अर्दोआन और इमरान ख़ान दोनों क्या एक ही दुख से हैं परेशान?

तुर्की और पाकिस्तान

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पिछले हफ़्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की 76वीं महासभा को संबोधित करने गए थे तो उन्हें उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन से भी मुलाक़ात होगी.

बाइडन से मुलाक़ात नहीं हुई. अल-जज़ीरा के मुताबिक़ बाइडन ने अर्दोआन से मिलने से इनकार कर दिया था.

इसी निराशा और ग़ुस्से में अर्दोआन ने टर्किश पत्रकारों से कहा था कि इससे पहले के अमेरिकी राष्ट्रपतियों के साथ उन्होंने अच्छे से काम किया था, लेकिन बाइडन के साथ ऐसा नहीं है.

बाइडन को लेकर अर्दोआन जैसी शिकायत कर रहे हैं, वैसी ही शिकायत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की भी है. पाकिस्तान कई बार कह चुका है कि बाइडन ने इमरान ख़ान को फ़ोन तक नहीं किया. दोनों देश बाइडन के इस रुख़ से परेशान हैं और रूस के क़रीब जाने की कोशिश कर रहे हैं.

अमेरिकी सीनेट में एक बिल लाया गया है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े में पाकिस्तान की भूमिका की समीक्षा होगी. पाकिस्तान इसे लेकर परेशान है. इस बिल से पाकिस्तान के बाज़ार में भगदड़ की स्थिति है और डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी मुद्रा रुपया औंधे मुँह गिरा है. ऐसी आशंका है कि पाकिस्तान की भूमिका सामने आई तो उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया जा सकता है. अमेरिका से इसी तनाव के बीच रूस और पाकिस्तान में रक्षा सहयोग पर बात चल रही है और बुधवार को दोनों देशों में इसे लेकर सहमति भी बनी है.

इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने इमरान ख़ान न्यूयॉर्क नहीं गए थे. उन्होंने वर्चुअली ने ही इसे संबोधित किया. कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान भी जाते तो उनसे बाइडन नहीं मिलते.

तुर्की और पाकिस्तान दोनों दोस्त हैं, लेकिन दोनों के संबंध बाइडन प्रशासन में अमेरिका से हाशिए पर चले गए हैं.

पाकिस्तान

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तुर्की को तवज्जो नहीं

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और अमेरिका के बाइडन प्रशासन के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका पहले से ही थी और अब ऐसा ही होता दिख रहा है.

बुधवार को राष्ट्रपति अर्दोआन ने स्पष्ट कर दिया कि वो रूस के साथ सैन्य और कारोबार साझेदारी बढ़ाएंगे. अर्दोआन बुधवार को रूस पहुँचे हैं. रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ राष्ट्रपति अर्दोआन की ब्लैक सी रिसॉर्ट सिटी सोची में तीन घंटों तक बैठक हुई है.

इस बैठक में अर्दोआन ने हथियार सौदा, व्यापार और तुर्की में न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने को लेकर बात की है.

तुर्की-रूस ऊर्जा और हथियार सौदे में दोस्त रहे हैं और मध्य-पूर्व की कई लड़ाइयों में दुश्मन रहे हैं. सीरिया और लीबिया में दोनों देश एक-दूसरे के विरोध में रहे हैं जबकि नागोर्नो-काराबाख़ में रूस और तुर्की के सैनिक शांति सेना के तौर पर काम कर रहे हैं.

तुर्की रूस

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रूस का इस्तेमाल

कहा जाता है कि अर्दोआन रूस को अमेरिका के साथ संबंधों में तोल-मोल करने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका से कुछ सौदा करना होता है तो अर्दोआन पुतिन से दूरी बना लेते हैं और अगर सौदा नहीं होता है तो पुतिन से क़रीबी बना लेते हैं.

