दिल्ली हिंसा में मारे गए इन 14 लोगों की कहानी क्या है?

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दिल्ली में बीते रविवार को भड़की हिंसा कई दशकों में बेहद ख़ौफनाक है. नागरिकता संशोधन कानून के विरोधियों और समर्थकों के बीच शुरू हुई छोटी-छोटी झड़पें देखते ही देखते सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गईं.
देश की राजधानी दिल्ली में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भड़की हिंसा ने दंगों का रूप ले लिया. हिंसा में कम से कम 40 लोग मारे गए हैं और 150 से अधिक जख़्मी हैं.
मौत के आंकड़े अभी बढ़ सकते हैं. मृतकों के परिजन सदमे में हैं और शहर में तनाव पसरा है.
बीबीसी संवाददाताओं ने अलग-अलग इलाकों में जाकर उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जो हिंसा में मारे गए हैं. यह मृतकों की पूरी सूची नहीं है.

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1. रतन लाल, उम्र: 42 साल
मौत का कारण: गोली लगना
पेशा: हेड कॉन्स्टेबल, दिल्ली पुलिस
रतन लाल कथित तौर पर दिल्ली में हिंसा में सबसे पहले पहले मारे जाने वालों में से एक हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन लाल पथराव का शिकार हुए थे और उन्होंने दम तोड़ दिया. लेकिन दिल्ली पुलिस के पीआरओ अनिल मित्तल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि रतन लाल को गोली भी लगी थी.
उनके घर में उनकी मां, दो भाई, पत्नी और तीन बच्चे हैं.
रतन लाल ने 1998 में नौकरी जॉइन की थी और तब उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से सिक्यॉरिटी में तैनात किया गया था. दो साल पहले ही प्रमोशन के बाद वह हेड कॉन्स्टेबल बने थे. राजस्थान के सीकर के रहने वाले 42 साल के रतन लाल तीन भाइयों में सबसे बड़े थे.

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2. वीरभान, उम्र: 45 साल
मौत का कारण: माथे पर गोली लगना
पेशा: छोटे कारोबारी
25 फ़रवरी को वीरभान खाना खाने घर जा रहे थे. वो उत्तर पूर्वी दिल्ली में मौजपुर के पास शिव विहार चौक से गुजर रहे थे जहां दंगे भड़के थे.
उनके परिवार का कहना है कि वीरभान का शरीर लावारिस हालत में पड़े होने की सूचना उन्हें फ़ोन पर मिली थी.
बीबीसी से बातचीत में वीरभान के भाई गंजेन्द्र सिंह ने कहा, ''हम उन्हें लेकर जीटीबी अस्पताल गए, जहां उन्हें पहले से मरा हुआ घोषित कर दिया गया.''
परिवार में इकलौते कमाने वाले वीरभान के घर में अब उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं.
3. मेहताब, उम्र: 23 साल
मौत का कारण: ज़िंदा जलना
पेशा: कंस्ट्रक्शन मजदूर
मेहताब 25 फ़रवरी को बृजपुरी स्थित अपने घर से शाम करीब चार बजे दूध लेने निकले थे लेकिन फिर वापस नहीं लौटे.
उनके भाई ने बताया, ''मैंने उसे मना किया था कि मत जाओ लेकिन उसने बोला कि उसका चाय पीने का मन है. उसके जाने के बाद गली के कुछ परिवार वालों ने गली का गेट बंद कर दिया क्योंकि इलाके में माहौल बेहद खराब था. वह अंदर नहीं आ पाया. बाहर जाने पर जय श्री राम के नारे लगाने वाले लोगों ने उसे खींच लिया.''
बाद में उनकी बहन को सूचना मिली कि मेहताब को ज़िंदा जला दिया गया है. उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां बताया गया कि उनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी है.
करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी मेहताब का परिवार उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डेड बॉडी का इंतज़ार कर रहा था.
वो अपनी मां, भाई, बहन और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ रहते थे.

