एलेक्सी नवेलनी जो रूस में व्लादिमीर पुतिन की 'ताक़त के लिए ख़तरा' बन गए थे

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रूस में भ्रष्टाचार के विरोध में अभियान चलाने वाले एलेक्सी नवेलनी लंबे वक्त से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने विपक्ष का मुख्य चेहरा बने हुए थे.
47 साल के नवेलनी ब्लॉगर रहे थे. नर्व एजेंट के ज़हर को मात दे चुके एलेक्सी की 16 फरवरी को जेल में मौत हो गई. उन्हें तीन साल पहले गिरफ्तार किया गया था और लंबी क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.
जेल अधिकारियों का कहना है कि कुछ देर टहलने के बाद उन्होंने बताया, "उनकी तबीयत ठीक नहीं थी" और इसके तुरंत बाद "वो गिर गए और बेहोश हो गए."
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार नवेलनी की मौत के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है.
पुतिन के कट्टर विरोधी के रूप में पहचाने जाने वाले नवेलनी चुनाव मैदान में उनके ख़िलाफ़ बतौर उम्मीदवार भी उतरे थे लेकिन वो जीत नहीं सके. लेकिन कई रूसी नागरिक उनकी आवाज़ को विरोध की मज़बूत आवाज़ मानते थे और वो पुतिन के लिए भी ख़तरा बने हुए थे.
नवेलनी के संगठन (एंटी करप्शन फाउंडेशन) के अनुसार, उनके चलाए अभियानों ने रूस में लगभग सभी स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को दुनिया के सामने लाकर रखा था. उन्होंने कई बार सीधे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर निशाना साधा. जेल की सज़ा मिलने के बाद नवेलनी को रूस के बाहर भी पहचाना जाने लगा.
ज़हर और जेल

एलेक्सी नवेलनी के संगठन को रूस में "चरमपंथी" करार दिया गया था. इस पर रूस में प्रतिबंध है. अगस्त 2020 में उन्हें साइबेरिया में नोविचोक नर्व एजेंट नाम का ज़हर दिया गया था.
इस हमले में उनकी जान बाल-बाल बची थी. उनकी टीम उन्हें एयरलिफ़्ट करके जर्मनी के बर्लिन लेकर आई जहां उनका इलाज चला. उन्हें स्वास्थ्य लाभ करने में कई महीनों का वक्त लगा.
12 जनवरी, 2021 को वो वापस रूस आए तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. उनकी गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ उनके समर्थकों ने देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जिसे रूसी पुलिस बलों ने ताक़त का इस्तेमाल कर ख़त्म कर दिया.
इस दौरान अनाधिकारिक तौर पर रैलियों में शामिल होने के लिए हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया. संसदीय चुनाव लड़ने को लेकर उनपर पाबंदी लगा दी गई. न तो वो बतौर उम्मीदवार चुनाव में उतर सकते थे और न ही उनकी भ्रष्टाचार विरोधी टीम से किसी को उतारा जा सकता था.
लेकिन उन्होंने एक "स्मार्ट वोटिंग" मोबाइल ऐप बनाया जिसके ज़रिए उन्होंने वोटरों से अपील की कि वो उन नेताओं का समर्थन करें, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वो पुतिन की यूनाइटेड रशिया पार्टी को हरा सकते हैं. उनके इस कदम ने रूसी राष्ट्रपति के दफ्तर क्रेमलिन को नाराज़ किया.
लाखों तक पहुंचा भ्रष्टाचार विरोधी वीडियो

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नवेलनी बार-बार ये आरोप लगाते रहे थे कि राष्ट्रपति पुतिन की पार्टी "झूठों और चोरों" से भरी हुई है.
उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश में "सामन्ती व्यवस्था" चला रखी है जिसमें सारी ताकत राष्ट्रपति के हाथों है.
उन्होंने रूसी सरकार की तुलना ज़ार के शासन (रूसी सम्राटों के शासन) से की और पुतिन पर "रूसी नागरिकों का खून चूसने का आरोप लगाया था."
वो युवा रूसी नागरिकों की भाषा में बात करते थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ताकतवर हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया.
उनके संगठन, एंटी करप्शन फाउंडेशन (एफ़बीके) ने विस्तार के साथ सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार के दावे करते हुए वीडियो बनाए.

