महुआ मोइत्रा: विपक्ष का आरोप निष्कासन के पीछे 'बदले की भावना', सरकार बोली सब कुछ नियमों के तहत

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तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा को शुक्रवार को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई.
जहां सत्ता पक्ष के नेता एथिक्स कमिटी की सिफारिश के बाद महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने के फ़ैसले को सही ठहरा रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता इसकी आलोचना कर रहे हैं.
लेकिन बीजेपी के नेताओं से इस फ़ैसले का पुरजोर समर्थन किया है. उनका कहना है कि महुआ मोइत्रा ने स्वयं गिफ्ट लेने की बात स्वीकार की है और ये अपने आप में अनियमितता का सबूत है.
उधर संसद से निष्कासित किए जाने के बाद संसद के बाहर महुआ मोइत्रा ने कहा कि मोदी सरकार जो कर रही है वो अदानी को बचाने के लिए कर रही है.
उन्होंने कहा कि "इस प्रक्रिया में जिस तरह से जल्दबाज़ी की गई, दुरुपयोग किया गया, वो ये दिखाता है कि मिस्टर अदानी आप लोगों के लिए कितने ज़रूरी हैं. एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का अधिकार नहीं है."
टीएमसी प्रमुख क्या बोलीं?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और पार्टी की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि संसद में बीजेपी का रवैया देख कर वो दुखी हैं.
उन्होंने कहा, "495 पन्ने की रिपोर्ट को आज सबमिट किया गया. इसके बाद सभी पार्टियों को मामले पर चर्चा के लिए आधे घंटे का वक्त दिया गया. मझे नहीं पता कि किस तरह आधे घंटे में नेता इस रिपोर्ट को पढ़ेंगे और कैसे सभी नेता फ़ैसला लेंगे."
"पार्टी महुआ मोइत्रा के साथ खड़ी है, उन्हें जनता ने चुना है. आने वाले चुनाव में बीजेपी को जनता सबक सिखाएगी."
"ये दो तीन महीने कोई मायने नहीं रखता. महुआ बाहर से अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखेंगी."
उन्होंने कहा, "संसद की कार्यवाही के बारे में मैं अच्छी तरह जानती हूं. ध्वनि वोट का मतलब है, पास पास पास. ये लोकतंत्र को बाईपास करना है."

इंडिया गठबंधन के सदस्य क्या बोले?
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इसे बदले की भावना से किया गया काम कहा.
उन्होंने कहा, "एक सोच, एक अंदाज़ के आधार पर ये किया गया. यह आधारहीन तथ्यों के आधार पर और सिर्फ और सिर्फ बदले की भावना से किया गया है."
"रोज़ाना सदन के भीतर सत्तारूढ़ पार्टी, ख़ासकर मोदी जी महिलाओं का गुणगान करते हैं और आज नए सदन में सबसे पहले महिलाओं को बलि पर चढ़ाया गया."
लेकिन बीजेपी के नेताओं ने लोकसभा में हुए फ़ैसले का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि इस मामले का महिलाओं से कोई संबंध नहीं है.
बीजेपी नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा कि महुआ से सवाल के बदले पैसे लेने के बारे में पूछा गया था और उन्होंने खुद गिफ़्ट स्वीकार करने के बात मानी है.
उधर बंगाल बीजेपी के प्रमुख सुकांत मजूमदार ने भी फ़ैसले कि हिमायत करते हुए कहा जो कुछ किया गया है वो नियमों के तहत ही है.
मजूमदार ने कहा कि महुआ के मामले में अनैतिकता दिखी इसलिए उनका निष्कासन हुआ.
एथिक्स कमेटी की एक और सदस्य और बीजेपी नेता अपराजिता सारंगी ने कहा कि महुआ मोइत्रा का निष्कासन सारे सांसदों के लिए सीख है.
लेकिन विपक्ष ने तो उस रिपोर्ट को ही ख़ारिज कर दिया जिसके आधार पर महुआ मोइत्रा को निष्कासित किया गया है.

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट को फ्रॉड रिपोर्ट बताया.
उन्होंने कहा, "रिपोर्ट के 52 नंबर पन्ने के पैरा 72 में कमिटी ने महुआ मोइत्रा की हरकत को गंभीर और आपराधिक बताया है. लेकिन अगले ही वाक्य में कमिटी ने क़ानूनी जांच की मांग है."
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी वही बात दोहराई जो कार्ति चिदंबरम ने कही थी.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ा विरोधाभास है कि एक व्यक्ति पर आपने कुछ आरोप लगाए, सभी उस पर बोल रहे थे पर उनको(महुआ मोइत्रा) बोलने और सफाई देने का मौका नहीं दिया गया। मुझे लगता है कि ये न्यायोचित नहीं है."
समाजवादी पार्टी ने नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सत्ताधारी दल विपक्ष के लोगों की सदस्यता लेने के लिए किसी सलाहकार को रख ले, जिससे मंत्रीगण व सत्ता पक्ष के सासंदों और विधायकों का समय षड्यंत्रकारियों गतिविधियों में न लगकर लोकहित के कार्यों में लगें."
उन्होंने इसके साथ ही सत्ताधारी बीजेपी को एक सलाह भी दे डाली.
उन्होंने लिखा, "कुछ लोग सत्ता पक्ष के लिए सदन से अधिक सड़क पर घातक साबित होते हैं."

जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने इसे दुखद दिन बताया.
उन्होंने सेशल मीडिया एक्स पर लिखा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह एक दुखद दिन है. महुआ मोइत्रा जैसे एक ज़हीन और तेज़ तर्रार सांसद को बेतरह परेशान किया गया, लांछित किया गया."
शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे अन्याय बताया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि महुआ फिर से चुनाव जीतकर आएंगी.
उन्होंने कहा, "जिन्होंने आरोप लगाया वे दुबई में बैठे हैं. उन्होंने बयान दे दिया और उसके आधार पर आपने निर्णय ले लिया. ये कहीं ना कहीं न्याय के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के खिलाफ गया है. उम्मीद करती हूं आने वाले समय में जब वे टीएमसीसे चुनाव लड़ेंगी और भारी बहुमत से जीतकर आएंगी."
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सत्ता पक्ष के नेताओं ने क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री और बीजेपी नेता प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष के सवालों का उत्तर देते हुए कहा, "ये महिला का विषय नहीं है. उनसे सवाल के बदले पैसे लेने के बारे में पूछा गया था. उन्होंने खुद गिफ़्ट स्वीकार करने के बात मानी है. अब और प्रूफ क्या चाहिए?"
जोशी ने कहा, "2005 में जब 10 सांसदों को निष्कासित किया गया था, उसी दिन रिपोर्ट पेश की गई थी, उसी दिन चर्चा हुई थी वे भी 10 सांसदों के लिए."
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था संसद में रिपोर्ट पेश करने के तुरंत बाद इस पर फ़ैसला लिया गया.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा "नियम तो हमने नहीं बनाए, नेहरू जी जब पीएम थे उन्होंने बनाए थे. जिस पर आरोप लगाया गया है वो संसद में अपना पक्ष नहीं रख सकता, वो कमिटी के सामने अपना पक्ष रख सकता है और उन्हें एथिक्स कमिटी के सामने बुलाया गया था."
"बाद में जब उन्हें सवालों का जवाब देना था तो वे जवाब नहीं दे पाईं और भागकर चली आईं. अगर उन्हें जवाब देना था तो कमिटी के सामने देतीं."

एथिक्स कमिटी की एक और सदस्य और बीजेपी नेता अपराजिता सारंगी ने कहा कि महुआ मोइत्रा का निष्कासन सारे सांसदों के लिए सीख है.
"जब हम सांसद बनते हैं तो हम संविधान को लेकर एक शपथ लेते हैं, हमें नियमों के तहत काम करना होता है."
"उनके मामले में अनैतिकता दिखी, दायित्वपूर्ण व्यवहार नहीं दिखा, इस कारण उनका निष्कासन हुआ."
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दानिश अली ने क्या कहा?
बीएसपी सांसद दानिश अली 15 सदस्यीय इस एथिक्स कमेटी के सदस्य हैं.
बीते सप्ताह उन्होंने एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट को लेकर असहमति दर्ज कराई थी और लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिखकर रिपोर्ट से अपने बारे में लिखी ‘विपरीत टिप्पणी’ को हटाने का आग्रह किया.
महुआ मोइत्रा के निष्कासन के बाद दानिश अली संसद में अपने गले में एक पोस्टर लटका कर आए थे.
उन्होंने कहा, "मैंने यह पोस्टर इसलिए लगाया है क्योंकि समिति ने अपनी सिफारिश में मेरा भी उल्लेख किया है क्योंकि मैं उन्हें (महुआ मोइत्रा) इंसाफ़ दिलाना चाहता हूं."
"संसद की मर्यादा 21 सितंबर की रात को भंग हुई थी, जब रमेश बिधुड़ी ने संसद के भीतर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था. आज गांधी और आंबेडकर की अत्मा रो रही होगी."
रमेश बिधूड़ी की ओर से दानिश अली पर ‘साम्प्रदायिक टिप्पणी’ करने का मुद्दा अभी भी एथिक्स कमेटी में लंबित है.
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क्या कहते हैं जानकार?
हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर चंचल कुमार ने बीबीसी से कहा कि अगले लोकसभा चुनावों में वो खड़ी हो सकती हैं या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि संसद का जो फ़ैसला है उसमें क्या लिखा गया है.
उन्होंने कहा, "प्रशासनिक तौर पर किसी की कमिटी के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. लेकिन अब तक जो तथ्य दिए गए हैं उनके आधार परवये फ़ैसला ग़लत नहीं लग रहा है."
"देखा जाए तो महुआ मोइत्रा के पास अब पहला रास्ता को यही बचता है कि वो कोर्ट का रुख़ कर सकती हैं और संसद के फ़ैसले को चुनौती दे सकती हैं. इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं है."
क्या है मामला?
महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय कारोबारी गौतम अदानी और उनकी कंपनियों के समूह को निशाना बनाने के लिए रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछे.
उन पर आरोप बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लगाए जिनके साथ महुआ की तीखी तक़रार जगज़ाहिर है.
बीजेपी सासंद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर आरोप लगाया था कि महुआ ने दर्शन हीरानंदानी नाम के कारोबारी से रिश्वत लेकर अदानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए सवाल पूछे.
उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में महुआ मोइत्रा ने जो 61 सवाल पूछे उनमें से 50 अदानी समूह से संबंधित थे.
महुआ इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं.
उनका मामला एथिक्स कमिटी के पास भेजा गया. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को भेजी.
इसके बाद संसद के शीत सत्र के पांचवें दिन महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे संसद में पास कर दिया गया.
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