पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड को लेकर क्यों आग बबूला हैं ममता बनर्जी?

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल में संदेशखाली की घटना पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी के बीच तेज़ होते सियासी घमासान के बीच अब आधार कार्ड निष्क्रिय होने के मुद्दे पर भी बवाल बढ़ रहा है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेज कर गहरी चिंता जताई है.
साथ ही उन्होंने ऐसे लोगों को राज्य सरकार की ओर से वैकल्पिक कार्ड जारी करने का भरोसा दिया है ताकि उनको बैंकिंग समेत दूसरी सरकारी सुविधाएँ मिलती रहें.
ममता ने इस मामले को संशोधित नागरिकता क़ानून (सीएए) और एनआरसी से जोड़ते हुए इसे बीजेपी की सुनियोजित क़वायद करार दिया है.
उन्होंने कहा है कि सरकार किसी भी स्थिति में इस रणनीति को कामयाब नहीं होने देगी.
दूसरी ओर, सीपीएम ने इसे केंद्र और राज्य सरकार की मिलीभगत का नतीजा बताया है.
पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले डर और आतंक का माहौल बनाने के लिए ही बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस मिल कर ऐसा कर रही हैं.
आधार कार्ड हुए रद्द

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दरअसल, इस मामले की शुरुआत बीते सप्ताह के आख़िर में हुई थी.
राज्य के बर्दवान, नदिया और बीरभूम ज़िला समेत कुछ इलाक़ों में लोगों को अचानक यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के राँची दफ़्तर से स्पीड पोस्ट के ज़रिए एक पत्र मिला.
इसमें कहा गया था कि भारत में रहने की पात्रता पूरी नहीं करने के कारण उनका आधार कार्ड निष्क्रिय किया जा रहा है.
इससे आम लोगों में डर फैल गया. उन्होंने स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया. लेकिन प्रशासन के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी.
इसके बाद ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव को इस मामले की ऑनलाइन शिकायत के लिए एक पोर्टल बनाने का निर्देश दिया.
उन्होंने साथ ही लोगों को राज्य सरकार की ओर से वैकल्पिक कार्ड देने का भी भरोसा दिया है.
इस मामले ने तूल पकड़ा कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना ज़िले के मतुआ बहुल इलाक़े में कई लोगों को ऐसा पत्र मिलने के बाद.
इस समुदाय के लोग पहले से ही एनआरसी के विरोधी रहे हैं. आधार कार्ड रद्द होने की सूचना से बीते तीन दिनों से मतुआ समुदाय में चिंता बढ़ गई है.
यह समुदाय टीएमसी के अलावा बीजेपी का भी वोट बैंक रहा है. इसके बाद ही मुख्यमंत्री ने सोमवार शाम को राज्य सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस की.
उन्होंने कहा, “बीजेपी नागरिकता क़ानून लागू करने के लिए ही एक सुनियोजित रणनीति के तहत ऐसा कर रही है. लेकिन सरकार प्रभावित लोगों को एक नया कार्ड देगी ताकि उनको सरकारी कामकाज में कोई परेशानी नहीं हो.”
उनका कहना था कि इस क़वायद से मतुआ तबके के ग़रीब लोग ही सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. लेकिन सरकार बंगाल में किसी भी स्थिति में नागरिकता क़ानून या एनआरसी लागू नहीं होने देगी.
सीएम ममता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

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ममता ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा है कि यूआईडीएआई ने बिना किसी पूर्व सूचना के लिए पिछले और आदिवासी तबके के लोगों के सैकड़ों आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिए हैं. इससे लोगों में भ्रम फैल रहा है.
राज्य में मतुआ समुदाय पहले से ही एनआरसी को लेकर चिंतित रहा है.
ख़ासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में नागरिकता क़ानून लागू करने का जो ऐलान किया था, उसके बाद अचानक आधार कार्ड निष्क्रिय होने का पत्र मिलने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है.
इसे एनआरसी और नागरिकता क़ानून लागू करने की क़वायद से जोड़ कर देखा जा रहा है.
उत्तर 24-परगना जिले के सीमावर्ती बनगाँव इलाक़े की रहने वाली कृष्णा बाला कहती हैं, "मेरे पति दैनिक मज़दूर हैं. बैंक में सामान्य पैसे हैं. लेकिन आधार कार्ड निष्क्रिय होने का पत्र मिलने के बाद हम वह पैसे भी नहीं निकाल पा रहे हैं."
इसी इलाक़े से मतुआ समुदाय की सुवर्णा बताती हैं, "पाँच सदस्यों के परिवार में तीन लोगों के आधार कार्ड निष्क्रिय हो गए हैं. इससे काफ़ी परेशानी हो गई है. अब सुनने में आ रहा है कि आधार कार्ड रद्द होने का मतलब इस देश की नागरिकता ख़त्म हो जाना है. इससे हम लोग आतंकित हैं."
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसी घटना से बीजेपी नेता भी परेशान हैं.
तृणमूल कांग्रेस है हमलावर

