नीट परीक्षा विवाद: झज्जर के उस एग्ज़ाम सेंटर में क्या-क्या हुआ था जहां छह छात्रों को मिले पूरे नंबर

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- Author, उमंग पोद्दार और सत सिंह
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
एक परीक्षा, 23 लाख छात्र और सैकड़ों सवाल.
चार जून के बाद से लोकसभा चुनाव के नतीजों के अलावा जो चीज़ सबसे ज़्यादा चर्चा में रही, वो हैं नीट परीक्षा के परिणाम.
कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के दावों और 67 छात्रों के टॉप रैंक हासिल करने के बाद उपजे विवाद को शांत करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कई स्पष्टीकरण दिए हैं.
नीट परीक्षा के नतीजों से जुड़ी कई याचिकाओं पर फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

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14 जून को एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट-यूजी 2024 में 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे और अब वो उन्हें रद्द कर रहा है.
एनटीए ने यह भी कहा कि ग्रेस मार्क्स पाने वाले छात्रों के लिए वह फिर से परीक्षा का आयोजन कर रहा है, वहीं ग्रेस मार्क्स वाले छात्र, ग्रेस में मिले नंबर छोड़कर परीक्षा फिर से न देने का विकल्प भी चुन सकते हैं.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नीट काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. अब इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 8 जुलाई को होनी है.
इस साल सबसे ज़्यादा विवाद नीट परीक्षा में 67 छात्रों को लेकर हुआ, जिन्होंने परीक्षा में 720 में से 720 नंबर हासिल किए थे. इन 67 छात्रों में छह छात्रों ने नीट परीक्षा हरियाणा में झज्जर के हरदयाल पब्लिक स्कूल में दी थी.
इतना ही नहीं इसी सेंटर से दो बच्चे ऐसे भी हैं जिन्हें 718 और 719 नंबर मिले हैं. जानकारों का दावा है कि परीक्षा में 718 या 719 नंबर नहीं मिल सकते हैं.
ग्रेस मार्क्स पाने वाले छात्रों ने क्या कहा?

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बीबीसी ने झज्जर पहुंचकर इन छात्रों और उनके परिवारों से बात करने की कोशिश की. इस बातचीत में एक बात यह है कि वे सभी निराश हैं और आगे क्या होगा, इसे लेकर डरे हुए हैं.
इस विषय में वो आम जनता भी ख़ुद को शामिल कर रही है जिसका इस परीक्षा से कुछ लेना देना नहीं है.
हरदयाल पब्लिक स्कूल के पास एक दुकानदार ने बीबीसी को बताया, “हां, मैंने सुना है कि एक मेडिकल परीक्षा हुई थी और वहां लोग कह रहे थे कि पेपर लीक हो गया है, क्योंकि बहुत सारे बच्चों ने टॉप कर लिया है.”
छात्रों ने बीबीसी को बताया कि परीक्षा की शुरुआत ही बहुत कंफ्यूज़न के साथ हुई, क्योंकि उन्हें एक की बजाय पेपर के दो सेट दिए गए.
उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें परीक्षा लिखने में मुश्किल आई और उनके शुरुआती 20 मिनट बर्बाद हो गए.

यश कटारिया, झज्जर के गुढ़ा गांव के रहने वाले हैं. इस साल नीट परीक्षा में उन्होंने 718 अंक हासिल किए हैं. उन्होंने भी यह परीक्षा हरदयाल पब्लिक स्कूल में बैठकर दी थी.
उन्होंने बताया, “जब पेपर शुरू हुआ तो हमें दो सेट मिले. तब टीचर ने कहा कि अभी परीक्षा मत लिखो, मैं पूछ कर बताती हूं कि कौन सा सेट करना है. इसमें 20-25 मिनट लग गए.”
वे कहते हैं, “ओवर ऑल इंडिया में Q, R, S, T सेट थे लेकिन हमारे सेंटर में M, N, O, P सेट दिए गए. दोनों सेट्स के सवाल बिलकुल अलग थे.”
यश को शुरुआत में 718 नंबर मिले थे, लेकिन जब एनटीए ने ग्रेस मार्क्स हटाए तो उनके नंबर घटकर 640 हो गए. यानी उन्हें ग्रेस मार्क्स के तौर पर 78 नंबर दिए गए थे.
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता था कि ग्रेस मार्क्स मिलेंगे.”

