झारखंडः दलित छात्रा की मौत, परिजनों ने स्कूल पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

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- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, बीबीसी के लिए
झारखंड के धनबाद में 17 साल की दलित छात्रा की कथित तौर पर खुदकुशी के बाद वहां के एक स्कूल की टीचर और स्कूल के प्रिंसिपल को ग़िरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है.
घटना के बाद ज़िला उपायुक्त ने जांच के लिए एक प्रशासनिक कमेटी गठित की है.
धनबाद के एसएसपी संजीव कुमार ने बीबीसी से कहा, "इस मामले में अभियुक्तों के विरुद्ध 'एबेटमेंट टू सुसाइड' की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है. चूंकि बच्ची नाबालिग थी इसलिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट जोड़ने के लिए भी कहा गया है."
छात्रा के सुसाइड नोट की जांच के लिए उसकी हैंडराइटिंग के सैंपल से जांच की जा रही है.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

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सुसाइड नोट में क्या लिखा?
ख़ुदकुशी से पहले लिखे गए नोट में छात्रा ने स्थानीय तेतुलमारी थाना प्रभारी को संबोधित करते हुए लिखा कि "आज स्कूल में एक शिक्षिका ने मुझे सबके सामने थप्पड़ मारा, पूरे स्कूल के सामने मुझे बेइज़्ज़त करके स्कूल से बाहर निकलवा दिया. मैं इस बेइज़्ज़ती को नहीं सहन कर पा रही हूं."
नोट में शिक्षिका का नाम सिंधु मैडम और प्रिंसिपल का नाम आरके सिंह लिखते हुए खुदकुशी का ज़िम्मेदार शिक्षिका को बताया है.
छात्रा ने लिखा है, "मेरे मरने के बाद सिंधु मैडम पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए."
ज़िला उपायुक्त संदीप सिंह ने बीबीसी को बताया कि छात्रा की आत्महत्या के मामले में एफ़आईआर होने के आलावा एक ज़िला स्तरीय प्रशासनिक जांच कमेटी गठित की गई है.
जांच करने वाली इस कमेटी को निर्देश दिया गया है कि छात्रा के परिवार के सदस्यों के अलावा उनके क्लासमेट का पक्ष भी जान लें.
क्या है पूरा मामला?

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ये मामला 10 जुलाई का है जब सेंट ज़ेवियर स्कूल में पढ़ने वाली 10वीं की छात्रा ने कथित तौर पर खुदकशी कर ली. छात्रा की मां वंदना देवी ने बताया, "मेरी बेटी सुबह सात बजे अंग्रेज़ी की एक्सट्रा क्लास के लिए जल्दी स्कूल चली गईं."
छात्रा के भाई राजीव बाउरी ने कहा, "स्कूल के रास्ते में मैंने दीदी को देखा कि वह एक जगह पर खड़ी हो कर रो रही थीं. मैंने पूछा तो कहा मां को बुलाकर लाओ."
वंदना देवी कहती हैं, "मेरी बेटी ने बताया कि रात में उसने जो बिंदी माथे पर लगाई थी, उसे हटाना भूल कर वह स्कूल चली गई. स्कूल प्रेयर के समय सिंधु मैडम ने उस बिंदी पर आपत्ति जताई और सभी विद्यार्थियों के सामने मेरी बेटी को दो तमाचे लगा दिए."
वह आगे कहती हैं, "इस बात से आहत हो कर मेरी बेटी स्कूल के प्रिंसिपल से शिकायत करने गई. लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि बैग लो और स्कूल से चली जाओ. अब इस स्कूल में मत आना."
"ये जानने के बाद मैं स्कूल प्रिंसिपल आरके सिंह के यहां गई और उनसे बेटी को स्कूल से न निकालने के लिए विनती की. मैंने सिंधु टीचर से माफ़ी मांगने की भी बात कही."

