महुआ मोइत्रा 'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में लोकसभा से निष्कासित

महुआ मोइत्रा

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लोकसभा से निष्कासित किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने कहा है कि एथिक्स कमेटी के पास उन्हें निष्कासित करने की सिफ़ारिश करने का कोई अधिकार नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस कंगारू कोर्ट में जो कुछ हुआ, वो बताता है कि अदानी को बचाने के लिए मोदी सरकार क्या कुछ कर सकती है.

महुआ मोइत्रा ने कहा, "मैं 49 साल की हूं और मैं अगले 30 साल तक संसद के अंदर और बाहर आपके ख़िलाफ़ संघर्ष करूंगी."

शुक्रवार को संसद की एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट लोकसभा में पास हो गई और महुआ मोइत्रा को 'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया.

संसद से बाहर निकल कर महुआ मोइत्रा ने संवाददाताओं से बात की और इस पूरे मामले पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की. उन्होंने कहा कि "मोदी सरकार ऐसा कर के मेरा मुंह नहीं बंद करा सकती."

जाते-जाते उन्होंने मीडिया से कहा कि वो अगले लोकसभा चुनावों में खड़ी होंगी.

लेकिन अब राजनीति में उनके भविष्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अब आगे क्या करेंगी.

हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर चंचल कुमार ने बीबीसी को बताया कि "वो लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं या नहीं ये संसद के फ़ैसले मे जो लिखा है, उस पर निर्भर करता है."

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एथिक्स कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने का सुझाव दिया था. लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कमेटी की सिफ़ारिश से सदन सहमत है.

इस रिपोर्ट पर बहस कराए जाने और महुआ मोइत्रा को लोकसभा में अपनी बात रखने की मांग को लोकसभा स्पीकर ने ये कहते हुए ठुकरा दिया कि उन्हें पैनल की बैठक के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका मिल चुका है.

इससे पहले दोपहर बाद एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद कुमार सोनकर ने जैसे ही रिपोर्ट पेश की, कांग्रेस और टीएमसी के सदस्य अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए और नारे लगाते हुए रिपोर्ट की प्रति दिए जाने की मांग की.

टीएमसी के सदस्य कल्याण बनर्जी ने रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर वोटिंग से पहले बहस कराए जाने की मांग की. कमेटी ने मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की थी.

हंगामे के बीच अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे बीजेपी सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सदन की कार्रवाई को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.

इस बीच लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीरंजन चौधरी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिख कर अपील की थी कि सदन में बहस के लिए सदस्यों को तीन चार दिन का वक्त दिया जाना चाहिए ताकि वे इसका अध्ययन कर सकें.

उन्होंने लिखा, “मैं अपील करता हूं कि एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पर बहस के लिए कम से कम तीन दिन बाद की तारीख और समय तय करें.”

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ''जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं गिर जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है."

संसद से बाहर आकर महुआ ने क्या कहा?

