हिंदू महासभा की दुर्गा पूजा में महिषासुर को दिखाया महात्मा गांधी जैसा, विवाद बढ़ा तो बदला चेहरा

दशहरा

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
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मामला क्या है?

  • कोलकाता में हिंदू महासभा की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा में असुर की प्रतिमा हुबहू महात्मा गांधी से मिलती थी.
  • आयोजकों के ख़िलाफ़ टीटागढ़ थाना में एक मामला दर्ज.
  • विवाद के बाद रातों-रात असुर का चेहरा बदल दिया गया. मूर्ति की आँखों से चश्मा हटा कर चेहरे पर मूंछ लगा दी गई और सिर पर नकली बाल लगा दिए गए.
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रविवार को पूरा भारत जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हिंदू महासभा की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया.

दरअसल, कोलकाता के कस्बा इलाक़े में रूबी क्रॉसिंग के पास आयोजित इस पूजा में असुर की जो प्रतिमा थी, वह हुबहू महात्मा गांधी से मिलती थी. इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज़ होने पर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आयोजकों ने रातों-रात मूर्ति बदल दी है.

अब उनकी दलील है कि यह महज एक संयोग था. हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रचूड़ गोस्वामी का कहना है, "गांधी जी ने कोई भी ऐसा काम नहीं किया है, जिससे उनको सम्मान दिया जाना चाहिए. लेकिन हमारा मक़सद किसी की भावना को ठेस पहुँचाने का नहीं था. गंजे सिर और चश्मा पहनने वाला व्यक्ति गांधी ही हो, यह ज़रूरी नहीं. असुर ने ढाल भी पकड़ी हुई है. महात्मा गांधी ने ढाल कभी नहीं पकड़ी."

रविवार को सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होने वाली हिंदू महासभा की ओर से आयोजित इस पूजा और मूर्ति की तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि दुर्गा की प्रतिमा के साथ असुर की जो प्रतिमा बनी है, उसका चेहरा हुबहू महात्मा गांधी के साथ मिलता है. सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर सामने आने के बाद इस पूजा पर विवाद तेज़ हो गया.

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पहले पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के सदस्य कौस्तुभ बागची ने आयोजकों के ख़िलाफ़ टीटागढ़ थाने में एक मामला दायर किया. उसके बाद कस्बा थाने में भी स्वत- संज्ञान के बाद मामला दायर किया गया.

चौतरफ़ा निंदा और विवाद के बाद रातों-रात असुर का चेहरा बदल दिया गया. मूर्ति की आँखों से चश्मा हटा कर चेहरे पर मूँछ लगा दी गई और सिर पर नकली बाल लगा दिए गए.

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'ये महज़ एक संयोग था'

इस पूजा के आयोजक और हिंदू महासभा के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष चंद्रचूड़ गोस्वामी दावा करते हैं कि महात्मा गांधी को असुर के तौर पर नहीं दिखाया गया था. यह महज एक संयोग था. महासभा ने पहली बार इस पूजा का आयोजन किया है.

उनका कहना था, "यह सही है कि असुर का चेहरा गांधी जी से मिलता था, लेकिन गांधी जी को असुर के तौर पर नहीं दिखाया गया था. यह महज एक संयोग था. लेकिन हम लोग मोहनदास करमचंद गांधी को राष्ट्रपिता नहीं मानते. हम नेताजी का सम्मान करते हैं."

आयोजकों का दावा है कि ऊपरी दबाव की वजह से मूर्ति का चेहरा बदल दिया गया है और यह सब पुलिस ने किया है.

हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सुंदरगिरि महाराज कहते हैं, "हिंदू समुदाय के लोग धार्मिक से ज्यादा दार्शनिक हैं. गांधी जी किसी भी लिहाज से महात्मा नहीं थे. ऐसे में अगर असुर की मूर्ति गांधी जी की तरह दिखती थी तो उसमें कुछ ग़लत नहीं था."

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सियासी विवाद तेज़

इस मामले पर सियासी विवाद भी लगातार तेज़ हो रहा है. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव कुणाल घोष कहते हैं, "ऐसी घटना की कल्पना तक नहीं की जा सकती. इससे भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है. यह नाटक है. महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता हैं. उनकी विचारधारा का पूरी दुनिया सम्मान करती है. राष्ट्रपिता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले की निंदा करते हुए कहा है कि आयोजकों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए. भाजपा ने भी इस घटना की निंदा की है.

सुकांत मजूमदार

यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल

दुर्गा पूजा महज एक धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल बढ़ाने और सियासत चमकाने के साथ ही आर्थिक लिहाज से भी सबसे बड़ा मौका है. इसके अलावा यह एक साहित्यिक उत्सव भी है. तमाम मीडिया घराने इस मौक़े पर विशेषांक प्रकाशित करते हैं जिनकी लाखों प्रतियां हाथों हाथ बिक जाती हैं.

यूनेस्को ने बीते साल 13 से 18 दिसंबर तक फ्रांस के पेरिस में आयोजित होने वाली अपनी अंतर सरकारी समिति के 16वें सत्र के दौरान कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था.

ममता सरकार ने बंगाल की विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा को अंतरराष्ट्रीय उत्सव की मान्यता देने के लिए यूनेस्को से आवेदन किया था. अब तक दुनिया के छह देशों के उत्सवों को ही यूनेस्को से अंतरराष्ट्रीय उत्सव के तौर पर मान्यता मिली है.

यूनेस्को ने दुर्गापूजा को विरासत का दर्जा देते हुए कहा था- "हम भारत और भारतीयों को बधाई देते हैं. हमें उम्मीद है कि दुर्गा पूजा को इंसानियत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किए जाने के बाद स्थानीय लोग इसे लेकर और ज्यादा उत्साहित होंगे."

"सांस्कृतिक विरासत केवल निशानियों और वस्तुओं का संकलन नहीं है. इसमें परंपराएं और हमारे पूर्वजों की भावनाएं भी शामिल हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को मिलती हैं."

दुर्गा पूजा

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यूनेस्को ने अपने ट्वीट में लिखा था, "दुर्गा पूजा के दौरान वर्ग, धर्म और जातीयता का विभाजन टूट जाता है. दुर्गा पूजा को धर्म और कला के सार्वजनिक प्रदर्शन की सबसे अच्छी मिसाल के साथ ही सहयोगी कलाकारों और डिजाइनरों के लिए एक बड़े मौक़े के रूप में भी देखा जाता है."

राज्य में दुर्गा पूजा की अर्थव्यवस्था 32 हजार 377 करोड़ रुपए की है. इसमें खुदरा क्षेत्र की हिस्सेदारी 27 हजार 634 करोड़ रुपए की है. दुर्गा पूजा में मूर्ति निर्माण, रोशनी व सजावट, प्रायोजन, विज्ञापन जैसे करीब 10 उद्योग खास तौर पर सक्रिय रहते हैं.

राज्य के पर्यटन मंत्रालय के निर्देश पर ब्रिटिश काउंसिल की ओर से किए गए शोध से यह आँकड़ा सामने आया है.

जानकारों के मुताबिक़ कोलकाता पूजा के दौरान कॉर्पोरेट घराने 800 से लेकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा तक ख़र्च करते हैं. इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स पहले ही अनुमान जता चुका है कि 2030 तक दुर्गा पूजा का टर्नओवर मेगा कुंभ मेला के बराबर हो जाएगा, जो क़रीब एक लाख करोड़ रुपए है.

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