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4. शाहिद अल्वी, उम्र: 23 साल
मौत का कारण: पेट पर दो बार गोली मारी गई
पेशा: ऑटो रिक्शा ड्राइवर
शाहिद के भाई इमरान जीटीबी अस्पताल में उनके शव का इंतज़ार कर रहे थे, तब हमारी मुलाक़ात उनसे हुई. उन्होंने काफ़ी हिम्मत जुटाकर हमसे बात की.
इमरान ने बीबीसी को बताया, ''मेरे भाई को ऑटो से बाहर खींचा गया और फिर गोली मारी गई.''
उन्हें कुछ अनजान लोगों ने अस्पताल पहुंचाया था लेकिन वो बच नहीं पाए. उनके परिवार को वॉट्सऐप पर उनकी मौत की सूचना मिली जिसमें शाहिद की डेड बॉडी की तस्वीरें भी थीं.
इमरान बताते हैं, ''जैसे ही हमने तस्वीरें देखीं हम अस्पताल के लिए भागे.''
शाहिद की शादी चार महीने पहले हुई थी. उनकी पत्नी गर्भवती हैं.

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5. मुबारक हुसैन, उम्र: 32 साल
मौत का कारण: सीने में गोली लगना
पेशा: मजदूर
मुबारक हुसैन पांच लोगों के परिवार में इकलौते कमाने वाले थे. उनके तीन छोटे भाई जो बेरोज़गार हैं और उनके बूढ़े पिता बिहार में रहते हैं.
वो रोज़ाना मज़दूरी के बाद मौजपुर-बाबरपुर में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में भी शामिल होते थे. ये प्रदर्शन महिलाओं की अगुवाई में चल रहा था.
हुसैन के पड़ोसी दानिश ने बीबीसी को बताया, ''वो अक्सर वहां प्रदर्शन कर रही महिलाओं को खाना-पानी देने जाते थे और कभी-कभी विरोध प्रदर्शन में शामिल भी होते थे.''
सीने में गोली लगने की वजह से मौके पर ही मुबारक हुसैन की मौत हो गई लेकिन उनकी लाश लावारिश हालत में करीब तीन घंटे तक सड़क पर ही पड़ी रही.
उनके मकान मालिक रेहान कहते हैं, ''हमने तीन घंटे तक एंबुलेस बुलाने के लिए फ़ोन किया लेकिन कोई नहीं आया.'' रेहान ने बीबीसी को अपना मोबाइल भी दिखाया जिसमें वो दोपहर पौने दो बजे से साढ़े तीन बजे के बीच एंबुलेंस के लिए कॉल कर रहे थे.
मुबारक हुसैन के भाई सदाक़त जो उनसे मिलने के लिए दिल्ली आए थे, जीटीबी अस्पताल के बाहर उनकी डेड बॉडी मिलने के इंतज़ार में बैठे हैं.

6. अशफ़ाक़ हुसैन, उम्र: 24 साल
मौत का कारण: कई बार गोली लगना
पेशा: इलेक्ट्रीशियन
करीब दो हफ़्ते पहले वैलेंटाइंस डे पर अशफ़ाक हुसैन की शादी हुई थी. 10 दिन बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान जब वो काम से लौट रहे थे तब उन्हें पांच बार गोली मारी गई. ऐसा उनके परिवार का दावा है.
अशफ़ाक़ की चाची हज़रा ने बीबीसी से कहा, ''उसने क्या ग़लत किया था? उसकी पत्नी अब क्या करेगी? कौन उसकी देखभाल करेगा?''
परिवार का कहना है कि अशफ़ाक़ के गले में तलवार से भी हमला किया गया था.

7. परवेज़ आलम, उम्र: 50 साल
मौत का कारण: गोली लगना
पेशा: प्रॉपर्टी डीलर
परवेज़ आलम के बेटे मोहम्मद साहिल बताते हैं कि उनकी आंखों के सामने ही घर के बाहर उनके पिता को गोली मारी गई.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैंने उनसे कहा था कि बाहर न जाएं लेकिन वो कह रहे थे मुझे कुछ नहीं होगा.''
वो दरवाजे पर खड़े थे और जैसे ही अंदर जाने के लिए पलटे उनकी पीठ पर गोली मार दी गई.
कई अन्य पीड़ित परिवारों की तरह इनका भी दावा है कि परवेज़ को बचाने के लिए एंबुलेंस नहीं पहुंची. उन्हें मोटरसाइकिल पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
साहिल कहते हैं, ''इन दंगों की वजह से परिवार के बाकी लोग यहां उनके जनाजे में शामिल होने के लिए आने से भी डर रहे हैं.''

