यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए पुतिन की शर्तें ख़ारिज़, शांति सम्मेलन में क्यों नहीं बनी बात?

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यूक्रेन युद्ध ख़त्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शर्तों को इटली और जर्मनी ने ख़ारिज़ कर दिया है.
स्विट्जरलैंड में यूक्रेन की ओर से आयोजित सम्मेलन में जुटे देशों ने व्यापक चर्चा के बाद पुतिन की शर्तों को नकार दिया गया.
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शांति योजना को प्रोपेगेंडा करार दिया है. वहीं जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स ने कहा कि ये एक 'तानाशाह की शांति’ है.
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्विट्जरलैंड में चल रहा यह शांति सम्मेलन अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सबसे बड़ी बैठक है.
इसमें 90 देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं. पुतिन ने इस सम्मेलन के शुरू होने के दो दिन पहले अपनी शर्तें रखी थीं.
पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए दो शर्तें रखी थीं.
पहली, यूक्रेन को दोनेत्स्क, लुहांस्क, खे़रसोन और ज़ापोरज़िया से अपने सैनिक हटाने होंगे. दूसरी, यूक्रेन नेटो में शामिल नहीं होगा.
स्विट्जरलैंड में यूक्रेन संकट खत्म करने के लिए आयोजित दो दिनों की बैठक में घोषणापत्र का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है.
घोषणापत्र में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और उसके ख़िलाफ़ किसी भी परमाणु धमकी को साफ तौर पर नामंजूर किया गया है.
इस घोषणापत्र को रविवार को औपचारिक तौर पर स्वीकार कर लिया जाएगा. इसमें ये भी कहा गया है कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए ब्लैक सी और अज़ोव सागर से होकर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को मंजूरी देना जरूरी है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के चीफ ऑफ स्टाफ एंद्रेई येरमाक ने स्विट्जरलैंड समिट के दौरान बीबीसी से कहा, "यूक्रेन की आज़ादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा.’’
इटली ने कहा, पुतिन की शर्तें कारगर नहीं

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इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी ने सम्मेलन में हो रही बातचीत पर कहा, ''पुतिन की शर्तें कारगर नहीं लगतीं क्योंकि इसमें यूक्रेन से ही कहा गया है कि वो अपनी जमीन से पीछे हट जाए.''
वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि पुतिन बातचीत की अपनी इच्छा के बारे में झूठी कहानी गढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो देश को रूस हथियारों से मदद कर रहे हैं वो गलत पाले में खड़े हैं और इतिहास उन्हें ऐसे ही दर्ज करेगा.
यूक्रेन स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में आयोजित इस सम्मेलन को अपनी सफलता के तौर पर पेश कर रहा है. सम्मेलन में जितने देश हिस्सा ले रहे हैं उससे उसका ये दावा मजबूत लग रहा है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस सम्मेलन के बारे में कहा कि उनका देश कूटनीति को एक मौका देना चाहता है और ये दिखाना चाहता है कि मिलजुल कर युद्ध को रोका जा सकता है.
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि हम यहां शिखर सम्मेलन में इतिहास बनते देखेंगे. जितनी जल्दी हो सके न्यायपूर्ण शांति स्थापित हो."
ज़ेलेंस्की के सहयोगी यरमैक ( यूक्रेन की राजनीति के प्रभावशाली शख़्स) ने सम्मेलन में चीन की गैर मौजूदगी को दरकिनार कर दिया.
उन्होंने कहा कि शांति वार्ता के लिए संयुक्त योजना तैयार हो जाने पर इसे रूस को भेजा जा सकता है.
सम्मेलन में रूस शामिल नहीं

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स्विट्जरलैंड में शांति सम्मेलन यूक्रेन की पहल पर हो रहा है. लेकिन इसमें रूस को नहीं बुलाया गया है. इसलिए इसमें यूक्रेन समस्या का कोई हल निकलने की संभावना काफी कम है.
हालांकि पुतिन यूक्रेन की शर्तों पर शांति के लिए तैयार नहीं है.
पुतिन जिन चार इलाकों से यूक्रेन को पीछे हटने के लिए कह रहे हैं उस पर रूस का आंशिक कब्जा है.
रूस का दावा है कि उसने 2022 में इन इलाकों को अपने में मिला लिया था. यूक्रेन में इस पर हुई वोटिंग को रूस ने ख़ारिज कर दिया था. पश्चिमी देशों ने तब इसे शर्मनाक कहा था.
यूरोपियन कमीशन की प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयन ने कहा, "यूक्रेन में विदेशी सेना मौजूद है. ऐसे में वहां संघर्ष कैसे खत्म हो सकता है. दरअसल पुतिन की शर्तें भविष्य की आक्रमण की रेसिपी है."
यूक्रेन ने पुतिन की शर्तों को आम समझ वाले व्यक्ति के लिए भी आपत्तिजनक करार दी हैं.
भारत का क्या रुख़ रहा

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इटली में जी-7 की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात की. इसके बाद ज़ेलेंस्की ने कहा था कि भारत स्विट्जरलैंड में शांति सम्मेलन में अपना प्रतिनिधि भेजेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद कहा था कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को समर्थन देता रहेगा.
भारतीय अंग्रेजी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़ भारत ने स्विट्जरलैंड में अपना प्रतिनिधि भेजा है. अख़बार के मुताबिक़ भारतीय विदेश मंत्रालय में पश्चिम के सचिव पवन कपूर बर्गेनस्टॉक पहुंचे हैं और सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं.
पश्चिमी देशों के यूक्रेन के लिए 50 अरब डॉलर के लोन का इंतजाम करने के बाद ये सम्मेलन हो रहा है. ये रकम जब्त रूसी संपत्तियों के एवज में हासिल ब्याज से जुटाई जाएगी.
ज़ेलेंस्की से मुलाकात में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनका देश रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण हल के लिए हर संभव मदद करेगा. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ मोदी और ज़ेलेंस्की की मुलाकात में स्विट्जरलैंड के शांति सम्मेलन के एजेंडे और यूक्रेन के हालात पर चर्चा हुई थी.
ज़ेलेंस्की ने इस दौरान ब्लैक सी में जहाजों की आवाजाही के संबंध में बात की थी. उन्होंने कहा था कि यहां आवागमन आसान होने पर यूक्रेन भारत को ज्यादा सूरजमुखी का तेल निर्यात कर सकेगा. इसके अलावा यूक्रेन से भारत को भेजी जाने वाली दूसरी सामग्रियों में भी इजाफा होगा.
इससे पहले ज़ेलेंस्की ने अपनी दस सूत्रीय शांति योजना लागू करने में भारत की मदद मांगी थी. इसमें यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को फिर से बहाल करने और उसे परमाणु , खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा देने की बात कही थी.
भारत ने भी यूक्रेन में मानवीय सहायता के काम को रफ़्तार देने के लिए एक 15 सदस्यीय दल भेजा है.
भारत रूस का रणनीतिक साझेदार है. भारत की रूसी हथियारों पर काफी निर्भरता है. युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बाद से ही भारत ने उससे बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया था.
चीन को लेकर सवाल

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शांति सम्मेलन में चीन हिस्सा नहीं ले रहा है. समझा जाता है कि वह अपने 10 सूत्री शांति समझौते का आगे बढ़ाना चाहता है.
चीन ने यूक्रेन में शांति की तो अपील की है लेकिन वह रूस का विरोध नहीं कर रहा है. चीन ने भी बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीदा है.
शांति सम्मेलन में हिस्सा ले रहे फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने शनिवार की शाम स्विट्जरलैंड में एक शिखर सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा कि चीन यूक्रेन में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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