अमेरिका, तालिबान, चीन, इसराइल, भारत और कश्मीर पर क्या बोले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अमेरिका 'ख़ुद पर क़ाबू करे', नहीं तो अफ़ग़ानिस्तान का पतन हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो अफ़ग़ानिस्तान चरमपंथियों का गढ़ बन जाएगा.
उन्होंने कहा कि अमेरिका को अफ़ग़ानिस्तान की हार से उबरते हुए वहां तत्काल मदद भेजनी चाहिए, ताकि पास मंडरा रही एक मानवीय आपदा को टाला जा सके. सोमवार को लंदन के ऑनलाइन न्यूज पोर्टल 'मिडिलईस्ट आई' को इस्लामाबाद में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ये बातें कही हैं.
इमरान ख़ान ने कहा, "पाकिस्तान के लिए यह अहम है कि अमेरिका इस चुनौती से निपटने के लिए क़दम उठाए. नहीं तो अमेरिकी नेतृत्व में आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान के हज़ारों लोगों के मारे जाने के बाद फिर से पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी होगी."
इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "यह वाक़ई बेहद अहम समय है. अमेरिका को अपनी भावनाओं पर संयम रखना होगा, क्योंकि अमेरिकी अभी सदमे में हैं."
अमेरिका के लोगों के बारे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा, "वो ख़ास तरह के लोकतंत्र, देश-निर्माण या महिलाओं की आज़ादी के बारे में सोच रहे थे कि अचानक से तालिबान आ गए. लोग गुस्से, सदमे और अचरज से भरे हुए हैं.''
उन्होंने आगे कहा कि जब तक अमेरिका नेतृत्व नहीं करता, तब तक हमें अफ़ग़ानिस्तान में अराजकता फैलने की चिंता रहेगी और इससे सबसे ज्यादा हम प्रभावित होंगे.

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'स्थिरता के लिए तालिबान का समर्थन ज़रूरी'
उन्होंने कहा कि दो दशक तक लड़ने के बाद अमेरिका के पास अफ़ग़ानिस्तान में स्थिर सरकार का समर्थन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि तालिबान ही इस इलाके में इस्लामिक स्टेट से लड़ने का एकमात्र विकल्प है. तालिबान के भीतर के कट्टरपंथी तत्वों को रोकने के लिए भी उसका समर्थन करना ज़रूरी है.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा, "दुनिया को अफ़ग़ानिस्तान के साथ जुड़ना चाहिए. यदि वो उसे दूर करेंगे तो तालिबान आसानी से 2000 की तरह फिर से कट्टरपंथियों के चंगुल में जा सकता है. और यह दुनिया के लिए बहुत बड़ी आपदा होगी."
इमरान ख़ान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है और देश के बजट का 75 फ़ीसदी पैसा विदेशी सहायता से आता है. ऐसे में यदि उस पर प्रतिबंध लगाए गया तो बहुत बड़ी मानवीय आपदा पैदा हो सकती है.
उन्होंने कहा, ''यदि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान को ऐसे ही छोड़ा तो मेरी चिंता है कि वो आसानी से 1989 के दौर में चला जाएगा. सोवियत संघ और अमेरिका के छोड़कर चले जाने के बाद हुए गृहयुद्ध के चलते दो लाख से अधिक अफ़ग़ान मारे गए थे."
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया, "साल 2008 में उन्होंने अमेरिकी सीनेटर जो बाइडन, जॉन केरी और हैरी रीड को चेताया था कि वो अफ़ग़ानिस्तान में एक दलदल पैदा कर रहे हैं, जिसका कि कोई सैनिक समाधान नहीं है. लेकिन उन्होंने हमें नहीं सुना. दो साल बाद हमारे उस समय के सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक परवेज़ कयानी ने राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी यही बात कही थी."
इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब़्जे के बारे में कहा, "वहां सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण से हमें बहुत राहत मिली. हमें बहुत ख़ूनख़राबे की आशंका थी. लेकिन इसके लिए भी हमें दोषी ठहराया गया है. तीन लाख अफ़ग़ान सैनिकों ने बिना लड़े आत्मसमर्पण कर दिया. जाहिर है हमने उन्हें आत्मसमर्पण करने को नहीं कहा."

