घृणा और हिंसा को बढ़ावा देने वाले यूजर्स की ट्विटर पर वापसी कैसे हुई?

नफरत के प्रतीक
इमेज कैप्शन, 1,100 से अधिक बहाल किए गए ट्विटर अकांउट के बीबीसी पड़ताल में पाया गया कि सैकड़ों नफरत और ग़लत सूचना फैला रहे हैं
    • Author, डिसइन्फॉर्मेशन टीम
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

बीबीसी की एक पड़ताल में पाया गया है कि जिन सैकड़ों ट्विटर अकांउट को वापस ट्विटर पर बहाल किए जाने कि अनुमति दी गई थी वे ग़लत सूचना फैला रहे हैं और ग़लत व्यवहार कर रहे हैं.

बीबीसी मॉनिटरिंग ने पहले से प्रतिबंधित 1100 से ज़्यादा ट्विटर अकांउट का विश्लेषण किया, जिन्हें ट्विटर के नए मलिक एलन मस्क के आने के बाद से बहाल कर दिया गया था.

बीबीसी मॉनिटरिंग को उनमें से एक तिहाई से ज़्यादा अकांउट में प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई आपत्तिजनक कंटेंट के साक्ष्य मिले हैं.

एलन मस्क ने कहा था कि वो "फ़्री स्पीच निरपेक्षता वादी" हैं. नवंबर में उन्होंने उन प्रतिबंधित अकांउट के लिए "सामान्य माफ़ी" की घोषणा की थी जिन्होंने कानून नहीं तोड़ा या फ़िर किसी गंभीर स्पैम में शामिल नहीं थे.

नस्ल, सेक्सुअल ओरिएंटेशन और जेंडर के आधार पर किसी दूसरों के प्रति हिंसा और प्रत्यक्ष हमलों और ख़तरों के साथ-साथ जो कंटेंट "नकारात्मक या हानिकारक रूढ़िवादिता को अमानवीय, नीचा दिखाने या मजबूत करने" का इरादा रखते हैं उनपर ट्विटर के नियम रोक लगाते हैं. .

ट्विटर बाल यौन शोषण को दर्शाने वाली या बढ़ावा देने वाली किसी भी सामग्री के प्रति "ज़ीरो टोलेरेंस" अपनाने का भी दावा करती है.

हालांकि बीबीसी मॉनिटरिंग के रिसर्च में संकेत दिया गया है कि बहाल किए गए कई अकांउट इन नियमों का उल्लंघन करते दिखते हैं.

  • बीबीसी मॉनिटरिंग डेटासेट के अनुसार लगभग 190 अकांउट घृणा और हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे. इसमें बलात्कार को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं और एलजीबीटी समुदाय के साथ ग़लत व्यवहार के संकेत भी शामिल हैं.
  • बीबीसी मॉनिटरिंग को कुछ ऐसे अकांउट भी मिले हैं जिनमें ऐसे चित्र हैं जो बाल यौन शोषण को दर्शाते हैं.
  • चुनावों और कोविड टीकों के बारे में ग़लत सूचना फैलाने वाले 270 से ज़्यादा ऐसे अकाउंट मिले. हालांकि ऐसे सारे कंटेट ट्विटर के मौजूदा नियमों का उल्लंघन नहीं करेगी.
ट्विटर
इमेज कैप्शन, ट्विटर के अनुसार नियम अभी भी घृणित, अपमानजनक और हिंसक कंटेंट को प्रतिबंधित करते हैं

एलन मस्क के अधिग्रहण के पहले दिन और 10 जनवरी के बीच बहाल किए गए अकाउंट को बीबीसी मॉनिटरिंग डेटा सेट ने सीमित कर दिया है, जिसमें केवल 10,000 से ज़्यादा फॉलोअर वाले प्रोफाइल शामिल हैं.

ये अकाउंट उन हज़ारों से केवल एक हिस्सा हैं जिन्हें हाल के महीनों में ट्विटर पर वापस बहाल करने की अनुमति दी गई है.

