बिहार शरीफ़ में रामनवमी के मौक़े पर भीड़ क्यों आक्रामक हो गई- ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बिहार शरीफ़ से
बिहार में नालंदा ज़िले के बिहार शरीफ़ में जली हुई दुकानें, गोदाम और घर से छिपकर बाहर की तरफ़ झाँक रहे लोगों को देखकर शहर में फ़ैली दहशत महसूस की जा सकती है.
यहाँ की वीरान सड़कें ठीक तीन साल पुराने कोविड लॉकडाउन की याद दिला रही थीं. लेकिन भारी पुलिस बल और पैरामिलिट्री की तैनाती के बीच बार-बार गुज़रती पुलिस और प्रशासन की गाड़ियाँ हालात को बयाँ करने के लिए काफ़ी थीं.
यहाँ सड़कों पर आम लोग तो नज़र नहीं आ रहे थे, एक-दो लोग कहीं-कहीं किसी ज़रूरी काम से घर से बाहर ज़रूर दिख रहे थे.
दरअसल यहाँ पुलिस लगातार एलान कर रही है कि लोग बिना किसी वजह के घर से बाहर ना निकलें.

बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 70 किलोमीटर दूर मौजूद बिहार शरीफ़ नालंदा ज़िले का मुख्यालय है.
यहाँ की आबादी क़रीब साढ़े तीन लाख मानी जाती है, जिसमें मुस्लिम आबादी भी क़रीब 30 से 35 फ़ीसदी है.
रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान बिहार शरीफ़ में भड़की हिंसा में अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हैं.
इस हिंसा में लाखों की संपत्ति भी जल कर राख हो चुकी है और अब भी कुछ दुकानों से निकलता धुआँ देखा जा सकता है.
यहाँ सांप्रदायिक उन्माद में एक मदरसे की लाइब्रेरी को भी आग के हवाले कर दिया गया और दूसरे समुदाय ने पुस्तकों के एक गोदाम में आग लगा दी.
इस आगज़नी के कारण कई बेशक़ीमती और ऐतिहासिक पुस्तकें जल कर राख हो गईं.
बिहार शरीफ़ राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह ज़िला भी है. बिहार शरीफ़ की परंपरा रही है कि यहाँ रामनवमी की मुख्य शोभा-यात्रा दशमी के दिन निकाली जाती है. यानी राम नवमी के दूसरे दिन.
लेकिन इस बार शोभा-यात्रा के बाद जो हिंसा भड़की है, उसके बाद से यहाँ हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.
शुक्रवार को रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. यह हिंसा शनिवार रात एक बार फिर से भड़क उठी थी.

ताज़ा हालात
बिहार शरीफ़ में हिंसा रोकने के लिए इलाक़े में इंटरनेट सेवा पूरी तरह से बंद कर दी गई है और लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है. यहाँ शुक्रवार से धारा 144 लागू कर दी गई है ताकि कहीं भी भीड़ ना जुट सके.
बिहार शरीफ़ में शुक्रवार को दो समुदायों के बीच नारेबाज़ी के बाद हिंसक झड़प हुई थी. इसमें दोनों तरफ़ से पत्थरबाज़ी भी हुई और कुछ असामाजिक तत्वों ने गोलीबारी भी की थी.
पुलिस ने शुक्रवार की हिंसा के आरोप में क़रीब 30 लोगों को गिरफ़्तार भी किया था. लेकिन शनिवार शाम को यहाँ और भी बड़ी हिंसा हुई जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई.

रविवार को भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में यहाँ हालात पर क़ाबू पाने की कोशिश की गई है.
यहाँ हिंसा के पीछे की वजहों को जानने के लिए पुलिस कमिश्नर और आईजी ने भी शहर के अलग-अलग इलाक़ों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फ़ुटेज को भी देखा है.
नालंदा के पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि बिहार शरीफ़ में पिछले साल भी रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी, लेकिन कोई हिंसा नहीं हुई थी. यहाँ मुहर्रम में भी कोई हिंसा नहीं हुई थी.
अशोक मिश्रा के मुताबिक़, "इस बार रामनवमी की शोभा यात्रा में भीड़ काफ़ी ज़्यादा थी. इस यात्रा का आयोजन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल मिलकर करते हैं, इस बार की यात्रा में लोग ज़्यादा उत्तेजित नज़र आ रहे थे."

