देवी काली पर महुआ मोइत्रा की टिप्पणी ममता बनर्जी के लिए बनी मुश्किल, FIR दर्ज

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तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा मंगलवार को एक विवाद में फँस गईं.
महुआ मोइत्रा ने कहा था कि मांस खाने वाली और शराब पीने वाली देवी काली की कल्पना करने का उन्हें पूरा अधिकार है.
महुआ मोइत्रा ने कहा था कि हर व्यक्ति को अपने देवता और देवी की पूजा अपनी तरह से करने का अधिकार है.
देवी काली पर कथित विवादित बयान को लेकर भोपाल में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में उनके ख़िलाफ़ आईपीसी के धारा 295A के तहत केस दर्ज किया गया है.
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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के देवी काली पर टिप्पणी की मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी निंदा की है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, "महुआ मोइत्रा के बयान से हिंदू धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
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वहीं बीजेपी ने महुआ मोइत्रा के बयान पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या यह बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी की भी यही राय है?
बीजेपी ने कहा कि यह हिन्दू देवी और देवताओं का अपमान है. तृणमूल कांग्रेस ने इस विवाद में ख़ुद को अपनी सांसद की टिप्पणी से अलग कर लिया है और महुआ मोइत्रा के बयान की निंदा की है.
पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में मंगलवार को कहा था कि यह व्यक्ति का अधिकार है कि वह अपने आराध्य को किस रूप में देखता है.
महुआ ने कहा था, ''मिसाल के तौर पर आप भूटान और सिक्किम में जाते हैं तो वे पूजा में अपने आराध्य को व्हिस्की देते हैं. लेकिन अगर उत्तर प्रदेश में जाएंगे और प्रसाद के रूप में व्हिस्की देने की बात करेंगे हैं तो लोग इसे ईशनिंदा के रूप में लेंगे.'' महुआ मोइत्रा ने कहा कि लोगों को यह अधिकार है कि अपने आराध्य की कल्पना अपने हिसाब से कर सकें.

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महुआ मोइत्रा ने कहा था, ''मेरे लिए काली एक मांस खाने वाली और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं. और आप तारापीठ (पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में एक शक्ति पीठ) जाएंगे तो पाएंगे कि साधु स्मोकिंग कर रहे हैं. काली की पूजा करने वाले आपको अलग-अलग मिलेंगे. हिन्दू धर्म के भीतर काली के उपासक के तौर पर मुझे अधिकार है कि मैं अपनी देवी की कल्पना अपने हिसाब से कर सकूं. यही मेरी आज़ादी है.''
मोइत्रा से काली पर विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर सवाल पूछा गया था. इस फ़िल्म में देवी काली को स्मोक करते हुए दिखाया गया है.
मोइत्रा ने कहा था, ''जिस तरह से आपको शाकाहारी और सफ़ेद वस्त्र में ईश्वर की पूजा की आज़ादी है, उसी तरह से मुझे भी मांसाहारी देवी की पूजा की आज़ादी है.'' महुआ मोइत्रा की यह टिप्पणी कुछ ही घंटों में वायरल हो गई. इसके बाद महुआ मोइत्रा ने आरएसएस पर हमला करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया.

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महुआ ने कहा था, ''यह सभी संघियों के लिए है. झूठ बोलने से आप बेहतर हिन्दू नहीं बन सकते. मैंने कभी किसी फ़िल्म या पोस्टर का समर्थन नहीं किया और न ही स्मोकिंग शब्द का इस्तेमाल किया है. मैं आपको सलाह दूंगी कि कभी तारापीठ में माँ काली का दर्शन करने जाएं और वहाँ देखिए कि भोग में क्या चढ़ाया जाता है. जय माँ तारा.''
बीजेपी ने कहा कि टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रथिंद्र बोस ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की बात हिन्दू देवी के बारे में टीएमसी के भीतर से कही गई है. बोस ने कहा, ''हमलोग मानते हैं कि यह टीएमसी का आधिकारिक रुख़ है और इससे हिन्दुओं की भावना आहत हुई है.''

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हालांकि टीएमसी ने महुआ मोइत्रा के बयान से ख़ुद को अलग कर लिया है. टीएमसी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मंगलवार को ट्वीट कर कहा गया, ''इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में महुआ मोइत्रा ने देवी काली को लेकर जो कुछ भी कहा है, वह उनकी निजी सोच है. उनकी इस टिप्पणी से न तो पार्टी सहमत है और न ही हमारा यह आधिकारिक रुख़ है. तृणमूल कांग्रेस महुआ मोइत्रा की टिप्पणी की निंदा करती है.''
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता गौरव वल्लभ से महुआ मोइत्रा और फ़िल्म काली के पोस्टर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इस पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं. गौरव ने कहा कि मोइत्रा की टिप्पणी टीएमसी का आंतरिक मामला है.
गौरव वल्लभ ने कहा, ''हम सभी धर्मों के आराध्यों का सम्मान करते हैं. भारत की ख़ूबसूरती विविधता है.'

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फ़िल्म पर क्या है विवाद
देवी काली को लेकर विवाद लीना मणिमेकलाई की फ़िल्म काली के पोस्टर से शुरू हुआ था. इस पोस्टर पर देवी काली को स्मोक करते दिखाया गया है. लीना फ़िलहाल कनाडा में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा कि देवी के जिस रूप को वो अपनी फ़िल्म में दिखा रही हैं वो "मानवता का स्वरूप हैं और विविधता का सम्मान करने वाली हैं." ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने इसे लेकर विरोध जताया है.
उच्चायोग ने एक बयान जारी कर कहा, "हमें कनाडा के हिंदू समुदाय के नेताओं की ओर से एक फ़िल्म के पोस्टर पर देवी-देवताओं के अपमानजनक प्रस्तुतीकरण को लेकर शिकायत मिली है जो टोरंटो के अगा ख़ान म्यूज़ियम के 'अंडर द टेंट प्रोजेक्ट' का हिस्सा है."
"टोरंटो में मौजूद हमारे काउंसलेट जनरल ने इवेंट के आयोजकों को इन चिंताओं से वाकिफ़ करा दिया है. हमें ये भी जानकारी मिली है कि कई हिंदू समूहों ने कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर कनाडा में प्रशासन से संपर्क किया है. हम कनाडा की सरकार और इवेंट के आयोजकों से ऐसी भड़काने वाली चीज़ें वापस लेने की अपील करते हैं."
पिछले हफ़्ते शनिवार को लीना ने अपनी फ़िल्म 'काली' का एक पोस्टर ट्वीट किया था, उनके अनुसार ये एक परफॉर्मेंस डॉक्युमेंट्री है. मणिमेकलाई अपनी फ़िल्मों में देवियों को पहले भी दिखाती रही हैं. साल 2007 में उनकी डॉक्युमेन्ट्री फ़िल्म 'गॉडेसेस' को मुंबई और म्युनिख़ फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिखाया गया था. इसके बाद 2019 में उनकी फ़िल्म 'मादाती- एन अनफ़ेयरी टेल' में एक दलित लड़की को देवी के तौर पर पूजा करने की काल्पनिक कहानी को दिखाया गया था.
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