8. विनोद कुमार, उम्र: 51 साल
मौत का कारण: पीट-पीटकर हत्या
पेशा: शादी और पार्टी कारोबार
विनोद कुमार अपने बेटे मोनू के साथ मोटरसाइकिल से मेडिकल स्टोर दवा लेने जा रहे थे जब हमलावरों ने उन पर धावा बोला. उन पर पत्थर और तलवारों से हमला किया गया.
मोनू कहते हैं, ''वो लोग अल्ला हू अकबर के नारे लगा रहे थे.''
मोनू को गंभीर चोटें आई हैं जबकि उनके पिता की मौके पर ही मौत हो गई. उन्होंने बताया कि हिंसक भीड़ ने उनकी मोटरसाइकिल को भी आग लगा दी.
मोनू से हमारी मुलाकात तब हुई जब वो अस्पताल के बाहर अपने पिता की डेड बॉडी मिलने का इंतज़ार कर रहे थे. वो अब भी सदमे में हैं.
9. इश्तियाक़ ख़ान, उम्र: 29 साल
मौत का कारण: पेट पर गोली लगना
पेशा: वेल्डिंग की मरम्मत का काम
इश्तियाक़ के पड़ोसी बताते हैं कि 25 फ़रवरी को जब पथराव शुरू हुआ तो हम सभी आसपास ही थे. उनका कहना है कि पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ रही थी और फायरिंग भी कर रही थी.
इश्तियाक़ के पड़ोस में रहने वाले आरिफ़ बताते हैं, ''गोलियां चल रही थीं. इश्तियाक़ को महसूस हुआ कि उसके पैर में कुछ लगा है लेकिन उसे ये अंदाज़ा नहीं हुआ कि गोली लगी है.''
उनके साथ जो लोग मौजूद थे वो बताते हैं कि गोली लगने के कुछ देर बाद ही वो बेहोश हो गए. लोगों ने सीपीआर के जरिए उन्हें होश में लाने की कोशिश की और तुरंत अस्पताल ले गए. शुरुआत में घरवालों से कहा गया कि वो ख़तरे से बाहर हैं लेकिन तीन-चार घंटे बाद उनकी मौत हो गई.
उनकी पत्नी ज़ेबा ने बीबीसी से कहा, ''मैंने उनको मना किया था कि घर से बाहर मत निकलो लेकिन उन्होंने मेरी सुनी नहीं.''
इश्तियाक़ को 25 फरवरी को गोली लगी और 26 फरवरी को उनका जन्मदिन था.

