भारत-चीन के बीच किस मुद्दे को लेकर फिर बढ़ा तनाव- प्रेस रिव्यू

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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य गतिरोध के डेढ़ साल बाद भी भारत और चीन के बीच तनाव कम होता नज़र नहीं आ रहा है. रविवार को 13वें दौर की कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता में भी हॉट स्प्रिंग्स को लेकर स्थिति नहीं सुलझ पाई है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, रविवार को चुशुल के नज़दीक सेना के मोल्डो सीमा मीटिंग प्वॉइंट पर भारत और चीन के बीच हॉटस्प्रिंग्स पर विवाद सुलझाने को लेकर बातचीत होने के एक दिन बाद यानी सोमवार को दोनों देश एक दूसरे पर बातचीत असफल होने का आरोप लगाते रहे.
पैंगॉन्ग त्सो और गोगरा पोस्ट के उत्तर और दक्षिण तट पर हालात में सुधार है, लेकिन हॉटस्प्रिंग्स में मई 2020 से ही दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं और यहां कोई बात बनती नज़र नहीं आ रही है.
अख़बार ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह देते हुए लिखा है कि चीनी सैनिक, भारतीय सेना को दौलत बेग ओल्डी में रणनीतिक भारतीय पोस्ट के पास स्थित डेपसांग पेट्रोलिंग प्वाइंट पर जाने से भी रोक रहे हैं.
भारतीय सेना ने कहा कि चीन के सामने 'रचनात्मक सलाह' रखी गई, लेकिन ''वो मानने के लिए तैयार' नहीं है, और वो कोई 'दूरगामी प्रस्ताव' भी पेश नहीं कर सके.
इससे पहले चीन ने कहा कि भारत ग़ैर-वाजिब और अनुचित मांग उठा रहा है जिससे मुश्किल पेश आ रही है. वह (भारत) किसी भी परिस्थिति का ग़लत आकलन ना करे.
तीखे शब्दों का ये आदान-प्रदान बीती बैठकों से अलग है. इससे पहले भारत और चीन बैठक पर साझा बयान जारी करते रहे हैं जिससे ये साफ़ नज़र आता था कि दोनों देशों के बीच बैठक में साझी समझ बन पाई है.
भारतीय सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में भारतीय पक्ष ने बाक़ी तीन विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति बहाल करने के लिए चीन से उचित क़दम उठाने को कहा.
भारतीय पक्ष ने ज़ोर देते हुए कहा कि बाक़ी तीन ठिकानों के समाधान से ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध भी आगे बढ़ेंगे.
अख़बार के मुताबिक, भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि एलएसी पर यह स्थिति चीन की ओर से यथास्थिति बदलने और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के कारण हुई. इसलिए यह आवश्यक था कि चीन इस मामले में उचित क़दम उठाए.
13वें दौर की इस सैन्य वार्ता के पहले दोनों देशों के विदेश मंत्री दुशांबे में मिले थे. वहाँ दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत-चीन के शेष मुद्दों को जल्दी से जल्दी हल करने पर सहमति जताई थी.
13वें दौर की बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधियों ने बाक़ी तीन इलाक़ों में समाधान के लिए कई सुझाव दिए, लेकिन चीनी प्रतिनिधि सहमत नहीं हुए. ऐसे में यह बैठक लंबी होने के बावजूद बेनतीजा रही.
हालांकि दोनों पक्ष बातचीत को आगे भी जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं और साथ ही ज़मीनी स्तर पर स्थिरता के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है.

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'निजी अस्पतालों की वैक्सीन का कोई डेटा उपलब्ध नहीं'
द हिंदू अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़ स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि निजी अस्पतालों ने कोविड-19 की कितनी वैक्सीन ख़रीदी है इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. साथ ही निजी अस्पतालों ने कितनी वैक्सीन लगाई है इसका भी कोई अलग डेटा सरकार के पास नहीं है.
ये बात एक आरटीआई को दिए जवाब में सामने आई है. केंद्र सरकार ने 25 फ़ीसदी वैक्सीन निजी अस्पतालों के लिए रिज़र्व रखी है, लेकिन हाल ही में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि निजी अस्पतालों ने मई से लेकर अब तक सिर्फ़ 6 फ़ीसदी वैक्सीन ही लोगों को लगाई है. भारत ने अब तक 95 करोड़ वैक्सीन की ख़ुराक़ दे दी है.
इससे पहले भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस इंडस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि वैक्सीनेशन ड्राइव में उतनी मदद नहीं की जा रही जितनी ज़रूरत है.

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'अजय मिश्रा को बीजेपी का पूरा समर्थन'
गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी हिंसा के मामले में इस वक़्त पुलिस रिमांड पर हैं, लेकिन बीजेपी उनके पिता और कैबिनेट मंत्री अजय मिश्रा के साथ मज़बूती से खड़ी है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी नेताओं का कहना है कि अजय मिश्रा ने अपने बेटे के घटना में शामिल होने से इंकार किया है और पुलिस को अब तक ऐसे सबूत भी नहीं मिले हैं.
विपक्ष लगातार मिश्रा के इस्तीफ़े की मांग कर रहा है, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस से बीजेपी के एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि पार्टी पुलिस की जांच के नतीजे का इंतज़ार कर रही है. एक बार जांच पूरी हो जाएगी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद तय करेंगे कि आगे क्या होगा.
सोमवार को आशीष मिश्रा को लखीमपुर खीरी की एक अदालत ने तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा है. तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर खीरी की हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. आरोप है कि अजय मिश्रा की गाड़ी के काफ़िले ने किसानों को रौंदा था और इनमें से एक गाड़ी में आशीष मिश्रा मौजूद थे.
हालांकि मंत्री अजय मिश्रा टेनी इस आरोप से इंकार करते रहे हैं.

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अफ़ग़ानिस्तान को लेकर होगी आज G20 की बैठक, मोदी होंगे शामिल
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के लगभग दो महीने बाद देश को गहराते मानवीय संकट से बचाने के उपायों पर मंथन के लिए मंगलवार को जी-20 समूह देशों के नेता विशेष बैठक करेंगे.
अमेरिका, फ़्रांस, चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान इटली की अगुवाई में होने वाली इस बैठक में शामिल होंगे.
दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस बैठक की घोषणा 29 सितंबर को इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रेगी ने की थी. ये बैठक रोम में 30 और 31 अक्टूबर को होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले की जा रही है.
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इटली के राष्ट्रपति के आमंत्रण पर भारत के प्रधानमंत्री भी इस बैठक में वर्चुअली शिरकत करेंगे. इसमें ख़ास तौर पर अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा आतंकवाद, विस्थापन, मानवाधिकारों पर भी बात होगी.
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