वो कंपनियां जिन्हें ईरान युद्ध की वजह से हुआ अरबों का मुनाफ़ा

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद शुरू हुए संघर्ष की वजह से दुनिया भर में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है (सांकेतिक तस्वीर)

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद शुरू हुए संघर्ष की वजह से दुनिया भर में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है (सांकेतिक तस्वीर)
    • Author, आर्ची मिचेल
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

एक तरफ दुनिया भर के आम परिवार ईरान में अमेरिका और इसराइल के युद्ध की कीमत चुका रहे हैं, वहीं कुछ कंपनियाँ इसमें भारी मुनाफ़ा कमा रही हैं.

इस संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता और ईरान की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर देने से रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें लगातार महंगी हो रही हैं. इसका अलग-अलग कंपनियों, परिवारों और दुनिया भर की सरकारों के बजट पर असर पड़ रहा है.

इससे जहाँ कुछ लोग हाशिए पर पहुँच गए हैं, वहीं कुछ ने रिकॉर्ड कमाई की है. ये ऐसे लोग हैं जिनका मुख्य कारोबार युद्ध के दौरान ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है और जिन्हें ऊर्जा की अस्थिर कीमतों से फ़ायदा होता है.

इस कहानी में हम कुछ ऐसे सेक्टर्स और कंपनियों का ज़िक्र करेंगे जो मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के दौरान अरबों की कमाई कर रही हैं.

1. तेल और गैस

ऑयल कंपनी शेल ने विश्लेषकों की उम्मीदों से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया है (सांकेतिक तस्वीर)

इमेज स्रोत, Mike Kemp/In Pictures via Getty Images

इमेज कैप्शन, ऑयल कंपनी शेल ने विश्लेषकों के अनुमानों से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया है (सांकेतिक तस्वीर)

इस युद्ध का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक असर ऊर्जा की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है.

दुनिया भर में सप्लाई होने वाली गैस और तेल का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रता है, लेकिन फ़रवरी के आख़िर से इनसे जुड़े जहाज़ों का इस समुद्री रास्ते से आना-जाना लगभग पूरी तरह से ठप हो गया.

इसका नतीजा यह हुआ कि ऊर्जा (तेल और गैस) की कीमतों में ज़बरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे दुनिया की कुछ सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों को फ़ायदा हुआ.

इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा तेल की दिग्गज यूरोपीय कंपनियों को हुआ. इनके पास ट्रेडिंग विंग्स हैं, इसलिए वे कीमतों में आए तेज़ उतार-चढ़ाव का फ़ायदा उठाकर अपना मुनाफ़ा बढ़ाने में कामयाब रहीं.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

बीपी (ब्रिटिश पेट्रोलियम) के मुनाफ़े में साल के पहले तीन महीनों में दोगुने से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया. कंपनी ने अपने ट्रेडिंग डिवीज़न के इस प्रदर्शन को बेमिसाल बताया है.

ऑयल कंपनी शेल ने भी इस मामले में विश्लेषकों की उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया. उसने पहली तिमाही में अपने मुनाफ़े में उछाल की जानकारी दी, जो बढ़कर 6.92 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया.

एक अन्य अंतरराष्ट्रीय दिग्गज कंपनी, 'टोटल एनर्जीज़' ने साल 2026 की पहली तिमाही में अपने मुनाफ़े में लगभग एक-तिहाई की उछाल देखी, जो बढ़कर 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया.

अमेरिका की दिग्गज कंपनियाँ एक्सोन मोबिल और शेवरॉन ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अपनी कमाई में गिरावट देखी, जिसका कारण मध्य-पूर्व से सप्लाई में आई रुकावट थी.

लेकिन इन दोनों ही कंपनियों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया.

उन्हें उम्मीद है कि जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेगा, उनका मुनाफ़ा और बढ़ेगा, क्योंकि तेल की कीमतें अभी भी उस समय की तुलना में काफ़ी ज़्यादा हैं, जब ईरान युद्ध शुरू हुआ था.

2. बड़े बैंक

बाज़ार में उतार-चढ़ाव की वजह से ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी बढ़ोतरी हुई (सांकेतिक तस्वीर)

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बाज़ार में उतार-चढ़ाव की वजह से ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी बढ़ोतरी हुई (सांकेतिक तस्वीर)

ईरान में युद्ध के दौरान कुछ सबसे बड़े बैंकों के मुनाफ़े में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है.

जेपी मॉर्गन की ट्रेडिंग शाखा ने साल 2026 के पहले तीन महीनों में रिकॉर्ड 11.6 अरब डॉलर का राजस्व कमाया. यह इस बैंक का किसी भी तिमाही में दूसरा सबसे बड़ा मुनाफ़ा है.

'बिग सिक्स' बैंकों में शामिल बैंक ऑफ़ अमेरिका, मॉर्गन स्टेनली, सिटी ग्रुप, गोल्डमैन सैक्स और वेल्स फार्गो, और जेपी मॉर्गन के मुनाफ़े में साल की पहली तिमाही में काफ़ी बढ़ोतरी हुई.

कुल मिलाकर, बैंकों ने साल 2026 के पहले तीन महीनों में 47.7 अरब डॉलर का मुनाफ़ा कमाया है.

वेल्थ क्लब की चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट सुसन्नाह स्ट्रीटर ने कहा, "भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम से इन्वेस्टमेंट बैंकों को फ़ायदा हुआ है, ख़ासकर मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स को."

