पश्चिम बंगाल: संदेशखाली मुद्दा क्या लोकसभा चुनाव तक रहेगा गर्म, बीजेपी की रणनीति के जवाब में टीएमसी का प्लान

संदेशखाली में लोगों से मुलाकात करते शुभेंदु अधिकारी

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में संदेशखाली की घटना को लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में लग रही है.

केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी ने चुनाव तक इस मुद्दे को न सिर्फ़ जीवित रखने बल्कि इस पर नंदीग्राम की तर्ज पर ज़बरदस्त राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा करने की भी रणनीति तैयार की है.

ये कहा जा रहा है कि इसी के तहत पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सप्ताह में तीन-तीन बार बंगाल दौरे पर बुलाने की तैयारी कर रही है.

तृणमूल कांग्रेस ने भी जवाबी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री के दौरे के ठीक बाद 10 मार्च को ब्रिगेड रैली के ज़रिए पार्टी का चुनाव अभियान शुरू करने का फ़ैसला किया है.

पहले मोदी को छह मार्च को उत्तर 24-परगना ज़िला मुख्यालय बारासात में संदेशखाली के मुद्दे पर एक जनसभा को संबोधित करना था.

लेकिन अब इसकी तारीख़ बदल कर आठ मार्च कर दी गई है. बीजेपी नेताओं के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने महिलाओं पर अत्याचार और यौन उत्पीड़न का मुद्दा उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी आठ मार्च ही चुना है.

लेकिन उससे पहले प्रधानमंत्री एक और दो मार्च को आरामबाग़ और कृष्णानगर लोकसभा इलाक़ों में अलग-अलग रैलियों को संबोधित कर सकते हैं.

चुनावी समीकरण के लिहाज से पार्टी के लिए यह दोनों सीटें अहम हैं.

बीजेपी क्या तैयारी कर रही है

संदेशखाली का दौरा करती राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम

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प्रदेश बीजेपी पहले दिन से ही संदेशखाली के मुद्दे पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ आक्रामक मुद्रा में है.

इस महीने इलाक़े में तृणमूल कांग्रेस नेताओं की तिकड़ी यानी शाहजहाँ शेख़, शिव प्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार के कथित अत्याचारों और यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महिलाओं के सड़क उतरने के बाद से ही पार्टी के नेता लगातार इस गाँव का दौरा कर रहे हैं.

इस दौरान उनकी कई बार पुलिस के साथ झड़प हो चुकी है. कलकत्ता हाईकोर्ट की अनुमति के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार अलग-अलग इलाक़े का दौरा कर चुके हैं.

पार्टी के कई अन्य नेता भी संदेशखाली जाने के रास्ते में पुलिस वालों से लड़-भिड़ कर गिरफ़्तारी देते रहे हैं.

अब दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से शनिवार को आयोजित एक सेमिनार में भी बीजेपी नेता संदेशखाली का मुद्दा उठा चुके हैं.

दूसरी ओर, तमाम केंद्रीय आयोग लगातार संदेशखाली का दौरा कर रहे हैं. राष्ट्रीय जनजाति आयोग की टीम बीते सप्ताह दूसरी बार मौक़े पर पहुँची थी.

इससे पहले इलाक़े के दौरे के बाद उसने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी रिपोर्ट में बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश की थी.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा के नेतृत्व में भी एक टीम संदेशखाली के दौरे के बाद यही बात दोहरा चुकी है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को राज्य प्रशासन से चार सप्ताह के भीतर संदेशखाली पर रिपोर्ट मांगी है.

मानवाधिकार आयोग की टीम शुक्रवार और शनिवार को लगातार दो दिनों तक इलाक़े का दौरा कर पीड़ितों से बातचीत कर चुकी है.

संदेशखाली के बहाने नंदीग्राम की याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में एक हफ्ते में तीन सभाएं करेंगे

प्रदेश बीजेपी के एक बड़े नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "हम सिंगूर और नंदीग्राम की तर्ज़ पर ही संदेशखाली आंदोलन को भी खड़ा करना चाहते हैं."

