लखीमपुर खीरी में दलित लड़कियों की हत्या: पीड़ित परिवार का क्या कहना है - ग्राउंड रिपोर्ट

लखीमपुर खीरी

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    • Author, प्रशांत पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखीमपुर खीरी से

"हमारी बेटी को क्यों मार दिया, हाय बिटिया कहाँ चली गई?"

रिश्तेदार-नातेदार माँ को दिलासा दिलाते हैं पर माँ का दिल यह मानने को तैयार नहीं कि उनकी बेटियों की इस तरह हत्या हो गई है.

"अरे मारे नहीं होते", "जान क्यों ले ली दोनों की", "सबको फ़ांसी होनी चाहिए", "पुलिस ख़ुद मिली है सबसे" ये कहते-कहते कहते दोनों नाबालिग दलित लड़कियों की माँ गश खाकर गिर पड़ती हैं.

गुरुवार को पूरे दिन परिवार का यही हाल रहा. मज़दूर पिता पोस्टमॉर्टम के लिए दौड़ते भागते रहे, मां का रो-रो कर बुरा हाल था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप और गला दबने की पुष्टि हुई है.

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लखीमपुर खीरी में दलित लड़कियों की हत्या

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- दोनों लड़कियां सगी बहनें थीं

- लड़कियों की उम्र 15 और 17 साल

- बुधवार को पेड़ से लटका मिला था शव

- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप और गला दबने की पुष्टि

- मामले में पुलिस ने छह लोगों को किया गिरफ़्तार

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पोस्टमॉर्टम के बाद पहुंचा शव

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गुरुवार की देर शाम दोनों लड़कियों के शवों का तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया. वीडियोग्राफ़ी भी हुई. इसके बाद लखीमपुर खीरी से उनके गाँव भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शव लाया गया, लेकिन परिवार वाले अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हो रहे थे.

दोनों बहनों (15 और 17 साल) के शवों का अंतिम संस्कार तब तक नहीं हुआ जब तक स्थानीय प्रशासन और परिवार के बीच लिखित समझौता नहीं हो गया.

एसडीएम निघासन राजेश कुमार सिंह और लखीमपुर खीरी के एएसपी अरुण कुमार सिंह ने मृतकों के पिता को एक लिखित आश्वासन का पत्र सौंपा.

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इस समझौते के मुताबिक़ (एससीएसटी एक्ट के तहत) दोनों बालिकाओं के लिए आठ-आठ लाख रुपये यानी कुल 16 लाख 16 सितंबर यानी कल (शुक्रवार) तक बैंक में ट्रांसफ़र करने का भरोसा दिया गया है.

इसके अलावा रानी लक्ष्मीबाई योजना से मदद धनराशि देने, प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत एक आवास आवंटित करने और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और अन्य आर्थिक सहायता के लिए शासन को लिखा जाएगा. इसके अलावा मामले के दोषियों को फांसी और जल्द सज़ा के लिए इस मामले की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में पैरवी की जाएगी.

इसके बाद स्थानीय एसडीएम ने परिवार वालों से बंद कमरे में बात की और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों का अंतिम संस्कार कराया गया.

लखीमपुर खीरी में दो बहनों की हत्या

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घर का माहौल

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इससे पहले, बारिश के बीच गुरुवार को इस परिवार के लोहिया आवास के तहत मिले घर पर दूरदराज़ के रिश्तेदारों, पुलिसकर्मियों और मीडिया कर्मियों की भीड़ जमा थी.

लखीमपुर ज़िला मुख्यालय से 61 किलोमीटर दूर इस गाँव में घर के बाहर रह-रह कर चीख़ों और मातम से माहौल ग़मगीन था. कभी-कभी कोई गाड़ी और सायरन की आवाज़ें इन चीखों को थोड़ा शांत करती.