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इस तरह की मुश्किल का सामना रितेश अहलावत नाम के एक और छात्र को करना पड़ा. उन्होंने बताया, “समय ख़राब होने की वजह से मैं 15 सवालों के जवाब नहीं दे पाया.”
उन्होंने बताया कि उन्हें ग्रेस मार्क्स के तौर पर 100 नंबर दिए गए थे.
परीक्षा तैयार करने वाले लोगों का कहना है कि पेपर के दो सेट तैयार किए गए थे, जिसमें से एक सेट इमरजेंसी के लिए था, लेकिन हरियाणा के दो सेंटर्स में जहां क़रीब एक हज़ार छात्र परीक्षा देने आए थे, वहां कॉर्डिनेशन की कमी के चलते इमरजेंसी वाला पेपर सेट बच्चों को दे दिया गया.
हरदयाल पब्लिक स्कूल के अलावा एक दूसरा नाम विजय स्कूल का है. इस सेंटर पर परीक्षा देने वालीं दीक्षा बरवाल का कहना है, “हमें 25 मिनट देरी से पेपर मिला. अगर समय से मिलता तो मेरा एग्ज़ाम अच्छा जाता.”
विजय स्कूल के प्रिंसिपल ने बच्चों को पेपर पूरा करने के लिए अतिरिक्त 30 मिनट का समय दिया. यही वजह है कि विजय स्कूल में परीक्षा देने वाले छात्रों को ग्रेस मार्क्स नहीं मिल पाए.
लेकिन छात्रों का कहना है ये ग़लत है क्योंकि उन्होंने हमें शुरू में नहीं बताया था कि वे हमें अतिरिक्त समय देंगे.
दीक्षा कहती हैं कि कन्फ्यूज़न के चलते वे अच्छे से परीक्षा नहीं दे पाईं और फिर से नीट की परीक्षा करवाने की मांग करती हैं.
किसकी ग़लती?

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विजय स्कूल की प्रिंसिपल रूपाक्षी नारंग कहती हैं कि उन्हें ठीक से निर्देश नहीं दिए गए थे, जिसकी वजह से कन्फ्यूज़न पैदा हुआ.
वे कहती हैं, “शहर के कोऑर्डिनेटर हमें प्रश्न पत्र दिलाने के लिए दो बैंकों में ले गए, जिसकी वजह से कन्फ्यूज़न की स्थिति पैदा हुई.”
बीबीसी ने नीट परीक्षा के लिए झज्जर शहर के कोऑर्डिनेटर वीएन झा से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया.
जब छात्रों ने परीक्षा का आयोजन करवाने वाली एजेंसी एनटीए से उन नंबरों के बारे में पूछा जो गणितीय रूप से संभव नहीं थे तो एनटीए ने ग्रेस मार्क्स का हवाला दिया.
एनटीए ने कहा कि उसने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट के 2018 में दिए एक फ़ैसले का इस्तेमाल कर 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए हैं. लेकिन जल्द ही एनटीए पर भी सवाल उठने लगे.
करियर 360 के संस्थापक और अध्यक्ष महेश्वर पेरी ने कहा, “कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट एक ऑनलाइन परीक्षा है. आपको ठीक-ठीक पता होता है कि परीक्षा कितने बजे शुरू हुई है, लेकिन नीट परीक्षा में देरी का पता करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया गया.”
हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट की परीक्षा देते हैं. इन विवादों के बाद लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, क्योंकि फ़िलहाल ये साफ़ नहीं है कि इस परीक्षा के साथ आगे क्या होगा?
एक और परीक्षा रद्द

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नीट की तरह यूजीसी-नेट की परीक्षा का आयोजन भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करती है.
देशभर की यूनिवर्सिटीज़ में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पद के लिए इस साल करीब दस लाख बच्चों ने यह परीक्षा दी थी, लेकिन अगले ही दिन इसे रद्द कर दिया गया.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “डार्क नेट पर यूजीसी-नेट परीक्षा का प्रश्न पत्र, यूजीसी-नेट के मूल प्रश्न पत्र से मेल खाता है, जिसकी वजह से हमने परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है.”
हालांकि एनटीए का कहना है कि मेडिकल छात्रों के लिए ली गई नीट परीक्षा उसने ठीक से आयोजित की थी, लेकिन छात्र और विपक्षी नेता पुलिस जांच की तरफ उंगली उठाते हुए इसे फिर से करवाने की मांग कर रहे हैं.
एनटीए ने 1563 छात्रों के लिए 23 जून को फिर से परीक्षा रखी है, क्योंकि उन्हें परीक्षा लिखने के लिए कम समय मिला था. सवाल है क्या इससे समस्या का समाधान हो गया है?
पेपर लीक और नक़ल