नालंदा पुलिस और ज़िला प्रशासन ने रविवार को शहर के सभी 51 वॉर्ड के सदस्यों के साथ मीटिंग की और उनके साथ मिल कर शहर में शांति बनाए रखने की अपील भी की जा रही है.
इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बयान दिया है कि बिहार शरीफ़ में किसी ने गड़बड़ी की है और पुलिस उसकी जाँच कर रही है, जो भी इसके पीछे होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस ने शुक्रवार को हिंसा रोक कर हालात को काबू में करने का दावा किया था. लेकिन शनिवार शाम को यहाँ और भी बड़ी हिंसा और गोलीबारी हुई. इस हिंसा में गोली लगने के एक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान हो गई.
रविवार को भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में यहाँ हिंसा पर काबू पाने की कोशिश की गई है. लेकिन शहर का माहौल तनावग्रस्त है और आम लोग डर की वजह से घरों में बंद हैं.
शुक्रवार से ही इलाक़े में धारा 144 लगा दी गई है. इस बीच पुलिस के मुताबिक़ उसने इस हिंसा में शामिल क़रीब 80 उपद्रवियों को गिरफ़्तार किया है.

हिंसा की शुरुआत
बिहार शरीफ़ में रामनवमी की शोभा यात्रा के लिए अलग-अलग मोहल्लों की झाँकियां श्रम कल्याण केंद्र के स्टेडियम तक आती हैं. यहाँ से सब मिलकर एक शोभा यात्रा निकालते हैं जो शहर में घूमते हुए क़रीब तीन किलोमीटर दूर मणिराम अखाड़े तक जाती है.
इस साल भी शुक्रवार क़रीब तीन बजे यह शोभायात्रा निकाली गई और लोग राँची रोड, मुरारपुर होते हुए अखाड़े की तरफ बढ़े. लेकिन राँची रोड पर गगन दीवान इलाक़े तक शोभा यात्रा के पहुँचते-पहुँचते ही माहौल बदलने लगा.
दरअसल शोभा यात्रा के दौरान गगन दीवान के पास कुछ अफ़वाह फ़ैली, वहाँ नालंदा एसपी ख़ुद मौजूद थे. उस जगह हालात को क़ाबू में पा लिया गया. लेकिन तभी मुरादपुर मस्जिद के पास नारेबाज़ी हुई और दो समुदायों के बीच पत्थरबाज़ी शुरू हो गई.
इस मस्जिद में मौजूद मोहम्मद सोहराबुद्दीन का कहना है कि पिछले 15 साल के अनुभव में उन्होंने बिहार शरीफ़ में ऐसी हिंसा कभी नहीं देखी थी.
उनका आरोप है कि लोग मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और मस्जिद की मीनारों के अलावा अंदर की दीवार और शीशे तक तोड़ दिए. उनका दावा है यहाँ गोलीबारी भी की गई थी.

नालंदा ज़िलाधिकारी शशांक शुभंकर के मुताबिक़, शुक्रवार को हुई गोलीबारी में कुछ लोगों को गोली के छर्रे से चोट लगी थी.
इसी मस्जिद के ठीक पीछे एक मदरसा है जो 1910 में बना था और इसे 1930 सरकार से मान्यता भी मिल गई थी.
इस मदरसा अज़ीज़िया में भी तोड़फ़ोड़ और आगज़नी की निशानी आसानी से देखी जा सकती है.
इस मदरसे में बच्चों के पढ़ने के क्लासरूम को आग के हवाले कर दिया गया. पंखे, बिजली के तार सब कुछ तबाह हो चुके हैं. यही नहीं इस उपद्रव में मदरसे के क्लासरूम की दीवारों तक को तोड़ने की कोशिश हुई.
लेकिन यहाँ हुई हिंसा का सबसे बड़े नुक़सान यहाँ मौजूद कई ऐतिहासिक किताबों को आग के हवाले कर देने से हुआ है.
स्थानीय वक़ील मोहम्मद सरफ़राज़ मलिक के मुताबिक़ इसमें अरबी और फ़ारसी की कई बेशक़ीमती किताबें थीं जो जलकर राख हो चुकी हैं. इनमें से कई सैकड़ों साल पुरानी दुर्लभ किताबें थीं.

