सीबीआई का दावा, रूस ले जाकर युवाओं को युद्ध में झोंकने वाले नेटवर्क का पता लगाया

- Author, शर्लिन मोलन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई ने दावा किया कि उसने नौकरी देने के बहाने लोगों को रूस ले जाने और उन्हें वहां की सेना की ओर से लड़ने को मजबूर करने वाले एजेंटों के नेटवर्क का पता लगाया है.
सीबीआई ने कहा है कि एजेंटों ने सोशल मीडिया के जरिये लोगों को रूस में नौकरी देने का लालच दिया था.
सीबीआई के अधिकारियों ने दावा किया कि लोगों को रूसी सेना में नौकरी के नाम पर फंसाने वाला नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ है. अब तक 35 लोग इनके झांसे में फंस चुके हैं.
भारतीय अधिकारियों ने एजेंटों के इस नेटवर्क को पकड़ने की कार्रवाई रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दो भारतीयों की मौत के बाद की है.
इन दोनों को रूसी सेना के लिए सहायक की नौकरी देने के नाम पर रूस भेजा गया था.
सीबीआई का कहना है कि भारतीयों को रूस की सेना में सहायक की नौकरी का लालच देकर भेजने वाले एजेंट एक बेहद संगठित नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे.
सीबीआई ने दावा किया कि युवाओं को बेहतरीन नौकरी के नाम पर रूस भेजने वाले एजेंट यूट्यूब और अपने स्थानीय संपर्कों के जरिये उन्हें फांसते थे.
इससे पहले मॉस्को में रहने वाले उत्तर प्रदेश के एक शख्स ने बीबीसी से कहा था कि एक यूट्यूब के जरिये उन्हें रूस जाने का ऑफर दिया गया था. उनसे हर महीने डेढ़ लाख रुपये वेतन देने का वादा किया था.
उन्होंने कहा, "हमें ये नहीं बताया गया था कि वहां जाकर हमें रूसी सेना के लिए काम करने को कहा जाएगा."
सीबीआई के मुताबिक़ यहां से ले गए भारतीयों को लड़ाई की ट्रेनिंग दी गई और उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर दिया गया. ये काम उनकी मर्जी के ख़िलाफ़ किया. इन एजेंटों की वजह से उनकी जान ख़तरे में पड़ गई.
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

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सीबीआई ने इस मामले में कई प्राइवेट वीजा कंसल्टेंसी कंपनियों और एजेंटों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. एजेंसी ने दिल्ली और मुंबई समेत 13 ठिकानों पर छापेमारी भी की है.
सीबीआई ने कहा है कि छापेमारी के दौरान 50 लाख रुपये कैश बरामद किया है.
भर्तियों से जुड़े कुछ दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद हुए हैं. इस सिलसिले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है.
इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने माना था कि कुछ भारतीयों को रूसी सेना में सपोर्ट रोल के लिए भर्ती किया गया था.
मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह के काम में लगे लोगों की भारत वापसी के लिए वो रूसी अधिकारियों से बात कर रहा है
मंत्रालय ने कहा है कि उसने सभी भारतीयों से अपील की है कि वो इस तरह के मामलों में सावधानी बरते और युद्ध से दूर रहें.

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पिछले दिनों अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने एक रिपोर्ट की थी, जिसमें कहा गया था कि नौकरी का झांसा देकर कुछ भारतीयों को रूस ले जाया गया और फिर उन्हें रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन सीमा पर फँसे सात और भारतीयों के एक समूह ने इस सप्ताह दो वीडियो जारी कर भारत लौटने के लिए सरकार से मदद मांगी.
एजेंटों के जाल में फंस कर रूस पहुंचने वाले युवकों में हैदराबाद के कुछ युवक भी शामिल थे. लेकिन यूक्रेन से युद्ध के दौरान अग्रिम मोर्चे पर तैनात मोहम्मद असफ़ान की मौत हो गई.
इस रिपोर्ट के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि रूस की सरकार से बात की जा रही है और इन लोगों को वापस लाने के लिए काम किया जा रहा है.
29 फ़रवरी को भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस ख़बर की पुष्टि की और कहा, "लगभग 20 भारतीय मदद के लिए मॉस्को में भारतीय दूतावास पहुंचे और भारत वापस आने के लिए मदद मांगी.''
रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे साल में

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रूस यूक्रेन युद्ध तीसरे साल में प्रवेश कर गया है. ऐसी रिपोर्ट्स कई बार आईं कि रूसी सेना सैनिकों की कमी से जूझ रही है.
बीते दिनों ऐसी ख़बरें आईं कि रूस यूक्रेन युद्ध में रूसी सैनिकों के साथ भारतीय नागरिक भी हैं, जो उनके साथ युद्ध के मैदान में तैनात हैं.
रूस में फंसे लोगों के अनुसार, एजेंटों ने उनसे कहा था कि उन्हें रूस में हेल्पर और सिक्योरिटी से जुड़ी नौकरियां दी जाएगी, सेना में नहीं.
इस नेटवर्क में दो एजेंट रूस में थे और दो भारत में बताए जाते हैं.
फ़ैसल ख़ान नाम के एक और एजेंट दुबई में थे जो इन चार एजेंटों के संयोजक के तौर पर काम कर रहे थे.
फ़ैसल ख़ान ही 'बाबा व्लॉग्स' यूट्यूब चैनल चलाते हैं.
इन एजेंटों ने कुल 35 लोगों को रूस भेजने की योजना बनाई थी. पहले बैच में तीन लोगों को 9 नवंबर 2023 को चेन्नई से शारजाह भेजा गया.
शारजाह से इन्हें 12 नवंबर को रूस की राजधानी मास्को ले जाया गया. 16 नवंबर को फ़ैसल ख़ान की टीम ने छह भारतीयों को और फिर सात भारतीयों को रूस पहुंचाया. इनसे कहा गया था कि उन्हें हेल्पर के तौर पर काम करना होगा सैनिकों के तौर पर नहीं.
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