संदेशखाली पर आंदोलन तेज़ करने की अपनी रणनीति के तहत ही पार्टी ने बीते सप्ताह 'द बिग रिवील-द संदेशखाली शॉकर' शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की है.

इसमें संदेशखाली की प्रभावित महिलाओं के बयान और इलाक़े की स्थिति दिखाई गई है.

बीजेपी ने संदेशखाली की तुलना नंदीग्राम से की है. यहाँ इस बात का ज़िक्र ज़रूरी है कि पूर्व मेदिनीपुर ज़िले के नंदीग्राम में जबरन ज़मीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के सहारे ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता में पहुँचने का रास्ता साफ़ हुआ था.

विपक्ष के नेता और नंदीग्राम से बीजेपी विधायक शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा, "संदेशखाली की परिस्थिति नंदीग्राम जैसी है. नंदीग्राम में लोगों ने ज़मीन के अधिग्रहण के ख़िलाफ़ लड़ाई की थी और यहाँ ज़मीन पर जबरन कब्ज़े के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. संदेशखाली में खेती की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा यौन उत्पीड़न के बाद दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है."

बीजेपी के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि पार्टी इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा भी इसी रणनीति का हिस्सा है.

प्रधानमंत्री मोदी आठ मार्च को उत्तर 24-परगना ज़िला मुख्यालय बारासात में एक सभा को संबोधित करेंगे.

वहाँ मुख्य मंच के पास ही एक और मंच बनेगा. उस पर संदेशखाली की कुछ महिलाओं को बुला कर बिठाया जाएगा.

वे बताते हैं कि पहले यह सभा संदेशखाली में करने पर विचार किया गया था. लेकिन हो सकता है कि राज्य सरकार से इसकी अनुमति नहीं मिले. इसलिए बारासात में इसके आयोजन का फ़ैसला किया गया है. प्रधानमंत्री वहां संदेशखाली की कुछ ऐसी महिलाओं से निजी तौर पर भी मुलाक़ात करेंगे, जिन्होंने अपने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी एक और दो मार्च को राज्य के दो अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे.

बीजेपी नेता बताते हैं कि आठ मार्च से पहले प्रधानमंत्री मोदी की लगातार दो दिन बंगाल के दौरे पर आने की योजना है.

पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी आरामबाग़ लोकसभा सीट पर बहुत कम अंतर से हारी थी. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी इस लोकसभा क्षेत्र के तहत सात में से चार विधानसभा सीटों पर विजयी रही थी.

महुआ मोइत्रा के इलाक़े का चुनाव क्यों

संदेशखाली का दौरा करते पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख

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दूसरी ओर, नदिया ज़िले में कृष्णानगर की राजनीतिक ज़मीन भी बीजेपी के लिए उपजाऊ है. वो पहले यह सीट जीत चुकी है.

वर्ष 1999 में इस सीट पर पार्टी के उम्मीदवार जलू मुखर्जी जीते थे. उस समय राज्य में बीजेपी का कोई संगठन या जनाधार नहीं था.

बीजेपी के एक नेता बताते हैं कि कृष्णानगर की तृणमूल कांग्रेस सांसद रही महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता छिनने और उनके कामकाज पर विवाद पैदा होने के बाद उपजी परिस्थिति का फ़ायदा पार्टी उठाना चाहती है.

यही वजह है कि बीजेपी ने पीएम मोदी की सभा के लिए कृष्णानगर को चुना है.

राजनीतिक विश्लेषक समीरन पाल मानते हैं कि कृष्णानगर इलाक़े की ज़मीनी परिस्थिति बीजेपी की राजनीति के लिए मुफ़ीद है. इसी वजह से लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री की सभा के लिए कृष्णानगर को चुना गया है.

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले प्रदेश बीजेपी ने कोलकाता में गांधी प्रतिमा के नीचे 27 से 29 फरवरी तक धरना देने का भी फ़ैसला किया है.

इसमें पार्टी के तमाम नेता शामिल रहेंगे. बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 42 में से 18 सीटें जीती थीं.

