नीट परीक्षा फिर से कराए जाने की मांग क्यों कर रहे हैं कुछ छात्र? इस पर क्या विवाद है?

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- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आप भले ही 'नेशनल इलिजिबिलिटी कम इंट्रेस टेस्ट' यानी नीट परीक्षा के टॉपर स्टूडेंट्स में शामिल हों लेकिन हो सकता है कि आप को देश के टॉप मेडिकल कॉलेज एम्स में दाखिला न मिल पाए.
आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों है? क्योंकि नीट परीक्षा में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 67 हैं जिन्होंने फर्स्ट रैंक हासिल किया है.
ये एक अभूतपूर्व स्थिति है. चार जून, 2024 को नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद ऐसे कई दावे सामने आए हैं कि इस परीक्षा का आयोजन ठीक तरह से नहीं हुआ है.
नीट वो परीक्षा है जिसमें डॉक्टरी की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी शामिल होते हैं. इसके स्कोर के आधार पर उन्हें मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है.
टॉप रैंक पर आने वाले 67 बच्चों में छह ऐसे हैं जिन्होंने हरियाणा के एक ही परीक्षा केंद्र पर इम्तेहान दिया था.
कुछ बच्चों को ऐसे प्राप्तांक भी मिले हैं जो परीक्षा की मार्किंग स्कीम के लिहाज गणितीय दृष्टि से मुमकिन नहीं थे.
इन दावों को खारिज करते हुए इस नीट का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा में किसी तरह की धांधली या प्रश्न पत्र लीक होने से संबंधित आरोपों से इनकार किया है.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि सिर्फ़ उन्हीं विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्क्स दिए गए हैं जिन्हें प्रश्न पत्र समय पर नहीं मिला था.
हालांकि इस बार के नीट में शामिल होने वाले कई विद्यार्थी परीक्षा फिर से आयोजित कराए जाने की मांग कर रहे हैं.
देश की कई अदालतों में इसे लेकर मुक़दमे भी दायर किए गए हैं.


नीट परीक्षा पर विवाद
इस बार नीट परीक्षा का आयोजन पांच मई को कराया गया था. नीट परीक्षा में शामिल होने के लिए 24 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था.
इनमें 23.33 लाख बच्चे परीक्षा में शामिल हुए. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, परीक्षा के परिणाम 14 जून को घोषित होने थे.
हालांकि रिज़ल्ट दस दिन पहले यानी चार जून को घोषित कर दिए गए.
नीट परीक्षा की प्रक्रिया पर नज़र रखने वाले जानकारों के अनुसार, गड़बड़ी के अंदेशे का पहला संकेत इसी बात से मिल गया था.
इसके अलावा कोचिंग इंस्टीट्यूट्स और विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा को लेकर कई गंभीर चिंताएं सामने रखी हैं.
परीक्षा परिणाम के अनुसार, 67 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने सौ फ़ीसदी स्कोर किया है यानी 720 नंबर की परीक्षा में उन्होंने पूरे के पूरे 720 नंबर हासिल किए हैं.
ऐसा पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पूरे सौ फ़ीसदी नंबर हासिल किए हैं.
साल 2023 में ये उपलब्धि केवल दो ही छात्रों ने हासिल की थी.
साल 2022 में किसी भी छात्र ने पूरे नंबर हासिल नहीं किए थे. उस साल भी नीट का कुल पूर्णांक 720 था और परीक्षा में टॉप करने वाले बच्चों को 715 नंबर आए थे.
इस बार की नीट परीक्षा में जिस बात की ओर सबका ध्यान गया है, वो ये है कि 67 टॉपर स्टूडेंट्स में से 6 बच्चों का परीक्षा केंद्र हरियाणा के झज्जर ज़िले का एक सेंटर था.
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी संभावना सामान्य रूप से बहुत कम है.
परीक्षा की प्रक्रिया और परिणाम को लेकर संदेह जताने वाले लोग जिस तीसरी बात की ओर ध्यान दिला रहे हैं, वो ये है कि कुछ छात्रों को 720 नंबर की परीक्षा में 718 और 719 नंबर आए हैं, जो परीक्षी की स्कीम के लिहाज से गणितीय रूप से मुमकिन नहीं है.
क्योंकि इस परीक्षा में किसी प्रश्न के सही उत्तर पर चार अंक निर्धारित थे और ग़लत जवाब होने की सूरत में एक अंक काट लिए जाने का प्रावधान किया गया था.
इसलिए अगर किसी छात्र ने सभी सवालों के सही जवाब दिए और उससे एक जवाब ग़लत हो गया तो मार्किंग के नियम के अनुसार, वो 715 नंबर हासिल करेगा.
पेपर लीक के भी आरोप सामने आ रहे हैं. इस सिलसिले में बिहार में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है और 13 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस केस की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है.
नीट परीक्षा में जिस पैमाने पर बच्चों को अच्छे नंबर आए हैं, उससे क्वॉलिफाइंग स्कोर काफी बढ़ गया है.
पिछले तीन सालों में नीट परीक्षा का क्वॉलिफ़ाइंग स्कोर 130 था जबकि इस साल ये बढ़कर 164 हो गया है.
एनटीए ने क्या जवाब दिया है?

