उन्नाव की मां जो अपनी बेटी को दिसंबर से ही ढूंढ रही थी, दो महीने बाद मिली लाश

दलित युवती की माँ
    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उन्नाव से

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 22 साल की दलित युवती की हत्या और शव को ज़मीन में गाड़ देने का मामला गुरुवार को सामने आया लेकिन रीता देवी अपनी बेटी को बीते आठ दिसंबर से तलाश रही थीं.

उनकी बेटी का शव गुरुवार को खोदकर निकाला गया और परिवार वालों की अनुमति के बाद शुक्रवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया.

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इस हत्या का आरोप समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री दिवंगत फ़तेहबहादुर सिंह के बेटे रजोल सिंह पर है.

रीता देवी का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनकी समय पर सुनवाई नहीं की जिसके चलते उनकी बेटी की हत्या हुई. बेटी के अंतिम संस्कार के चंद घंटों बाद बीबीसी की टीम रीता देवी से मिलने उन्नाव स्थित निवास पर पहुँची, वहां रीता देवी का रो रो कर बुरा हाल था, चीख चीख कर उनका गला बैठ चुका था.

लेकिन दिसंबर से अपनी बेटी को ढूंढ रही रीता देवी को शायद इस बात का एहसास है कि आगे भी उनकी लंबी लड़ाई जारी रहेगी.

रीता देवी ने अपनी आपबीती सुनाई कि वो कैसे पुलिस प्रशासन से जूझीं, आत्मदाह की कोशिश करने पर मजबूर हुईं और इन सबके बाद उनको अपनी बेटी की लाश मिली जिसे ज़मीन में गाड़ दिया गया था.

सपा नेता के बेटे की दुकान पर करती थी काम

रीता देवी की बेटी 8 दिसंबर 2021 से लापता थी. लेकिन मामले में एफ़आईआर 10 जनवरी 2022 को दर्ज की गयी. रीता देवी की बेटी पूर्व सपा के मंत्री दिवंगत फ़तेह बहादुर सिंह के बेटे रजोल सिंह की दुकान पर काम करती थीं.

रीता देवी के मुताबिक, एक महीने तक ही काम पर गई थी और इसी दौरान रजोल सिंह की नियत बिगड़ गयी और वो उनकी बेटी पर शादी करने के लिए दबाव बनाने लगा.

उन्नाव

इमेज स्रोत, ANI

स्थानीय पुलिस की ओर से एफ़आईआर में देरी के बारे में रीता देवी ने बताया, "इंस्पेक्टर साहब कहने लगे, लड़की तुमने छुपा रखी है. पैसे कमाने का ज़रिया है तुम्हारा. तुम मैसेज करवा-करवा के लड़के के खाते में पैसे मंगवाती हो."

रीता देवी यह भी आरोप लगाती हैं कि अभियुक्त रजोल सिंह पुलिस वालों को घूस देता था और इसलिए पुलिस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही थी.

रीता देवी कहती हैं कि वो बार बार पुलिस थाने जाती थीं लेकिन पुलिस उनके साथ ख़राब तरीक़े से पेश आती थी.

वो कहती हैं, "पुलिस प्रशासन गन्दी नज़रों से देखता और कहता कि तुम्हारी लड़की बालिग़ है तुम जाओ यहाँ से. रोज़ चक्कर लगाती हो, रोज़ चक्कर लगाने से तुम्हारी लड़की मिल जाएगी? अगर पुलिस ने कार्रवाई की होती तो मेरी लड़की ज़िंदा होती."

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पुलिस पर ढील देने का आरोप

रीता देवी का आरोप है कि उनकी लगातार शिकायत और एफ़आईआर दर्ज कराने की कोशिशों के बीच रजोल सिंह को उन्नाव पुलिस ने काफ़ी ढील दी.

अब इस मामले की जांच कर रहे उन्नाव के एडिशनल एसपी शशि शेखर सिंह ने रीता देवी द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में कहा, "इस पूरे प्रकरण में पुलिस के कंडक्ट के बारे में जांच हो रही है. अगर ऐसा इसमें कुछ भी बात आएगी तो लोगों को सज़ा होगी."

कोतवाली एसएचओ अखिलेश पांडेय को सस्पेंड किया है. इस मामले में किसी की लापरवाही रही है, कोई कार्रवाई करने में कमी रही है, उसके बारे में पुलिस अधीक्षक उन्नाव द्वारा, एक जांच का आदेश दिया गया है और इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी."

लड़की के शव की बरामदगी और इस मामले में रजोल सिंह की और सूरज सिंह की गिरफ़्तारी के बारे में एडिशनल एसपी शशि शेखर सिंह का कहना है कि, "इसमें हमारी पांच टीमें लगी हुई थीं और इसके लिए वो दिन रात काम रहे थे."

