रूसी सेना में जबरन भर्ती करने की बात सात और भारतीयों ने कही, जानिए पूरा मामला- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Getty Images
रूस और यूक्रेन की जंग में रूसी सेना में पहले नेपालियों के शामिल होने की रिपोर्ट सामने आई थी लेकिन अब भारतीयों के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है.
बीते दिनों अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने एक रिपोर्ट की थी, जिसमें कहा गया था की नौकरी का झांसा देकर कुछ भारतीयों को रूस ले जाया गया और फिर उन्हें रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया.
इस रिपोर्ट के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि इस मामले पर रूस की सरकार से बात की जा रही है और इन लोगों को वापस लाने के लिए काम किया जा रहा है.
बुधवार को द हिन्दू ने अपने पहले पन्ने पर उस ख़बर का ही एक फॉलोअप छापा है.
रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन सीमा पर फँसे सात और भारतीयों के एक समूह ने इस सप्ताह दो वीडियो जारी कर भारत लौटने के लिए सरकार से मदद मांगी.
सात भारतीयों की पहचान गगनदीप सिंह (24), लवप्रीत सिंह (24), नारायण सिंह (22), गुरप्रीत सिंह (21), गुरप्रीत सिंह (23), हर्ष कुमार (20) और अभिषेक कुमार (21) के रूप में की गई है. इनमें से पाँच मजदूर पंजाब के बताए जा रहे हैं जबकि दो हरियाणा के हैं.
उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि वे टूरिस्ट वीज़ा पर रूस पहुंचे थे और पुलिस ने दस्तावेज़ नहीं होने के कारण उन्हें हिरासत में लिया और बाद में "सहायक" के रूप में रूसी सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर किया गया.
इन लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें रूस की सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया और कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें 10 साल की क़ैद दे दी जाएगी.

इनमें से एक पंजाबी बोलने वाले शख़्स ने तीन मार्च को एक वीडियो में कहा, “हमें बताया गया कि केवल ‘हेल्पर’ के रूप में काम करना है. लेकिन उन्होंने हमें हथियारों और गोला-बारूद के प्रशिक्षण के लिए भर्ती कर लिया और हमें यूक्रेन भेजने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने हमें भूखा रखा और फोन छीन लिये.''
उस व्यक्ति ने कहा कि रूस से मदद की उनकी अपील का कोई नतीजा नहीं निकला.
इसी ग्रुप ने चार मार्च को भी एक वीडियो जारी किया. इसमें एक व्यक्ति ने कहा, “रूसी सेना हमसे कहती है कि हम एक साल बाद ही यहां से निकल सकते हैं. वे हमसे युद्ध जीतने में मदद करने के लिए कह रहे हैं, हम नहीं जानते कि उनकी मदद कैसे करें. अगर ऐसा नहीं करेंगे तो हम ज़िंदा नहीं बचेंगे. ”
इनमें से एक वर्कर ने हिंदी में कहा, “हमने आपको पहले भी अपनी दुर्दशा के बारे में बताया है. यूक्रेन या रूस में कई भारतीय फँसे हुए हैं. हम भारतीय दूतावास और भारत सरकार से अपील करते हैं कि हमारी मदद करें. ये हमारा आख़िरी वीडियो हो सकता है, वे हमें यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में भेज रहे हैं.''
द हिंदू ने 20 फ़रवरी को रिपोर्ट की थी कि रूस में सिक्योरिटी हेल्पर के रूप में नियुक्त किए गए कम से कम तीन भारतीयों को रूस-यूक्रेन सीमा पर युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
इसके बाद अख़बार ने बताया कि लगभग 100 भारतीय ऐसे हैं जो एक साल से रूस की सेना में काम कर रहे हैं.
29 फ़रवरी को, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस ख़बर की पहली बार पुष्टि की और स्पष्ट रूप से कहा कि "लगभग 20" भारतीय मदद के लिए मॉस्को में भारतीय दूतावास पहुंचे और भारत वापस आने के लिए मदद मांगी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए भारत रूस के संपर्क में है. 24 फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
केंद्र सरकार लद्दाख को दे सकती है अनुच्छेद-371 जैसा दर्जा
लद्दाख में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के 'अनुच्छेद 371 जैसी सुरक्षा' दे सकती है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अख़बार को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की एक बैठक के दौरान लद्दाख में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 371 जैसी सुरक्षा दे सकती है.
गृह मंत्री ने बताया है कि ज़मीन, नौकरियों और संस्कृति की उनकी सभी चिंताओं को अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधानों के ज़रिए सुरक्षा दी जाएगी.
एक सूत्र ने अख़बार को बताया कि अमित शाह ने ये साफ़ कर दिया कि लेह को संविधान के छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग नहीं मानी जा सकती.
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने विधायिका की मांग को को भी ठुकरा दिया है. जम्मू-कश्मीर के अलग लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है.
अख़बार को लद्दाख के एक नेता जो इस बैठक का हिस्सा थे, उन्होंने बताया, “ गृहमंत्री ने भूमि, नौकरियों और संस्कृति पर लोगों की चिंताओं के प्रति सहानुभूति जतायी और कहा कि इन्हें अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधानों के ज़रिए सुरक्षित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार 80 फ़ीसदी तक नौकरियों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित रखना चाहती है.”
संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत पूर्वोत्तर के छह राज्यों सहित 11 राज्यों के लिए विशेष प्रावधान है.
वहीं संविधान की छठी अनुसूची में अनुच्छेद 244 के तहत क्षेत्र को विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक स्वायत्तता देने का प्रावधान है.

संदेशखाली: शेख़ शाहजहां को सीबीआई के हवाले करने से पं. बंगाल पुलिस का इनकार
कोलकाता से निकलने वाले अख़बार द टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ मंगलवार शाम को पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय बभनी भवन के बाहर जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला.
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के साथ सीबीआई की टीम शेख शाहजहां को हिरासत में लेने के लिए पहुंची, लेकिन दो घंटे से अधिक समय तक इंतज़ार करने के बाद सीबीआई को खाली हाथ लौटना पड़ा.
इससे पहले हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस टी.एस. शिवगणनम और हिरण्मय भट्टाचार्य की बेंच ने राज्य पुलिस को कहा था कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपे जाएं और शेख शाहजहां को सीबीआई को मंगलवार की शाम साढ़े चार बजे तक सौंपा जाए. राज्य पुलिस ने ऐसा नहीं किया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