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छह जून को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर, इन तमाम आरोपों से इनकार किया है.
एनटीए ने अपने जवाब में कहा है कि जल्द से जल्द परिणाम घोषित करना एक तय प्रक्रिया है. इस बार एनटीए ये काम 30 दिनों के भीतर कर पाई है.
एनटीए का कहना है कि उसने 1563 परीक्षार्थियों को ग्रेस मार्क्स दिए हैं क्योंकि उन्हें परीक्षा के लिए कम वक़्त मिला था. कुछ परीक्षार्थियों ने अदालत में याचिका डालकर कहा था कि परीक्षा केंद्र पर वे वक़्त से अपनी परीक्षा शुरू नहीं कर सके.एनटीए ने कहा कि सेंटर की सीसीटीवी फ़ुटेज देखकर और अधिकारियों से बातचीत करने के बाद इन परीक्षार्थियों को ग्रेस मार्क्स दिए गए. एजेंसी ने कहा कि इसके लिए वही फॉर्मूला अपनाया गया जो सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के लिए सुझाया था.
यही कारण है कि कुछ छात्रों को 718 जैसे नंबर मिले. इसके अलावा एजेंसी ने कहा है कि 720 अंक पाने वाले छह छात्र ऐसे हैं जिन्हें ग्रेस मार्क्स मिले हैं. इसके अलावा 44 अन्य छात्र जिन्होंने 720 मार्क्स (शत-प्रतिशत अंक) पाए, उन्हें फ़िजिक्स के एक प्रश्न के उत्तर के लिए रिविज़न मार्क्स दिए गए हैं.
एनटीए ने इस बात से भी इनकार किया कि परीक्षा का पेपर लीक हुआ है. इसके अलावा एजेंसी ने कहा है कि 'परीक्षा की शुचिता से समझौता नहीं किया गया है.'
परीक्षा के बारे में अन्य शिकायतों पर एजेंसी ने कहा है कि वो तय प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई कर रही है.
छात्रों और अन्य लोगों का क्या कहना है?

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पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर छात्रों और कोचिंग सेंटरों ने बहुत सारी शिकायतें की हैं.
शिक्षा के क्षेत्र से जुडी़ वेबसाइट 'करियर्स360' के संस्थापक महेश्वर पेरी ने बीबीसी को बताया, "पूरे मामले में कुछ गंभीर गड़बड़ियां हैं."
उन्होंने कहा कि "भारत में कई प्रवेश परीक्षाएं होती हैं. आम तौर पर कुछ परीक्षार्थी ऐसे होते हैं जो बढ़िया अंक प्राप्त करते हैं. लेकिन ये बहुत बड़ा अपवाद है, हम एक या दो नहीं बल्कि 67 लोगों की बात कर रहे हैं."
उनका यह भी मानना था कि ग्रेस मार्क्स देने का काम 'गैर-पारदर्शी' तरीके से किया गया है.
उन्होंने कहा कि पहले जब उत्तरों की कुंजी, परिणाम से पहले प्रकाशित की जाती थी, तब केवल एनटीए या अन्य परीक्षा संस्था ही स्पष्ट करती थी कि क्या वे प्रश्न में किसी समस्या के कारण अतिरिक्त अंक दे रहे हैं या नहीं.
उन्होंने कहा, "इस मामले में जब उनसे पूछा गया तभी उन्होंने स्पष्टीकरण दिया."
जब परिणाम घोषित किए गए, तो कई लोगों ने सवाल उठाया कि आख़िर किसी को 718 जैसे नंबर कैसे मिल सकते हैं. तभी एनटीए ने एक ट्वीट में स्पष्ट किया कि ग्रेस मार्क्स दिए गए थे.
कट ऑफ़ भी बढ़ा

