सुप्रीम कोर्ट ने आप पार्षद को मेयर बना दिया लेकिन संख्या बल में बीजेपी आगे, अब क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट

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    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी ब्यूरो, दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजयी घोषित कर दिया है.

इसे इंडिया ब्लॉक की पार्टियों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

अदालत ने चुनाव में अमान्य घोषित किए गए आठ वोटों को वैध क़रार दिया. इन अमान्य क़रार दिए गए वोटों की वजह से ही कुलदीप कुमार चुनाव हार गए थे.

शीर्ष अदालत ने चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर की जीत को रद्द कर दिया.

इससे पहले पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने मनोज सोनकर को विजयी घोषित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फ़ैसले से पहले सोनकर ने मेयर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने मेयर चुनाव कराने वाले पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की जमकर फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि जिन मत पत्रों को उन्होंने अमान्य क़रार दिया था, क्या उनके साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्या?

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड

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बीबीसी लीगल संवाददाता उमंग पोद्दार के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिल मसीह को सीआरपीसी की धारा 340 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस भेजा जाए.

ये धारा अदालत के सामने झूठी गवाही से संबंधित है. आरोप साबित होने पर इसमें सात साल तक की सज़ा हो सकती है.

आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को "लोकतंत्र की जीत" बताया.

पार्टी नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देते हुए कहा, "सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं."

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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर कहा कि पूरी प्रक्रिया ही 'पूरी तरह तमाशा' थी.

फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने ज़बरदस्त काम किया है जिसकी हम सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद करते हैं."

वो कहते हैं, ''उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा की है. उन्होंने यह काम साहसिक और दृढ़ तरीके से किया है ताकि जो हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है, या हुई थी उसके रोका जा सके."

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अगर दोबारा चुनाव होता तो क्या होता

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मेयर चुने गए कुलदीप कुमार को मिठाई खिलाले लोग

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पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने कहा, "ये आदेश इतना अच्छा है कि मैं सुप्रीम कोर्ट को सलाम करता हूं. उन्होंने हरसंभव बदमाशी करने की जो कोशिश की गई थी, उसे पहचाना और उसे पलटा."

क़ुरैशी कहते हैं, "देरी की वजह से तीन डिफ़ेक्शन भी हो गए थे. अगर दोबारा चुनाव भी होते तो नतीजे दूसरे घोषित हो जाते. तो सुप्रीम कोर्ट ने उस हॉर्स ट्रेडिंग को भी पहचाना और उसे उन्होंने रोकने के लिए कहा कि जो असली वोट थे, वही गिने जाएंगे. मुझे लगता है कि ऐसे कम फ़ैसले कम देखने में आते हैं."

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले रविवार को आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे.

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ये आदेश इतना अच्छा है कि मैं सुप्रीम कोर्ट को सलाम करता हूं. उन्होंने हरसंभव बदमाशी करने की जो कोशिश की गई थी, उसे पहचाना और उसे पलटा.
एसवाई कुरैशी
पूर्व चुनाव आयुक्त

फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के वकील मुकुल रोहतगी ने बीबीसी से कहा, "इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है. अदालत के आदेश का पालन होना चाहिए."

हमने इस फ़ैसले पर भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर और अनिल मसीह से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

चंडीगढ़ में पूर्व भाजपा अध्यक्ष और पूर्व मेयर अरुण सूद ने बीबीसी से कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को मानते हैं और उसकी इज़्ज़त करते हैं, लेकिन, "मेरा आम आदमी पार्टी से सवाल ये है कि एक तरफ़ वो कह रहे हैं कि लोकतंत्र की हत्या हुई है, दूसरी ओर बहुमत वाली पार्टी यानी बीजेपी विपक्ष में हैं, 10 सदस्यों वाली (आप) और सात सदस्यों वाली (कांग्रेस) पार्टी वो नेतृत्व कर रही है. वो बिना भाजपा की सहमति के कैसे काम करेंगे? हमारे पास संख्या है. हम फ़ैसला करेंगे लेकिन हमारा मेयर नहीं है."

अब आगे क्या होगा?

पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या होगा यह सवाल इसलिए उठ रहा क्योंकि पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे.

चंडीगड नगर निगम के हाऊस में कुल 35 मत हैं. एक मत चंडीगड़ के लोकसभा सदस्य का होता है.

आम आदमी पार्टी के तीन पार्षदों के बीजेपी में शामिल हो जाने के बाद आप-कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी के पार्षदों की संख्या 17-17 हो गई है. लेकिन बीजेपी के पास एक अतिरिक्त वोट चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर का भी है. क्या सुप्रीम कोर्ट को फ़ैसला सलामत रहेगा?

जब चुनाव हुआ था, तब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन के पास 20 मत थे और भाजपा के पास लोकसभा सदस्य को मिलाकर 16 मत थे. इस विवादित चुनाव में भाजपा को 16 मत मिलने से विजेता क़रार दे दिया गया था और आम आदमी पार्टी के 8 मतों को रद्द कर दिया गया था.

उन्हें अब योग्य ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आप के कुलदीप कुमार को विजेता मेयर क़रार दिया है. लेकिन इसके बाद तीन आप सदस्यों के भाजपा में जाने से आप अल्पमत में चली गई है.

क्या भाजपा सदन में अविश्वास का प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को भी पलट सकती है?

यही सवाल बीबीसी पंजाबी ने चंडीगड़ के पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा और आम आदमी पार्टी के चंडीगड़ मामलों के इंचार्ज एसएस आहलूवालिया से किया.

प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि नगर निगम में फ्लोर टेस्ट नहीं होता अगर विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहता है तो उसके पास दो-तिहाई का समर्थन होना चाहिए जो इस समय भाजपा के पास नहीं है.

वो कहते हैं कि भाजपा का अविश्वास प्रस्ताव तभी आ सकता है, अगर कांग्रेस वोटिंग में हिस्सा ना ले जो अभी नहीं दिखता.

दो-तिहाई के हिसाब से अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जीतने वाले पक्ष को 24 मतों की ज़रूरत होगी.

आहलूवालिया ने कहा कि कांग्रेस और आप पूरी तरह से एकमत हैं. वे पूरे जोश के साथ भाजपा से लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए दोनों पार्टियों की चंडीगड़ में बैठक हो रही है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी और आप के मेयर की सीट को कोई ख़तरा नहीं है.

क्या ऐसा पहले कभी हुआ है?

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन करते आप के कार्यकर्ता

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वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के मुताबिक़ उन्हें नहीं याद आता कि इससे पहले कभी किसी प्रिसाइडिंग अफ़सर को सुप्रीम कोर्ट में बुलाया गया हो और इस तरह की बातें सुनाई गई हों.

वो कहते हैं, "शायद ये पहली बार है. ऐसे बहुत से लोग हैं जो ऐसे काम कर रहे हैं, उस हिसाब से ये ऐसा फ़ैसला है जिसकी आज बहुत ज़रूरत थी, ऐसे वक्त जब कई स्तरों पर लोकतंत्र की हत्या हो रही है."

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मुझे याद नहीं आता कि इससे पहले कभी किसी प्रिसाइडिंग अफ़सर को सुप्रीम कोर्ट में बुलाया गया हो और इस तरह की बातें सुनाई गई हों.
प्रशांत भूषण
वरिष्ठ वकील, सुप्रीम कोर्ट

पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी कहते हैं, "ऐसे आरोप तो पहले लगे हैं लेकिन मुझे तो याद नहीं आता कि कभी प्रिसाइडिंग अफ़सर को सुप्रीम कोर्ट ने बुलाकर लताड़ा हो.''

''चार-पाँच साल पहले हरियाणा विधानसभा में जब राज्यसभा के लिए चुनाव हो रहा था तो वहाँ के रिटर्निंग अफ़सर जो विधानसभा के सचिव थे, उन्होंने ऐसा काम किया था. चुनाव में इसी तरह की हेराफेरी की गई थी. मुझे नहीं पता कि वो मामला अभी क़ानूनी प्रक्रिया में कहाँ पर है, लेकिन उस वक्त रिटर्निंग अफ़सर के ऊपर बड़ा सवाल लगा था."

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