गाँव के उत्तर में स्थित गन्ने के खेतों के पास परिवार का घर है. इन्हीं गन्ने के खेतों में ही बुधवार को दोनों नाबालिग़ लड़कियों के शव पेड़ पर लटके मिले थे. गन्ने के खेत में खैर के पेड़ से एक ही दुपट्टे से दोनों बहनों के शव लटके हुए थे.

स्थानीय ग्रामीण राजू बताते हैं, "लड़कियों को शाम साढ़े चार बजे से ढूंढा जा रहा था. पहले गाँव के चार पा-च लोग ढूंढते रहे. जब नहीं मिलीं तो 15-20 लोग निकले. फिर गन्ने के खेत में खैर के पेड़ से दोनों बहनें लटकी मिलीं."

माँ की तहरीर के आधार पर पुलिस ने हत्या, अवैध रूप से घर में घुसने और पॉक्सो ऐक्ट में निघासन कोतवाली में मामला दर्ज किया गया.

बुधवार को लड़कियों की माँ ने बताया था कि "बाइक पर सवार तीन लड़के इन लड़कियों को जबरन लेकर चले गए थे." इस शिकायत के बाद क्षेत्र की आईजी लक्ष्मी सिंह ख़ुद लखीमपुर आकर तफ़्तीश को आगे बढ़ाने लगीं. वह ख़ुद मौक़ा-ए-वारदात पर भी गईं.

घटना के 24 घंटों के अंदर ही गुरुवार को खीरी के एसपी संजीव सुमन ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि ''गाँव के पास लालपुर गाँव के दूसरे समुदाय के पाँच लड़कों ने घटना को अंज़ाम दिया. उनका साथ गाँव के एक लड़के ने भी दिया.''

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पुलिस की थ्योरी पर भाइयों का सवाल

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दोनों लड़कियों का परिवार आम मज़दूरों का परिवार है. पिता के पास कोई भी ज़मीन नहीं है. लोहिया आवास के तहत परिवार को दो कमरों का पक्का आवास अखिलेश यादव की सरकार में मिला था.

गांव की आबादी दो हज़ार के आस पास है जिसमें दलितों की आबादी सबसे ज़्यादा है. गांव में दलितों की आबादी 500 से ज़्यादा है. लेकिन ज़्यादातर परिवार भूमिहीन मज़दूर हैं और दिहाड़ी काम-धंधा करके आजीविका चलाते हैं.

लड़कियों के दो भाई हैं जो दिल्ली में एक फ़ैक्ट्री में काम करते हैं. वहीं बड़ी बहन की शादी पास के ही गाँव में हुई है. बुधवार को दोनों लड़के दिल्ली में थे. पिता मजदूरी करने गए थे. माँ अकेली थी. तभी मां के मुताबिक़, बाइक सवार लड़के लड़कियों को बाइक पर बिठाकर ले गए.

थोड़ी देर बाद जब खोजबीन शुरू हुई तो लड़कियों के शव लालपुर गाँव की तरफ़ मेन अधबनी रोड से भीतर गन्ने के खेत में लटके मिले. इसके बाद पुलिस को इत्तला दी गई और तफ़्तीश शुरू हुई.

लखीमपुर खीरी पुलिस ने लालापुर गांव के पाँच अभियुक्तों और मृतका के गाँव के एक अभियुक्त को गिरफ़्तार किया है.

एसपी संजीव सुमन ने बताया, "जुनैद और उसके साथियों से लड़कियों की हालिया दोस्ती थी, अभियुक्त लड़की को बहला फुसलाकर ले गए थे. पहले रेप किया फिर गला दबाकर हत्या कर दुपट्टे से लटका दिया. इसके बाद दो और साथियों को बुला लिया. अभी प्राथमिक जाँच में ये तथ्य सामने आए हैं. अभियुक्तों के कपड़े फोरेंसिक जाँच को भेजे जा रहे हैं."

दिल्ली से गाँव में रात भर सफ़र करके सुबह नौ बजे पहुँचे लड़कियों के भाइयों ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा, "पुलिस कह रही है कि दोनों बहनें सहमति से गईं पर अगर सहमति से गई हैं तो उन्हें उन लड़कों ने मारा क्यों? मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा."