वॉल स्ट्रीट (न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज) के बड़े कर्ज़दाताओं को ट्रेडिंग में अचानक आई तेज़ी से फ़ायदा हुआ है. निवेशक ज़्यादा जोखिम वाले स्टॉक और बॉन्ड्स बेचकर अपना पैसा उन एसेट्स में लगा रहे हैं जिन्हें ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है.

वित्त बाज़ार में उतार-चढ़ाव का फ़ायदा उठाने की इच्छा रखने वाले निवेशकों की वजह से भी ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी हुई है.

स्ट्रीटर कहते हैं, "युद्ध की वजह से पैदा हुए उतार-चढ़ाव की वजह से ट्रेडिंग में अचानक तेज़ी आई है. कुछ निवेशकों ने युद्ध बढ़ने के डर से अपने स्टॉक बेच दिए, जबकि कुछ ने कीमतों में गिरावट आने पर स्टॉक ख़रीदे, जिससे बाज़ार में रिकवरी को बढ़ावा मिला."

3. रक्षा क्षेत्र की कंपनियाँ

रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग की वजह से वे कई ऑर्डर पूरे नहीं कर पायी हैं (एफ़ 35- सांकेतिक तस्वी)

इमेज स्रोत, Leon Neal/Getty Images

इमेज कैप्शन, रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग की वजह से वे कई ऑर्डर पूरे नहीं कर पाई हैं (एफ़ 35- सांकेतिक तस्वी)

आरएसएमयूके (बाज़ार से जुड़ी सलाहकार कंपनी) की सीनियर एनालिस्ट एमिली सॉविच के अनुसार, किसी भी युद्ध में सबसे ज़्यादा फ़ायदा रक्षा क्षेत्र को होता है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "इस संघर्ष ने हवाई रक्षा क्षमताओं में मौजूद कमियों को उजागर किया है, जिससे पूरे यूरोप और अमेरिका में मिसाइल डिफ़ेंस, एंटी ड्रोन तकनीक सैन्य साज़ो-सामान में निवेश तेज़ी से बढ़ा है."

रक्षा कंपनियों के महत्व को उजागर करने के साथ ही इस युद्ध ने सरकारों के लिए हथियारों के भंडार को फिर से भरने की ज़रूरत भी पैदा की है, जिससे इसकी मांग बढ़ी है.

एफ़ 35 लड़ाकू विमान के पुर्ज़ों सहित कई अन्य सामान बनाने वाली बीएई सिस्टम्स ने गुरुवार को कारोबार से जुड़े एक अपडेट में कहा कि उसे इस साल बिक्री और मुनाफ़े में ज़बरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है.

कंपनी ने दुनिया भर में बढ़ते "सुरक्षा ख़तरों" का हवाला दिया, जिनके कारण सरकारों का रक्षा ख़र्च बढ़ा है; और इससे कंपनी के लिए एक "अनुकूल माहौल" तैयार हुआ है.

दुनिया की तीन सबसे बड़ी रक्षा ठेकेदार कंपनियाँ - लॉकहीड मार्टिन, बोइंग और नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन ने साल 2026 की पहली तिमाही के अंत में अपने पास रिकॉर्ड संख्या में लंबित ऑर्डर (यानी जो पूरे नहीं हो पाए हैं) होने की जानकारी दी है.

लेकिन रक्षा कंपनियों के शेयर, जिनमें हाल के वर्षों में तेज़ी से उछाल आया था, मार्च के मध्य से नीचे गिर गए हैं.

ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत से जुड़ी कंपनियाँ

चीन ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कारोबार में बड़ा मुनाफ़ा कमाया है (फ़ाइल फ़ोटो)

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, चीन ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कारोबार में बड़ा मुनाफ़ा कमाया है (फ़ाइल फ़ोटो)

स्ट्रीटर ने कहा कि इस संघर्ष ने जीवाश्म ईंधनों (तेल और गैस) पर निर्भरता कम करके ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लाने की ज़रूरत को भी उजागर किया है.

उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका में भी "रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में दिलचस्पी बहुत तेज़ी से बढ़ी है."

जबकि अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने "ड्रिल, बेबी, ड्रिल" का नारा लोकप्रिय बनाया था, जो जीवाश्म ईंधनों के ज़्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देता है.

स्ट्रीटर ने कहा कि इस युद्ध के कारण रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश को अब स्थिरता और झटकों को झेलने की क्षमता के लिए ज़्यादा से ज़्यादा महत्वपूर्ण माना जाने लगा है.

जिन कंपनियों को इससे फ़ायदा हुआ है, उनमें फ़्लोरिडा की 'नेक्स्टइरा एनर्जी' भी शामिल है. इस साल अब तक इसके शेयरों में 17% की तेज़ी आई है. निवेशक इसके मिशन में बढ़-चढ़कर निवेश कर रहे हैं.

डेनमार्क की विंड एनर्जी की दिग्गज कंपनियाँ वेस्टास और ऑर्स्टेड ने भी अपने मुनाफ़े में ज़बरदस्त बढ़ोतरी की जानकारी दी है.

इससे पता चलता है कि ईरान युद्ध से रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ी कंपनियाँ भी कैसे फ़ायदा उठा रही हैं.

ब्रिटेन में ऑक्टोपस एनर्जी ने हाल ही में बीबीसी को बताया कि इस युद्ध की वजह से सोलर पैनल और हीट पंप की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है और फ़रवरी के आख़िर से अब तक सोलर पैनल की बिक्री में 50% की बढ़ोतरी हुई है.

पेट्रोल की क़ीमतों में तेज़ी के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की माँग भी बढ़ी है. इस मामले में मौक़े का सबसे ज़्यादा फ़ायदा चीनी कंपनियाँ उठा रही हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)