पिछले कई सालों की तुलना में इस बार नीट की परीक्षा में छात्रों ने ज़्यादा नंबर हासिल किए हैं.
करियर 360 के संस्थापक और अध्यक्ष महेश्वर पेरी कहते हैं, “2023 में 600 अंक हासिल करने वाले छात्र की रैंक 26 हज़ार के क़रीब थी, लेकिन इस बार इतने ही नंबरों पाने वाले छात्रों को क़रीब 80 हज़ार रैंक मिलेगी. इस बार जो स्कोर आया है, वह पहले कभी नहीं देखा गया. ऐसा क्यों हुआ, इसका कोई ठीक-ठीक जवाब भी नहीं है.”
इसके अलावा कई ऐसे घटनाक्रम हैं जो नीट की परीक्षा पर संदेह पैदा करते हैं.
बिहार में जिस दिन नीट की परीक्षा हुई, उसी दिन एक पुलिस अधिकारी ने अपनी तरफ़ से एक एफ़आईआर दर्ज की.
एफ़आईआर में कहा गया है कि उन्हें जानकारी मिली है कि नीट परीक्षा का पेपर एक संगठित गिरोह की मिली-भगत से लीक हो गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस मामले में पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से चार लोगों ने पुलिस के सामने यह कबूल किया है कि परीक्षा से पहले पेपर लीक हो गया था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एक छात्र ने अपने कबूलनामे में कहा कि उसे परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्न पत्र दिया गया था और सभी उत्तर रटने के लिए कहा गया था.
हालांकि बीबीसी इन मीडिया रिपोर्ट्स की पुष्टि नहीं कर पाया है.
गुजरात में गोधरा के पुलिस अधीक्षक हिमांशु सोलंकी का कहना है कि बिहार के अलावा गुजरात पुलिस को गोधरा में नीट परीक्षा में हुई धोखाधड़ी की शिकायतें मिली हैं.
उनके मुताबिक़ छात्रों से कहा गया कि उन्हीं सवालों के जवाब दें, जो उन्हें आते हैं, इसके बाद परीक्षा केंद्र में कोई दूसरा व्यक्ति आकर बचे हुए सवालों को पूरा कर देगा, ताकि उन्हें अच्छे नंबर मिल पाएं.
सोलंकी के मुताबिक़, इस मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और जांच अभी जारी है.
एनटीए ने मानी ग़लती

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सवालों में घिरी एनटीए ने एक ग़लती मानी है. उसका कहना है कि छात्रों को ग्रेस मार्क्स ठीक से नहीं दिए गए थे.
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ़ से पेश वकील ने कहा कि एनटीए ने छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क्स को वापस लेने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने कहा कि जिस तरीके़ से ग्रेस मार्क्स दिए उससे मुश्किल स्थिति पैदा हुई और उसके परिणाम भी अच्छे नहीं रहे, क्योंकि समिति ने ग्रेस मार्क्स को परीक्षा में छोड़ दिए सवालों तक ही सीमित नहीं रखा.
यही कारण है कि वह ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 छात्रों के लिए फिर से परीक्षा आयोजित करेगी.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे रैंक में आई बड़ी तब्दीली का समाधान नहीं हो सकता है.
उनका कहना है, “हर बार जब हम 1563 छात्रों के बारे में बात करते हैं तो हम नीट परीक्षा में जो कुछ हुआ उससे मुंह मोड़ रहे होते हैं. इस बार ऐसे 54 हज़ार छात्र हैं जो एक ही सीढ़ी पर खड़े हैं.”
अधर में छात्रों का भविष्य

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नीट परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ने न सिर्फ़ छात्रों बल्कि उनके परिवारों पर भी बहुत असर डाला है. जो छात्र फिर से यह परीक्षा दे रहे हैं, वे भी इससे ख़ुश नहीं हैं.
झज्जर के रहने वाले यश कटारिया कहते हैं, “नीट की फिर से परीक्षा के लिए काफी कम समय दिया है. 9 दिन का समय दिया है, उतने में सिलेबस को फिर से रिवाइज़ करना मुश्किल है. नीट की परीक्षा पूरे देश में फिर से होनी चाहिए.”
फिर से नीट की परीक्षा देने जा रहे रितेश अहलावत का कहना है, “अभी डटे हुए हैं कि डॉक्टर बनना है, अगर इस साल एग्जाम अच्छे से नहीं हुआ तो फिर दूसरे विकल्प देखेंगे.”
यश कटारिया के पिता ओम प्रकाश कटारिया कहते हैं, “मैं तो पेपर दिलवाने वाले लोगों के साथ सरकार की ग़लती मानता हूं. बच्चों के साथ खिलवाड़ हो रहा है. सभी बच्चों के लिए यह परीक्षा फिर से होनी चाहिए.”