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उधर, तृणमूल कांग्रेस ने आम लोगों की नाराजगी और चिंता को हथियार बनाते हुए बीजेपी नेताओं पर हमला शुरू कर दिया है.
बनगांव के मतुआ बहुल 11 नंबर वार्ड की तृणमूल कांग्रेस सांसद शंपा मोहंत बताती हैं, "आधार कार्ड निष्क्रिय होने से परेशान रोज़ाना मेरे पास आ रहे हैं. लेकिन हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर को फ़ौरन इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."
मतुआ समुदाय के एक गुट ने भी केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इस्तीफ़े की मांग की है.
ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने सोमवार को इस मुद्दे पर आपात बैठक में इस पर चर्चा की.
महासंघ की प्रमुख और पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद ममता ठाकुर का आरोप लगाती हैं, "केंद्र सरकार आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की क़वायद के ज़रिए राज्य में एनआरसी लागू करना चाहता है. केंद्र ने नागरिकता क़ानून लागू करने का भरोसा दिया था. लेकिन उल्टे अब आधार कार्ड रद्द कर मतुआ समुदाय के लोगों से नागरिकता छीनने का प्रयास किया जा रहा है."
उन्होंने इस कथित साज़िश के ख़िलाफ़ मतुआ संगठनों की ओर से बड़े पैमाने पर आंदोलन और आमरण शुरू करने की चेतावनी दी है.
मतुआ तबका राज्य का एक अहम वोट बैंक रहा है. पहले इस पर तृणमूल कांग्रेस का ही कब्ज़ा था.
लेकिन वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इसमें सेंध लगाई थी. फ़िलहाल इस तबके के सांसद शांतनु ठाकुर केंद्र में मंत्री भी हैं.
यही वजह है कि मतुआ समुदाय के लोगों के आधार कार्ड रद्द होने के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के साथ केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर भी डैमेज कंट्रोल की क़वायद के तहत मैदान में उतर पड़े हैं.
बीजेपी ने क्या कहा

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प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने इस मुद्दे पर सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद इसे तकनीकी ग़लती करार दिया.
उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा. विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी भरोसा दिया है कि जल्दी ही ऐसे तमाम रद्द आधार कार्ड फिर सक्रिय हो जाएँगे.
बीजेपी ने इस मुद्दे पर राजनीति के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की है.
प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजमूदार का आरोप है कि मुख्यमंत्री संदेशखाली से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इसे मुद्दा बना रही हैं.
मुख्यमंत्री विभिन्न ज़िलों में लोगों को डरा रही हैं कि एनआरसी लागू करने के लिए आधार कार्ड को ख़त्म किया जा रहा है. लेकिन यह आरोप निराधार है.
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी और केंद्र सरकार पर हमला जारी रखा है.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, "आख़िर बीजेपी ने मान लिया कि आधार कार्ड रद्द करने की क़वायद चल रही है. केंद्र सरकार की सहमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता."
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीजेपी फ़िलहाल संदेशखाली मुद्दे के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर आंदोलन करते हुए इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है.
लेकिन आधार कार्ड रद्द होने के पत्र ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को बीजेपी और उसके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ एक ठोस मुद्दा दे दिया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले से ही कहती रही हैं कि वे किसी भी सूरत में राज्य में एनआरसी और नागरिकता क़ानून लागू नहीं होने देंगी.
वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "आधार कार्ड निष्क्रिय होने और इस मुद्दे को एनआरसी और नागरिकता क़ानून से जोड़ने की ममता बनर्जी की पहल ने बीजेपी को बैकफुट पर धकेल दिया है. यही वजह है कि पार्टी के तमाम नेता इस नुक़सान की भरपाई के लिए मैदान में उतर गए हैं."
पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) लोकसभा चुनाव से पहले लागू हो जाएगा.
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