सुल्तानपुर: दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा का क्या है पूरा मामला

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर के इब्राहिमपुर में 10 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़कने का एक मामला सामने आया है. पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर 32 लोगों की गिरफ्तारी की है.
पुलिस के मुताबिक़, हिंसा में दो पुलिस वाले और आठ से नौ स्थानीय लोग ज़ख़्मी हुए थे.
सुल्तानपुर पुलिस ने अपनी कार्रवाई के बारे में ट्वीट किया है.
ट्वीट में पुलिस ने लिखा, "थाना बल्दीराय के इब्राहिमपुर गांव में 10 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन को लेकर विवाद हुआ था. थाना बल्दीराय में मुक़दमा पंजीकृत किया गया था. घटना से संबंधित 32 अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर रिमांड के बाद जेल भेजा गया."
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क्या कहती हैं घटना से जुड़ी एफआईआर?
दर्ज एफ़आईआर से मिली जानकारी के मुताबिक़, 10 अक्टूबर को सुल्तानपुर के बल्लीपुर क्षेत्र में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था.
एफ़आईआर के मुताबिक़, शाम 6 बज कर 10 मिनट पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए चौकी पारा होते हुए इसौली घाट जा रही थी. इस दौरान जब प्रतिमा कादरी मस्जिद के सामने पहुंची तो डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया.
एफ़आईआर में लिखा है कि इस घटना से हिंदू तथा मुसलमान समुदाय में भारी तनाव पैदा हो गया. उपद्रवी सड़क मार्ग और उसके आस-पास की दुकान और घरों में आगज़नी करने लगे. बाद में पुलिस पहुँची, तब तक सड़क ईंट-पत्थर और डंडों से भर गई थी.
बाद में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दुर्गा प्रतिमा को विसर्जन स्थल पर ले जाकर विर्सिजित कराया गया.
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एक तरफ़ा कार्रवाई के आरोप

जिस रात हिंसा भड़की तब मौके पर पहुँच कर सुल्तानपुर के एसपी सोमेन वर्मा ने स्थानीय मीडिया को बताया, "पुलिस इसमें निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगी. जिस किसी भी व्यक्ति ने ऐसा किया है, उसकी गिरफ़्तारी होगी और जितनी कठोर कार्रवाई हो सकती है होगी."
लेकिन घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ है.
इस वीडियो में बल्दीराय एसएचओ अमरेंद्र सिंह मंच से ये कहते हुए नज़र आ रहे हैं-

ऐसा कहने के बाद भीड़ तालियां बजाने लगती है और 'जय श्री राम' के नारे लगाने लगती है.
भीड़ को संबोधित करते हुए एसएचओ अमरेंद्र सिंह आगे कहते हैं, "प्रशासन कमज़ोर नहीं है. जो लोग इस तरह का दुःसाहस कर रहे हैं उनके खिलाफ प्रशासन कठोरतम कार्रवाई करेगा. मौके पर डीएम साहब और कप्तान साहब आ गए हैं. वलीपुर में हैं. जो अच्छे से अच्छे हो सकता है, वो निर्णय लेंगे. आपके हित में लेंगे. माँ भगवती की मूर्ति विसर्जित हो, हम लोग पहले इस कार्यक्रम को संपन्न करें. फिर मैं उनको चुन चुन कर मारूंगा."
इसके बाद जनता फिर ज़ोर से तालियां बजाने लगती है.
इस वीडियो और एसएचओ के बयान के सवाल का जवाब देते हुए सुल्तानपुर के एडिशनल एसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव कहते हैं, "वीडियो में धर्म संप्रदाय के बारे में नहीं कहा गया है. जो ख़ुराफ़ाती तत्त्व हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए कहा है. बाकी और कार्रवाई चल रही है. जो भी होगा क़ानून के मुताबिक़ होगा."
विपुल कुमार श्रीवास्तव ने ज़्यादा जानकारी देते हुए कहा, "फ़िलहाल इस घटना से जुड़े चार मुक़दमे दर्ज किए गए हैं जिनकी तहरीर पुलिसवालों ने और मौके पर मौजूद लोगों ने दी है. उन्होंने यह भी बताया कि अभी फ़िलहाल दूसरे पक्ष की तरफ़ से पुलिस को कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है."
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मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है?

