चीन के साथ हुए समझौते में क्या भारत को झुकना पड़ा?- प्रेस रिव्यू

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वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर भारत और चीन के बीच हुई डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया के दौरान अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति बहाल करने की जगह चीन की 'बफ़र ज़ोन' की मांग मानने की सैन्य अधिकारियों ने निंदा की है.

द टेलिग्राफ़ अख़बार अपनी ख़ास रिपोर्ट में लिखता है कि भारत और चीन ने गलवान घाटी, पैंगॉन्ग लेक और गोगरा की तरह ही हॉट स्प्रिंग्स में समान दूरी पर पीछे हटने पर सहमति जताई है और इसको 'नो पट्रोलिंग ज़ोन' घोषित किया है.

अख़बार के मुताबिक़, इसका मतलब है कि चीनी सैनिक उस ज़मीन पर रहेंगे जिस जगह तक का भारत दावा करता रहा है, इसके साथ ही भारत ने अधिक क्षेत्र पर पट्रोलिंग (गश्त) के अपने अधिकार को छोड़ दिया है.

द टेलिग्राफ़ अख़बार से सेना के एक पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल ने कहा, "मोदी जी के नेतृत्व में यह एक न्यू इंडिया है जो चीनी आक्रामकता और बदमाशी के आगे हथियार डाल दे रहा है और भारतीय क्षेत्र में बिना सैनिकों वाला बफ़र ज़ोन बनाने की अनुमति दे रहा है. इस बफ़र ज़ोन का मतलब है कि और ज़मीन का नुक़सान.. क्योंकि डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत भारत ने अपने ही उस क्षेत्र को छोड़ दिया है, जिस पर अब तक वो दावा करता आया था."

"उस तथाकथित ताक़त से भरे राष्ट्रवाद का क्या हुआ जो यह सरकार चुनावी भाषणों में दिखाती रही है? चीनी सेना हमारे क्षेत्र में आकर बैठी हुई है और हम इसे 'डिसइंगेजमेंट' कह रहे हैं. बीते दो सालों के दौरान हम भारत सरकार के पूरे आत्मसमर्पण और चीन को और ज़मीन सौंपने के गवाह बने हैं."

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कहाँ-कहाँ लागू हुआ 'बफ़र ज़ोन'

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गलवान घाटी में 'बफ़र ज़ोन' 3 किलोमीटर, पैंगॉन्ग लेक 10 किलोमीटर और गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स 3.5-3.5 किलोमीटर चौड़ा है. भारतीय सेना जो इन इलाक़ों में गश्त किया करती थी वो अब इस समझौते के तहत यह नहीं कर सकेगी.

अख़बार से एक पूर्व ब्रिगेडियर ने कहा, "एक शॉर्ट टर्म समाधान और इसे 'डिसइंगेजमेंट' कहने के बजाय भारत चीन से यह क्यों नहीं कह रहा है कि वो अपनी ओर का लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल उसे लौटाए."

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने अख़बार से कहा कि बफ़र ज़ोन और गश्त स्थगित करना अस्थायी है. उन्होंने कहा, "भारत ने इन इलाक़ों पर अपना अधिकार नहीं छोड़ा है."

हालांकि उन्होंने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि बफ़र ज़ोन कब तक जारी रहेगा इस पर कोई औपचारिक बयान क्यों नहीं आया है.

एक रियाटर्ड मेजर जनरल ने अख़बार से कहा कि मई 2020 के बाद भारत के दावे वाले क्षेत्रों में चीन ने अतिक्रमण किया और इसका साफ़ मक़सद था कि वो नक़्शा बदले और उन इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करे जो उसके रणनीतिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं.

उन्होंने कहा, "ये बफ़र ज़ोन मोर्चे पर एक नई यथास्थिति को दिखाते हैं. अप्रैल 2020 की यथास्थिति लागू करने को लेकर चीन प्रतिबद्ध नहीं है और वो भारत पर दबाव बना रहा है कि वो उसके अतिक्रमण के बाद तैयार बदली हुई सीमा को स्वीकार करे."

उन्होंने कहा कि इस तरह के बफ़र ज़ोन बनाने के औचित्य पर भारत सरकार की चुप्पी है जहां पर भारत 1962 से गश्त कर रहा था, इसके देश की क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता पर गंभीर प्रभाव होंगे.

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भारत-चीन के बीच विवाद की जड़ क्यों है लद्दाख?