बीजेपी नेताओं का कहना है कि तब जिस तरह उन्होंने अपनी सीटों की संख्या दो से बढ़ा कर 18 तक पहुँचा दी थी, उसी तरह इस बार संदेशखाली आंदोलन के ज़रिए इसे 30 के पार पहुँचाना ही उनका लक्ष्य है.

तृणमूल कांग्रेस के जवाबी कदम

संदेशखाली में कैंप लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते सरकारी कर्मचारी अधिकारी

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दूसरी, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर बंगाल विरोधी प्रचार करने और इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.

पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, "इलाक़े में भारी तादाद में पुलिस बल के जवान तैनात हैं. इलाक़े में जगह-जगह अस्थायी शिविर लगाए गए हैं ताकि लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. तमाम आरोपों की जाँच की जा रही है. कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है."

लगातार तीन दिनों तक इलाक़े का दौरा करने वाले पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार ने स्थानीय लोगों से कहा था कि क़ानून का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा.

दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का कहना है, "हमारी पार्टी इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी. महिलाओं और आम लोगों पर होने वाला अत्याचार हमारे लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है. हमें चुनाव जीतने के लिए संदेशखाली पर राजनीति करने की ज़रूरत नहीं है."

तृणमूल कांग्रेस को भी शायद इस मुद्दे से होने वाले नुक़सान का अंदेशा है.

यही वजह है कि वह डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है. राज्य सरकार के दो मंत्री पार्थ भौमिक और सुजित बसु लगातार इलाक़े का दौरा कर लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों को उनकी ज़मीन वापस लौटाने और बकाया रकम का भुगतान करने का भरोसा दिया जा रहा है. सरकार और पुलिस की ओर से इलाक़े में अलग-अलग अस्थायी शिविर खोले गए हैं, जहाँ लोग ज़मीन पर कब्ज़े और अत्याचार की शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी संदेशखाली पर अपना आंदोलन तेज़ करते हुए इसे पूरे राज्य में फैलाना चाहती है.

इसके पीछे यह सोच काम कर रही है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की भारी जीत के पीछे महिलाओं की अहम भूमिका थी.

बीजेपी संदेशखाली के बहाने राज्य में महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों और उनकी हालत को मुद्दा बनाते हुए ममता बनर्जी के इस वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है.

कब सामने आया मामला?

शाहजहां शेख़
इमेज कैप्शन, शाहजहां शेख़ अब तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं.

यह पूरा मामला बीते महीने राशन घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख के घर ईडी के छापे से शुरू हुआ था.

इस मामले में पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक की गिरफ्तारी के बाद ईडी की एक टीम बीती पांच जनवरी को शाहजहां शेख के घर की तलाशी के लिए संदेशखाली पहुंची थी. लेकिन उस समय शाहजहां शेख के कथित समर्थकों के हमले में ईडी के तीन अधिकारी घायल हो गए थे.

शाहजहां तभी से फरार है. उसके जिन दो सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न और जमीन पर जबरन कब्जे के आरोप लगे हैं उन दोनों के नाम हैं उत्तम सर्दार और शिव प्रसाद हाजरा. दोनों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

करीब एक महीने तक यह मामला शांत रहा. लेकिन इस महीने आठ फरवरी को स्थानीय महिलाएं शाहजहां और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लाठी और झाड़ू लिए सड़कों पर उतर आई.

हिंसा पर उतारू भीड़ ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं के घरों और गोदामों पर हमले किए और कुछ जगह आगजनी भी हुई.

इन महिलाओं ने शाहजहां और उसके लोगों पर खेती की जमीन पर जबरन कब्जे के साथ ही यौन उत्पीड़न, बलात्कार और अत्याचार के भी आरोप लगाए हैं. बवाल लगातार बढ़ते देख कर पुलिस ने पहले उत्तम सर्दार को गिरफ्तार किया और फिर टीएमसी नेता शिव प्रसाद हाजरा को.

इस दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में सीपीएम के पूर्व विधायक निरापद सर्दार और बीजेपी नेता विकास सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है. इलाके में प्रदर्शन और गिरफ्तारी का सिलसिला अब भी जारी है.

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