"मामला संवेदनशील भी था, इस मामले को लेकर काफ़ी संवेदनशील थे और हमने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की. छुपा करके इतने शातिर तरीक़े से अपराध किया गया था. यह एक जघन्य अपराध था. अभियुक्तों को हमने गिरफ़्तार कर लिया और हमने साइंटिफिक सबूत इकठ्ठा किए हैं और वो इतने ठोस हैं कि उनको क़ानून के तहत सज़ा होगी."

पुलिस का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है. पुलिस का यह भी दावा है कि गिरफ़्तार किए गए दोनों अभियुक्तों रजोल और सूरज के ख़िलाफ़ गैंगस्टर एक्ट और एनएसए के तहत भी कार्रवाई होगी.

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अखिलेश के सामने आत्मदाह की कोशिश

रीता देवी द्वारा अपनी बेटी के खोज की ख़बर पहली बार सुर्ख़ियों में तब आई जब उन्होंने लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यालय के सामने अखिलेश यादव के काफ़िले के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की थी.

रीता देवी ने बताया, "वो गाड़ी से निकल गए, एक बार भी मुड़ कर नहीं देखा कि यह महिला परेशान है, आत्मदाह कर रही है. उनको उतर कर एक बार पूछना था. एक बार भी नहीं पूछे, चलते चले गए."

इस घटना के बाद रीता देवी को लखनऊ पुलिस गौतम पल्ली पुलिस स्टेशन ले गए जहाँ से सूचना उन्नाव भेजी गयी और फिर उनकी बेटी की तलाश शुरू हुई.

इस मामले के बारे में अखिलेश यादव से चुनाव प्रचार के दौरान पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, "जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो समाजवादी पार्टी के मंत्री थे उनकी मौत चार साल पहले हो चुकी है. पुलिस को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने इसमें कार्रवाई करने के लिए इतने दिन क्यों लगाए. हम लोग पीड़िता के परिवार के साथ हैं और उनकी सभी मांगे पूरी होने चाहिए."

रजोल सिंह

इमेज स्रोत, Facebook/ Rajol Singh

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कौन है रजोल सिंह

रजोल सिंह दिवंगत सपा नेता फ़तेह बहादुर सिंह के बेटे हैं. फ़तेह बहादुर सिंह मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री शासनकाल में दर्जा प्राप्त मंत्री थे और उत्तर प्रदेश सहकारी फेडरेशन के चेयरमैन थे. वे उन्नाव के सफीपुर के ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके थे. उनका चार साल पहले निधन हो गया था.

रजोल सिंह के अलावा फ़तेह बहादुर सिंह के एक और बेटे अशोक सिंह हैं.

समाजवादी पार्टी के उन्नाव जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव के मुताबिक़ दोनों भाइयों रजोल सिंह और अशोक सिंह में प्रॉपर्टी को लेकर फ़तेह बहादुर की संपत्ति को लेकर भी चल रहा है.

धर्मेंद्र यादव कहते हैं कि, "फ़तेह बहादुर सिंह के दोनों बेटों का समाजवादी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है और वो पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं है."

इस मामले में अभी तक रजोल सिंह के परिवार से किसी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है.

मृतका के पिता मुकेश गौतम
इमेज कैप्शन, मृतका के पिता मुकेश गौतम

योगी से उम्मीदें

बेबसी के इस दौर से गुज़री रीता देवी कहती हैं कि, "योगी आदित्यनाथ हमारा फ़ैसला करेंगे. उन्हीं से हम न्याय मांगेंगे."

हालांकि रीता देवी और उनके परिवार वालों को अब तक कोशिशों के बाद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समय नहीं मिल सका है.

मृतका के पिता मुकेश गौतम के मुताबिक़ वो और उनकी पत्नी रेखा देवी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने गए थे, दोनों ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी जाने की कोशिश की लेकिन मुलाक़ात नहीं हो सकी.

मुकेश गौतम कहते हैं, "एक महीने तक हम कोतवाली के चक्कर काटते रहे, लेकिन हमारी एफ़आईआर नहीं लिखी गई. तब हम योगी महाराज के दरबार में गए लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण जनता दरबार नहीं लग रहा था और हमारी मुलाक़ात उनसे नहीं हो पाई."

शनिवार की देर शाम वरिष्ठ अधिवक्ता और बहुजन समाज पार्टी की नेता सीमा कुशवाहा ने उन्नाव पहुंचकर परिवार से मुलाक़ात की और कहा कि वे पीड़ित परिवार की तरफ़ से केस लड़ेंगी.

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