अर्दोआन की इस विवादित योजना से क्यों डरे हुए हैं तुर्की के लोग

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने पर्यावरण और आर्थिक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं के बावजूद 'कनाल इस्तांबुल परियोजना' की ओर अपना पहला क़दम उठाया है.
इस नहर के प्रस्तावित रूट पर बने एक पुल का उद्घाटन करते हुए शनिवार को अर्दोआन ने कहा, "आज हम तुर्की के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहे हैं. हम इस नहर परियोजना को इस्तांबुल के भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं. हम मानते हैं कि ये नहर इस्तांबुलवासियों के जीवन की रक्षा करने के लिए ज़रूरी है."
अपनी इस 'ड्रीम परियोजना' के बारे में अर्दोआन ने कहा कि बोस्पोरुस जलडमरुमध्य और इस्तांबुल को बचाने के लिए कनाल इस्तांबुल का निर्माण करना ज़रूरी है.
उन्होंने कहा कि "ये किसी फ़व्वारे का उद्घाटन समारोह नहीं है, बल्कि सदी की सबसे बड़ी नहर परियोजना की शुरुआत है."
अर्दोआन ने बताया कि इस परियोजना को पूरा करने में (नहर के निर्माण में) क़रीब 15 अरब डॉलर का ख़र्च आयेगा, जिसे लेकर बीते समय में अर्दोआन के आलोचक कई तरह के सवाल खड़े कर चुके हैं.
हालांकि, अर्दोआन ने बताया कि इस नहर को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत बनाया जायेगा जिसके बाद इस्तांबुल एक ऐसा शहर बन जायेगा जिसकी सीमा से दो विशाल नहरें गुज़रा करेंगी. तुर्की की सरकार के अनुसार, नहर के निर्माण का काम छह सालों में पूरा किया जाना है.
बताया गया है कि ये नई नहर 45 किलोमीटर लंबी, 275 मीटर चौड़ी और क़रीब 21 मीटर गहरी होगी और इसके ज़रिए रोज़ाना कम से कम 160 जहाज़ सफ़र कर सकेंगे.

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समंदर में बढ़ते ट्रैफ़िक की दलील
शनिवार के कार्यक्रम में तुर्की के पूर्व सांसद और परिवहन मामलों के विशेषज्ञ मुस्तफ़ा इलीकली ने कहा कि 2005 से लेकर अब तक, बोस्पोरुस जलडमरुमध्य में जहाज़ों का ट्रैफ़िक 72 प्रतिशत बढ़ा है. रोज़ इसमें टैंकर टकराते हैं, उनसे तेल समंदर में गिरता है और भारी उत्सर्जन होता है.
उन्होंने नई नहर की उपयोगिता बताते हुए कहा कि 1930 में बोस्पोरुस से हर साल क़रीब तीन हज़ार जहाज़ गुज़रा करते थे, जिनकी संख्या अब 45 हज़ार हो गई है. उन्होंने दावा किया कि साल 2050 तक यह संख्या क़रीब 78 हज़ार प्रति वर्ष हो जायेगी जिससे ना सिर्फ़ बोस्पोरुस पर, बल्कि इस्तांबुल पर भी ख़तरा बढ़ेगा.
उद्घाटन समारोह में अर्दोआन ने अपने निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि "दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक - बोस्पोरुस को इस नई नहर के बनने से काफ़ी राहत मिलेगी और यह बोस्पोरुस के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को बचाने के लिए भी ज़रूरी है."

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जहाज़ों से भरे रहने वाला बोस्पोरुस स्ट्रेट (जलडमरुमध्य) काला सागर को मरमरा सागर से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है. मरमरा सागर के ज़रिए काला सागर और भूमध्यसागर एक दूसरे से जुड़ते हैं.
लेकिन अर्दोआन की इस परियोजना के आलोचकों की संख्या भी कम नहीं है. इसके विरोध में खड़े लोगों का कहना है कि अर्दोआन जिस परियोजना के लिए अड़े हुए हैं, उससे इस्तांबुल को भारी पर्यावरणीय नुक़सान होगा और भूकंप जैसी किसी परिस्थिति में भारी तबाही की संभावना भी बढ़ेगी.
कुछ लोगों का यह भी सवाल है कि अर्दोआन आख़िर इस परियोजना के लिए इतनी बड़ी रक़म कहाँ से लाने वाले हैं. इनका कहना है कि अर्दोआन के इस सपने को पूरा करने के लिए तुर्की को भारी क़र्ज़ चुकाना पड़ सकता है.

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जब सेवानिवृत्त अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया
इसी साल, अप्रैल में तुर्की के दस सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारियों ने अर्दोआन की इस परियोजना की खुलकर आलोचना की थी जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और सभी पर देश की सुरक्षा और संवैधानिक प्रक्रिया के ख़िलाफ़ काम करने का आरोप लगाया गया.
इस घटना से एक महीने पहले ही तुर्की की सरकार ने बोस्पोरुस का विकल्प देने वाली इस परियोजना को मंज़ूरी दी थी.
इस परियोजना का विरोध करने वाले सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारियों की दलील थी कि इस नई नहर परियोजना को मंज़ूरी देना, साल 1936 में हुए मॉत्रो समझौते का उल्लंघन होगा जिसके ज़रिए तुर्की को अपनी सीमा के भीतर बोस्पोरुस स्ट्रेट पर नियंत्रण मिला था. इस समझौते के ज़रिए यहाँ से गुज़रने वाले व्यावसायिक और नौसेनिक जहाज़ों के लिए भी सीमा तय की गई थी.
इन अधिकारियों ने लिखा था कि "सरकार को किसी भी ऐसी गतिविधि या हरक़त से बचना चाहिए जिससे इस समझौते पर फिर से बातचीत शुरू हो सकती है. यही देश के हित में होगा."

