुबह क़रीब छह बजे उन्हें गिरफ़्तार किया गया. उन्होंने बीबीसी से कहा कि अ'भय सिंह ने ही पीछे से लोगों को भड़काया था.'
उनके अनुसार, 'हालिया रामनवमी में भी अभय सिंह ने ही माहौल ख़राब करने की कोशिश की थी. इस घटना को अंजाम देने के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुपों का इस्तेमाल किया गया.'
उन्होंने कहा कि अभय सिंह के अलावा पांच-छह और नेता हैं जो इस मामले में अभियुक्त हैं.
भाजपा नेता अभय सिंह ने राजनीति की शुरुआत भाजपा से बतौर पूर्वी सिंहभूम ज़िला अध्यक्ष साल 2002 में की थी. वह 2005 तक ज़िला अध्यक्ष रहे. वो जमशेदपुर पूर्वी विधान सभा से आते हैं, इसी विधान सभा से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी हैं.

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बीजेपी नेता अभय सिंह और विवाद
राजनीतिक स्कोप की तलाश में वो बाबूलाल मरांडी ने जब एक नई पार्टी जेवीएम बनाई तो उसमें शामिल हो गए. वो इसके महासचिव भी रहे.
साल 2009, 2014 व 2019 विधानसभा चुनाव में वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवरदास के ख़िलाफ़ जमशेदपुर पूर्वी से विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन तीनों बार उनको हार मिली.
2019 विधानसभा चुनाव के बाद जब बाबूलाल मरांडी भाजपा में शामिल हुए तो अभय सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए. इस दौरान उनकी छवि कट्टर हिंदुत्वादी नेता की बन गई.
इस छवि में ढलना उनके लिए मुश्किल नहीं था क्योंकि उनके पिता धुरेंदर सिंह व दादा प्यारे लाल भी हिंदुत्ववादी नेता रहे हैं. इनके पिता विश्व हिंदू परिषद के जमशेदपुर अध्यक्ष रहे हैं.
इस वर्ष 2023 की रामनवमी में जमशेदपुर के तमाम अखाड़ों का अभय सिंह ने ही नेतृत्व किया था.
इस दौरान प्रशासन के मना करने के बावजूद रामनवमी अखाड़ा ने जुलूस में बड़े ट्रक का इस्तेमाल किया, जिसे प्रशासन ने ज़ब्त कर लिया. इस वजह से अभय सिंह ने नवमी के दिन आखाड़ा नहीं उठाने का फ़ैसला किया.
अभय सिंह दिन भर धरना पर बैठे रहे. जमशेदपुर के सांसद की मध्यस्थता के बाद प्रशासन ने ट्रक छोड़ा, तब नवमी का झंडा उठा. इससे पहले भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में अभय सिंह का नाम विवादों से जुड़ा रहा है.
16 नवंबर 2021 को ठाकुर प्यारा सिंह, धुरंधर सिंह दुर्गापूजा कमेटी के मुख्य संरक्षक अभय सिंह समेत सात पर नामज़द व 40 अज्ञात पर कोविड को लेकर जारी दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज हुआ था लेकिन उस समय गिरफ़्तारी नहीं हुई थी.

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बीजेपी ने खड़े किए सवाल
भाजपा ने अभय सिंह की गिरफ़्तारी का विरोध किया है.
भाजपा की प्रदेश मंत्री रीता मिश्रा ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि शनिवार व रविवार को हुई घटना में अभय सिंह न वहां गए न ही उन घटनाओं को लेकर उनकी कोई गतिविधि थी, न ही उन्होंने कोई बयान दिया.
वो कहती हैं, "फिर भी प्रशासन बिना वारंट दिखाए उनको घर से गिरफ़्तार करती है, जोकि निंदनीय है. जब मैंने जानकारी मांगी तो मुझसे कहा गया कि जो भी जानकारी चाहिए अब कोर्ट से हासिल कीजिए. प्रशासन का रवैया बिल्कुल तानाशाही वाला है."
भाजपा नेता शिव शंकर सिंह कहते हैं कि ग़लती प्रशासन की है वह शनिवार कि घटना पर नियांत्रण नहीं कर सका, जिसका ख़मियाज़ा शास्त्रीनगर के लोगों ने रविवार को भुगता.

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शनिवार व रविवार को क्या हुआ?
दरअसल शनिवार की रात जमशेदपुर के शास्त्रीनगर इलाक़े में रामनवमी के झंडे में कथित तौर पर मांस का टुकड़ा मिलने को लेकर तनाव पैदा हो गया. यह झंडा तीस फ़िट ऊंचे खंभे में लगा था.
इस दौरान दोनों पक्षों से लगभग पचास लोगों को हिरासत में ले लिया गया. प्रशासन ने बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के मद्देनज़र धारा 144 लगा दी.
सिटी एसपी विजय शंकर सिंह ने बीबीसी से बताया कि एक सौ से अधिक नामज़द लोगों पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 353, 332, आर्मस एक्ट-27 आदि धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज हुई है.
हालांकि शनिवार को तनाव पैदा होने के बाद जमशेदपुर पुलिस हरकत में आ गई थी और दोनों पक्षों को समझा बुझा कर माहौल शांत करवा दिया था. हालात को देखते हुए इलाक़े में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात कर दिया गया है.
इसके बाद हिंदुत्ववादी संगठनों की ओर से उस स्थान का आरती के द्वारा शुद्धिकरण किया गया. लेकिन रविवार की शाम को माहौल दोबारा तनावपूर्ण हो गया.