पिछले हफ़्ते न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अर्दोआन ने कहा था कि नेटो के तहत तुर्की का पश्चिम से सैन्य सहयोग रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम ख़रीदने से प्रभावित नहीं होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि रूस ने S-400 मिसाइल सिस्टम नेटो के एयरक्राफ्ट को मार गिराने के लिए बनाया था.

अर्दोआन ने कहा कि है कि तुर्की अपना हथियार अपने हिसाब से ख़रीदेगा. अर्दोआन ने कहा कि नेटो सेक्रेटरी जेंस स्टोल्टेनबर्ग और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि तुर्की को हथियारों के आपूर्तिकर्ता चुनने का अधिकार है.

टर्किश राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अमेरिका ने पैट्रीयट डिफ़ेंस मिसाइल सिस्टम दे दिया होता तो तुर्की को S-400 मिसाइल ख़रीदने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

अर्दोआन ने कहा कि अब तुर्की अपने हिसाब से हथियार ख़रीदेगा. अर्दोआन ने कहा कि रूस के साथ मिसाइल सौदे से अमेरिका के साथ संबंधों में टकराव आना अपेक्षित था. अर्दोआन ने कहा कि तुर्की अपनी सुरक्षा अपने हिसाब से मज़बूत कर सकता है.

अर्दोआन ने कहा कि तुर्की और अमेरिका की दोस्ती अब भी अहम है. तुर्की का अमेरिका से संबंध पुराना है और मज़बूत बना रहेगा.

रूस के साथ तुर्की के S-400 सौदे को लेकर अमेरिका हमेशा से सख़्त रहा है. 2019 में इसी वजह से अमेरिका ने F-35 लड़ाकू विमान का सौदा तुर्की से रद्द कर दिया था. इसके अलावा ट्रैवल और आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिया था.

इसके बाद भी अर्दोआन रूस से सेकंड बैच के S-400 ख़रीदने को लेकर प्रतिबद्ध दिख रहे हैं. पुतिन के बारे में कहा जा रहा है कि वो तुर्की के ज़रिए नेटो और ईयू के एजेंडे को कमज़ोर करना चाहते हैं.

अमेरिका और तुर्की

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बाइडन हुए सख़्त

अर्दोआन हमेशा से कहते रहे हैं कि रूस के साथ संबंध एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में ज़रूरी है. तुर्की ये भी कह रहा है कि अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में दबाव नहीं डाल सकता है. रूस तुर्की में पहला न्यूक्लियर पावर स्टेशन बना रहा है और ब्लैक सी से तुर्की के लिए एक गैस पाइप लाइन भी खोली है.

रूस के दौरे पर गए अर्दोआन ने कहा, ''हमारा कारोबारी रिश्ता उठापटक के बावजूद अच्छा है. हमें लगता है कि इसे और अच्छा किया जा सकता है. मैं रूस को पर्यटन के मामले में समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त करता हूँ. हमलोग इस बात से ख़ुश हैं कि हमारे रूसी दोस्त पर्यटन में तुर्की को चुन रहे हैं.''

अक्कुयु न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर अर्दोआन ने कहा, ''हमें भरोसा है कि पहली यूनिट अगले साल खुल जाएगी. इसे लेकर कोशिशें ज़ोर-शोर से जारी हैं. इसमें 13 हज़ार लोग काम कर रहे हैं. 10 हज़ार तुर्क हैं और तीन हज़ार रूसी. हालाँकि सबकी ट्रेनिंग रूस में ही हुई है. यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर है.''

पुतिन ने तुर्की के साथ हुई ऊर्जा डील की तारीफ़ की और कहा कि यूरोप में गैस की बढ़ती क़ीमत से तुर्की बच गया. पुतिन ने कहा, ''जब हम देख रहे हैं कि यूरोप के गैस मार्केट में अस्थिरता है तो तुर्की हमसे ऊर्जा समझौता कर ख़ुद को आश्वस्त पा रहा होगा.''