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  • अप्रैल 2020 में शुरू हुआ विवाद, जब चीन ने पूर्वी लद्दाख़ में विवादित एलएसी पर सैन्य मोर्चाबंदी की
  • चीन ने भारत पर एलएसी पर निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाया
  • गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स जैसे इलाक़ों में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आईं
  • 15 जून को गतिरोध हिंसक हुआ. गलवान में हुए खूनी संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई
  • बाद में चीन ने माना कि उसके भी चार सैनिक मरे, पर जानकारों के मुताबिक चीनी सैनिकों की मौत का आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा था
  • फ़रवरी 2021 में दोनों देशों ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर चरणबद्ध और समन्वित तरीके से तनाव को कम करने की घोषणा की
  • दोनों देशों में गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक और डेपसांग जैसे इलाक़ों को लेकर भी विवाद है
  • एलएसी पर भारत और चीन के बीच कई सालों से कम-से-कम 12 जगहों पर विवाद रहा है
  • जून 2020 के बाद दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर पर 16 राउंड की बातचीत हो चुकी है
  • ताज़ा बयान इसी 16वें राउंड की बातचीत के बाद जारी किया गया है
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मोदी

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मोदी सरकार के दावों पर उठते सवाल

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अख़बार लिखता है कि 'द वायर' न्यूज़ पोर्टल को दिए इंटरव्यू में पूर्व कर्नल अजय शुक्ला ने कहा है कि लद्दाख़ में कई जगहों पर डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया 'भारत के लिए हानिकारक' है.

कर्नल शुक्ला ने कहा, "बफ़र ज़ोन इस तरह से बना है कि भारत उन क्षेत्रों में गश्त नहीं कर सकता है जिन्हें भारत का माना जाता है और जहां पर पहले गश्त होती रही है."

साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बयान के 'बेहद हानिकारक' असर की भी बात की. 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प में 20 भारतीय जवान मारे गए थे जिसके चार दिन बाद पीएम मोदी ने कहा था कि किसी ने भी भारतीय क्षेत्र को न ही क़ब्ज़ा किया है और न ही कोई क़ब्ज़ा करने जा रहा है.

इस बयान के बाद चीन ने किसी भी उल्लंघन से इनकार किया था और उसने उस पूरे ही क्षेत्र पर दावा किया जो उसके पास था.

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डेपसांग प्लेन्स से चीनी सेना अभी भी पीछे नहीं हटी है. कहा जा रहा है कि भारत के दावे वाली सीमा रेखा से वो 18 किलोमीटर अंदर आ चुके हैं.

ऐसा अनुमान है कि भारत के दावे वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 1,000 स्क्वेयर किलोमीटर के क्षेत्र पर चीन क़ब्ज़ा कर चुका है.

अशोक गहलोत

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सीएम की मौजूदगी में मंत्री ने सड़कों की आलोचना की

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राजस्थान के कैबिनेट मंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में राज्य की ख़राब सड़कों की आलोचना की.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार लिखता है कि मंत्री ने कहा कि राज्य की सड़कों का हाल इतना ख़राब है कि अगर कोई गर्भवती महिला रोड से अस्पताल जाएगी तो वो रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे देगी और सरकार की प्रमुख चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना कुछ भी नहीं करेगी.

राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीडब्ल्यूडी मंत्री भजनलाल जाटव की मौजूदगी में ये बातें भरतपुर ज़िले में कहीं.

उन्होंने भजनलाल जाटव से कहा कि इन सड़कों पर वो काम शुरू करें क्योंकि उन्हें रोज़ लोगों की 'गालियां सुननी पड़ती हैं.'

फडणवीस

गुजरात पाकिस्तान नहीं है: फडणवीस

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महाराष्ट्र में वेदांता-फॉक्सकॉन डील को लेकर सियासी घमासान लगातार जारी है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ज़ुबानी जंग चल रही है.

अमर उजाला अख़बार लिखता है कि शुक्रवार को उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी और शिवसेना पर करारा पलटवार किया और कहा कि 'इस परियोजना के गुजरात शिफ्ट होने के पीछे आपकी सुस्ती ज़िम्मेदार है. जब हम सरकार में आए तो गुजरात में परियोजना स्थापित करने का निर्णय लगभग अंतिम चरण में था. मतलब कि यह डील गुजरात के साथ पक्की हो चुकी थी.'

फडणवीस ने कहा कि 'गुजरात पाकिस्तान नहीं है, हम दोनों राज्य भाई-भाई हैं. सभी राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतियोगिता है. हम जल्द ही गुजरात, कर्नाटक, सभी से आगे निकलेंगे.'

उन्होंने पिछली महाविकास अघाड़ी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 'आपके शासन के दौरान हम अपने पड़ोसी राज्य से पिछड़ गए.'

निघासन

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निघासन कांड के अभियुक्तों पर लगेगा रासुका

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निघासन कांड के सभी छह अभियुक्तों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने मामले की कार्रवाई तेज़ कर दी है.

दैनिक जागरण अख़बार के मुताबिक़, पुलिस इन सभी अभियुक्तों पर जल्द ही रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की भी तैयारी में है.

अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अभियुक्तों पर मामले की कार्रवाई गहनता के साथ की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के अनुसार कार्रवाई होगी.

निघासन कांड को लेकर शासन-प्रशासन की संजीदगी लगातार तेज़ी पकड़ती जा रही है. इस मामले में शुक्रवार को सुबह ही पीड़ित मां के बैंक खाते में एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली 8.25 लाख की पहली किस्त भेज दी गई है.

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