भारत में रामनवमी पर हिंसा को लेकर विदेशों से आ रही ऐसी प्रतिक्रिया

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बीते दिनों भारत के कुछ हिस्सों में रामनवमी के दिन हुई हिंसा को लेकर विदेशों से भी प्रतिक्रिया आ रही है.
ख़ासकर इस्लामिक देश, संगठन और मानवाधिकार संस्थाओं ने भारत को इस मामले में आड़े हाथों लिया है. इस्लामिक देश के कुछ पत्रकारों ने भी भारत के ख़िलाफ़ पाबंदी की मांग की है.
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने कहा है कि भारत में इस्लामोफ़ोबिया से जुड़ी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसे लेकर सरकार को क़दम उठाना चाहिए.
पाकिस्तान ने कहा है कि भारत में मुसलमानों पर हो रहे हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी से वो चिंतित है.
इससे पहले इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने भी इसे लेकर बयान जारी किया था और अपनी नाराज़गी जताई थी.
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी कहा है कि इस बार रामनवमी के मौक़े पर मुस्लिम बहुल इलाक़ों से शोभायात्राएं निकाली गईं जिनमें मुसलमान विरोधी नारे लगाए गए, इस कारण सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं.
ओआईसी के बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है और बयान जारी कर इसे उसके 'भारत विरोधी एजेंडा' करार दिया है.
पाकिस्तान ने क्या कहा?
बुधवार रात पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि रामनवमी के मौक़े पर भारत के कम से कम आठ राज्यों में कट्टरपंथी संगठनों ने सार्वजनिक रैलियां कीं और वहां मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएं सामने आईं.
कई जगहों पर मस्जिदों और मुसलमानों के घरों पर हमले कर उन्हें नुक़सान पहुँचाया गया.
अपने बयान में पाकिस्तान ने बिहार के नालंदा ज़िले की घटना का ज़िक्र किया है और लिखा है कि यहाँ एक मदरसे को जला दिया गया. पाकिस्तान ने कहा है कि इस आग में पवित्र क़ुरान समेत क़रीब 4,500 क़िताबें जल कर खाक़ हो गईं.
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत की और इस्लामोफ़ोबिया की घटनाएं बढ़ रही हैं. मंत्रालय ने कहा है कि भारत की मौजूदा सरकार हिंदुत्व के एजेंडे पर चल रही है और राजनीति में इस्लाम विरोधी रुख़ अपना रही है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से गुज़ारिश की है कि वो सांप्रदिक हिंसा फैलाने वालों और मुसलमानों को लेकर नफ़रत फैलाने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए.
विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत को ये दिखाना होगा कि अपने यहाँ रह रहे मुसलमानों को सुरक्षा देने के लिए वो इस्लामोफ़ोबिया पर लगाम लगाने के लिए क़दम उठा सकता है.
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ओईसी ने क्या कहा?
57 इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने एक बयान जारी कर भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हुई कथित हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है.
ओआईसी ने भी अपने बयान में बिहार शरीफ़ में मदरसे और उसकी लाइब्रेरी में आग लगाने की घटना का ज़िक्र किया है और कट्टर हिंदुओं की भीड़ ने इस घटना को अंजाम दिया है.
ओआईसी ने अपने बयान में हिंसा और भड़काने वाली कार्रवाई की आलोचना की है और कहा है कि ये भारत में बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया और सुनियोजित तरीक़े से मुसलमान समुदाय को निशाना बनाने का नतीजा है.
ओआईसी ने भारत सरकार से मुसलमानों पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई और मुसलमानों की सुरक्षा, अधिकारों और उनसे सम्मान की रक्षा की गुज़ारिश की है.
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ह्यूमन राइट्स वॉच का बयान
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) की दक्षिण एशिया की निदेशिका मीनाक्षी गांगुली ने एक बयान जारी कर कहा कि 30 और 31 मार्च को भारत के कई राज्यों में हिंसक घटनाएं हुई थीं.
बिहार में भीड़ ने एक मदरसे को आग के हवाले कर दिया और हिंसा में एक हिंदू युवा की मौत की ख़बर आई.
एचआरडब्ल्यू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सत्ताधारी बीजेपी हिंदू त्योहारों का इस्तेमाल वोट जुटाने के लिए कर रही है, जिससे हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं.
उन्होंने लिखा कि भीड़ को राजनीतिक संरक्षण का भरोसा होता है और इसमें शामिल लोग मानते हैं उन्हें इसके लिए सज़ा नहीं दी जाएगी.
मीनाक्षी गांगुली ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा का ज़िक्र किया और कहा कि विपक्ष की सरकार वाले इस प्रदेश में अधिकारियों ने बीजेपी के दर्जनों सदस्यों और उनके समर्थकों को हिंसा फैलाने के लिए गिरफ्तार किया तो वहाँ पार्टी ने पुलिस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया.
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मीनाक्षी गांगुली ने लिखा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक गणतांत्रिक देश के रूप में अपनी छवि मज़बूत बनाना चाहता है और मोदी जी-20 की अध्यक्षता करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां भी दुनिया के सामने रखना चाहते हैं. लेकिन भारत में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है और सिविल सोसायटी को दबाया जा रहा है.
वह कहती हैं, अगर भारत को सही मायनों में विश्व का नेता बनना है तो देश के भीतर मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए.
भारत की प्रतिक्रिया
ओआईसी के बयान की भारत ने कड़ी आलोचना की है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इसे ओआईसी की सांप्रदायिक सोच वाली मानसिकता और उसके भारत विरोधी रवैया करार दिया है.
उन्होंने कहा कि बारत विरोधी ताक़तें इस संगठन का इस्तेमाल कर रही हैं और ऐसा होने देकर ओआईसी अपना ही सम्मान कम कर रहा रहा है. भारत ऐसी घटनाओं पर पाकिस्तान और ओआईसी पहले भी प्रतिक्रिया देते रहे हैं.
भारत पाकिस्तान को आड़े हाथों लेता रहा है. भारत ने अपने अतीत के जवाब में पाकिस्तान को कहा है कि वह अल्पसंख्यक हिन्दुओं को सुरक्षा देने में नाकाम रहा है और दूसरों को उपदेश देता है.
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सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा
क़तर के पत्रकार अब्दुल्ला अलमादी ने सोशल मीडिया पर भारत की आलोचना की है. उन्होंने ओआईसी के बयान को रीट्वीट करते हुए लिखा है, "इस तरह के आधिकारिक बयानों का कट्टर विचारधारा से चलने वाली दक्षिणपंथी रुझान वाली सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अगर किसी बात से वाक़ई फ़र्क़ पड़ेगा तो वो है भारत के साथ व्यापार कम करना और भारत के हिंदू कामगारों को काम न देना."
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि भारत में हिंदुओं के त्योहार अल्पसंख्यकों के लिए ख़तरे और परेशानी का सबब बन गए हैं.
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द न्यू अरब ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो पोस्ट किए गए हैं, जिनमें लोग हिंदू झंडे लिए मस्जिदों में घुसे और मुसलमानों के घरों में घुसकर इफ्तार के दौरान उन्हें परेशान करते दिख रहे हैं.
वेबसाइट ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वोट बैंक बनाने के लिए भारत में ये कट्टरपंथी सोच फैलाई जा रही है कि देश के भीतर मुसलमानों से ख़तरा है.
तुर्की की समाचार एजेंसी टीआरटी वर्ल्ड लिखता है कि आचोलक कहते हैं कि मोदी अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हमलों, हिंदू कट्टर नेताओं द्वारा धर्म के ग़लत इस्तेमाल और देश में बढ़ रही असहिष्णुता को रोकने में कामयाब नहीं हो पाए हैं.
वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में रामनवमी के मौक़े पर पश्चिम बंगाल और बिहार शरीफ़ में हुई हिंसा के बारे में लिखा है और साथ ही लिखा है कि मुसलमान विरोधी विचारधारा रखने वाले कई हिंदू धर्मगुरू रोहिंग्या अल्पसंख्यकों की तरह मुसलमान जाति के सफाए की बात करते हैं.