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  • किसी भी कैश, किसी भी तोहफ़े का कोई सबूत कहीं नहीं हैं.
  • निष्कासन की सिफ़ारिश सिर्फ़ इस बात पर आधारित है कि मैंने अपना लोकसभा पोर्टल लॉग-इन साझा किया था. लॉग-इन शेयर करने को लेकर कोई नियम नहीं हैं.
  • एथिक्स कमेटी की सुनवाई में ये साफ़ हुआ कि हम सभी सांसद कनवेयर बेल्ट हैं, ताकि हम जनता, नागरिकों के सवालों को संसद में उठा सकें.
  • अगर मोदी सरकार ये सोच रही है कि मेरा मुंह बंद करके वो अदानी के मुद्दे से ध्यान हटा सकते हैं तो मुझे आपको ये बताना है कि इस कंगारू कोर्ट ने पूरे भारत को दिखा दिया है कि इस प्रक्रिया में जिस तरह से जल्दबाज़ी की गई, दुरुपयोग किया गया, वो ये दिखाता है कि मिस्टर अदानी आप लोगों के लिए कितने ज़रूरी हैं. और आप एक महिला सांसद को तंग करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं ताकि मुझे चुप कराया जा सके.
  • कल सीबीआई को मेरे घर पर भेजा जाएगा. वो लोग मुझे अगले छह महीने तक मुझे प्रताड़ित करेंगे. लेकिन मुझे सवाल करना है कि मिस्टर अदानी के 13 हज़ार करोड़ रुपए के कोयला घोटाला का क्या होगा, जिस पर सीबीआई या ईडी गौर नहीं कर रहे.
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  • आप कहते हैं कि मैंने लॉग-इन पोर्टल से राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है? मिस्टर अदानी हमारे सभी बंदरगाह ख़रीद रहे हैं, हवाई अड्डे ख़रीद रहे हैं और उनके शेयरधारक विदेशी पेशेवर निवेशक हैं और गृह मंत्रालय उन्हें हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ख़रीदने की इजाज़त दे रहा है.
  • भाजपा के 303 सांसद लोकसभा में हैं, लेकिन उनमें एक भी मुसलमान नहीं हैं. रमेश बिधूड़ी इसी संसद में खड़े होते हैं और 26 मुसलमान सांसदों में से एक दानिश अली से अपशब्द कहते हैं. उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
  • आप अल्पसंख्यकों से नफ़रत करते हैं, आप महिलाओं से नफ़रत करते हैं. आप नारी शक्ति से घृणा करते हैं. आप पावर और अथॉरिटी को संभालना नहीं जानते.
  • मैं 49 साल की हूं और मैं अगले 30 साल सदन के भीतर, सदन के बाहर आप लोगों से लड़ती रहूंगी, मैं गटर में लड़ूंगी, मैं सड़कों पर लड़ूंगी.
  • महुआ मोइत्रा ने बांग्ला में कहा - लोग आपका अंत देखेंगे. आपके पास पंजाब नहीं है, सिंध हमारे पास नहीं है, द्रविड़ आपका नहीं है, उत्कल आपका नहीं है, बंगाल आपका नहीं है. आप कहां से हम पर राज करेंगे, आपको ये शक्तिशाली बहुमत कहां से मिलेगा?
  • एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का अधिकार नहीं है. आपने अर्धन्यायिक अथॉरिटी की अधिकार लिए और मुझ पर कार्रवाई कर दी. आपने प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है.
  • ये आपके अंत की शुरुआत है. हम लौटेंगे और आपका अंत देखेंगे.
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क्या हैं आरोप?

महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय कारोबारी गौतम अदानी और उनकी कंपनियों के समूह को निशाना बनाने के लिए लगातार संसद में सवाल पूछे और वह भी रिश्वत लेकर.

आरोप लगाया है बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने, जिनकी महुआ से तीखी तक़रार जग ज़ाहिर है.

महुआ इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और कहा कि हर जांच का सामना करने को वो तैयार हैं.

बीजेपी सासंद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर आरोप लगाया था कि महुआ ने दर्शन हीरानंदानी नाम के कारोबारी से रिश्वत लेकर अदानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए सवाल पूछे.

एक हलफ़नामे को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें दर्शन हीरानंदानी ने दावा किया है कि मोइत्रा ने अदानी समूह को निशाना बनाया.

हालांकि, मोइत्रा ने इस हलफ़नामे पर सवाल उठाए थे.

दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को दी शिकायत में जय अनंत देहाद्राई नाम के वकील ने इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत दिए थे.

देहाद्राई वही शख़्स हैं जिन्हें महुआ मोइत्रा अपना ‘जिल्टेड एक्स’ यानी निराश ‘पूर्व प्रेमी’ बताती हैं.

निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया गया कि संसद में महुआ मोइत्रा ने जो 61 सवाल पूछे उनमें से 50 अदानी समूह से संबंधित थे.

उन्होंने आरोप लगाया, “रियल एस्टेट समूह हीरानंदानी ग्रुप के प्रमुख अरबपति कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कारोबारी हितों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए महुआ मोइत्रा ने आपराधिक साज़िश रची.”