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तालिबानी सरकार पर क्या बोले इमरान
तालिबान की अस्थाई सरकार की बनावट के बारे में इमरान ख़ान ने माना है कि ये समावेशी नहीं है. साथ ही उन्होंने जोड़ा कि तालिबान सरकार संक्रमणकाल के लिए बनी है. और ये भी कहा कि विभिन्न समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए तालिबान को समय देने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि सरकार में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए पाकिस्तान पड़ोसी देशों ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के साथ काम कर रहा है. मालूम हो कि अफ़ग़ानिस्तान में ताजिक और उज़्बेक मूल के काफी अल्पसंख्यक रहते हैं.
इमरान ख़ान के अनुसार, "अफ़ग़ानिस्तान का समाज विविध है, इसलिए उन्हें समावेशी सरकार की ज़रूरत है. उन्होंने वाजिब बयान दिए हैं. सबसे अच्छा उपाय ये है कि हम उन्हें बात करने को प्रोत्साहित करें. लेकिन यदि आप उन्हें मजबूर करते हैं, तो मुझे लगता है कि उनका स्वभाव ऐसा है कि इसका नतीजा उल्टा हो जाएगा."

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टीटीपी पर पाकिस्तानी पीएम की राय
उन्होंने कहा कि तालिबान के भीतर साफ तौर पर कई धाराएं हैं और कई मसलों पर स्पष्ट नेतृत्व की कमी रही है. उनके अनुसार, तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) में 50 समूह शामिल हैं और जो बात करने को तैयार हैं, वो उनसे बात करने को तैयार हैं.
ब्रिटेन के उत्तरी आयरलैंड के साथ हुए समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''मेरा हमेशा से मानना रहा है कि सारे विद्रोह अंततः बातचीत की टेबल पर ख़त्म होते हैं. अब हम टीटीपी के उन लोगों से बात कर रहे हैं जिनसे सुलह हो सकती है और जो अपने हथियार छोड़कर आम नागरिक के रूप में रहने को तैयार हों.''
उन्होंने कहा कि तालिबान की सरकार ने पाकिस्तान से कहा है कि टीटीपी को अफ़ग़ान इलाके से हमला करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. साथ ही भारत की खुफ़िया एजेंसी पर उन्होंने एक बार फिर आरोप मढ़ा कि वो काबुल की पहले वाली सरकार के समय टीटीपी को पाकिस्तान पर हमले के लिए समर्थन दिया करता था.

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'पाकिस्तान अब अमेरिका को जगह नहीं देगा'
अमेरिका द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में ड्रोन के लगातार उपयोग की निंदा करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "ये आतंकवाद से लड़ने का सबसे बेकार तरीका है. गांव की झोपड़ी पर ड्रोन से हमला करके ये उम्मीद करना कि इससे कोई हताहत नहीं होगा. और कई बार ड्रोन ने तो गलत लोगों को अपना निशाना बनाया."
अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट को निशाना बनाने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान में जगह देने के बारे में इमरान ख़ान से एक सवाल पूछा गया. इस पर इमरान ख़ान ने कहा कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि हमें फिर से संघर्ष का हिस्सा बनने की ज़रूरत नहीं है."
अफ़ग़ान यद्ध के चलते पाकिस्तान को हुए नुक़सान के बारे में उन्होंने कहा, "किसी भी देश ने पाकिस्तान जितना नुक़सान नहीं उठाया. हमारे 80 हज़ार लोग मारे गए. हमारी अर्थव्यवस्था को 150 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. इससे हमारी अर्थव्यवस्था तबाह हो गई. यहां साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा लोग विस्थापित हुए. इसे पृथ्वी का सबसे ख़तरनाक जगह कहा जाता था."