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जनवरी में एलेक्सी नवेलनी की गिरफ्तारी के बाद उनकी टीम ने "पुतिन का राजमहल" नाम से यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट किया.
इस वीडियो के केंद्र में था काले सागर के पास बना विराट लग्ज़री महल जिसे कथित तौर पर पुतिन के अरबपति साथियों ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया था.
इस वीडियो को अब तक 10 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है.
रूसी राष्ट्रपति के दफ्तर ने इसे "आधी अधूरी जांच" पर आधारित वीडियो बताते हुए खारिज किया है. वहीं पुतिन ने इन दावों को खारिज करते हुए वीडियो को "उबाऊ" बताया है.
बाद में अरबपति बिज़नेसमैन अर्काडी रोटेनबर्ग ने कहा कि ये उनका अपना महल है. रोटेनबर्ग को पुतिन का करीबी दोस्त माना जाता है.

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फरवरी, 2021 में नवेलनी को जेल की सज़ा सुनाई गई. इस केस में मानवाधिकार मामलों की यूरोपीय कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि उन्हें तुरंत आज़ाद किया जाना चाहिए क्योंकि उनकी जान को ख़तरा है. हालांकि रूस ने यूरोपीय कोर्ट के इस फ़ैसले को खारिज कर दिया.
नवेलनी ने मांग की कि उनका उचित इलाज कराया जाए लेकिन ऐसा न होने पर वो भूख हड़ताल पर बैठ गए.
उनका कहना था कि मॉस्को से 100 किलोमीटर दूर स्थित जेल में अधिकारी उन्हें पैर और पीठ में हो रही परेशानी के लिए उचित इलाज की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं.
लेकिन उनके कुछ बयानों के लिए मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उन्हें दिया "प्रिज़नर ऑफ़ कॉन्साइंस" का दर्जा फरवरी में वापस ले लिया. (राजनीतिक या धार्मिक विचारधारा के कारण जेल भेजे गए कैदी को प्रिज़नर ऑफ़ कॉन्साइंस कहा जाता है.)
हालांकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बाद में ये कहा कि नवेलनी को इस "सूची से हटाने" के लिए "जानबूझकर अभियान" चलाया गया था. हालांकि बाद में संगठन ने अपना फ़ैसला बदल दिया.
ये मामला विदेशी लोगों के ख़िलाफ़ ऐसी नफरती टिप्पणियों से जुड़ा था जो उन्होंने सालों पहले दिए थे, लेकिन उन्होंने इसे नकारा नहीं था.
साल 2007 के एक वीडियो में वो नस्लीय हिंसा की तुलना सड़े हुए दांतों से करते हैं, साथ ही उन्होंने अप्रवासियों की तुलना कॉकरोचों से की थी.
साल 2014 में यूक्रेन के क्राइमिया प्रायद्वीप पर रूस के कब्ज़े के बाद जिस वक्त अंतरराष्ट्रीय समुदाय रूस की आलोचना कर रहा था, नेवलनी ने कहा था, "ये हमेशा से रूस का हिस्सा रहा है."

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... जेल के दिन
लेकिन रूसी सरकार ने नवेलनी के अभियानों और उनके विरोध के लिए उन्हें सज़ा देना जारी रखा.
जून, 2022 में जिस वक्त नवेलनी जेल की सज़ा काट रह थे, उन्हें जेल की कोठरी से ग़ायब पाकर उनके साथियों ने आवाज़ उठाई थी.
बाद में जेल अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पीनल कॉलोनी में ट्रांसफर कर दिया गया है. उन्हें पीनल कॉलोनी की जेल नंबर आईके-3 में रखा गया था जो मॉस्को से पूर्व में क़रीब 250 किलोमीटर दूर है. यहां उन्हें एक बार फिर दूसरों से अलग एकांत में रखा गया.
रूस में स्टालिन के दौर के लेबर कैंम्पों को पीनल कॉलोनी कहा जाता है. रूस की अधिकतर पीनल कॉलोनियां साइबेरिया के इलाके़ में बनाई गई हैं. यहां कैदियों को बैरकों में बेहद मुश्किल हालात में रखा जाता है. यहां कैदियों की संख्या जेल की क्षमता से कहीं अधिक है और उन पर जेल के कड़े नियम लागू किए जाते हैं.
2021 में पीनल कॉलोनी की जेल से दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनका दिन का काम "जेल की साफ-सफाई होता है जिसके बाद उन्हें घंटों तक टीवी देखना होता है, जिसमें उन्हें सरकारी टेलिविज़न या प्रोपेगैंडा फ़िल्में देखनी होती हैं."
आख़िरी बार उन्हें अगस्त, 2023 में सज़ा सुनाई गई थी जिसके बाद उन्हें पहले से मिली सज़ा की अवधि बढ़कर 19 साल हो गई.
इसके बाद उन्हें हाई सिक्योरिटी पीनल कॉलोनी जेल में शिफ्ट कर दिया जिसे रूस की सबसे ख़तरनाक जेल माना जाता है.

