यूक्रेन पर रूस के हमले के दो सालः मुश्किलों के बीच वजूद की लड़ाई लड़ते देश की कहानी

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    • Author, जेम्स वाटरहाउस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, यूक्रेन

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की अपने व्यक्तित्व को गढ़ने में औद्योगिक शहर क्रिवी रीह को श्रेय देते हैं. यहां एक विशाल अपार्टमेंट ब्लॉक में वो बड़े हुए.

जब आप इस विशाल इमारत के सामने खड़े होते हैं तो यहां से निकल कर युद्ध के समय के एक नेता के तौर पर ज़ेलेंस्की की यात्रा उल्लेखनीय लगती है.

ज़ेलेंस्की के माता पिता के घर के पास रहने वाली विटा कहती हैं, “मैं चाहती हूं कि जंग जल्द ख़त्म हो. वो एक सामान्य और अच्छे व्यक्ति हैं जो लोगों के लिए लड़ रहा है. मैं बस चाहती हूं कि यह जंग और साइरन जल्द बंद हों.”

लेकिन यूक्रेन की नाममात्र की प्रगति और रूस के बढ़ते दबदबे के बीच इस जंग का अंत नज़र नहीं आ रहा है.

हाल ही में म्यूनिख सिक्युरिटी कांफ़्रेंस में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने पश्चिम देशों के प्रतिनिधि मंडलों से कहा कि वो यूक्रेन से ये न पूछें कि जंग कब ख़त्म होगी, बल्कि ये पूछें कि ‘पुतिन इसे अभी तक जारी क्यों रखे हुए हैं.’

इस समय अधर में पड़ी सैन्य सहायता मोर्चे पर यूक्रेन की सैन्य क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है.

ज़ेलेंस्की का ये बयान उन लोगों पर तंज़ था, जो लोग हथियार और गोलाबारूद की आपूर्ति में बाधा डाल रहे हैं.

क्रिवी रीह में एक दुकान के सामने खड़े 80 साल से अधिक उम्र के वैलेरी कहते हैं, “मैं नेता नहीं हूं. हम ये नहीं पूछ सकते कि जंग दोबारा कब ख़त्म होगी.”

उन्होंने कहा, “हमें लड़ना होगा; हमारे पास और कोई चारा नहीं है. अब लोग बहुत गुस्से में हैं.”

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: रूस-यूक्रेन जंग के दो साल

यूक्रेन की चुनौती

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समाप्त

24 फ़रवरी 2022 को जब जंग शुरू हुई तबसे अबतक यूक्रेन में अपनी रक्षा करने की भावना उसी तरह बनी हुई है.

नतीजे की चिंता और डर को पीछे छोड़ हज़ारों लोगों ने यूक्रेन के जंग में खुद को वॉलंटियर किया.

दुनिया की नज़र कीएव को ओर मुड़ी, जहां से मैं रिपोर्टिंग कर रहा हूं.

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की शख़्सियत और लोकप्रियता तब और आसमान छू गई जब कीएव से निकलने की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया.

उन्होंने बहुत परिचित अंदाज़ में कहा, “हमें गोला बारूद की ज़रूरत है, घूमने की नहीं.”

उनकी यह ज़रूरत बदली नहीं है, लेकिन उनकी अपील अब उत्साही असर खो चुकी है.

2023 में प्रत्याक्रमण की असफलता ने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यूक्रेन अपने इलाक़ों को मुक्त कराने में सक्षम भी है?

अमेरिका में रिपब्लिकन सीनेटर, अरबों डॉलर की सैन्य सहायता को रोके हुए हैं और इससे जंग में टिके रहने की यूक्रेन की क्षमता पर असर पड़ रहा है.

कीएव का कहना है कि हथियारों की कमी और गोला बारूद ख़त्म होने की वजह से मोर्चे पर मरने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ रही है.

इस बीच, रूस जंग में पूरी ताक़त से डटा हुआ है और उसके सहयोगी उत्तर कोरिया और ईरान मिसाइलों की सप्लाई कर रहे हैं जो यूक्रेन के शहरों पर बरस रही हैं.

रूस ने पिछले साल बख़मूत पर कब्ज़ा कर लिया था.

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इमेज कैप्शन, रूस ने पिछले साल बख़मूत पर कब्ज़ा कर लिया था.

