नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पर क्यों है हंगामा?

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तमिलनाडु में छात्रा अनिता की आत्महत्या ने मेडिकल कॉलेजों में नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के आधार पर प्रवेश को लेकर मामला गरमा दिया है.

मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए नीट को वापस लेने की मांग की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में अनीता ने लड़ी थी. ऐसे में अनिता की आत्महत्या के बाद तमिलनाडु में कई राजनीतिक पार्टियों ने धरना प्रदर्शन किया.

मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके समेत दलित पार्टी विदुथालाई चिरुथैगल काच्चि (वीसीके), मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और अन्य पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन किए. विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी और केंद्र सरकार की निंदा की.

क्या है मामला?

तमिलनाडु स्टेट बोर्ड से बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 अंक के साथ 98 फीसदी नंबर पाने के बावजूद अनिता को नीट में कम नंबर मिले. नीट परीक्षा में अनीता को केवल 86 नंबर मिले.

कम अंकों की वजह से उसका मेडिकल में चयन नहीं हुआ, जिसके कारण अनिता ने आत्महत्या कर ली. दिहाड़ी मजदूर की बेटी अनिता अरियलुर जिले की रहने वाली थीं.

इस बार सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को नीट के तहत परीक्षा और काउंसलिंग करने का आदेश दिया था. ऐसे में उसे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका.

अनिता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की. उसने मेडिकल कॉलेजों में नीट प्रवेश परीक्षा बंद कराने की अर्जी डाली जिसमें उसने कहा कि इस परीक्षा से मेडिकल सीट पाने की संभावना को लेकर ग्रामीण इलाकों के गरीब छात्र-छात्राओं पर असर पड़ेगा.

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तमिलनाडु को पिछले साल मिली थी छूट

तमिलनाडु में इससे पहले 12वीं के नतीजे के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिला करते थे.

तमिलनाडु को नीट परीक्षा से पिछले साल छूट मिल गई थी. हालांकि तमिलनाडु सरकार ने इस साल अध्यादेश लाकर नीट से बाहर होने की कोशिश की थी लेकिन कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

मद्रास हाई कोर्ट ने जुलाई में तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसके तहत सरकार ने मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में तमिलनाडु राज्य बोर्ड के छात्रों को 85 फीसदी आरक्षण देने का आदेश दिया था.

राज्य सरकार ने नीट परीक्षा पास करने वाले तमिलनाडु राज्य बोर्ड के छात्रों को अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल/डेंटल सीटों में 85 फीसदी आरक्षण देने का आदेश दिया था, जिसके बाद अन्य बोर्ड के छात्रों के लिए केवल 15 फीसदी सीटें बचीं. अदालत ने आरक्षण के इस आदेश को भेदभावपूर्ण व भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ करार दिया था.

क्या है नीट?

नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट नीट-यूजी छात्रों की वो प्रवेश परीक्षा है जिसे सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा की स्नातक की पढ़ाई के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाता है.

इसकी परीक्षा दो चरणों में होती है.

इससे पहले देश में ऑल इंडिया प्री मेडिकल एंट्रेस टेस्ट (एआईपीएमटी) होता था. एआईपीएमटी में कुछ समय से लगातार हो रही घपलेबाजी को देखते हुए मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया की अपील पर केंद्र ने इसके स्वरूप में बदलाव किया. इसके साथ ही नीट की बुनियाद रखी गई. 2013 में नीट आया. इसमें ये तय हुआ कि पूरे देश में एक ही मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा होगी.

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बदले नियम से भी परेशानी

नीट सीबीएसई ने परीक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए उम्र की सीमा के साथ ही प्रयासों की संख्या तय कर दी है. नए नियमों के मुताबिक, अब केवल 17 से 25 साल तक के छात्र ही नीट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं.

अनुसूचित जाति और जनजाति को उम्र में पांच साल की छूट दी गई है. 180 सवालों की यह परीक्षा 700 अंकों की होती है और इसमें निगेटिव मार्किंग भी की जाती है.

साथ ही छात्रों के इस परीक्षा में बैठने के अटेंप्ट को भी तीन कर दिया गया. यानी जो छात्र पहले दो बार ये परीक्षा दे चुके हैं उनके लिए भी इस बार आयोजित परीक्षा अंतिम अटेंप्ट थी. इस बार तो समूचे देश में विरोध हो रहा है.

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