जमीयत उलेमा के एक दल ने बुधवार को सुल्तानपुर के डीएम रवीश गुप्ता से मुलाक़ात की और इस घटना में एक तरफ़ा कार्रवाई का आरोप लगाया. इस मुलाकात से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें जमीयत का दल कह रहा है कि वो अमन शान्ति चाहते हैं, लेकिन वो दोनों पक्षों पर कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं.
डीएम रवीश गुप्ता से मुलाक़ात के बाद मीडिया से बात करते हुए इस दल के एक सदस्य ने मीडिया को बताया, "हम यह नहीं कहते हैं कि मुजरिम को बख्शा जाए, लेकिन दोनों तरफ़ के जो मुजरिम हैं, उनकी गिरफ्तारियां होनी चाहिए."
"अभी तक जो गिरफ्तारी हुई है वो सिर्फ़ एक एफ़आईआर की तरफ़ से हुई है. एफ़आईआर सिर्फ़ एक तरफ़ से हुई है. दूसरी तरफ़ की एफ़आईआर नहीं हो पा रही है. इसके पीछे की वजह दूसरे समुदाय के लोगों का ख़ौफ़ है. वो लोग ख़ौफ़ से अपने घरों को छोड़ कर जा चुके हैं और थाने भी नहीं पहुंच पा रहे हैं.
जो लोग गाँव में हैं, कम से कम उन लोगों के दिलों से ख़ौफ़ निकले और मुसलमानों की तरफ़ से भी एफ़आईआर होनी चाहिए."
उन्होंने आगे ये भी मांग रखी कि पूरे मामले में एसएचओ बल्दीराय ने जो काम किया है, कम से कम उनके ख़िलाफ़ प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए.
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क्या बुलडोज़र वाले बयान पर होगी कार्रवाई ?

बल्दीराय के एसएचओ अमरेंद्र सिंह पर मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि उन्होंने घटना के बाद मंच से भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि 'मैं आप से वादा करता हूँ कि उनको मैं मिट्टी में मिला दूंगा. उनके घर बुलडोज़र से गिरेंगे.'
अभियुक्तों के विरुद्ध बुलडोज़र की कार्रवाई के बारे में सुल्तानपुर के एडिशनल एसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव पुष्टि नहीं कर पाए.
सुल्तानपुर के हेमनापुर गांव में चार घरों और एक स्कूल की इमारत पर अवैध निर्माण के नोटिस भी चिपकाए गए हैं.
यह सभी नोटिस हिंसा के दूसरे दिन 11 अक्टूबर को जारी किए गए हैं जिनमें उनके मालिकों और प्रबंधन पर अवैध निर्माण का आरोप है और इस बारे में उनसे 14 अक्टूबर तक जवाब माँगा गया है.
इस नोटिस के बारे में स्थानीय एसडीएम वंदना पांडेय ने बताया, "यह रूटीन है कि जो अवैध क़ब्ज़े होते हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होती है. यह दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई हिंसा के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ नहीं है. नोटिस के बाद यह लोग कोर्ट में अपना जवाब देते हैं, और फिर उसका निस्तारण किया जाता है."
"उस हिंसा में शामिल लोगों की जांच पुलिस कर रही है और जो अवैध क़ब्ज़े हैं, उनके संबंध में कार्रवाई अलग चल रही है. यह संयोग है कि दोनों एक साथ चल रहे हैं. इस वजह से लोगों को लग रहा है कि ये कार्रवाई इनके ख़िलाफ़ हो रही है. हमने जिनको नोटिस भेजा है उसमें हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं. जो लोग अवैध क़ब्ज़ेदार हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी."
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