जंग की थकान

पूरा देश जंग की जिस थकान से जूझ रहा है, क्रिवी रीह उससे अलग नहीं है. कुछ लोग इस जंग से ऊब चुके हैं, अधिकांश पुरुष ज़बरदस्ती सेना में भर्ती किए जाने से डरे हुए हैं और फिर भी उनका कहना है कि यह वजूद की लड़ाई है.

समझौता या रूस को रियायत देने के विचार को हार की तरह देखा जाता है. यह वजूद का सवाल है.

कीएव में अपने फ़्लैट के बाहर बच्चों को खेलते हुए, यूक्रेन पर हमले के पहले ही मैंने देखा था. अब ये खेल के मैदान विनाशकारी मिसाइल हमलों या हैलिकॉप्टर क्रैश के दृष्य हैं. ऐसे दृश्य मोर्चे पर या ब्रोवारी या कीएव के पास दिख जाएंगे.

मौतों और विनाश ने युवा मासूमियत को छीन लिया है.

क्रिवी रीह में हम दुखी यूरी से मिले, जिनकी आंखों में आंसू थे क्योंकि पिछले साल मिसाइल हमले में उनका फ़्लैट नष्ट हो गया था.

वो पूछते हैं, “कोई यह जंग नहीं चाहता, तो फिर किसलिए यह जारी है? इतने सारे लोग मारे जा रहे हैं.”

तो क्या वो ये सोचते हैं कि शांति के लिए यूक्रेन को अपने इलाक़े छोड़ देने चाहिए?

वो कहते हैं, “बिल्कुल नहीं. इन इलाक़ों के लिए बहुत सारे लोग मारे गए. इन्हें छोड़ने का कोई मतलब नहीं है.”

जंग के मैदान में कोई प्रगति न होने से राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और यूक्रेन के सैन्य प्रमुख जनरल वैलेरी ज़ालुझनी के बीच मतभेद पैदा हो गया. उन्हें अब हटा दिया गया है. जनरल ज़ालुझनी को ज़ेलेंस्की का संभावित राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता है.

मोर्चे के पीछे की रणनीति

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क्रीव रीह के आस पास यूक्रेन के लोग उन चीजों में मदद करने की कोशिश करते हैं जहां उनके देश के सहयोगी आगे मदद नहीं करेंगे.

एक छिपी हुई इमारत में, वॉलंटियर की बड़ी संख्या मोर्चे पर लड़ रही सेना के लिए जाल बुन रही है.

इसके सुपरवाइज़र बताते हैं कि महिलाओं और पुरुषों के अलग अलग ग्रुप हैं क्योंकि उनके 'मज़ाक अलग अलग' होते हैं.

शहर के एक दूसरे औद्योगिक क्षेत्र में एक पूर्व बाइक क्लब ने अपनी साइकिलें दे दी हैं.

कई टीमें केन में रसायन मिलाकर भर रही हैं जो स्मोक ग्रेनेड बन जाएंगे. यह एक उपयोगी सैन्य हथियार है जो हमला करने या घायलों को बाहर निकालने में काम आता है.

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एक वॉलंटियर आइनेस कहती हैं, “मेरे पति जंग लड़ रहे हैं ऐस में इन चिंताओं के साथ घर पर बैठना मुश्किल है. यहां आकर मुझे लगता है कि उनके लिए कुछ चीजें आसान करने में मैं मदद कर सकती हूं.”

साल 2014 में क्राइमिया को अलग करने के साथ ही रूस की यूक्रेन के ख़िलाफ़ आक्रामकता जारी है और अब यह देश के पूर्वी हिस्से में जंग के रूप में सामने है.

मौजूदा जंग के 731वें दिन, अब यह संघर्ष बिल्कुल अलग रूप ले चुका है.

हालांकि असाधारण साहस और रूस के नेवी को भारी नुकसान पहुंचाने के बावजूद जंग के रुख़ को यूक्रेन अपने पक्ष में नहीं मोड़ सका.

इस युद्ध की नवीनता ख़त्म हो चुकी है. यूक्रेन, क्रिवी रीह और इसके मशहूर बेटे को ताक़त के नए स्रोत ढूंढने की ज़रूरत होगी और दुनिया का साथ पाने के लिए एक चतुर रणनीति अपनानी होगी.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग हान्ना कोर्नस, स्कार्लेट बार्टर और स्वेतलाना लिबेत

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