रितेश अहलावत जब कोटा में तैयारी कर रहे थे, तब पिता अनिल अहलावत दो महीने के लिए उनके पास चले गए थे.
वे कहते हैं, “अपने बच्चे का हौसला बढ़ाने के लिए मैं उसके पास चला गया था, लेकिन यह एग्ज़ाम हम सब पर भारी पड़ा है. बच्चे मानसिक पीड़ा से अभी गुज़र रहे हैं. माता-पिता के साथ-साथ बच्चे भी प्रेशर में हैं. सुबह उठने से लेकर सोने तक ये देखते रहते हैं कि नीट को लेकर कोई नया फैसला तो नहीं आ गया. दिनभर न्यूज़ और यू-ट्यूब से चिपके रहते हैं.”
इसके लिए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया है, लेकिन एनटीए का कहना है कि उसने शिकायतों की सुनवाई के लिए एक समिति बनाई थी, जिसने ग्रेस मार्क्स दिए हैं.
हालांकि जिन छात्रों को ग्रेस मार्क्स नहीं मिले हैं, वे भी चाहते हैं कि यह नीट की परीक्षा दोबारा से हो.
दीक्षा के पिता बसंत सिंह कहते हैं, “घर में शोर होता था तो मैंने उसे पढ़ने के लिए घर के पास एक पीजी में शिफ्ट कर दिया था. लेकिन जो नीट में अभी हो रहा है उससे न सिर्फ बच्चों का बल्कि माता-पिता का भी दिल टूटता है. हम चाह रहे हैं कि नीट की परीक्षा फिर से हो.”
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी

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अब विशेषज्ञ परीक्षा आयोजित करवाने वाली एनटीए की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है.
नीट और यूजीसी-नेट परीक्षा के अलावा एनटीए कई और परीक्षाएं भी करवाती है, जिसमें आईआईटी के जेईई और कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट भी शामिल है.
एनटीए के बनने से पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नीट की परीक्षा करवाता था.
2004 से 2010 तक एनसीईआरटी के डायरेक्टर रहे कृष्ण कुमार का कहना है, “एनटीए के पास कोई स्थायी कर्मचारी नहीं है. हर छह-आठ महीने में लोग बदलते रहते हैं.”
उन्होंने कहा, “पूरे सिस्टम में अराजकता फैली हुई है. आप असल में किसी एक व्यक्ति के नाम पर हाथ नहीं रख सकते कि यह व्यक्ति ज़िम्मेदार है.”
एक्सपर्ट महेश्वर पेरी कहते हैं, “एनटीए में पारदर्शिता और खुलेपन की कमी है. जब भी कोई उनसे कुछ पूछता है, तभी वे जवाब लेकर आते हैं. इसे देखकर ऐसा लगता है कि वे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. इससे एनटीए की विश्वसनीयता को झटका लगा है.”
वे कहते हैं, “यह कहना वैसा ही है कि जैसे कोई हत्या नहीं हुई है क्योंकि हत्या में इस्तेमाल हथियार आपको नहीं मिला है.”
आगे क्या?

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सुप्रीम कोर्ट अब सभी याचिकाओं पर 8 जुलाई को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा है कि भले नीट की काउंसलिंग प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को शुरू हो जाए, लेकिन उसे अगर पता चला कि परीक्षा ठीक से नहीं हुई है तो कोर्ट को उसे पलटने का अधिकार है.
कृष्ण कुमार का कहना है, “मुझे पूरा यकीन है कि नीट की परीक्षा फिर से होगी. यह इस तरह से नहीं चल सकता.”
इस बीच सरकार ने एक और कमेटी का गठन कर दिया है.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है, “सरकार एक उच्च स्तरीय समिति बना रही है. समिति एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता, डेटा और सुरक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए सिफारिशें देगी.”
उन्होंने कहा, “नीट प्रकरण में जो दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी.
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