राजस्थान का जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट, जागरूकता अभियान या सरकारी पैसे की बर्बादी?

जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट

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    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जयपुर से

राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए 'जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट' जारी किया है. इसकी चर्चा देशभर में हो रही है.

लेकिन राज्य में विपक्ष इसे सरकारी ख़ज़ाने का दुरुपयोग बता रहा है. जबकि राजस्थान सरकार का कहना है कि ये सरकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने के लिए है.

इसके तहत सरकारी योजनाओं पर क़रीब 30,000 वीडियो बनाकर भेजे गए हैं.

सरकार ने इनमें से 3,538 वीडियो को इनाम देने की घोषणा की है. इनाम में कुल डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाएंगे.

कांग्रेस जहां इस कॉन्टेस्ट के ज़रिए सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी इसे पैसों का दुरुपयोग बता रही है.

राजस्थान सरकार ने 7 जुलाई को 'राजस्थान जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट' योजना लॉन्च की थी.

महंगाई राहत कैंप में दस योजनाओं के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया था. इन्हीं योजनाओं के लिए वीडियो कॉन्टेस्ट की शुरुआत की गई.

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इमेज कैप्शन, महंगाई राहत कैंप में दस योजनाओं के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया था. इन्हीं योजनाओं के लिए वीडियो कॉन्टेस्ट की शुरुआत की गई.

क्या है योजना?

इसके ज़रिए लोगों से सरकारी योजनाओं के वीडियो बना कर भेजने की अपील करते हुए रोज़ 103 लोगों को कुल 2 लाख 75 हज़ार रुपये के इनाम देने की घोषणा की गई.

साथ ही रोज़ तीन शीर्ष विजेता और 100 प्रेरणा पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई. विजेता को एक लाख रुपये, उपविजेता को 50,000 रुपये और तीसरे स्थान के लिए यह पुरस्कार राशि 25,000 रुपये रखी गई. साथ ही 1,000 रुपये के 100 प्रेरणा पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान भी किया गया.

7 जुलाई को वीडियो कॉन्टेस्ट एक महीने के लिए शुरू किया गया था लेकिन एंट्री भेजने की अंतिम तिथि को अब छह अगस्त से बढ़ा कर छह सितंबर कर दिया गया है.

इसमें भाग लेने के लिए लोगों को राज्य सरकार की एक या इससे अधिक योजनाओं पर 30 से 120 सेकेंड का वीडियो बनाकर दो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जन सम्मान राजस्थान हैशटैग के साथ शेयर करना होता है.

जिस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करना होता है उसे जन सम्मान राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड भी करना होता है.

अशोक गहलोत की दस मुख्य योजनाओं के प्रचार के लिए जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट की शुरुआत की गई. इसके तहत इन योजनाओं से जुड़े वीडियो लोग बना कर भेज रहे हैं और इनाम जीत रहे हैं.

  • गैस सिलेंडर योजना
  • मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना
  • किसानों के लिए निशुल्क बिजली योजना
  • मुख्यमंत्री निशुल्क अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना
  • महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना
  • इंदिरा गांधी शहरी रोज़गार गारंटी योजना
  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन
  • मुख्यमंत्री कामधेनू योजना
  • मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना
  • मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

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टॉप तीन में अब तक 35 महिलाएं

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इस कॉन्टेस्ट में हर दिन तीन शीर्ष विजेता चुने जाने हैं. अब तक इन शीर्ष 75 विजेताओं में से 35 महिलाएं हैं. अब तक इस कॉन्टेस्ट के तहत कुल 3,538 विजेताओं को डेढ़ करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं.

वीडियो कॉन्टेस्ट में प्रथम पुरस्कार विजेता रहीं सलोनी जिंदल मूल रूप से करौली ज़िले से हैं. उन्हें पुरस्कार में एक लाख रुपए मिले हैं.

वह जयपुर में रह कर एक सरकारी योजना के तहत महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं.

उन्होंने बीबीसी से फ़ोन पर बताया, "मैंने इस कॉन्टेस्ट के बारे में सुना था तो सोचा वीडियो बना कर भेजा जाए. सरकारी योजना 'राजस्थान स्किल एंड लाइवलीहुड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' के ज़रिए महिलाओं को ट्रेनिंग देने पर वीडियो बनाया था."

"हमने रोज़ाना की तरह ही महिलाओं को ट्रेनिंग देने के वीडियो शूट कर भेजे थे. हमें प्रथम पुरस्कार मिला तो अच्छा लगा."

