यूक्रेन क्या अब रूस के भीतर हमले की तैयारी कर रहा है?

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- Author, अब्दुजलील अब्दुरुसलॉफ
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
यूक्रेन को अब रूस के भीतर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए पश्चिमी हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है.
इस फ़ैसले से क्या बदलाव आएगा और यूक्रेन के फ्रंटलाइन पर इसका क्या असर होगा?
अब तक पश्चिमी देशों ने अपने हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों तक ही सीमित रखा था. इसमें क्राइमिया और दूसरे क़ब्ज़े वाले इलाक़े भी शामिल थे.
ऐसी चिंताएं थीं कि अगर नेटो देशों के ज़रिए मुहैया कराए गए हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमा पार के ठिकाने पर किया जाता है तो इससे संघर्ष और बढ़ जाएगा.
लेकिन हाल ही में जिस तरह से यूक्रेन के खारकीएव इलाक़े में रूस ने बढ़त बनाई है, उसे देखते हुए यूक्रेन के सहयोगियों को ये लगा कि यूक्रेन को ख़ुद को बचाने के लिए रूसी सीमा के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम होना चाहिए.
पिछले महीने रूस ने इस क्षेत्र में एक बड़ा ज़मीनी हमला किया और एक नया मोर्चा खोल दिया. साथ ही कई गांवों पर क़ब्ज़ा कर लिया. रूस की इस बढ़त ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीएव के लिए गंभीर ख़तरा पैदा किया है, जो कि सीमा से महज़ 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
इस क्षेत्र में जो सीमा है, वो प्रभावी तौर पर फ्रंट लाइन है. यहाँ से बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है.
ऐसे में सीमा पार के लिए पश्चिमी हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की वजह से रूसी सैनिकों को सुरक्षित माहौल में ऑपरेशन के लिए तैयार होने में मदद मिली है.
अमेरिका ने अपनी नीति में किया है बदलाव

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अब यूक्रेन और दूसरे यूरोपीय देशों के बढ़ते दबाव की वजह से अमेरिका ने अपनी नीति में बदलाव किया है. अमेरिका ने कीएव को पश्चिमी हथियारों से रूस पर हमला करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.
शुक्रवार को प्राग में हुई नेटो देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, ''हमारे सहयोग की ख़ासियत ये रही है कि ज़रूरत के हिसाब से चीज़ों में बदलाव लाया जाए और व्यवस्थित किया जाए. ताकि युद्ध के मैदान में जो असल में चल रहा है, उसका सामना किया जा सके और ये सुनिश्चित किया जा सके कि यूक्रेन को जिस चीज़ की ज़रूरत हो वो उसे मिल सके.''
इस एलान से कुछ ही दिन पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ये धमकी दी थी कि अगर पश्चिमी देशों के लंबी दूसरी वाले हथियारों का इस्तेमाल रूसी इलाक़े में किया गया तो वो ''सैनिटरी ज़ोन'' का विस्तार करेंगे.
पुतिन ने कहा था कि नेटो देशों को याद रखना चाहिए कि उनके पास ''छोटे भूभाग और घनी आबादी वाले देश'' हैं. ''रूसी इलाक़े में अंदर तक हमला करने पर बातचीत से पहले उन्हें इस पहलू को ध्यान में रखना चाहिए.''
तनाव को बढ़ने से रोकने की वजह से ही शायद अमेरिका ने रूस पर हमला करने के लिए ATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम) जैसे लंबी दूरी के हथियारों की अनुमति नहीं दी. इन मिसाइलों की रेंज 300 किलोमीटर है और इनका इस्तेमाल रूसी क्षेत्र के सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों पर हमले के लिए किया जा सकता है.
हथियारों के इस्तेमाल की मंज़ूरी से रूसी अभियान पर क्या असर होगा

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ऐसे प्रतिबंधों की वजह से यूक्रेन के पास केवल अपनी सीमाओं के नज़दीक वाले ठिकानों पर ही हमले का विकल्प बचता है. लेकिन अब कीएव के मुख्य सहयोगियों ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है.
कम दूरी वाले यानी 70 किलोमीटर के हथियारों के इस्तेमाल से भी रूसी अभियान में बाधा पहुंचाई जा सकती है.
HIMARS जैसे रॉकेट लॉन्चर रूस के लॉजिस्टिक ऑपरेशन और सेनाओं की आवाजाही को बड़े स्तर पर बाधित कर सकते हैं, जो रूसी अभियान को धीमा कर देगा.
उत्तर-पूर्व में सैन्य अभियान का समन्वय करने वाले खारकीएव टैक्टिकल समूह के यूरी पोवख कहते हैं, ''अब यूक्रेन उन जगहों पर हमला कर सकता है, जहां दुश्मन ने अपने सैनिकों, उपकरणों और आपूर्ति भंडार को रखा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले के लिए किया जाता है.''
इस हफ़्ते की शुरुआत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा था कि रूस एक और हमले के लिए खारकीएव से महज़ 90 किलोमीटर दूर अपने सैनिकों को इकट्ठा कर रहा है.
इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ़ वॉर ने सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से ये पुष्टि की है कि रूस ने उस इलाक़े में डिपो और गोदामों में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं.
ऐसे में यूक्रेन अब इन ठिकानों को निशाना बना सकेगा और रूस के नए हमलों को कमज़ोर कर सकेगा.

