अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले केस में मिली ज़मानत, आज हो सकते हैं रिहा

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू अदालत ने कथित शराब घोटाले मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ज़मानत दे दी है.

बीबीसी संवाददाता उमंग पोद्दार से बात करते हुए केजरीवाल के अधिवक्ता विवेक जैन ने ज़मानत दिए जाने की पुष्टि की है.

केजरीवाल इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. शुक्रवार को बेल बॉन्ड ड्यूटी जज के सामने पेश किया जाएगा. अगर बॉन्ड स्वीकार कर लिया जाता है तो शुक्रवार को ही उनकी रिहाई होगी.

अरविंद केजरीवाल को कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 10 मई को अंतरिम ज़मानत दी थी, जिसकी अवधि बीते एक जून को पूरी हुई और 2 जून को केजरीवाल तिहाड़ जेल वापस चले गए थे.

ये ज़मानत उन्हें लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र दी गई थी.

आम आदमी पार्टी के सांसद सौरभ भारजद्वाज ने इस फ़ैसले को ‘निचली अदालतों के लिए रौशनी बताया है.’

उन्होंने कहा, “केजरीवाल को लोअर कोर्ट से ज़मानत मिलना पूरे देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा. क्योंकि देखा जाता रहा है कि पीएमएलए केस में कोई भी राहत लोअर कोर्ट, हाईकोर्ट में नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट में जा कर मिलती है. जबकि न्याय व्यवस्था में न्याय संगत फैसले कोई भी कोर्ट दे सकती है. लेकिन देखा जा रहा था कि लोअर कोर्ट में राहत देने को लेकर हिचकिचाहट थी. ये फ़ैसला लोअर कोर्ट के लिए एक रोशनी का काम करेगा.”

आम आदमी पार्टी ने अपने संयोजक की ज़मानत पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा है कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. बीजेपी और ईडी की तमाम आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए माननीय न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ज़मानत दे दी है.”

क्या है पूरा कथित शराब घोटाला

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21 मार्च को दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति में कथित अनियमितता के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया था.

इस मामले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अभी भी जेल में हैं.

दिल्ली सरकार ने एक नई आबकारी नीति (आबकारी नीति 2021-22) नवंबर 2021 में लागू की थी.

नई आबकारी नीति लागू करने के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी हाथों में आ गया था.

दिल्ली सरकार ने इसका तर्क दिया था कि इससे इस कारोबार से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी.

दिल्ली सरकार की यह नीति शुरू से ही विवादों में रही. लेकिन जब यह विवाद बहुत बढ़ गया तो नई नीति को ख़ारिज करते हुए सरकार ने जुलाई 2022 में एक बार फिर पुरानी नीति को ही लागू कर दिया.

मामले की शुरुआत दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार की उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, आर्थिक अपराध शाखा नई दिल्ली, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भेजी गई रिपोर्ट से हुई.

यह रिपोर्ट 8 जुलाई 2022 को भेजी गई थी.

इसमें एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते सिसोदिया पर उपराज्यपाल की मंज़ूरी के बिना नई आबकारी नीति के ज़रिए फ़र्ज़ी तरीक़े से राजस्व कमाने के आरोप लगाए गए .

रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियों को लाइसेंस फ़ीस में 144.36 करोड़ की छूट दी गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना के समय शराब विक्रेताओं ने लाइसेंस शुल्क माफ़ी के लिए दिल्ली सरकार से संपर्क किया.

सरकार ने 28 दिसंबर से 27 जनवरी तक लाइसेंस शुल्क में 24.02 प्रतिशत की छूट दे दी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इससे लाइसेंसधारी को अनुचित लाभ पहुंचा, जबकि सरकारी ख़ज़ाने को लगभग 144.36 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ.

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जबकि अधिकारियों के मुताबिक़, लागू हो चुकी नीति में किसी भी बदलाव से पूर्व आबकारी विभाग को पहले कैबिनेट और फिर उप-राज्यपाल के पास अनुमति के लिए भेजना होता है. कैबिनेट और उप-राज्यपाल की अनुमति के बिना किया गया कोई भी बदलाव ग़ैर-क़ानूनी कहलाएगा.

रिपोर्ट सीबीआई को भेजी गई जिसके आधार पर बीते साल मनीष सिसोदिया को गिरफ़्तार किया गया.

मनीष सिसोदिया पर विदेशी शराब की क़ीमतों में बदलाव करने और प्रति बीयर 50 रुपये आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फ़ायदा पहुंचाने का आरोप था.

पुडुच्चेरी की पिक्सी इंटरप्राइजेज़ प्राइवेट लिमिटेड ने एयरपोर्ट ज़ोन में खोली गई 10 शराब दुकानों के लाइसेंस अधिकार जीते थे, लेकिन कंपनी एयरपोर्ट अधिकारियों से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) हासिल करने में कामयाब नहीं रही. सरकार ने लाइसेंस की बोली के लिए जमा किए गए 30 करोड़ रुपए कंपनी को वापस कर दिए.

रिपोर्ट में कहा गया कि ये दिल्ली आबकारी नियम, 2010 का उल्लंघन है. अगर कोई आवेदक लाइसेंस के लिए औपचारिकताएं नहीं पूरी कर पाता तो उसकी जमा राशि ज़ब्त हो जाती है.

इस केस में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी गिरफ्तार किए गए थे जो जमानत पर जेल से बाहर हैं.

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