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चीन पर इमरान ख़ान की राय
अमेरिका की वापसी के बाद इलाके पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में इमरान ख़ान ने कहा कि इसके बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी. लेकिन उन्होंने कहा कि चीन एक उभरती ताक़त है, जो अमेरिका के जाने के बाद खाली जगह पर अपने पांव पसार सकता है. साथ ही ये भी जोड़ा कि हाल के संकट भरे दिनों में चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा, इसलिए हम उन्हें हमेशा याद करते हैं.
चीन के वीगर मुसलमानों के मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में इमरान ख़ान ने कहा कि उन्होंने चीन से इस बारे में बात की है और चीन ने पाकिस्तान के सामने अपना पक्ष रखा है. इसके बाद उन्होंने कहा, "लेकिन पाकिस्तान और चीन के रिश्ते ऐसे हैं कि हम सारी बातें बंद दरवाज़े के भीतर ही करते हैं. हम इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहते."

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कश्मीर मसले पर भारत की तुलना इसराइल से
इमरान ख़ान ने इस इंटरव्यू में कश्मीरियों के मानवाधिकार का मुद्दा उठाया. इमरान ख़ान ने दावा किया कि इसराइल जैसे फ़लीस्तीनी इलाके में जनसांख्यिकी में बदलाव ला रहा है, वैसी ही गतिविधि भारत भी जम्मू और कश्मीर में कर रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल की तरह भारत को भी विश्व समुदाय से सजा से छूट मिली हुई है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जम्मू और कश्मीर में जमीन अधिग्रहण की अनुमति देकर इसराइल की ही नकल कर रहे हैं.
इमरान ख़ान ने कहा, "इस समय हमारा ध्यान भारत और पाकिस्तान के बीच के विवादित इलाके पर होना चाहिए. वहां लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का एक विवादित मुद्दा है. इस बात को यूएन की सुरक्षा परिषद के दो प्रस्ताव भी मानते हैं."
इमरान ख़ान ने आरोप लगाया कि भारत प्रशासित कश्मीर एक खुली जेल जैसा है. उन्होंने दावा किया है कि कश्मीर में नौ लाख भारतीय सैनिकों ने वहां के अस्सी लाख लोगों को क़ैद में रखा हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत कश्मीरी स्वायत्तता को ख़त्म करने के लिए अपने संविधान को बदलकर जेनेवा समझौते का उल्लंघन कर रहा है.
उन्होंने कहा, ''लेकिन भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मजबूती से चुनौती नहीं मिली, क्योंकि पश्चिमी देश इसे चीन के ख़िलाफ़ एक कवच के रूप में देख रहे हैं. भारत को इसराइल के साथ गहरे संबंधों का भी फायदा हुआ है.''
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, ''गेंद अब भारत के पाले में है. भारत अनिश्चितकाल के लिए इन लोगों को खुले जेल में नहीं रख सकता."
इमरान ख़ान ने दुनिया के ताज़ा हालात के बारे में कहा कि यदि पूरी दुनिया के फ़्लैशप्वाइंट को देखें तो पाएंगे कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक परमाणु फ़्लैशप्वाइंट (बदतर हालात) बना हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे हालात दुनिया में और कहीं नहीं हैं.

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क्रिकेट पर इमरान ख़ान ने क्या कहा?
हाल ही में न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड की क्रिकेट टीमों ने सुरक्षा कारणों के चलते अपने पाकिस्तान दौरे रद्द कर दिए थे. क्रिकेटर से नेता बनने वाले इमरान ख़ान ने इस बारे में कहा कि इन टीमों की सुरक्षा चिंताएं निराधार थीं.
उन्होंने कहा कि न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड ने जो पाकिस्तान के साथ किया वो भारत के साथ कभी नहीं कर सकते. ख़ान ने कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड काफ़ी शक्तिशाली है, क्योंकि उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है.
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