पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारी को 'खालिस्तानी' कहने का मामला, बीजेपी विधायक ने क्या कहा - प्रेस रिव्यू

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पश्चिम बंगाल बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी को उत्तरी 24 परगना ज़िले के संदेशखाली जाने से रोकने के लिए तैनात एक पुलिस अधिकारी उस समय नाराज़ हो गए, जब बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें कथित तौर पर खालिस्तानी कह दिया.
एक वीडियो में लोगों से घिरे पुलिस अधिकारी जसप्रीत सिंह इस बात पर आपत्ति जताते दिख रहे हैं कि उन्हें उनकी 'धार्मिक पहचान के आधार पर खालिस्तानी क्यों कहा गया.'
द टेलिग्राफ़ की ख़बर के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के साथ आए बीजेपी विधायक अग्निमित्र पॉल का कहना है कि पुलिस अधिकारी अपनी ड्यूटी सही से नहीं कर रहे थे.
उन्होंने इस आरोप को भी ख़ारिज किया कि किसी बीजेपी कार्यकर्ता ने खालिस्तानी शब्द इस्तेमाल किया.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति ने शर्मनाक ढंग से संवैधानिक सीमाओं को लांघ दिया है.
उन्होंने कहा कि यह हरकत सिखों की छवि को ख़राब करने की कोशिश है, जिनका देश के लिए बलिदान देने के लिए बहुत सम्मान किया जाता है.
पुलिस अधिकारी ने क्या कहा
2016 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी जसप्रीत सिंह धमखाली में अपनी टीम के साथ तैनात थे.
शुभेंदु अधिकारी को कालिंदी नदी के उस पार संदेशखाली जाने से रोकने के लिए उन्होंने बैरिकेड लगाए हुए थे. इसी बीच कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने जसप्रीत सिंह को खालिस्तानी कह दिया, जिससे वो नाराज़ हो गए.
वह बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहते नज़र आए, “आप कह रहे हैं कि मैं खालिस्तानी हूँ? मैं इस पर एक्शन लूंगा. मैंने पगड़ी पहनी है तो आप लोग ये बोल रहे हैं. अगर मैंने पगड़ी न पहनी होती तो क्या आप मुझे खालिस्तानी बोलते?”
"आप पुलिस को कहना है कहिए, मेरे धर्म पर नहीं बोल सकते. मैं आपके धर्म पर नहीं बोल रहा. मुझे क्यों खालिस्तानी बोला? जब आपके धर्म पर किसी ने नहीं बोला, मेरे धर्म पर क्यों बोला?"
इस बीच वहाँ मौजूद लोग लगातार पुलिस अधिकारी जसप्रीत सिंह से बहस कर रहे थे. ग़ुस्से में जसप्रीत ने कहा, " सिर्फ़ आप धर्म पर टिप्पणियां कर रहे हैं. मैंने पगड़ी पहनी है तो आप मुझे खालिस्तानी बोलेंगे? ये आप लोगों की हिम्मत है? किसी पुलिसवाले ने पगड़ी पहनी है तो आप खालिस्तानी बोलोगे?"
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा है, "बीजेपी के मुताबिक़, पगड़ी पहनने वाला हर शख़्स खालिस्तनी है. मैं सिख भाई-बहनों की छवि को नुक़सान पहुंचाने की इस कोशिश की निंदा करती हूं."
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हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों को ग़लत बताया है और आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों को नहीं निभा रहे थे.
बीजेपी विधायक अग्निमित्र पॉल ने कहा, "किसी ने उन्हें गाली नहीं दी और न खालिस्तानी शब्द इस्तेमाल किया. वह बिना वजह मुद्दा बना रहे थे. पुलिस अधिकारी संविधान के मुताबिक़ अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे थे."
टेलिग्राफ़ ने तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सिख समुदाय के लोगों ने कोलकाता में बीजेपी के कार्यालय का घेराव करने की योजना बनाई है. वे आसनसोल में भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.
इससे पहले पुलिस ने बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी को संदेशखाली जाने से रोक दिया. पुलिस का कहना था कि राज्य सरकार ने वहां किसी के भी जाने पर रोक लगाई हुई है और हाई कोर्ट की सिंगल बेंच की ओर से विपक्षी नेताओं को वहां जाने में दी गई छूट के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने डिविज़न बेंच में याचिका दायर की है.
हालांकि, बाद में डिविज़न बेंच से अनुमति मिलने के बाद बीजेपी नेताओं को संदेशखाली जाने दिया गया.
संदेशखाली में एक महिला ने तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेख़ और उनके समर्थकों पर 'ज़मीन पर क़ब्ज़े और यौन उत्पीड़न' का आरोप लगाया था, जिसके बाद यहां लगातार प्रदर्शन हो रहे थे.
पांच जनवरी को ईडी के अधिकारी राशन में कथित घोटाले की जांच के मामले में जब शाहजहां के यहां तलाशी लेने गए थे तो भीड़ ने उनपर हमला कर दिया था. कथित तौर पर ये भीड़ शाहजहां के साथ थी.
बतौर हेल्पर गए भारतीयों को जंग में झोंक रहा रूस