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रामनवमी के मौक़े पर क्या हुआ?
30 मार्च को भारत में रामनवमी थी. इस साल रामनवमी और रमज़ान का महीना एक ही रहा. इस दिन देश के कई हिस्सों में हिंदू संगठनों ने शोभायात्राएं निकाली थीं.
शोभायात्रा के दौरान ही पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दो गुटों के बीच झड़प हो गई. आक्रोशित लोगों ने गाड़ियों में आग लगा दी और दुकानों पर पत्थर फेंके.
बिहार के बिहारशरीफ़ और सासाराम में भी हिंसा की घटनाएं हुईं, जिसके कारण वहाँ इंटरनेट सर्विस रोकनी पड़ी और धारा 144 लगानी पड़ी.

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बिहारशरीफ़ में मदरसा अज़ीज़िया में भी तोड़फोड़ और आगज़नी की गई. यहाँ बच्चों के पढ़ने के क्लासरूम और लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया गया.
रामनवमी के दिन गुजरात के वडोदरा के फतेहपुरा इलाक़े में हिंसा की छिटपुट घटनाएं हुई. हालांकि पुलिस ने कहा कि यहां कुछ गाड़ियों को नुक़सान पहुंचा है लेकिन कोई घायल नहीं हुआ है.
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में छत्रपति संभाजी नगर में दो गुटों के बीच झड़प हो गई. ये घटना किराडपुरा के जानेमाने राम मंदिर के सामने हुई.
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड स्थित हल्दीपोखर ने पथराव की घटना सामने आई. पुलिस के अनुसार इस हिंसा में क़रीब पाँच लोग घायल हुए हैं.
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