हिंसा फ़ैलती गई
मस्जिद और मदरसे पर शुरू हुई हिंसा को जब तक पुलिस संभालती, तभी यह शहर के कई इलाक़ों में फ़ैलने लगी.
इसी इलाक़े में लहेरी थाना क्षेत्र में ही जूते और चप्पलों की एक दुकान को आग के हवाले कर दिया गया.
इसी दुकान के ठीक सामने एक दवा दुकान पर हमारी मुलाक़ात 'विकी' नाम के एक युवक से हुई.
उनका कहना है कि गगन दीवान में सबसे पहले हंगामा शुरू हुआ और उसके बाद यह हिंसा फ़ैलती गई, उसी हिंसा में सामने के जूते-चप्पल की दुकान में भी आग लगा दी गई.
गगन दीवान में क्या हुआ था यह जानने के लिए हम आगे बढ़ें, तो लहेरी थाने से थोड़ी ही दूरी पर एक दुकान से धुआं निकलता दिखा. दरअसल यह एक टायर की दुकान थी.
यहाँ लगी आग ने बगल के एक ड्राइक्लीन की दुकान के एक हिस्से को भी अपनी चपेट में ले लिया था.
थोड़ी देर में यहाँ दमकल विभाग की एक छोटी-सी गाड़ी आई और उसने दुकान की आग पर पूरी तरह काबू पा लिया.
इलाक़े में सड़क पर जहाँ-तहाँ हिंसा के निशान मौजूद थे. यहाँ से आगे बढ़ते हुए हम गगन दीवान इलाक़े में पहुँचे. यहाँ हमें अरुण कुमार मेहता मिले जो इलाक़े के प्रमिला कॉम्पलेक्स के मालिक हैं, जहाँ कई दुकानें और गोदाम बने हुए हैं.