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भारत से ठगी करके रूस भेजे गए लोगों को जबरन यूक्रेन के ख़िलाफ़ जंग में शामिल करने का मामला सामने आया है.
द हिंदू की ख़बर अनुसार, ऐसे कम से कम तीन भारतीय हैं, जिन्हें एजेंटों ने सेना के सहायक के तौर पर भेजा, मगर उन्हें वहां यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की ओर से लड़ने को मजबूर किया जा रहा है.
अख़बार ने ऐसे ही एक शख़्स से बातचीत के आधार पर यह ख़बर दी है.
नवंबर 2023 से लगभग 18 भारतीय रूस-यूक्रेन सीमा पर मारियुपोल, खारकीव, दोनेत्स्क और रोस्तोव ऑन दोन में फंसे हुए हैं. एक एजेंट का कहना है कि एक शख़्स की मौत भी हुई है.
अख़बार के अनुसार, यूक्रेन ने रूस के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए जो अंतरराष्ट्रीय सैन्य टुकड़ी बनाई है, उसमें कुछ भारतीयों के अपनी मर्ज़ी से शामिल होने की ख़बरें तो आई थीं, लेकिन यह पहला मामला है जब रूस की ओर से कोई भारतीय लड़ रहा हो.
यह मामला एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उठाया है. रूस में फंसे लोगों में से एक हैदराबाद से है, जहां से ओवैसी सांसद हैं. उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस मामले में दख़ल देने की मांग की है.
शादी करने पर महिलाओं की नौकरी छीनना ग़लत: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई भी क़ानून असंवैधानिक है, जिसके तहत महिला कर्मचारियों को शादी करने या किसी घरेलू मामले के काऱण नौकरी से निकाला जा सकता हो.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में धमकाकर नौकरी से निकालना गंभीर लैंगिक भेदभाव है.
सेना की नर्सिंग सर्विस में पर्मानेंट कमीशंड ऑफ़िसर रहीं लेफ़्टिनेंट सेलिना जॉन की सेवाएं सेना के एक नियम के तहत साल 1988 में ख़त्म कर दी गई थीं. यह कार्रवाई उनके शादी करने के बाद की गई थी.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि लेफ़्टिनेंट सेलिना को 60 लाख रुपये दिए जाएं.
कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा, “महिला की शादी हो जाने के कारण रोज़गार ख़त्म करना लिंग के आधार पर भेदभाव और असमानता का गंभीर मामला है. ऐसे पितृसत्तात्मक रवैये को स्वीकार करना मानवीय गरिमा, गैर-भेदभाव और निष्पक्ष व्यवहार के अधिकार को कमज़ोर करता है."
कोर्ट ने कहा कि लिंग आधारित पूर्वग्रहों पर आधारित कानून और नियम संवैधानिक आधार पर अस्वीकार्य हैं.
पुतिन ने किम जोंग-उन को भेजी कार, उठे सवाल

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को रूस में बनी एक ख़ास कार तोहफ़े में दी है.
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, पुतिन ने अपने क़रीबी नेता को निजी इस्तेमाल के लिए लिमोज़ीन कार दी है. हालांकि, ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है.
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने मंगलवार को यह कार मिलने का दावा किया. हालांकि, यह नहीं बताया गया कि कार रूस से उत्तर कोरिया कैसे पहुंचाई गई.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस कार को भेजना संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का उल्लंघन को हो सकता है, जिसके तहत उत्तर कोरिया पर परमाणु हथियारों का विकास रोकने का दबाव बनाने के लिए ऐसी चीज़ों की आपूर्ति करने पर प्रतिबंध लगाया गया है.
पुतिन ने ऐसे समय किम जोंग उन को यह कार भेजी है, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने आरोप लगाया है कि उत्तर कोरिया ने रूस को यूक्रेन के ख़िलाफ़ जंग में इस्तेमाल करने के लिए भारी मात्रा में गोला-बारूद भेजा है.
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