पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टिप्पणी से इंडिया गठबंधन को लेकर बढ़ी आशंका

ममता बनर्जी

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

पश्चिम बंगाल में सीटों के सवाल पर वहाँ की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है. वह कांग्रेस को ज़्यादा सीटें देने के मूड में नहीं हैं.

बुधवार को ममता बनर्जी ने कहा, ''कांग्रेस बंगाल में रैली कर रही है लेकिन हमें नहीं बता रही है. मैं इंडिया गठबंधन की हिस्सा हूँ और इस नाते उन्हें बताना चाहिए कि दीदी मैं आपके राज्य में आ रहा हूँ. हमलोग सेक्युलर पार्टी हैं और बीजेपी को हराने के लिए जो भी हम कर सकते हैं, उसे करेंगे.''

इस मुद्दे पर दोनों दलों के नेताओं की परस्पर विरोधी बयानबाज़ी के बाद यहां राजनीतिक हलकों में यही सवाल पूछा जा रहा है.

इसी के साथ यह सवाल भी उभर रहा है कि क्या यहां इंडिया गठबंधन की गाड़ी आख़िरकार पटरी पर आएगी?

मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी कभी अकेले अपने बूते राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का संकेत दे रही हैं तो कभी वाममोर्चा पर इंडिया गठबंधन के एजेंडे को नियंत्रित करने की कोशिश का आरोप लगा रही हैं.

दूसरी ओर, कांग्रेस ने साफ कह दिया है कि वह ममता की पार्टी के साथ कोई तालमेल नहीं करेगी. उसने अपने सहयोगी वाम मोर्चा के साथ मिल कर टीएमसी पर भाजपा के साथ गोपनीय तालमेल का आरोप लगाया है. दिलचस्प बात यह है कि ममता भी इन दोनों पर यही आरोप लगाती रही हैं.

इन तीनों का यह अड़ियल रवैया इंडिया गठबंधन की राह की सबसे बड़ी बाधा के तौर पर उभरा है.

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 22 और भाजपा ने 18 सीटें जीती थी. बाकी दो सीटें कांग्रेस ने जीती थी.

बीते महीने ऐसी अपुष्ट खबरें सामने आई थी कि ममता कांग्रेस को पिछली बार जीती उसकी दोनों सीटें यानी बहरामपुर और मालदा दक्षिण ही देने के लिए तैयार हैं. उसके बाद से ही दोनों दलों के बीच तनातनी चल रही है.

ममता ने राज्य में सीटों के बँटवारे के लिए 31 दिसंबर की समय सीमा तय की थी. लेकिन वह काफ़ी पहले ख़त्म हो चुकी है.

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मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी ममता पर पलटवार करते हुए उनको ‘मौक़ापरस्त’ करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी ममता की मदद के बिना ही लोकसभा चुनाव में उतरेगी.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हम ममता की मदद से चुनाव नहीं लड़ेंगे. कांग्रेस अपने बूते चुनाव लड़ने की कला जानती है. ममता बनर्जी को यह याद रखना चाहिए कि वो कांग्रेस के समर्थन से ही बंगाल की सत्ता में आई थी. वो जो चाहें कर सकती हैं."

हालांकि ममता पर अधीर चौधरी के हमलों के बावजूद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को असम में इस बारे में पत्रकारों के एक सवाल पर कहा, "ममता बनर्जी के साथ मेरी काफी घनिष्ठता है. हमारे नेता कभी-कभार कुछ कह देते हैं. लेकिन वैसी टिप्पणियां कोई मायने नहीं रखतीं."

राहुल ने बताया कि उन्होंने ममता बनर्जी और नीतीश कुमार को भी अपनी यात्रा में शामिल होने का न्योता भेजा है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी पहले भी तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन का कड़ा विरोध करते रहे हैं. लेकिन गठबंधन का फै़सला केंद्रीय नेतृत्व ही करता रहा है.

बंगाल में कांग्रेस टीएमसी के बीच सीट बंटवारा

बंगाल में कांग्रेस की स्थिति

राजनीति विज्ञान के प्रोफे़सर शुभोजित लाहिड़ी कहते हैं, "अधीर तो शुरू से ही ममता के कट्टर विरोध रहे हैं. लेकिन राहुल गांधी की कल की टिप्पणी से साफ़ हो गया है कि इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व उनके बयानों को खास तवज्जो देने के मूड में नहीं है. केंद्रीय नेतृत्व बंगाल में अपनी ताकत और कमज़ोरियों से वाकिफ़ है."

वह कहते हैं कि "बंगाल में गठबंधन की राह हमेशा टेढ़ी-मेढ़ी और उलझन भरी रही है. वह चाहे कांग्रेस के साथ टीएमसी का गठबंधन हो या फिर वाम मोर्चा के साथ. ऐसे मुद्दे आख़िरी क्षण तक तय होते हैं. लेकिन ममता यहां सबसे बड़ी और सत्तारूढ़ पार्टी होने के कारण सब कुछ अपनी शर्तों पर तय करना चाहती है. वे अपनी पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक हैं जबकि कांग्रेस और सीपीएम की ओर से तो फैसला केंद्रीय नेतृत्व को करना है. ऐसे में अधीर चौधरी की टिप्पणियां बेमतलब हैं."

यही बात कांग्रेस के नेता भी मानते हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "हमारा संगठन कमज़ोर है. ऐसे में पांच से ज़्यादा सीटों पर लड़ने का दावा हवा-हवाई ही है. इस बार हम अपनी पिछली दोनों सीटें ही बचा लें तो बहुत है."

उनकी राय में केंद्रीय नेतृत्व इन दोनों सीटों यानी बहरामपुर और मालदा दक्षिण पर ही सहमत हो जाएगी.

बंगाल में कांग्रेस टीएमसी के बीच सीट बंटवारा

लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी अपने सबसे पुराने और कट्टर दुश्मन रहे वाम मोर्चा के लिए कोई सीट छोड़ेगी?

ममता उस पर इंडिया गठबंधन की बैठकों में उसके एजेंडे को नियंत्रित करने की कोशिश का आरोप लगा चुकी हैं. हालांकि सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने इस आरोप को निराधार करार दिया है.

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष इस बारे में एक सवाल पर कहते हैं, "फिलहाल कुछ भी तय नहीं हैं. सीटों के बंटवारे की समय सीमा ख़त्म हो चुकी है. आगे क्या होगा, फिलहाल यह कहना मुश्किल है. आने वाले कुछ दिनों में इसका खुलासा हो जाएगा."

क़रीब चार दशक तक पश्चिम बंगाल की राजनीति को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी भी यही बात कहते हैं.

वह कहते हैं, "ममता को लगता है कि राज्य में कांग्रेस और सीपीएम का खास जनाधार नहीं है. ऐसे में वो चाहती हैं कि अगर सीटों के बंटवारे पर कोई समझौता हो तो या तो उनकी शर्तों पर हो या फिर नहीं हो."

"राज्य में गठबंधन के इतिहास को ध्यान में रखते हुए इस बात की संभावना ही ज़्यादा है कि प्रदेश नेतृत्व की राय को दरकिनार कर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सीटों के तालमेल के मुद्दे पर ममता की शर्त के आगे झुक जाए."

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