प्रमिला कॉम्पलेक्स में भी शुक्रवार को बड़ी हिंसा और आगजनी की गई थी. यहाँ हार्डवेयर की एक दुकान पर जम कर तोड़फ़ोड़ की गई और फ़िर इस कॉम्पलेक्स में मौजूद कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया.
इस जगह हुई हिंसा में अरुण कुमार की एक कार और तीन ई-रिक्शा पूरी तरह जलकर राख हो गए. जबकि किताब के एक थोक विक्रेता के गोदाम में आग लगा दी गई.
यहाँ अब भी कई जली हुई किताबें चारों तरफ़ बिखरी हुई हैं और अरुण कुमार कुछ मज़दूरों के साथ अपने कॉम्पलेक्स और किराएदारों की बची-खुची संपत्ति को समेटने की कोशिश कर रहे हैं.
उनका कहना है, "ये किसी धर्म का काम नहीं ये सब लुटेरे हैं. एक जगह पर चिकेन शॉप पर आग लगाई गई और उसके बाद दूसरे समुदाय ने हमारे कॉम्लेक्स पर हमला कर दिया. यहाँ दीवार को तोड़कर दुकान के अंदर आग लगाई गई."
इसी कॉम्पलेक्स में हमें कई जली हुई किताबें दिखीं. इनमें अंग्रेज़ी, हिंदी, अरबी और फ़ारसी की भी कई किताबें थीं.
हालाँकि पुलिस ने शुक्रवार को फ़ैली हिंसा और उपद्रव को काबू में कर लेने का दावा किया था और शनिवार दोपहर तक बिहार शरीफ़ में हालात काबू में दिख रहे थे.
लेकिन शनिवार को ही कई इलाक़ों में फिर से हिंसा शुरू हो गई. इस दौरान भी दोनों समुदायों के बीच नारेबाज़ी और पत्थरबाज़ी हुई. स्थानीय पुलिस अधीक्षक के मुताबिक़ शनिवार को हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान हो गई.
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हिंसा का इतिहास
हाल के वर्षों में बिहार शरीफ़ में ऐसी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई थी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बिहार शरीफ़ हिंसा मामले पर बयान दिया और कहा कि ऐसा पहले होता था लेकिन उस पर काबू पा लिया गया था.
नीतीश कुमार ने आशंका जताई थी कि बिहार शरीफ़ में ज़रूर किसी ने कोई गड़बड़ की है और पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है.
वहीं स्थानीय वकील मोहम्मद सरफ़राज़ मलिक ने बीबीसी को बताया, "बिहारशरीफ़ में 1981 में बड़ी हिंसा हुई थी जो यहाँ के ग्रामीण इलाक़ों तक फैल गई थी. साल 1998 और साल 2000 में यहाँ छिटपुट हिंसा हुई थी. बीते चार दशक से यहाँ माहौल शांतिपूर्ण था."
नालंदा के पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्र का कहना है कि वो पिछले साल भी यहीं पर थे, लेकिन शहर में कोई तनाव नहीं था और न ही कोई हिंसा हुई.
उनका कहना है, "इस बार की रामनवमी की शोभा यात्रा में भीड़ काफ़ी ज़्यादा थी. इस बार जुलूस में कुछ असामाजिक तत्वों ने ज़रूरत से ज़्यादा आक्रमकता दिखाई है, उसी से हिंसा शुरू हुई और फ़ैल गई. इस बार का क्राउड ज़्यादा चार्ज्ड अप था. उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी जाँच की जा रही है."
अशोक मिश्र का कहना है कि बिहार शरीफ़ में पहले भी कई धार्मिक आयोजन हुए हैं लेकिन हाल के वर्षों में कभी ऐसी हिंसा नहीं हुई है. हमारी उम्मीद थी कि इस बार भी शांति से शोभा यात्रा होगी लेकिन इस बार असामाजिक तत्व ज़्यादा थे.

'शांति ही समाधान'
बिहार शरीफ़ की हिंसा से आम लोगों की परेशानी जानमाल के नुक़सान के अलावा भी है. यहाँ मुख्य सड़क पर एक व्यक्ति सर पर भारी गठरी लेकर अपने परिवार के साथ सड़क पर गुज़रते दिखे.
उन्होंने अपना नाम अनोखे रजक बताया. उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे जो दोपहर की धूप में किसी सवारी गाड़ी की तलाश में कई किलोमीटर तक पैदल चले जा रहे थे.
हमने उनसे पूछा कि इस माहौल में वो कहाँ जा रहे हैं, तो उनका कहना था कि गाँव से निकले तो पता नहीं था कि ऐसा माहौल है. उन्हें इसी इलाक़े में लहसंढा नाम के किसी जगह पर जाना है.
लेकिन न तो उन्हें, न सड़क पर मौजूद पुलिसवालों और न ही हमें पता था कि उन्हें गाड़ी की तलाश में कहाँ तक पैदल जाना होगा. बस उनके चेहरे पर दिन की रोशनी और सड़क पर मौजूद पुलिसवालों की वजह से एक राहत दिख रही थी.
बिहार शरीफ़ में शांति बनाए रखने के लिए फ़िलहाल पैरामिलिट्री की तीन कंपनियों को तैनात किया गया है.
इसके अलावा बिहार सशस्त्र पुलिस की 10 से ज़्यादा कंपनियाँ इलाक़े में मौजूद हैं. यहाँ शांति बहाली के लिए नालंदा और आसपास से भी बड़ी संख्या में राज्य पुलिस की तैनाती की गई है.
पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा का कहना है, "जब तक लोग विश्वास नहीं करेंगे कि शांति ही समाधान है तब तक हम लोग पूरी तरह सामान्य हालात नहीं बना पाएँगे. उनका कहना है कि क़ानून को अपना काम करने दें. इस हिंसा के पीछे जो भी हो उन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी."
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