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कोचिंग इंस्टीट्यूट 'फ़िज़िक्सवाला' के संस्थापक अलख पांडे ने कहा है कि वे ख़ुद एक छात्र की उत्तर पुस्तिका जांच चुके हैं. और उन्होंने पाया कि छात्र को एनटीए ने 85 अतिरिक्त नंबर दिए हैं. बीबीसी अलख पांडे के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर नहीं कर सकता है.
इतने अधिक लोगों को ज़्यादा अंक मिलने से कट-ऑफ़ बहुत अधिक हो गया है.
मोशन एजुकेशन नाम के इंस्टीट्यूट को चलाने वाले नितीन विजय ने एक्स पर लिखा, "इस बार एक ही जैसे कट-ऑफ़ वाले छात्रों की संख्या तीन गुना हो गई है. ये असंभव है. इस बार का पेपर पिछले वर्ष की तुलना में आसान तो नहीं था. चीटींग हुई है. हमें अपनी आवाज़ उठानी चाहिए."
इस विवाद का असर छात्रों पर भी पड़ा है.
दिल्ली की आद्विका ने भी इस साल नीट की परीक्षा दी थी. आद्विका कहती हैं, "सब लोगों का इस परीक्षा पर से भरोसा उठ गया है. मैंने 600 अंक स्कोर किए हैं. मुझे उम्मीद थी कि इतने स्कोर में मेरी रैंकिग 30 हज़ार के आस-पास रहेगी. लेकिन मुझे 80 हज़ार का रैंक मिला है और ये कट-ऑफ़ से कहीं नीचे है."
आद्विका कहती हैं कि अगर कोई दूसरा वर्ष होता तो उन्हें किसी कॉलेज में दाख़िला मिल जाता है लेकिन इस साल ये मुमकिन नहीं है.
तय समय पर पेपर नहीं होने पर दिए गए ग्रेस मार्क्स की पद्धति पर भी सवाल उठे हैं.
महेश्वर पेरी कहते हैं, "आप पेपर एक घंटा देरी से शुरू करवाने पर मुझे इसलिए 100 अंक देते हैं क्योंकि सही वक्त पर पेपर मिलता तो मैं ये अंक हासिल कर सकता था. लेकिन अतिरिक्त समय में मैं उनमें से कई प्रश्नों के गलत उत्तर दे सकता था."
परीक्षा फिर से कराए जाने की मांग

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कई छात्रों ने मांग की है कि ये परीक्षा दोबारा होनी चाहिए.
आद्विका कहती हैं, "मैं चाहती हूँ कि परीक्षा दोबारा हो. जब टॉप करने वाले आठ छात्र एक ही सेंटर से हों तो कुछ न कुछ गड़बड़ लगना लाज़िमी है."
परीक्षा को दोबारा करवाए जाने की मांग करने वाली दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की गई हैं.
17 मई को अदालत ने ऐसी ही एक याचिका के तहत नोटिस जारी किया था लेकिन अदालत ने कहा था कि इसकी सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद की जाएगी.
उस याचिका में कहा गया था कि पेपर लीक होने के कारण कई मेधावी छात्रों को बराबरी का अवसर नहीं मिला है.
याचिका में मांग की गई थी कि हर राज्य में पेपर लीक की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाना चाहिए.
ये मुद्दा सियासी पार्टियां भी उठा चुकी हैं. सात जून को कांग्रेस ने एक प्रेस वार्ता कर मांग की थी कि नीट की परीक्षा में अनियमितताओं की जांच की जानी चाहिए.


