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10. मोहम्मद फ़ुरकान, उम्र: 30 साल
मौत का कारण: गोली लगना
पेशा: कारीगर
24 फरवरी की शाम करीब पांच बजे फ़ुरकान के बड़े भाई इमरान को फ़ोन पर सूचना मिली कि उन्हें पैर में गोली लगी है.
उन्होने कहा, ''मुझे भरोसा नहीं हुआ क्योंकि फ़ोन आने के क़रीब एक घंटे पहले ही मैं उससे मिला था.''
इमरान बताते हैं, ''फ़ुरकान कुछ काम कर रहा था. बीच में वो सामान लेने के लिए बाहर निकला तभी ये घटना हुई. दोनों भाइयों के घर आस-पास ही हैं.
उनके परिवार का कहना है कि किसी ने फ़ोन करके जानकारी दी कि उन्हें लेकर अस्पताल गए हैं लेकिन जब तक वो लोग वहां पहुंचे फुरकान की मौत हो चुकी थी.
11. दीपक, उम्र: 34 साल
मौत का कारण: चाकू से हमला
पेशा: मज़दूरी
अस्पताल के बाहर दीपक की डेड बॉडी मिलने के इंतज़ार में बैठे उनके परिजनों को अब तक नहीं मालूम कि उनकी मौत कैसे हुई.
परिवार के एक सदस्य ने बताया, ''हमने उसके चेहरे पर कुछ जख़्म देखे थे. उसे गोली लगी है या नहीं ये नहीं पता.''
दीपक के घर में उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं. दीपक मूल रूप से बिहार के आरा ज़िले के रहने वाले थे लेकिन वो बीते दस साल से दिल्ली में ही रह रहे थे.
दीपक को विक्की नाम के एक शख़्स ने अस्पताल में भर्ती कराया था और उनके परिवार को सूचना दी थी.
12. अंकित शर्मा, उम्र 26 साल
मौत का कारण: मारपीट और टॉर्चर
पेशा: ख़ुफ़िया विभाग
अंकित शर्मा की लाश चांदबाग़ इलाक़े में एक नाले में मिली थी. उनके परिवार का कहना है कि 25 फ़रवरी को जब वो काम से लौट रहे थे तब उन पर हमला हुआ.
उनके भाई अंकुर ने बीबीसी से बताया,''मेरे भाई के शरीर पर चोट के गहरे जख़्म हैं. उसका चेहरा बुरी तरह बिगाड़ दिया.''
उनकी लाश 26 फ़रवरी को बरामद हुई. अंकुर का कहना है कि हमलावरों ने उनकी लाश को नाले में फेंक दिया.
अंकित के पिता भी सरकारी कर्मचारी हैं. उनके भाई अंकुर सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दे रहे हैं और बहन अभी पढ़ाई कर रही है.
13. राहुल ठाकुर, उम्र: 23 साल
मौत का कारण: गोली लगना
पेशा: छात्र
राहुल अपने घर में खाना खा रहे थे जब उन्होंने बाहर गोली चलने और पथराव की आवाज़ें सुनी.
परिवार के मुताबिक़, वो घर से बाहर यह देखने निकले थे कि शोर क्यों हो रहा है. जैसे ही वो बाहर निकले उनके सीने में गोली लगी. उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया लेकिन वो बच नहीं पाए.

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14. अकबरी, उम्र 85 साल
मौत की वजह: जिंदा जलाना
उत्तर पूर्वी दिल्ली के गमरी गांव में 25 फ़रवरी की शाम हिंसक भीड़ सड़कों पर 'जय श्रीराम' के नारे लगाते हुए दुकानों और घरों को आग लगा रही थी.
हिंसक भीड़ ने अकबरी के चार मंज़िला घर को भी आग लगा दी. परिवार के बाकी लोग किसी तरह भागकर छत पर पहुंचे लेकिन अकबरी पीछे छूट गईं. कई घंटों बाद उनकी लाश मिली.
अकबरी के पोते सलमानी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ''मैं घर लौट रहा था तभी मेरे बेटे ने फ़ोन पर बताया कि भीड़ ने हमारे घर को घेर रखा है. उनके हाथों में पेट्रोल बम और डंडे हैं. मेरी मां, पत्नी और तीन बच्चे दूसरी मंज़िल पर थे. मैंने फ़ोन पर ही उनको छत पर जाने के लिए कहा.''
सलमानी बताते हैं, ''मेरे 10 मज़दूर ग्राउंड फ्लोर पर ही थे. वो भी भागकर छत पर पहुंचे. मेरे बेटे ने बाद में ध्यान दिया कि मां वहां नहीं थी. उसने नीचे आने की कोशिश भी की लेकिन तब तक पूरा घर आग के हवाले हो चुका था और हर तरफ़ धुआं था. जब वो लोग छत से नीचे उतरे मां गुजर चुकी थी.''
उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले से आने वाली अकबरी के पति की मौत करीब 40 साल पहले हो गई थी. उन्होंने मज़दूरी करके अपने सात बच्चों को पाला था.
(रिपोर्ट: अभिजीत कांबले, भूमिका राय, विग्नेश अय्यासामी, कीर्ति दुबे और श्रुति मेनन)
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