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KAB से कैसे निपटेगा यूक्रेन?
हालांकि, पश्चिमी हथियारों पर प्रतिबंध हटाने से यूक्रेन को रूसी ग्लाइड बम से बचने में मदद नहीं मिल सकेगी. इन बमों को स्थानीय तौर पर KAB के नाम से जाना जाता है.
इन बमों का विनाशकारी प्रभाव होता है और इन्हें खारकीएव और दूसरी सीमावर्ती इलाक़ों में रूस इस्तेमाल करता है. ऐसे हमलों को रोकने के लिए यूक्रेन को उन विमानों को निशाना बनाना पड़ेगा जो KAB को गिराते हैं.
ऐसे विमानों को रोकने में सक्षम जो एकमात्र हथियार यूक्रेन के पास है वो अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पैट्रियट है.
हालांकि, इस हथियार को खारकीएव ले जाना एक बड़ा जोखिम है. जासूसी ड्रोन इसे तुरंत पहचान सकते हैं और इसके बाद रूस इस महंगे हथियार को नष्ट करने के लिए इस्कैंडर जैसा मिसाइल लॉन्च कर सकता है.
दिलचस्प बात ये है कि ब्रिटेन और फ्रांस ने यूक्रेन को जो संयुक्त तौर पर बनाई गइ स्टॉर्म शैडो एअर लॉन्च क्रूज़ मिसाइलें दी हैं, उनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं लगाया है. ये मिसाइल 250 किलोमीटर तक का निशाना साध सकती हैं.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पिछले हफ्ते पत्रकारों से बातचीत में कहा था, ''हमें यूक्रेन को उन जगहों को निशाना बनाने की अनुमति देनी चाहिए जहां से मिसाइलें दागी जाती हैं. आमतौर पर उन सैन्य ठिकाने को जहां से यूक्रेन पर हमला किया जाता है.''
इस तरह के बयान को स्टॉर्म शैडो के इस्तेमाल की अनुमति के तौर पर देखा जाता है.
एक मिलिट्री एविएशन ऑफिसर ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि यूक्रेन अब यूक्रेन की सीमा से लगे कुर्स्क और बेलगोरोड इलाक़ों में हवाई अड्डों पर हमला कर सकता है.
F-16 का इस्तेमाल युद्ध में कर सकेगा यूक्रेन?
हालांकि, ये ऑपरेशन सीमित तौर पर ही प्रभावी साबित होंगे. दरअसल, यूक्रेन का Su-24 जो इन क्रूज़ मिसाइलों को लॉन्च करेगा, उसे ऐसा करने के लिए रूसी सीमा के पास जाना होगा, ऐसे में वो रूसी एयर डिफेंस सिस्टम के निशाने पर आ सकता है.
इस साल के अंत तक F-16 यूक्रेन के बेड़े में शामिल हो सकता है, जो ऐसे काम के लिए बेहतर साबित होगा. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की मानते हैं कि ये अभी तक साफ़ नहीं है कि यूक्रेन के सहयोगी F-16 जेट को रूस में हमले के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देंगे या नहीं.
स्टॉकहोम में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में उन्होंने शुक्रवार को कहा, ''मुझे लगता है कि रूस की धरती पर किसी भी हथियार चाहे वो पश्चिमी देशों का ही हथियार हो, उसका इस्तेमाल समय आने पर तय होगा.''
रूस की सीमा के काफ़ी अंदर घुसकर हमले के लिए यूक्रेनी सेना अपने हथियार बनाने की कोशिश में है. यूक्रेन के कुछ ड्रोन ने रूसी डीपो और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों किलोमीटर अंदर जाकर हमला किया है.
ताज़ा हमले की बात करें तो यूक्रेन की सीमा से 1800 किलोमीटर की दूरी पर ओर्स्क शहर में एक रेडार स्टेशन पर हमला हुआ था.
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