JEE-NEET परीक्षा की तारीख़ आगे क्यों नहीं बढ़ा सकती मोदी सरकार

परीक्षा

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में इन दिनों आईआईटी और नीट की परीक्षा कराए जाने की ख़ूब चर्चा है. क्या राजनेता, क्या शिक्षाविद, क्या बुद्धिजीवी और क्या सामाजिक कार्यकर्ता, सब अपनी-अपनी राय दे रहे हैं और पक्ष-विपक्ष में उनके अपने-अपने तर्क हैं.

कई छात्र अपनी मांग पर क़ायम हैं और सरकार भी अपनी ज़िद पर अड़ी है. जेईई की परीक्षा शुरू होने में बस चार दिन बाक़ी हैं.

छात्र परीक्षा देने से इनकार तो नहीं कर रहे, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से सितंबर में परीक्षा नहीं चाहते. कोरोना की वजह से कई राज्यों में छात्रों के पास परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं है. 

कई इलाक़ों में बाढ़ की समस्या है, ऐसे में कई छात्र और उनके परिवार को लगता है कि ये सही वक़्त नहीं है कि परीक्षा अभी कराई जाए. परीक्षा की तारीख़ पहले भी दो बार टाली जा चुकी है. 

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अब आईआईटी की परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच प्रस्तावित है. नीट की परीक्षा की तारीख़ 13 सितंबर है. देशभर में तकरीबन 23 लाख छात्रों ने इन परीक्षाओं के लिए आवेदन भरा है. 

इस तारीख़ को टालने के लिए छात्र एक बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं, जिसमें सरकार ने अपनी राय नहीं बदली और कोर्ट ने अपना फ़ैसला सरकार के पक्ष में सुनाया. 

बुधवार को 7 राज्यों की सरकारों ने साथ में फिर से सुप्रीम कोर्ट जा कर रिव्यू पीटिशन डालने का मन बनाया है. बहुत मुमकिन है कि मामला दोबारा कोर्ट पहुँच भी जाए.

इसके अलावा भी कुछ दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार से इन परीक्षाओं को कोरोना और बाढ़ की स्थिति सुधरने के बाद कराने का सुझाव दिया है, जिसमें दिल्ली और ओडीशा जैसे राज्य शामिल हैं. 

दूसरी तरफ़ शिक्षा जगत से जुड़े देश के अलग-अलग हिस्सों से 100 शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ख़त लिख कर जेईई-नीट की परीक्षा सितंबर में कराने की माँग की है.

लेकिन परीक्षा की तारीख़ नहीं टालने के पीछे सरकार की अपनी दलील भी है. 

शिक्षाविद् ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ख़त

सत्र में फेरबदल का असर अगले साल भी रहेगा

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आम तौर पर जेईई का सेशन अगस्त से शुरू होता है. लेकिन इस बार कोरोना की वजह से ऐसी नहीं हो पाया.

आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर वी रामुगोपाल राव ने फ़ेसबुक पोस्ट लिख कर जेईई परीक्षा बाद में कराने की परेशानियों के बारे में विस्तार से बताया है. जेईई एडवांस का एग्ज़ाम इस बार आईआईटी दिल्ली को ही को-ऑर्डिनेट करना है. इसलिए उनकी राय अहमियत रखती है.

उनके मुताबिक़ सितंबर में परीक्षा कराने के बाद, जेईई एडवांस की परीक्षा होगी, उसके बाद भी रिजल्ट आने और काउंसिलिंग की प्रक्रिया में डेढ़ से दो महीने का वक़्त और लगेगा.

ऐसे में इस साल का सत्र नवंबर के पहले किसी भी सूरत में शुरू नहीं हो सकता. यानी तीन महीने की देरी पहले ही हो चुकी है.

अगर इन परीक्षाओं की तारीख़ सितंबर से आगे बढ़ाई गई तो 2021 के पहले सत्र शुरू करना मुमकिन नहीं हो पाएगा. जेईई मेन्स की परीक्षा वैसे भी साल में कई बार होती है. जो छात्र इस बार नहीं दे सकते वो छह महीने बाद परीक्षा दोबारा दे सकते हैं.

ऐसे में सत्र भी ख़राब नहीं होगा और जिन छात्रों की तैयारी पूरी है वो एग्ज़ाम में बैठ सकते हैं, उनका साल भी बर्बाद नहीं होगा. 

लेकिन अगर तारीख़ सितंबर से आगे बढ़ती है, तो पूरे सेमिस्टर का पैटर्न ही बदल जाएगा. इसका असर केवल इस साल के छात्रों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि आने वाले सत्र के छात्र भी प्रभावित होंगे.

इसलिए सरकार की कोशिश है कि इस साल नवंबर में सत्र शुरू करने की. उसके बाद छुट्टियाँ कम कर के और सिलेबस छोटा करके 2021 अगस्त तक दो सेमेस्टर पूरे कर लिए जाएँ, ताकि अगले साल होने वाली जेईई और नीट की परीक्षा समय पर करवाई जा सके. 

और यही तर्क नीट के छात्रों के लिए भी लागू होता है.

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एनटीए को तैयारी के लिए वक़्त 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) वो संस्था है, जो आईआईटी और नीट परीक्षा करवाती है. उनका तर्क है कि परीक्षा करवाने के लिए भी तैयारी करने में वक़्त लगता है. 