हालांकि वैश्विक मार्केट में प्राकृतिक गैस की क़ीमतें बढ़ रही हैं और यह केवल यूरोप की बात नहीं है. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि रूस तुर्की को गैस के मामले में कैसी मदद पहुँचाने जा रहा है. अर्दोआन गैस आपूर्ति को लेकर परेशान हैं और वे चाहते हैं कि इस मामले में किसी भी तरह से राहत मिले.

अर्दोआन और पुतिन के बीच बैठक तब हुई है जब रूस और सीरिया की ओर से संकेत मिले हैं कि दोनों इदलिब में तुर्की समर्थित विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने जा रहे हैं. सीरिया का यह आख़िरी क्षेत्र है जो विद्रोहियों के नियंत्रण में है.

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लीबिया और तुर्की ने सैकड़ों सैनिकों की तैनाती की है. बुधवार को हुई बैठक में अर्दोआन ने ये भी कहा कि सीरिया में शांति की स्थापना एक अहम मुद्दा है और वे चाहते हैं कि इदलिब को लेकर कोई तात्कालिक समाधान निकालने के बजाय स्थायी समाधान के बारे में सोचा जाए.

इदलिब का जो हिस्सा विद्रोहियों के नियंत्रण में है, वहाँ 40 लाख लोग रहते हैं और अर्दोआन को लगता है कि सैन्य कार्रवाई हुई तो बड़ी संख्या में शरणार्थी तुर्की की ओर आएंगे. तुर्की में पहले से ही 40 लाख शरणार्थी हैं और इनमें से ज़्यादातर सीरियाई हैं. इतनी बड़ी संख्या में शरणार्थियों को रखने की नीति तुर्की में तेज़ी से अलोकप्रिय हो रही है.

2015 में तुर्की ने सीरिया के साथ लगी दक्षिणी सीमा पर रूसी प्लेन मारकर गिरा दिया था. उसके बाद से अर्दोआन पुतिन के साथ संबंधों को लेकर काफ़ी सतर्क रहे हैं. नेटो और अमेरिका के सहयोगी होने के बावजूद

अर्दोआन पुतिन से कई बार मिल चुके हैं. कहा जा रहा है कि अर्दोआन रूस से और S-400 मिसाइल सिस्टम ख़रीदने की योजना पर काम कर रहे हैं और यह बाइडन प्रशासन के लिए परेशान करने वाला है.

टर्किश राष्ट्रपति नेटो को असहज करने से बाज नहीं आएंगे और पुतिन के लिए यह मौक़ा होगा कि नेटो को कमज़ोर किया जाए.

तुर्की

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मॉस्को यूनिवर्सिटी में टर्किश-रूसी संबंध के प्रोफ़ेसर करीम हस ने एक ब्लॉग लिखा है और उसमें कहा है कि अर्दोआन तब रूस आए हैं जब वो कमज़ोर स्थिति में हैं. करीम हस ने लिखा है, ''अर्दोआन न केवल इदलिब में रूसी कार्रवाई को लेकर परेशान हैं बल्कि गैस की बढ़ती क़ीमत के कारण रूस से एक बढ़िया समझौता भी करना चाहते हैं. संभव है कि अर्दोआन रूस से S-400 ख़रीद लेंगे ताकि वे अपना चेहरा बचा सकें. अर्दोआन रूस से वापस ख़ाली हाथ गए हैं. मेरा मानना है कि अर्दोआन जो सोचकर आए थे, वो मिला नहीं.''

अर्दोआन चाहते हैं कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ रिश्ते पटरी पर आएं. हाल ही में अर्दोआन ने बाइडन के साथ रिश्तों में ठंडेपनकी बात कही थी. अर्दोआन ने कहा था, ''पिछले 19 सालों से मैं तुर्की का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति हूँ. अभी वो स्थिति है कि तुर्की और अमेरिका के संबंध ठीक नहीं हैं. हमने बुश जूनियर, ओबामा और ट्रंप के साथ काम किया लेकिन मैं ये नहीं कह सकता कि बाइडन के साथ अच्छी शुरुआत हुई है.''

(कॉपी - रजनीश कुमार)

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