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रविवार को सामूहिक इफ़्तार के वक़्त हुई घटना
इन दिनों रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है जिसमें मुसलमान रोज़ा रखते हैं. रविवार की शाम झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से शास्त्रीनगर से एक किलोमीटर दूर गणेश पूजा मैदान में इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया गया था.
शास्त्रीनगर के स्थानीय निवासी आफ़ताब ख़ान कहते हैं, "शास्त्रीनगर के अधिकांश मुस्लिम नौजवान वहां मौजूद थे. इसी समय दूसरे समुदाय के लोग रामनवमी के झंडे के साथ कुछ दूर पर बने फ़ारूक़ी मस्जिद के पास जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे. इस बात की सूचना मिलते ही, हम सभी शास्त्री नगर मुख्य सड़क तक पहुंचे."
वह आगे कहते हैं, "मुख्य सड़क तक पहुंचने के बावजूद भीड़ से भरे तनावपूर्ण माहौल के कारण मैं अपने घर की ओर नहीं बढ़ सका, जो सड़क की दूसरी तरफ़ ही था. उस दौरान दोनों पक्षों की ओर से लगाए जा रहे धार्मिक नारों के बीच पथराव भी शुरू हो गया. स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे."
आफ़ताब ख़ान का दावा है कि इस घटना में पांच-छह दुकानों में आग लगा दी गई जिससे काफ़ी नुक़सान हुआ. आसपास मौजूद बड़ी संख्या में बाइक और दूसरे वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए.

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क्या कहना है मस्जिद के सदर का
फ़ारूक़ी मस्जिद के सदर शफ़ीक़ ख़ान कहते हैं, "पथराव मस्जिद से नहीं हुए, मस्जिद में तरावीह की नमाज़ हो रही थी. मस्जिद रोड में मौजूद असमाजिक तत्वों ने प्रशासन की ओर पथराव तब किया जब मुख्य सड़क पर मौजूद मुसलमानों की दुकानों में आग लगाई गई."
बीबीसी ने पाया कि मस्जिद रोड से दो बार पथराव हुए. पहली बार दो पक्षों के बीच लगभग साढ़े छह बजे के आसपास और दूसरी बार प्रशासन व सुरक्षा बलों पर लगभग आठ बजे के बाद पथराव हुए.
प्रशासन की ओर से मस्जिद रोड में लगभग नौ बजे आरएएफ़ के जवानों की तैनाती हुई. इस दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया.
शफ़ीक़ ख़ान का दावा है कि रविवार की रात साढ़े नौ बजे बड़ी तादाद में सुरक्षा बल मस्जिद के अंदर घुसे और तरावीह की नमाज़ पढ़कर बाहर निकल रहे लोगों को जबरन हिरासत में ले लिया.

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एसपी सिटी का कहना है कि कुछ नाबालिग़ बच्चों व अन्य नमाज़ियों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन सत्यापन के बाद उनको रात में ही छोड़ दिया गया जिनका मामले से कोई संबंध नहीं था.
शफ़ीक़ ख़ान भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सोमवार सुबह साढ़े तीन बजे के क़रीब हिरासत में लिए गए तीस में से अट्ठारह लोगों को पुलिस ने रिहा कर दिया.
छोड़े गए लोगों में मस्जिद के इमाम, तरावीह पढ़ाने वाले हाफ़िज़, मस्जिद के ख़ादिम, कुछ बुज़ुर्ग व नाबालिग़ बच्चे शामिल हैं.

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कैसे शुरू हुई हिंसा
स्थानीय लोगों के अनुसार पचास फुट चौड़े चौराहे के बीचोबीच झंडा लगे स्थल पर रविवार की शाम एक सभा हो रही थी. हिंदू समुदाय के लोगों का आरोप है कि इस दौरान उनपर पथराव होने लगा.
स्थानीय लोगों का कहना है कि हिंदुत्ववादी इस चौराहे को एक धार्मिक नाम देना चाहते हैं.
इस बैठक से संबंधित सोशल मीडिया स्टेटस भी वायरल हुआ जिसमें 9 अप्रैल को शाम छह बजे शास्त्रीनगर के 2 नंबर ब्लॉक पर लोगों को एकत्रित होने के लिए कहा गया था.
इस पोस्ट के संबंध में सिटी एसपी विजय शंकर ने बताया कि सिर्फ़ यह पोस्ट ही नहीं, इसके अलावा दो-तीन और पोस्ट हैं और उनकी जांच चल रही है.
सोशल मीडिया पर प्रचारित इस जमावड़े के बारे में बीबीसी ने भाजपा के महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया.

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क्या कहते हैं अधिकारी
मौक़े पर मौजूद एएसएसपी प्रभात कुमार ने कहा, "हालात बिल्कुल कंट्रोल में है. हालात शांतिपूर्ण हैं. जो लोग इकट्ठा हुए थे सब लोगों को उनके घर भेज दिया गया है. पूरे इलाक़े में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है, रैपिड एक्शन फ़ोर्स की एक कंपनी तैनात है. कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है."
हालांकि मामला रविवार को दोबारा तनावपूर्ण कैसे हुए, नाबालिग़ों को हिरासत में क्यों लिया गया और पुलिस पर लग रहे एकतरफ़ा कार्रवाई के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
जबकि ज़िले की उपायुक्त विजया जाधव ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है.

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उन्होंने कहा कि इसके मद्देनज़र पुलिस बल, मजिस्ट्रेट, क्यूआरटी, आरएएफ़, दंगा विरोधी दस्ते तैनात किए गए हैं.
उनके अनुसार, प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है और किसी भी प्रकार की असामाजिक हरक़त करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि वो किसी भी प्रकार की अफ़वाह पर विश्वास ना करें.
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