नीट ही वो संस्था है, जिसे देश में यूजीसी नेट, CMAT, GPAT और कई दूसरी परीक्षाएँ कराने का ज़िम्मा दिया गया है. एनटीए के पास अपना एक तय एकेडमिक कैलेंडर होता है, जिसमें हर महीने कोई ना कोई परीक्षा की तैयारी और ज़िम्मेदारी होती ही है.

अगर आईआईटी और नीट की परीक्षा की ही बात करें, तो पेपर सेट करने से लेकर, परीक्षा सेंटर तय करने में, पेपर सेंटर तक पहुँचाने में, एडमिट कार्ड प्रीटिंग से लेकर पेपर लीक ना हो जाएँ, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से तालमेल बैठाने में वक़्त लगता है. 

पूरी प्रक्रिया में तकरीबन 80 से 90 दिन का वक़्त लगता है. 

अगर इस बार दोबारा से इन परीक्षाओं की तारीख़ आगे बढ़ाई गई, तो उनके पिछले 90 दिन की मेहनत बर्बाद हो जाएगी और दूसरी परीक्षा करवाने पर भी इसका असर होगा.

वीडियो कैप्शन, कोरोना के बीच परीक्षा देने पर क्या बोले छात्र?

त्यौहारों का समय

केंद्र सरकार का तर्क ये भी है कि सितंबर के बाद भारत में त्यौहारों का सीज़न शुरू हो जाएगा. दशहरा, दिवाली, छठ, भैया दूज, क्रिसमस. ये बात खु़द शिक्षा सचिव अमित खरे ने कही.

ऐसे में सितंबर के बाद नवंबर 26 तक परीक्षा दोबारा कराने के लिए पूर्वोत्तर भारत में शिक्षकों का मिलना भी मुश्किल होगा.

परीक्षा सेंटर के चयन में भी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है. बिहार जैसे राज्य में चुनाव की तैयारी के लिए शिक्षकों की आवश्यता होती है और कुछ शिक्षण संस्थाओं को पोलिंग बूथ भी बनाया जाता है. 

इस समय कई संस्थानों में छुट्टियाँ होती है, शिक्षक छुट्टियों पर होते हैं. और छात्रों की बात सरकार मान लेती है तो ये पूरा सत्र 'ज़ीरो एकेडमिक ईयर' हो जाएगा. 

वैसे भी इन परीक्षाओं की तारीख़ अप्रैल और जुलाई में पहले भी बदली जा चुकी है.

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कुछ छात्र चाहते हैं परीक्षा सितंबर में हो 

ये परीक्षाएँ पहले अप्रैल में होनी थी. छात्रा इसके लिए साल भर पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं. यानी 2020 की परीक्षा की तैयारी छात्र 2019 से कर रहे होंगे. एक साल तक जो तैयारी कर ली है, उसको छह महीने और पढ़ना अपने आप में छात्रों पर अलग तरह का मानसिक दवाब डालता है.

ऐसे में तारीख़ एक बार और बढ़ाने पर कुछ छात्र दूसरे तरह के मेंटल स्ट्रेस से गुज़रते है. सरकार को इसकी भी चिंता है. 

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनके पास कई ऐसे छात्रों और अभिभावकों का प्रतिनिधि दल मिलने आया, जो परीक्षा आगे नहीं टालना चाहते.

केंद्र सरकार की ओर से ये भी तर्क़ दिया जा रहा है कि लाखों छात्रों ने आईआईटी और नीट की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए हैं. अपने इंटरव्यू में उन्होंने ऐसे छात्रों की संख्या लगभग 85 फ़ीसदी बताई है. सरकार एडमिट कार्ड डाउनलोड करने को छात्रों की रज़ामंदी के तौर पर देख रही है.

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दूसरी परीक्षा की तारीख़ पर भी असर

एक और बात है जिसका डर केंद्र सरकार को सता रहा है. लेकिन खुल कर इस बारे में कोई नहीं कह रहा. यूजीसी की ओर से ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की परीक्षा का मामला भी फ़िलहाल कोर्ट में है.

अगर किसी एक परीक्षा के लिए कोरोना का तर्क कोर्ट और सरकार स्वीकार कर लेती है, तो एक पैंडोरा बॉक्स खुल जाएगा. हर तरह से दूसरी परीक्षा को टालने के लिए माँग उठने लगेगी.

ऐसे में सरकार की चिंता ये भी है कि तीसरी बार इस परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ा कर सरकार एक अलग नज़ीर तो नहीं पेश करेगी कि सभी चीज़ें आगे के लिए टाल दी जा सकती हैं. 

'जान भी जहान भी' का नारा दे कर केंद्र सरकार ने फ़ैक्टरी, ऑफ़िस, मॉल, ट्रेन, हवाई यात्रा शुरू कर ही दिया है. संसद का सत्र बुलाने की तैयारी भी चल रही है.

ऐसे में सरकार की पूरी कोशिश है कि कोरोना काल में अलग तरह के एसओपी के साथ परीक्षाएँ कराई जाएँ और 80 से 90 फ़ीसदी छात्र भी इसे परीक्षा को देने में सफल होते हैं तो सरकार इसे अपनी सफलता करार दे सकती है. 

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