यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस पर लगीं कितनी पाबंदियां, अर्थव्यवस्था पर कितना असर

मॉस्को का सेंट बेसिल कैथेड्रल
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यूक्रेन युद्ध के दो साल पूरे हो चुके हैं. दो साल पहले 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था. अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने रूस पर नई पाबंदियां लगाने की घोषणा की है.

रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की जेल में हुई मौत के एक हफ्ते बाद ही इन देशों ने ये पाबंदियां लगाई हैं.

इससे पहले भी रूस पर साढ़े 16 हजार से अधिक पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं. आइए देखते हैं कि ये पाबंदियां कितनी प्रभावी हैं और रूस की अर्थव्यवस्था इनसे कितनी प्रभावित हुई है.

पाबंदियां क्या हैं?

पाबंदिया किसी एक देश द्वारा किसी दूसरे देश पर लगाई गई रोक हैं ताकि उस देश को आक्रामक तरीके से काम करने या अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने से रोका जा सके.

यह दुनिया भर देशों की ओर से उठाए जाने वाले सबसे कठोर कदमों में से एक हैं.

रूसी पर लगी नई पाबंदियां क्या हैं?

रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी. फाइल फोटो
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 500 रूसी व्यवसायों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है. पाबंदियों की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वे रूस की युद्ध मशीनरी को निशाना बनाएंगे. करीब 100 फर्मों या व्यक्तियों पर निर्यात पाबंदी लगाई जाएगी. इसका मकसद रूस की हथियार बनाने की क्षमता को कमजोर करना है.

राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि इन पाबंदियों के दायरे में एलेक्सी नवेलनी की कैद में हुई मौत से जुड़े लोगों को भी लाया जाएगा.

वहीं ब्रिटेन ने जेल में बंद छह बॉसों की संपत्ति जब्त कर ली है. उनके ब्रिटेन की यात्रा करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

इसके अलावा ब्रिटेन ने रूसी धातुओं, हीरे और ऊर्जा निर्यात पर भी नई पाबंदियां लगाई हैं.

यूरोपीय संघ ने 200 संगठनों और लोगों पर पांबदी लगाने की घोषणा की है. संघ का कहना है कि ये लोग रूस को हथियार दिलाने या यूक्रेनी बच्चों को उनके घरों से ले जाने में उसकी मदद कर रहे हैं.

16,500 से अधिक पाबंदियां

व्लादिमीर पुतिन

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फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान जैसे देशों ने रूस पर 16,500 से अधिक पाबंदियां लगाई हैं.

इन पाबंदियों का मुख्य लक्ष्य रूस का पैसा रहा है.

करीब 350 अरब डॉलर मूल्य के रूसी विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया गया है. यह उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब आधा है.

यूरोपीय संघ का कहना है कि रूसी बैंकों की करीब 70 फीसदी संपत्ति भी जब्त की गई है. वहीं उसके कुछ बैंकों को वित्तीय संस्थानों की हाई-स्पीड मैसेजिंग सेवा 'स्विफ्ट' से बाहर कर दिया गया है.

पश्चिमी देशों ने ये पाबंदियां भी लगाई हैं

 चेल्सी एफसी के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच
इमेज कैप्शन, चेल्सी एफसी के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच उन लोगों में शामिल हैं जिन पर पाबंदी लगाई गई है
  • उन जानकारियों के निर्यात पर पांबदी लगा दी गई है, जिससे रूस हथियार बना सकता है.
  • रूस से सोने और हीरे के आयात पर पाबंदी लगा दी गई है.
  • रूस से आने वाली उड़ानों पर भी पाबंदी है.
  • क्रेमलिन से जुड़े धनी व्यवसायियों पर पाबंदी लगाकर उनके नौकाओं को जब्त कर लिया गया है.

रूस का तेल उद्योग इन पाबंदियों का एक और प्रमुख लक्ष्य रहा है.

अमेरिका और ब्रिटेन ने रूसी तेल और प्राकृतिक गैस पर पाबंदी लगा रखी है. वहीं यूरोपीय संघ ने समुद्री रास्ते से कच्चे तेल के आयात पर पाबंदी लगा दी है.

दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संगठन जी-7 ने रूस की आय कम करने की कोशिशों के तहत रूसी कच्चे तेल की अधिकतम कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल तय की है.

किन कंपनियों ने छोड़ा है रूस का साथ?

मैकडॉनल्ड, कोका-कोला, स्टारबक्स और हेनीकेन समेत सैकड़ों बड़ी कंपनियों ने रूस में सामान बेचना और उत्पादन करना बंद कर दिया है.

हालाँकि अभी भी कुछ कंपनियां रूस में कारोबार कर रही हैं, जैसे पेप्सिको पर रूस में अपने खाद्य उत्पाद बेचने का आरोप है. इस बीच बीबीसी को पता चला है कि सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एवन मॉस्को के पास एक कारखाने में सामान बना रही है.

पाबंदियों से कैसे बचा रूस?

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि यूरोपीय देशों की पाबंदियों से रूस को कोई नुकसान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, "हमारे पास विकास है और उनके पास गिरावट है."

अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के मुताबिक रूस विदेश में जी-7 की तय कीमत से अधिक कीमत पर तेल बेचने में सफल रहा है. थिंक टैंक के मुताबिक इस तेल को भेजने के लिए करीब 1,000 टैंकरों का उपयोग होता है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक रूस अभी भी रोजाना 8.3 मिलियन बैरल तेल का निर्यात कर रहा है. इससे भारत और चीन को होने वाली तेल की आपूर्ति बढ़ गई है.

लंदन के किंग्स कॉलेज के शोधकर्ताओं के मुताबिक रूस जॉर्जिया, बेलारूस और कजाकिस्तान जैसे देशों के जरिए उन सामान का आयात कर रहा है, जिन पर पश्चिमी देशों ने पाबंदी लगा रखी है.

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज एक अमेरिकी थिंक टैंक है. इसकी डॉक्टर मारिया स्नेगोवाया कहती हैं कि चीन पश्चिम के देशों के हाई टेक उत्पादों का विकल्प उपलब्ध कराने वाला एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है.

वो कहती हैं, "चीन उसके सैन्य उत्पादन को बनाए रखने के लिए जरूरी चिप्स और अन्य उपकरण बेचता है. चीन की मदद के बिना रूस ऐसा करने में सक्षम नहीं हो पाएगा."

साल 2023 में अमेरिका ने किर्गिस्तान जैसे देशों में कंपनियों पर पाबंदी लगानी शुरू की, जो रूस को पश्चिम के देशों में बनी तकनीक को फिर से निर्यात कर रही हैं.

पाबंदियों का रूसी अर्थव्यवस्था पर असर

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक युद्ध के पहले साल 2022 में रूस की अर्थव्यवस्था 2.1 फीसदी सिकुड़ी.

हालांकि आईएमएफ का अनुमान है कि 2023 में रूसी अर्थव्यवस्था 2.2 फीसदी बढ़ी. उसने 2024 में इसमें 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है.

हालांकि अमेरिकी वित्त विभाग का दावा है कि पाबंदियां रूस को नुकसान पहुंचा रही हैं. इसकी वजह से पिछले दो साल में उसके आर्थिक विकास में 5 फीसदी की कटौती हुई हो सकती है.

अमेरिकी वित्त विभाग का यह भी कहना है कि यूक्रेन युद्ध और पाबंदियों की वजह से 10 लाख से अधिक लोग रूस छोड़कर चले गए हैं. इनमें कई युवा और उच्च शिक्षित व्यक्ति शामिल हैं.

वहीं ब्रितानी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक रूस की सरकार ने यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण के लिए स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में भी कटौती की है.

लंदन स्थित विदेशी मामलों के थिंक टैंक 'चैटम हाउस' के जेम्स निक्सी कहते हैं कि इसका असर मुख्य रूप से ग्रामीण इलाके के लोगों पर पड़ा है. उनका कहना है कि रूस की सरकार ने बड़े शहरों को छोड़कर ग्रामीण इलाकों में कटौती की है, जो वहां विद्रोह का कारण बन सकते हैं.

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