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पुतिन के 'दुश्मन'
सोवियत संघ के जानेमाने नेता निकिता ख्रुश्चेव की परपोती प्रोफ़ेसर नीना ख्रुश्चेव और अंतरराष्ट्रीय मामलों के कई जानकारों ने उस वक्त बीबीसी को बताया था कि नवेलनी को मिल रही कठोर सज़ा अपने आप में इस बात का सूबूत था कि पुतिन और उनकी सत्ता, लोगों के बीच नवेलनी के अभियानों के असर से डरी हुए थी.
प्रोफ़ेसर नीना ख्रुश्चेव पुतिन की तुलना जानीमानी अंग्रेज़ी फ़िल्म 'हैरी पॉटर' से मशहूर हुए एक किरदार 'वोल्डेमॉर्ट' से करती हैं. 'वोल्डेमॉर्ट' के बारे में कहा जाता था कि 'वो जिसका कोई नाम नहीं होना चाहिए.'
उन्होंने कहा था, "पुतिन न तो खुद नाम लेते हैं और ही उनके दफ्तर में कोई उनका नाम ज़ुबान तक ला सकता है."
"नवेलनी पुतिन की निजी ताक़त और निजी प्रतिष्ठा के लिए ख़तरा बन गए थे और पुतिन अपने दुश्मनों को हलके में नहीं लेते. दुर्भाग्य की बात है कि नवेलनी उनके बड़े दुश्मन बन गए थे जिसे रूसी भाषा में कहा जाता है-उन्होंने पुतिन का निजी दुश्मन होने का टिकट कटा लिया था."

जेल में क्यों थे नवेलनी?
दो फरवरी, 2021 को मॉस्को की एक अदालत ने नवेलनी को 2014 के धोखाधड़ी के एक मामले में दी गई निलंबित सज़ा की शर्तों के उल्लंघन के मामले में जेल की सज़ा सुनाई.
उनके ख़िलाफ़ मामला ये था कि 2020 में वो पुलिस के सामने नियमित तौर पर हाजिर नहीं हो सके थे.
उनकी क़ानूनी टीम ने इसे 'हास्यास्पद' बताते हुए कहा कि अधिकारियों को पता था कि साइबेरिया में नवेलनी पर नोविचोक नर्व एजेंट से हुए हमले के बाद बर्लिन में उनका इलाज चल रहा था.
उन्होंने अदालत से कहा कि इस दौरान लंबे वक्त तक वो कोमा में चले गए थे.

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नवेलनी ने दलील दी कि जनवरी से अगस्त, 2020 के बीच उन्हें ज़हर दिए जाने से पहले वो महीने में दो बार पुलिस के सामने हाजिरी लगाते रहे थे.
उन्होंने खुद पर लगे धोखाधड़ी के आरोप को भी खारिज किया और कहा था कि उनका मुंह बंद करने के लिए उनके ख़िलाफ़ जानबूझकर फर्जी मामला बनाया गया है.
ये मामला फ्रांस की कॉस्मेटिक कंपनी ईव रॉशर की रूसी सब्सिडियरी और एक लकड़ी की कंपनी किरोवलेस में कथित धांधली से जुड़ा था.
इस मामले में एलेक्सी के भाई ओलेग को अदालत ने साढ़े तीन साल की सज़ा दी, एलेक्सी को भी इतनी ही सज़ा दी गई थी हालांकि उन्हें दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया गया था.