जिस कंटेंट के साथ समस्या थी उसके पहचान के लिए डेटासेट में हर अकांउट पर दर्जनों या कभी-कभी सैकड़ों पोस्ट का कीवर्ड सर्च और मैन्युअल विश्लेषण किया गया. इन अकांउट के निलंबन के कारणों को भी नोट किया गया.

तो किस तरह के अकांउट ट्विटर जेल से वापस बहाल किए गए ?

नफ़रत के कई चेहरे

बीबीसी मॉनिटरिंग डेटासेट में ट्विटर पर फिर से बहाल होने वाले कई ऐसे अकांउट मिले जिनका अतीत महिला विरोधी टिप्पणियां करने का रहा है.

इनमें से एक ऑनलाइन इनफ्लुएंसर एंड्रयू टेट हैं. वो फिलहाल रोमानिया में मानव तस्करी और बलात्कार की जांच के हिस्से के तौर पर हिरासत में है. महिलाओं के लेकर उन्होंने कहा था कि बलात्कार की कुछ ज़िम्मेदारी महिलाओं की भी होनी चाहिए.

ट्वीटर पर फिर बहाल होने के बाद से एंड्रयू टेट के फॉलोअर्स की संख्या बढ़ गई है. नवंबर 2022 में 150,000 से बढ़कर वर्तमान में 50 लाख हो गई है.

महिलाओं के प्रति नफ़रत को बढ़ावा देने वाले कुछ यूजर्स में से एक ने कहा कि वह जानता है कि जब वह महिला को पीटना चाहता है तो इसे लेकर महिला सामान्य है.

एक और यूजर ने ट्वीटर पर वापस बहाल होने के बाद बलात्कार का चित्रण करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया.

एलजीबीटी समुदाय को बार बार टारगेट किया गया.

बीबीसी मॉनिटरिंग डेटासेट के अनुसार कई ऐसे ट्वीट्स देखे गए जिनमें उन्हें अपमानजनक तरीक़े से "बीमार इंसान" और "बच्चों से कामुकता रखने वाले इंसान" जैसी बातें बोली गईं.

सेंटर फॉर काउंटरिंग डिजिटल हेट (सीसीडीएच) के इमरान अहमद का कहना है कि मस्क के ट्विटर पर आने के बाद से उनके संगठन में महिलाओं और एलजीबीटी समुदाय के प्रति घृणा दर्शाने वाले शब्द में वृद्धि देखी गई है.इसके साथ ही नस्लवादी गालियां भी दी गई हैं.

इमरान का दावा है कि ट्विटर पर निलंबित सभी अकांउट को बिना पूरी समीक्षा के दोबारा बहाल करने को लेकर "मस्क ने आग की नली को खोल दिया है. ये नफ़रत और ग़लत सूचना के प्रसार को अनुमति देता है."

इस जांच से सबसे परेशान करने वाले परिणाम बाल यौन शोषण को दर्शाने वाली फ़़ोटो वाले दो अकांउट थे.

वे फ़ोटो रियल लाइफ इमेज़ नहीं हैं बल्कि ड्राइंग इमेज़ है.

बीबीसी मॉनिटरिंग ने इस कंटेंट की सूचना ट्विटर को दी. इसके बाद ट्विटर ने एक इनमें से एक अकांउट को निलंबित कर दिया. जबकि दूसरे अकांउट के एक फ़ोटो को हटा दिया.

इसके बाद कुछ हफ़्ते पहले बीबीसी मॉनिटरिंग को ट्विटर के ज़रिए एक और अकांउट मिला. उसपर भी वैसी ही तस्वीरें लगी थीं. इसके बारे में ट्विटर को सूचना दी गई लेकिन लेख के लिखे जाने तक वो अकांउट अभी भी सक्रिय है.

चुनाव को ख़ारिज़ रने वाले प्रतीकों से घिरी महिला
इमेज कैप्शन, अमेरिका में चुनावी इनकार करने वालों द्वारा "चोरी बंद करो" हैशटैग का व्यापक तरीक़े से इस्तेमाल किया गया

चुनाव को लेकर भम्र

डेटासेट के सौ से ज़्यादा अकांउट चुनावों और उनके परिणामों के बारे में झूठे और भ्रामक दावे फैलाते हैं.

