कांवड़ लेकर निकले केंद्रीय मंत्री ने बताया यात्रा का मक़सद - प्रेस रिव्यू

डॉ. संजीव बालयान

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्रीय मंत्री और मुज़फ़्फ़रनगर से भाजपा सांसद संजीव बालयान कांवड़ यात्रा पर निकले हैं.

शुक्रवार को बालयान ने हरिद्वार से मुज़फ़्फ़रनगर की चार दिन की कांवड़ यात्रा पूरी की. इस दौरान वो 80 किलोमीटर चले.

अख़बार से बात करते हुए बालयान ने कहा, “मैंने अपनी कांवड़ यात्रा के दौरान भगवान शिव की अराधना की और प्रार्थना की कि निकट भविष्य में समान नागरिंक संहिता के क़ानून का मसौदा तैयार हो जाए.”

बालयान ने कहा कि उन्होंने लोगों को समान नागरिक संहिता के फ़ायदे बताने के लिए ये यात्रा की है.

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में जब साल 2013 में सांप्रदायिक दंगे हुए थे तब संजीव बालयान पर भी मुक़दमा दर्ज हुआ था.

बालयान का कहना है कि चार दिन की कांवड़ यात्रा के दौरान वो कांवड़ियों के साथ ही रहे, सोये और उनके साथ ही खाना खाया.

बालयान का कहना है कि उन्होंने कांवड़ियों को भी यूसीसी के फ़ायदे गिनाये.

कंधे पर कांवड़ लेकर चल रहे बालयान के साथ सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी भी थे.

उनके साथ चल रहे समर्थकों ने टीम बालयान लिखी सफ़ेद रंग की टी-शर्ट पहनी थी.

हर चार-पांच किलोमीटर की यात्रा के बाद जगह-जगह उनका स्वागत किया जा रहा था.

अख़बार से बात करते हुए बालयान ने कहा, “हमारे हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई भाइयों के मन में यूसीसी को लेकर शंकाए हैं. वो सभी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं को मानते हैं. लेकिन एक राष्ट्र के लिए एक समान क़ानून होना ही चाहिए.”

बालयान की ये पहली कांवड़ यात्रा थी और वो भविष्य में ऐसी ही और भी यात्राएं करना चाहते हैं.

मोदी और मैक्रों

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भारत और फ़्रांस मिलकर बनायेंगे जेट इंजन

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द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत और फ़्रांस ने साथ मिलकर जेट इंजन बनाने का फ़ैसला किया है.

दोनों देशों ने इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (आईएमआरएच) के लिए इंजन बनाने का समझौता भी किया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस हेलीकॉप्टर के डिज़ाइन और विकास पर काम कर रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़्रांस की यात्रा पर गए थे. इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में कई अहम समझौते किए हैं.

प्रधानमंत्री मोदी और फ़्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों के बीच वार्ता के बाद जारी साझा बयान में कहा गया है, ''इस साल के अंत से पहले सफरान और डीआरडीओ के बीच इस परियोजना पर एक रोड मैप तैयार किया जाएगा.”

“वे फ्रांस के साफरान हेलीकॉप्टर इंजन के साथ आईएमआरएच कार्यक्रम के तहत भारी-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों के मोटरीकरण के लिए औद्योगिक सहयोग का भी समर्थन करते हैं.”

हेलीकॉप्टर इंजन के विकास के लिए भारत की एचएएल और फ्रांस की साफरान के बीच शेयरधारक समझौता हुआ है.

भारत इस समय पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ़्ट (एएमसीए) के विकास पर काम कर रहा है और इसके लिए अधिक शक्तिशाली इंजन बनाना चाहता है.

पिछले महीने ही एचएएल ने अमेरिकी कंपनी जेनरल इलेक्ट्रिक के साथ स्वदेशी लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ़्ट एमके2 के लिए इंजन विकसित करने का समझोता किया है. हालांकि इसके लिए लाइसेंस को अमेरिकी कांग्रेस से मंज़ूर कराना ज़रूरी होगा.

चीता

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कूनो में चीतों की मौत के लिए गले का पट्टा ज़िम्मेदार?

द टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो पार्क में दो चीतों की मौत के लिए उनके गले में डाला गया पट्टा ज़िम्मेदार है.

चीता प्रोजेक्ट के तहत गले में लगाए गए ट्रांसमीटर के ज़रिये चीतों के आवागमन पर नज़र रखी जाती है. ये ट्रांसमीटर सैटेलाइट से कनेक्ट होते हैं.