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19 साल की सज़ा
कथित धांधली के मामले में साल 2014 में मिली इसी सज़ा की 2016 में मानवाधिकारों के लिए यूरोपीय कोर्ट ने आलोचना की. कोर्ट ने कहा कि नवेलनी के अधिकारों का उल्लंघन किया गया है और कोर्ट ने रूस को आदेश दिया कि वो एलेक्सी और ओलेग को हर्ज़ाना दे.
ये मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट में गया जिसने दोनों की सज़ा को बरकरार रखा.
सज़ा दिए जाने के बाद नवेलनी को मॉस्को से 100 किलोमीटर दूर व्लादिमीर पीनल कॉलोनी में रखा गया.
मार्च 2022 में अदालत ने उन्हें कोर्ट के आदेश की अवमानना करने और धोखाधड़ी से जुड़े नए आरोपों पर उन्हें दोषी करार दिया. उन्हें दी गई सज़ा को नौ साल के लिए बढ़ा दिया गया.
इसके बाद उन्हें मॉस्को से क़रीब 250 किलोमीटर दूर एक नई पीनल कॉलोनी, मेलेखोवो में शिफ्ट कर दिया गया.
अगस्त 2023 में उन पर चरमपंथी संगठन बनाने और इससे जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसों की व्यवस्था करने का आरोप लगा. उन्हें दोषी पाते हुए उन्हें 19 साल की सज़ा सुनाई गई.
कोर्ट सज़ा सुनाए, उससे पहले नवेलनी ने कहा था कि उन्हें "स्टालिन" दौर की सज़ा सुनाई जा सकती है ताकि पुतिन के विरोधियों को कड़ा संदेश दिया जा सके, लेकिन रूसी नागरिकों से अपील की कि वो "क्रेमलिन में मौजूद विलेन और चोरों" का विरोध करना जारी रखें.
स्टिंग ऑपरेशन
69 साल के राष्ट्रपति पुतिन के ख़िलाफ़ नवेलनी की लड़ाई काफी हद तक निजी दिखती थी, उन्होंने आरोप लगाया कि पुतिन के इशारे पर सरकारी एजेंटों ने उन्हें नोविचोक नर्व एजेंट दिया था. कोर्ट में उन्होंने ये आरोप दोहराया.
तंज कसते हुए नवेलनी ने कोर्ट से कहा, "उन्हें मुझसे सबसे बड़ी शिकायत यही रहेगी कि मेरे कारण उनका नाम इतिहास में एक ज़हर देने वाले के तौर पर दर्ज होगा. जैसे अलेक्ज़ेंडर द लिबरेटर, यारोस्लाव द वाइस वैसे ही व्लादिमीर अंडरपैन्ट्स पॉइज़नर (छिपकर ज़हर देने वाला)."
दिसंबर में नवेलनी ने एक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया.
उन्होंने रूसी सुरक्षा सेवा (एफ़एसबी) से जुड़े एक अधिकारी से फ़ोन पर बातचीत की, जिन्होंने बताया कि नोविचोक बेहद घातक रूसी केमिकल हथियार है, जिसे नवेलनी के अंडरवीयर में लगाया गया था. इसके बाद रूस के सोशल मीडिया पर ऐसे मीम्स शेयर किए जाने लगे जिनमें अंडरपैन्ट्स लिखा था.

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अगस्त 2020 में साइबेरिया से एक विमान पर उड़ान भरने के दौरान नवेलनी बीमार हो गए थे. उन्हें ओम्स्क में मौजूद एक अस्पताल ले जाया गया.
विमान की इस इमर्जेंसी लैंडिंग के कारण उनकी जान बचाई जा सकी. इसके बाद जर्मनी में मौजूद एक चैरिटी ने रूसी अधिकारियों से बातचीत कर उन्हें मनाया कि नवेलनी को इलाज के लिए बर्लिन ले जाया जाए.
सितंबर में जर्मन सरकार ने कहा कि सेना ने जो जांच की है उसमें "बिना शक़ नोविचोक ग्रुप के नर्व एजेंट के इस्तेमाल के सबूत मिले हैं."
रूस ने इस मामले में हाथ होने के आरोप से इनकार किया और कहा कि जर्मनी का दावा बेबुनियाद है.
इसके बाद यूरोपीय संघ ने रूस के छह आला अधिकारियों और एक रूसी केमिकल वीपन्स रिसर्च सेन्टर पर ये कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि नवेलनी को ज़हर देने वाले मामले में ये सीधे तौर पर शामिल थे.
इसके जवाब में रूस ने भी जर्मनी पर प्रतिबंध लगा दिए.
नोविचोक नाम का नर्व एजेंच 2018 में ख़ासा चर्चा में रहा था. उस वक्त ब्रिटेन में रह रहे पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को इंग्लैंड के सैलिसबरी में इस ज़हर से निशाना बनाया गया था.
इस घटना में नोविचोक के संपर्क में आई एक स्थानीय महिला की भी मौत हो गई थी.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने माना था कि सरकार नवेलनी पर नज़र रख रही है. उनका कहना था कि ये उचित है क्योंकि अमेरिकी जासूस नवेलनी की मदद कर रहे हैं.
बेलिंगकैट नाम के एक खोजी समूह की जांच में इस बात की तरफ इशारा किया गया कि एफ़एसबी के अधिकारी लंबे वक्त से नवेलनी पर नज़र रख रहे हैं, भले ही आधिकारिक तौर पर वो इससे इनकार करते रहे हों.
वेबसाइट ने कम से कम आठ एफ़एसबी कार्यकर्ताओं की पहचान भी की जो कथित तौर पर नवेलनी को ज़हर देने की योजना में शामिल थे.