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नहर को लेकर कई अन्य चिंताएं
हाल ही में तुर्की के चैंबर ऑफ़ अर्बन प्लानर्स के उपाध्यक्ष पिनार गिरितलिओग्लू ने कहा था कि इस नई नहर के बनने से काला सागर और मरमरा सागर का पानी मिल जायेगा. इससे पर्यावरणीय नुक़सान होंगे.
तुर्की के कुछ किसान संगठनों का भी कहना है कि इस परियोजना से बहुत सारे गाँव बर्बाद हो जायेंगे.
कुछ किसानों ने मीडिया चैनल अल-जज़ीरा से बातचीत में कहा कि जहाँ नई नहर बननी है, हम वहाँ खेती करते हैं, हम खेती से जुड़े नये प्रयोग कर रहे हैं, अपने काम धंधे जमा चुके हैं, लेकिन अब हमें आगे बढ़ने से रोका जा रहा है. हमारे पास इसके बाद सिर्फ़ यही काम बचेगा कि हम नहर के दोनों तरफ बनने जा रहे सैकड़ों मकानों के बाहर चौकीदार की नौकरी करें.
मध्य-पूर्व के नामी विश्लेषकों में से एक, सैमुअल रमानी को इसमें अलग ही ख़तरा नज़र आता है. वो मानते हैं कि बोस्पोरुस स्ट्रेट में ट्रैफ़िक बढ़ना एक गंभीर विषय है, लेकिन उनका कहना है कि "पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के साथ-साथ हमें भू-राजनीतिक चिंताओं को भी ध्यान में रखना होगा क्योंकि ऐसी कई रिपोर्टें हैं जिनमें दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए तुर्की को चीन से काफ़ी पैसा मिलने वाला है."
वे कहते हैं, "बोस्पोरुस स्ट्रेट में भीड़ कम करने की दलील, एक वाजिब दलील है. लेकिन एक बड़ा प्रश्न ये भी है कि अगर ये परियोजना मुख्यत: चीन द्वारा वित्तपोषित है, तो क्या इसका तुर्की की संप्रभुता पर कोई ख़तरा नहीं होगा?"

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'15 नहीं, 65 अरब डॉलर होंगे ख़र्च'
द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि तुर्की की सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस परियोजना का ख़र्च 15 अरब डॉलर बताया है. लेकिन फ़्रांस में हुई कुछ बड़े डिवेलपर्स की एक बैठक में अंदाज़ा लगाया गया कि इसमें कम से कम 65 अरब डॉलर का ख़र्च आयेगा.
तुर्की के कुछ विश्लेषकों का कहना है कि "इस परियोजना के ख़िलाफ़ जैसे-जैसे आवाज़ उठती गई, राष्ट्रपति अर्दोआन में इसे शुरू करने की सनक भी बढ़ी. वे इसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं सुनना चाहते."
वॉशिंगटन स्थित मिडिल-ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक स्कॉलर के अनुसार, तुर्की को इस परियोजना को पूरा करने में छह नहीं, बल्कि लगभग बीस साल लगेंगे और जिस तरह की परिस्थितियाँ दिखाई देती हैं, उन्हें देखते हुए अर्दोआन के लिए इस परियोजना के लिए पैसे जुटाना काफ़ी मुश्किल होगा.

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'परियोजना की सोचकर मुझे नींद नहीं आती'
अर्दोआन ने साल 2011 में पहली बार इस परियोजना का ज़िक्र किया था. तब उन्होंने कहा था कि "जल्द ही एक नई नहर इस्तांबुल के दिल को छूकर निकलेगी."
लेकिन इस्तांबुल में विपक्षी पार्टी के मेयर एक्रेम इमामोग्लू ने हाल ही में प्रेस से कहा कि "जब मैं इस परियोजना के बारे में सोचने लगता हूँ, तो मुझे रात में नींद नहीं आती. मुझे इसे लेकर बहुत बुरे सपने आते हैं. आख़िर कितना पैसा और कितना सीमेंट इस परियोजना में लगा दिया जायेगा. मुझे नहीं लगता कि ये लोग आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोच रहे हैं."
तुर्की के वैज्ञानिक समुदाय का एक बड़ा हिस्सा मेयर इमामोग्लू की बात से इत्तेफ़ाक रखता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नई नहर ना केवल इस्तांबुल, बल्कि पूरे मरमरा क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र और समाज पर भारी और अपरिवर्तनीय प्रतिकूल प्रभाव पैदा करेगी. दोनों क्षेत्रों (काला सागर और मरमरा सागर) के पानी के मिलने से मिट्टी और भूजल के लवणीकरण और संदूषण का भी ख़तरा बढ़ेगा है क्योंकि ये नहर काला सागर से खारे पानी को मरमरा सागर तक ले जाएगी.
कुछ वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि ये नहर इस्तांबुल को भूकंप और विकट मौसमीय घटनाओं जैसे सूखे और बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील बना देगी.
उनके अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर दो अलग-अलग समुद्रों को जोड़ने वाली परियोजना को कभी भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता.
इसके अलावा स्थानीय लोगों में विस्थापन की चिंता, इस वक़्त एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.
(कॉपी: प्रशांत चाहल)
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