रूस की संपत्ति से यूक्रेन को मिलेगा 50 अरब डॉलर का कर्ज़, जी7 में हुई डील

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- Author, जारोस्लाव लुकीएव, जीन मैकेन्ज़ी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
जी-7 ने यूक्रेन के लिए 50 अरब डॉलर कर्ज़ जुटाने के लिए रूस की जब्त संपत्ति के इस्तेमाल पर सहमति बना ली है. इस पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन रूस के साथ युद्ध में इस्तेमाल करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह रूस के लिए एक और चेतावनी है कि "हम पीछे नहीं हट रहे हैं."
हालांकि रूस ने इस क़र्ज़ की डील पर कहा है कि इसका अंजाम "बहुत दर्दनाक" होगा.
इस साल के अंत तक इन पैसों के आने की उम्मीद नहीं है. लेकिन इसे यूक्रेन के युद्ध की तैयारियां करने और उनकी अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए एक दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है.
इटली में चल रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने यूक्रेन और अमेरिका के बीच 10 साल के लिए द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे कीएव ने "ऐतिहासिक" बताया है.
इस समझौते में यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य और प्रशिक्षण की बात कही गई है - लेकिन इसमें ये नहीं कहा गया है कि अमेरिका यूक्रेन में युद्ध लड़ने के लिए अपनी सेना भेजने के लिए बाध्य है.

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'रूस के लिए सबक'
साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद यूरोपीय संघ के साथ-साथ जी7 ने लगभग 325 अरब डॉलर मूल्य की रूस की संपत्ति फ्रीज़ कर दी थी.
ये संपत्तियां हर साल तीन अरब डॉलर का ब्याज कमा रही हैं.
जी7 की योजना के तहत तीन अरब डॉलर का इस्तेमाल यूक्रेन के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से लिए गए 50 अरब डॉलर के क़र्ज़ के सालाना ब्याज का भुगतान करने के लिए किया जाएगा.
दक्षिणी इटली के पुलिया में शिखर सम्मेलन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि 50 बिलियन डॉलर का कर्ज यूक्रेन को दिया जाएगा और साथ ही ये पुतिन के लिए एक रिमाइंडर होगा कि हम पीछे नहीं हट रहे हैं.".
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अमेरिका और अपने अन्य सहयोगियों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद कहा.
नए सुरक्षा समझौते का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "यह वास्तव में एक ऐतिहासिक दिन है और यूक्रेन को 1991 में आज़ादी मिलने के बाद से यूक्रेन और अमेरिका के बीच ये सबसे मज़बूत समझौता है."
कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे धनी देशों वाला जी7 समूह यूक्रेन का महत्वपूर्ण वित्तीय और सैन्य समर्थक रहा है.

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इस पैसे से क्या होगा
जी-7 के अन्य नेताओं ने भी 50 अरब डॉलर के क़र्ज़ के समझौते की सराहना की है.
कीएव में कुछ लोग जो इस पैसे को पाने पर दबाव बना रहे थे, वो चाहते थे कि जी7 देश 300 अरब डॉलर की पूरी फ्रीज़ की हुई राशि जारी कर दें न कि केवल उस पर मिलने वाले ब्याज को जारी किया जाए.
लेकिन यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने इस संभावना को ख़ारिज कर दिया था.
इससे पहले अमेरिका ने यूक्रेन को 61 अरब डॉलर की सहायता दी थी.
अमेरिकी पैकेज का सीधा मतलब ये समझा गया कि इससे यूक्रेन के फ्रंटलाइन पर मिसाइलें और बढ़ेंगी. लेकिन उससे इतर ये माना जा रहा है कि ये पैसे संभवतः इस साल तक यूक्रेन को नहीं मिलेंगे, ऐसे में इसका वर्तमान युद्ध के स्वरूप पर बहुत कम असर पड़ेगा.
फ़िलहाल, यूक्रेन का कहना है कि उसे अभी और अधिक हथियारों की तत्काल ज़रूरत है.
ख़ासकर एयर डिफेंस सिस्टम की ताकि उसके शहरों और बिजलीघरों पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया जा सके.
साथ ही उसे लंबे समय से इंतज़ार किए जा रहे एफ-16 लड़ाकू विमानों की भी ज़रूरत है. उम्मीद है कि वे इस साल गर्मी में डिलिवर किए जाएंगे.
जी-7 शिखर सम्मेलन में ज़ेलेंस्की ने कहा कि नए सुरक्षा समझौते में अमेरिका से मिलने वाले उन युद्ध विमानों की खेप भी शामिल है.
यूक्रेन के लिए इस क़र्ज़ के प्रतीकात्मक मायने हैं. अब उसके हमलावर को न केवल उसके द्वारा की गई बर्बादी की भरपाई के लिए बल्कि यूक्रेन को अपनी रक्षा के लिए भी पैसे चुकाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
ज़ेलेंस्की के सबसे क़रीबी सलाहकारों में से एक ने कहा है कि रूस को इस तरह से सज़ा देने का पश्चिमी देशों का फ़ैसला इस युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ है.
रूस के सेंट्रल बैंक की ज़्यादातर ज़ब्त संपत्तियाँ बेल्जियम में हैं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत देश रूस से उन संपत्तियों को ज़ब्त करके यूक्रेन को नहीं दे सकते.
जी-7 में इस फ़ैसले के आधिकारिक एलान से पहले ही रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा हुआ तो इसका जवाब "काफ़ी दर्दनाक" साबित होगा.
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