इन आरोपों पर महुआ मोइत्रा ने बीबीसी से कहा, "इन आरोपों में कोई दम नहीं है. यदि मैंने कोई तोहफ़ा लिया है तो उसकी लिस्ट कहां है? बीजेपी एक जिल्टेड एक्स के दावे को आधार बनाकर मुझ पर निशाना साध रही है. ये प्रयास कामयाब नहीं होंगे"

महुआ के पास अब क्या रास्ता बचा है?

हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर चंचल कुमार ने बीबीसी से कहाकि अगले लोकसभा चुनावों में वो खड़ी हो सकती हैं या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि संसद का जो फ़ैसला है उसमें क्या लिखा गया है.

उन्होंने कहा, "प्रशासनिक तौर पर किसी की कमिटी के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. लेकिन अब तक जो तथ्य दिए गए हैं उनके आधार पर ये फ़ैसला ग़लत नहीं लग रहा है."

"देखा जाए तो महुआ मोइत्रा के पास अब पहला रास्ता को यही बचता है कि वो कोर्ट का रुख़ कर सकती हैं और संसद के फ़ैसले को चुनौती दे सकती हैं. इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं है."

एथिक्स कमेटी में सुनवाई में क्या हुआ?

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संसद की एथिक्स कमेटी ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों को बुलाकर बात की. दो नवंबर को महुआ मोइत्रा को बुलाया गया था.

इस पूछताछ के लिए महुआ पहुंचीं भी लेकिन कुछ ही देर बाद ही बसपा सांसद दानिश अली समेत अन्य विपक्षी सांसदों के साथ बैठक का बहिष्कार कर बाहर आ गईं.

महुआ ने आरोप लगाया था कि कमेटी में उनसे व्यक्तिगत सवाल पूछे गए और जब उनसे एक सीमा से बाहर जाकर निजी सवाल पूछे जाने लगे तो वो कमेटी की सुनवाई से बाहर आ गईं.

द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने बताया कि एथिक्स कमेटी की सुनवाई के दौरान क्या हुआ और उसने किस तरह के सवाल पूछे गए.

कमेटी के अध्यक्ष बीजेपी सांसद विनोद कुमार सोनकर ने महुआ के आरोपों को ख़ारिज किया और कहा कि वो पूछताछ में सहयोग नहीं कर रही थीं और

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को 10 नवंबर तक भेज दी थी.

दानिश अली 15 सदस्यीय इस एथिक्स कमेटी के सदस्य हैं.

उन्होंने बीते शनिवार को लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिखकर महुआ मोइत्रा के निष्कासन की सिफ़ारिश की रिपोर्ट से अपने बारे में लिखी ‘विपरीत टिप्पणी’ को हटाने का आग्रह किया.

उन्होंने इस रिपोर्ट पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी.

दानिश अली ने क्या कहा?

दानिश अली
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संसद के विशेष सत्र के दौरान बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी की ओर से दानिश अली पर ‘साम्प्रदायिक टिप्पणी’ का मुद्दा अभी भी एथिक्स कमेटी में लंबित है.

दानिश अली ने शनिवार को कहा, “जो पीड़ित है उसे ही आरोपी ठहराने की कोशिश हो रही है. ”

उन्होंने कहा, “एक तरफ़ महुआ मोइत्रा को लेकर एथिक्स कमेटी बुलेट ट्रेन की गति से काम कर रही है दूसरी तरफ़ इससे भी पहले का मामला है और पूरी दुनिया ने देखा और सारी चीजें रिकॉर्ड हैं. उस पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही है. इसकी पीड़ा है और सोमवार को इसके बारे में पूछेंगे.”

उन्होंने कहा, “महुआ मोइत्रा का मामला संसद की एथिक्स कमेटी के पास था वहां भी उन्हें नहीं सुना जा सका. जो हलफनामा देने वाले दर्शन हीरानंदानी थे, कमेटी उनसे पूछताछ नहीं कर पाई. ”

उन्होंने कहा, “कहीं न कहीं ऐसा लग रहा है कि इस देश में कुछ व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कोई आवाज़ उठाएगा तो उसे हर क़ीमत पर दबाने की कोशिश की जाएगी.”

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