वो हाथ जोड़ने लगते हैं और कहते हैं, "प्लीज़ हमें अकेला छोड़ दीजिए."

वीडियो कैप्शन, बलात्कार के खिलाफ़ कैसे लड़ी गईं ये लड़ाइयां?

अभियुक्तों का परिवार क्या कह रहा है?

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हत्या के आरोप में लालपुर गाँव के रहने वाले पाँच अभियुक्तों को पकड़ा गया है. मृतक दोनों बहनों के गाँव से लालपुर गाँव की दूरी दो किलोमीटर के क़रीब है.

मुख्य अभियुक्त जुनैद (पुलिस के मुताबिक) के 65 साल के बाबा अपने घर पर कम्बल ओढ़े गुमसुम बैठे थे.

उन्होंने बताया, "मेरा पोता हैदराबाद में ग्रिल बनाने का काम करता था. छह महीने पहले गया था. मोहर्रम में आया था. कल गल्ला लेने तमोलीपुरवा गया था, चार बजे आ गया था. फिर जुनैद का टिकट दिल्ली का था तो चला गया था. फिर रात में 11 बजे पुलिस आई जुनैद के पिता इसराइल को पकड़ कर ले गई. इसके बाद पिता से फ़ोन करवाया और उसे वापस बुलाया. इसके बाद हम लोगों को पता चला कि ये कांड हो गया."

मुख्य अभियुक्त के पिता भी पुलिस हिरासत में हैं, जबकि उसके बाबा अपने पोते का आधार कार्ड दिखाते हुए दावा करते हैं, "इन लड़कों को पुलिस फंसा रही है. सब नाबालिग हैं."

मुख्य अभियुक्त के घर से कुछ आगे दूसरे अभियुक्तों के घर हैं. मज़दूरी पेशा परिवार से ताल्लुक रखने वाले ये सभी अभियुक्त हैदराबाद, गुजरात में काम करते हैं.

इसमें दो अभियुक्त सगे चचेरे भाई हैं. दोनों की दादी दुपट्टे से आँसू पोंछते हुए कहती हैं, "दोनों घर पर ही सो रहे थे. भोर में पुलिस आई और दोनों को उठा कर ले गई."

एक अन्य अभियुक्त की मां ने बताया, "बेटा कल गल्ला लेने गया था, लेकर आ गया था तुरन्त. उसे बुखार था. हमारा बेटा ऐसा नहीं कर सकता. पुलिस फँसा रही है."

इस घटना के बाद लालपुर गाँव में घटना के बाद अजीब सी ख़ामोशी है. कभी-कभी सायरन बजाती पुलिस की जीपें इस सन्नाटे को चीरती हैं. गाँव के दक्षिण में रहनेवाले एक बुज़ुर्ग जमील कहते हैं, "हम लोगों को भी कल तब पता चला जब पुलिस की जीपें आने लगीं."

जमील कहते हैं, "घटना किसने की और क्यों की ये सब मुझे नहीं पता है. पर दोनों गाँवों के ताल्लुकात ज़रूर ख़राब होंगे. जो हुआ वो ग़लत हुआ. यहाँ सब मिलकर रहते थे, पर अब कुछ भी हो सकता."

गाँव में लगा है सियासी दलों का जमावड़ा

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दोनों बहनों की हत्या के बाद यूपी की सियासत में भी अचानक गर्माहट आ गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर योगी सरकार और निशाना साधा. वहीं प्रियंका गाँधी और आम आदमी पार्टी ने भी यूपी में क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.

समाजवादी पार्टी की ओर से प्रवक्ता जूही सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल गांव में पहुंचा जबकि काँग्रेस पार्टी के भी राज्य के दो विधायकों का प्रतिनिधि मंडल परिवार से मिला.

हालांकि स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाई है और पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि उन्हें न्याय मिलेगा.

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