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भ्रष्टाचार रोधी अभियान
जेल में रहने के बावजूद नवेलनी रूस के भीतर यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध की आलोचना करने वाली मुखर आवाज़ बने रहे.
मई 2022 में अदालत में एक मामले में सुनवाई के दौरान पेश हुए नवेलनी ने पुतिन पर "मूर्खतापूर्ण युद्ध" शुरू करने का आरोप लगाया जिसका "न तो कोई उद्देश्य है और न ही कोई मतलब."
सितंबर में उन्होंने वॉशिंगटन पोस्ट में लेख लिखा जिसमें उन्होंने रूस के संपन्न वर्ग पर "यूक्रेन के लिए खून का प्यासा" होने का आरोप लगाया.
जितने वक्त नवेलनी जेल में रहे उनके संगठन ने सरकार का विरोध करना जारी रखा. यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए तीन लाख से अधिक पुरुषों की सेना में भर्ती के सरकार के आदेश का उन्होंने विरोध किया.

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कई सालों तक नवेलनी सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करते रहे. लेकिन धोखाधड़ी के आरोप में सज़ा दिए जाने के बाद बाद साल 2018 में उन पर चुनावों में खड़े होने को लेकर पाबंदी लगी दी गई.
नवेलनी को अंदाज़ा था कि रूस में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.
2019 में जेल में सज़ा काटने के दौरान उन्हें डर्माटाइटिस हुआ. उनके डॉक्टर ने कहा कि हो सकता है कि वो किसी "घातक चीज़ के संपर्क" में आए हों.
इसके अलावा उन पर दो बार ज़ेलयोन्का नाम के एंटीसेप्टिक ग्रीन डाई से हमला हुआ, जिससे उनकी आंखों में जलन हुई.
रूस की राजनीति में उदय
रूस की राजनीति में एक ताक़त के रूप में उनका उदय साल 2008 में उस वक़्त हुआ जब उन्होंने रूस की बड़ी सरकारी कंपनियों में कथित कदाचार और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर ब्लॉगिंग शुरू की.
इसके लिए वो अनोखा तरीका अपनाते थे. वे किसी बड़ी तेल कंपनी या बैंक में कुछ शेयर खरीदकर मुश्किल सवाल पूछने लगते थे.
जुलाई, 2013 में किरोव शहर में जब उन्हें कथित गबन के आरोप में पांच साल जेल की सज़ा सुनाई गई तो कई हलकों में इस फ़ैसले को राजनीतिक माना गया.
लेकिन वे थोड़े समय के लिए जेल में रहे और उन्हें साल 2013 के मॉस्को मेयर चुनाव के प्रचार के लिए जेल से बाहर जाने दिया गया. ये एक चौंका देने वाला फ़ैसला था.

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इस चुनाव में 27 फ़ीसदी वोट पाकर नवेलनी दूसरे नंबर पर रहे. पुतिन के क़रीबी सर्गेई सोबीयानिन इस चुनाव में विजयी घोषित किए गए.
नवेलनी की इस उपलब्धि को एक नाटकीय कामयाबी के तौर पर देखा गया क्योंकि उनके पास प्रचार के लिए टीवी का कोई मंच उपलब्ध नहीं था. उस वक़्त उनके पास प्रचार के लिए केवल इंटरनेट का सहारा था और जनता से उनका सीधा संपर्क उनके लिए मददगार रहा.

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नवेलनी ने कभी बीबीसी से कहा था कि रूस में न्याय के लिए पश्चिमी देश जो सबसे अच्छा काम कर सकते हैं, वो 'डर्टी मनी' पर कड़ी कार्रवाई है.
उन्होंने कहा था, "मैं चाहता हूं कि जो लोग भ्रष्टाचार और सामाजिक और लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं के दमन में शामिल हैं, उन्हें उन देशों में जाने देने से रोका जाना चाहिए, उन्हें वीज़ा देने से इनकार किया जाना चाहिए."
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