अख़बार के मुताबिक़ कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो पार्क में दो चीतों की मौत एक अप्रत्याशित चुनौती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि गले में डाले गए इन पट्टों की वजह से भारत के आद्र मौसम में चीतों के गले में सूजन, जीवाणु संक्रमण और सेप्टीसीमिया हो रहा है.

शुक्रवार को कूनो में एक चीते की मौत पार्क की बाड़ेबंदी के बाहर हुई थी. इससे पहले मंगलवार को एक चीते की मौत बाड़े के भीतर हुई थी. सप्ताह भर के भीतर दो चीतों की मौत ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है.

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन दोनों चीतों की मौत गले में पट्टे के कारण हुए संक्रमण की वजह से हुई है.

भारत के चीता प्रोजेक्ट को गाइड कर रहे दक्षिण अफ़्रीका के एक विशेषज्ञ का ऐसा ही मानना है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ प्रिटोरिया में एसोसिएट प्रोफ़ेसर एडरियन टोर्डिफ़ ने अख़बार से बात करते हुए कहा, “दोनों ही चीतों के जो घाव हैं वो निश्चित तौर पर किसी दूसरे जानवर की वजह से नहीं हुए हैं. ये ऐसी समस्या की वजह से हुए हैं जिसे हम भांप नहीं पाये क्योंकि हम अफ़्रीका में चीतों को कॉलर लगाते हैं और इससे कोई दिक्कत नहीं होती है.”

मंगलवार को मारे गए चीते के शुरुआती पोस्टमार्टम और उनके शव के वीडियो से पता चलता है कि गले पर घाव था और उनकी मौत की वजह इस घाव पर मक्खियों और अन्य कीटों के बैठने और उसकी वजह से हुए संक्रमण की वजह से हुई हो सकती है.

प्रोफ़ेसर टोर्डिफ़ ने कहा, “संभवतः आद्र और गीले मौसम की वजह से, कॉलर के नीचे पानी इकट्ठा हो जाता है और इसकी वजह से त्वचा लगातार गीली रहती है. मक्खियां यहां बैठती हैं, अंडे देती हैं और लारवा की वजह से कीड़े भी पड़ जाते हैं. ये घाव को और गहरा कर देते हैं और इससे संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है.”

भारत में चीता प्रोजेक्ट के तहत लाये गए चीतों को गले में ट्रांसमिटर वाले पट्टे डाले गए थे ताकि सेटेलाइट से उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके.

लड़की का स्कैच

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दलित युवती की हत्या पर क्यों उबल रहा है राजस्थान का एक ज़िला

पूर्वी राजस्थानी के करौली ज़िले में एक 19 वर्षीय दलित युवती की हत्या के बाद तनाव है.

इस युवती का शव घर से क़रीब सात किलोमीटर दूर एक कुएं से मिला है.

अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद इलाक़े में राजनीति भी तेज़ हो गई है.

अख़बार से बात करते हुए युवती की मां ने कहा, “दो-तीन युवक आए थे. वो चुपचाप आए, लड़की के चेहरे पर रुमाल रखा और उसे कार में डालकर ले गए. और अब उसकी मौत हो गई है, सीने पर गोली लगी है और चेहरे पर तेज़ाब डाला गया है. गैंगरेप के बाद उसे मारा गया.”

राजस्थान में इसी साल चुनाव भी होने हैं, ऐसे में हत्या की इस घटना के बाद राजनीति भी हो रही है.

युवती की मां ने अख़बार को बताया, “मैं और मेरे चार बच्चे 11-12 जुलाई की दरमियानी रात घर पर ही सो रहे थे, जब लोग आए और मेरी बेटी को उठा ले गए. मैं आवाज़ सुनकर जाग गई थी. वो मेरी बेटी को उठा ले जा रहे थे, मैंने शोर मचाया लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया.”

महिला के मुताबिक़ अंधेरा होने की वजह से वह बेटी को उठा ले जाने वालों का चेहरा नहीं देख पायी थीं.

युवती बीए की छात्रा थी और उसके सभी भाई बहन उससे छोटे हैं. उसके पिता पिछले छह साल से दुबई में काम करते हैं.

युवती की मां ने दावा किया है कि वो बेटी के अग़वा किए जाने की शिकायत लेकर थाने गईं थीं लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था और उसे थाने से ही वापस भेज दिया था.

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