इसी तरह भीलवाड़ा के रवि कोली ने सरकार की तीन योजनाओं पर एक वीडियो बनाया. उन्हें पुरस्कार के रूप में 50,000 रुपए मिले हैं.

उन्होंने बताया, "यह पांचवीं बार वीडियो बना कर भेजा था, इस बार दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है. पहले चार वीडियो भी इन्हीं तीन सरकारी योजनाओं पर बनाए थे."

जन सम्मान वीडियो कॉन्टेस्ट

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इमेज कैप्शन, वीडियो कॉन्टेस्ट के लिए भीलवाड़ा से भेजी गई वीडियो में महिलाएं सरकारी योजनाओं का ज़िक्र करते हुए.

सरकारी नज़र में कॉन्टेस्ट

सरकार ने कॉन्टेस्ट की वेबसाइट पर लिखा है कि यह कॉन्टेस्ट सरकारी योजनाओं को प्रदेश के हर ज़रूरतमंद तक पहुंचाने का एक संकल्प है.

इस पहल का मूल विचार यह है कि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं से लाभान्वित किया जाए.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने योजना की लॉन्चिंग के दौरान कहा था, "अमूमन आम लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे जानकारी नहीं होती है. जानकारी के अभाव में वे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं."

बीते दिनों सीएम गहलोत ने एक वीडियो में कहा था, "महंगाई राहत शिविर में क़रीब एक करोड़ 80 लाख परिवारों ने भाग लिया और अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है. इस प्रतियोगिता का मक़सद सिर्फ़ ये है कि 15 लाख बचे हुए परिवारों को भी इसके माध्यम से जुड़ने का मौका मिलेगा."

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष डॉ. सतीश पूनिया

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सरकारी ख़ज़ाने का दुपयोग?

बीजेपी ने इस योजना को सरकारी पैसे का दुरुपयोग क़रार दिया है.

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने इस कॉन्टेस्ट पर सवाल खड़े किए हैं.

डॉ पूनिया का कहना है, "सरकार का वोटर को प्रभावित करने का अनैतिक क़दम है. सरकार जनता के पसीने की कमाई को इस तरह इनाम में नहीं लुटा सकती."

"करोड़ों रुपए के विज्ञापन देने के बाद यह भी सरकारी ख़ज़ाने पर अतिरिक्त भार है. वीडियो कॉन्टेस्ट के ज़रिए वोटर्स को प्रभावित करने की विफल कोशिश है. अशोक गहलोत सरकार सरकारी खजाने के व्यय की दोषी है."

उन्होंने कहा, "राजस्थान की जनता अब इन घोषणाओं पर भरोसा नहीं करने वाली है. क्योंकि जानता के समक्ष किसानों का कर्ज़ माफ़ी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे हैं, इन मुद्दों के सामने किसी जन सम्मान का वीडियो भरी नहीं पड़ेगा."

बीजेपी नेता और विधायक मदन दिलावर ने बीबीसी से फोन पर कहा, "यह सरकारी पैसे का दुरुपयोग है. योजनाएं चलानी थीं तो पहले ही करते. अब व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है."

"चुनाव से पहले पानी की तरह सरकारी पैसे को बहाया जा रहा है. धरातल पर कुछ नहीं है, लोगों को न सिलेंडर मिल रहे हैं और न गांवों में बिजली है."

अशोक गहलोत

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मदन दिलावर कहते हैं, "हमने भी पिछली बार अंतिम दिनों में प्रयास किए थे कि कैसे भी चुनाव जीतें, कई योजनाएं भी शुरू की थीं लेकिन उसका कोई लाभ हुआ नहीं."

वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रहे और वर्तमान विधायक वासुदेव देवनानी ने अशोक गहलोत को घोषणावीर बताया है.

पूर्व मंत्री और विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा, "पब्लिसिटी के ज़रिए लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं. आगामी चुनाव को देखते हुए लोगों का आभामंडल बनाने का प्रयास है."

उन्होंने कहा, "लोगों के बिजली बिल पहले से ज़्यादा आने लगे हैं. लोग परेशान हैं जिससे लोगों का भ्रम टूट गया है. लोगों को चिरंजीवी का लाभ नहीं मिल रहा, नए ज़िले बनाए लेकिन आधे से ज़्यादा के खिलाफ़ लोगों में रोष है."

उन्होंने कहा, "सिर्फ़ घोषणावीर बनना और जादूगर नाम से जादूगरी दिखाने का असफल प्रयास है."

देवनानी ने कहा, "अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यह करना उचित नहीं ठहराया जा सकता है. इसका कोई लाभ नहीं हो सकता है."

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