उदाहरण के लिए कुछ यूजर्स ने ग़लत सुझाव दिए कि ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोलसोनारो ने चुनाव के दोनों राउंड जीते थे.

कुछ लोगों ने ग़लत दावा किया कि अमेरिका में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प "बड़े बहुमत" से जीते.

ट्रम्प समर्थकों में से कुछ ने झूठे चुनावी दावों वाले पोस्ट के साथ अपनी ट्विटर पर वापसी का जश्न भी मनाया.

माई पिलो के सीईओ माइक लिंडेल फर्जी सिद्धांत के सबसे बड़े समर्थकों में से एक है. उनका मानना था 2020 का चुनाव धोखाधड़ी से प्रभावित था.

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "मैं वापस आ गया हूँ !! धन्यवाद एलन मस्क. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को पिघला दें और उन्हें जेल की सलाखों में बदल दें"

ट्विटर का कहना है कि वह चुनावों और उनके परिणामों के बारे में ग़लत या भ्रामक जानकारी को लेबल यानी चिन्हित कर सकता है या हटा सकता है.

इस लेख को लिखे जाने तक बीबीसी मॉनिटरिंग ने चुनावों के बारे में इस तरह का दावा करते हुए किसी भी पोस्ट को लेबल होते नहीं देखा है.

महिला कोविड इनकार का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतीकों से घिरी हुई है
इमेज कैप्शन, नवंबर में ट्विटर ने अपनी कोविड-19 ग़लत सूचना नीति को लागू करना बंद कर दिया.

वैक्सीन के भ्रामक दावे

2022 के नवंबर में ट्विटर ने अपनी कोविड ग़लत सूचना नीति को लागू करना बंद कर दिया. इस वजह से कोरोना वायरस से जुड़े मिथकों और वैक्सीन की ग़लत सूचनाओं को फ़ैलाने वाले कुछ लोगों को वापस आने का संकेत मिला.

डॉ. रॉबर्ट मेलोन उनमें से एक थे. उन्होंने कोविड टीकों की प्रभावशीलता और उसकी सुरक्षा पर संदेह जताने वाले भ्रामक दावे किए हैं.

हृदय रोग विशेषज्ञ पीटर मैक्कुलो ने झूठे दावों का प्रसार किया है कि कोविड टीके बड़ी संख्या में लोगों की जान ले रहे हैं.

दुनिया भर के कई स्वतंत्र वैज्ञानिकों के साक्ष्यों के साथ-साथ पांच अरब से ज़्यादा लोगों के अनुभवों से पता चला है कि कोविड के टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं और गंभीर दुष्प्रभाव दुर्लभ हैं.

डेटासेट में लोगों की "अचानक मौतों" को टीकों से जोड़ने वाली भी कई पोस्ट मिली.

एक घटना में एक शोक संतप्त माता-पिता के उत्पीड़न का कारण बनने वाली कई पोस्ट भी मिलीं .

हमारे डेटा सेट में बहाल किए गए ज़्यादातर अकांउट ने ग़लत सूचना या घृणा फ़ैलाने वाले कंटेंट का प्रचार नहीं किया. कभी-कभी यह स्पष्ट भी नहीं होता कि किसी अकांउट को पहले क्यों निलंबित किया गया था.

फिर भी बाकियों के लिए दोबारा अकांउट की बहाली उस तरह के व्यवहार को दोहराने के अवसर के तौर पर देखी जाती है जिस वजह से उन पर प्रतिबंध लगाए थे.

लेख लिखे जाने तक 1,100 से ज़्यादा के डेटा सेट में सिर्फ एक दर्जन से अधिक अकांउट को स्वतंत्र तरीक़े से दोबारा निलंबित किया गया था.

टिप्पणी के लिए बीबीसी मॉनिटरिंग ने ट्विटर से संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया.

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