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छात्रा को अपमानित करने का आरोप
वंदना देवी ने बताया, "प्रिंसिपल ने कहा कि 'आप लोग क्या पढ़ाई लिखाई कीजिएगा, छोटी जाति से हैं, दूसरों के घर में काम करती हैं, यही काम इसको भी सिखाइए.' इस तरह अपमानित करते हुए उन्होंने कहा कि 'जाइए कल टीसी भिजवा देंगे', और मेरी बेटी को स्कूल से निकाल दिया."
वंदना देवी के अनुसार, "घर आने के बाद मेरी बेटी गुमसुम बैठी थी. मैंने उसे समझाया कि आप स्कूल ड्रेस चेंज कर लो और परेशान मत हो कुछ हल निकलेगा. इस पर उसने मुझ से कहा कि मां आप नहाकर नाश्ता कर लो. ये कहते हुए वह काग़ज़ पर कुछ लिखने लगी. मैंने गौर से देखते हुए पूछा कि बेटी क्या लिख रही हो? उसने जवाब दिया कि मां टेस्ट की तैयारी कर रही हूं, आप नहाने जाओ. अफसोस मुझे नहीं मालूम था कि वह उस समय सुसाइड नोट लिख रही थी. काश मैं शिक्षित होती तो समझ पाती."
वो कहती हैं, "लगभग सुबह के दस बज रहे थे जब मैं नहा कर कमरे की तरफ आई और देखा कि बेटी का शव पंखे से लटक रहा है. पड़ोसियों और पुलिस को सूचना दी. पुलिस के सामने बेटी के पॉकेट से वही सुसाइड नोट मिला जिसे वह लिख रही थी."
कुछ महीने पहले पिता की मृत्यु
एक साल पहले हनुमानगढ़ी मोहल्ला स्थित बीसीसीएल के तीन कमरे के घर में छात्रा सहित उनके पिता, मां, भाई, बहन व दादी कुल छह लोग रहते थे.
ग्यारह महीने पहले छात्रा के पिता की मौत कैंसर से हो गई थी. वंदना देवी के बेटे राजीव ने बताया, "मेरे पापा बीसीसीएल कर्मचारी थे. उनको ब्रेन ट्यूमर के बाद फेफड़े का कैंसर हो गया जिससे उनकी मौत हो गई. एक साल भी नहीं हुए अब दीदी भी चली गईं."
बिगड़ती आर्थिक स्थित के कारण वंदना देवी मज़दूरी करने लगीं.
राजीव कहते हैं कि पापा की जगह बीसीसीएल में अनुकंपा के आधार पर मुझे हाईस्कूल पास करने पर नौकरी मिल जाएगी. लेकिन दीदी की मृत्यु के बाद मुझे इस पढ़ाई से नफ़रत सी हो गई है, मैं कैसे हाईस्कूल करूं?"
राजीव आगे कहते हैं, "उस दिन प्रिंसिपल सहयोग करते तो मेरी दीदी भी हाईस्कूल कर लेतीं, जो नहीं हो सका. जानते हैं क्यों? क्योंकि आर्थिक स्थिति बिगड़ने के बाद मेरी व मेरी दोनो बहनों की लगभग छह महीने की फीस स्कूल में जमा नहीं हो सकी."
"इस वजह से हम तीनों को स्कूल में प्रताड़ित बात बात पर किया जाता था. जिसका खामियाज़ा मेरी दीदी को जान देकर चुकाना पड़ा."

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प्रिंसिपल की पत्नी ने क्या कहा?
सेंट ज़ेवियर स्कूल के प्रिंसिपल आरके सिंह की पत्नी सुप्रिया सिंह स्कूल का मैंनेजमेंट देखती हैं.
उनका कहना है, "स्कूल का सेंट ज़ेवियर नाम से लोग इसे क्रिश्चियन मिशनरी का विद्यालय समझ रहे हैं. लोगों को लगता है कि क्रिश्चियन स्कूल है इसलिए छात्रा को बिंदी लगाने के कारण डांटा व मारा गया है. जबकि मैं और मेरे पति हिंदू हैं."
सुप्रिया सिंह के अनुसार, “प्रार्थना के दौरान सिंधु टीचर ने छात्रा के मेकअप को लेकर पूछताछ की और कहा कि सबके लिए एक जैसे नियम हैं. तो छात्रा ने उनसे कहा कि वो सीनियर क्लास की टीचर नहीं हैं, आप इस तरह बात नहीं कर सकतीं. इस मिसबिहेव पर टीचर ने छात्रा को एक थप्पड़ मार दिया. इसके बाद छात्रा तल्खी में बात करने लगी तो प्रिंसिपल गार्जियन के साथ आने को कहा था.”
वह कहती हैं, "छात्रा अपनी मां के साथ प्रिंसिपल के पास वापस आईं और कहा कि टीचर माफी मांगें. इसके बाद प्रिंसिपल ने छात्रा को समझाया फिर भी वह अड़ी रहीं तो प्रिंसिपल ने छात्रा की मां से कहा कि इनको ले जाइए आज इनको पढ़ने का मन नहीं है. फिर दोनो चले गए."

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फीस न देने के कारण किया प्रताड़ित?
वंदना देवी का आरोप है कि, "पति की मौत के बाद तीनो बच्चों की लगभग छह महीने की फीस वह अदा नहीं कर सकीं. इस कारण उनके तीनों बच्चों को स्कूल में प्रताड़ित किया जाता रहा है."
इस आरोप पर सुप्रिया सिंह कहती हैं, "प्रताड़ित करने की बात सरासर ग़लत है. वंदना देवी के तीन बच्चों की 15,000 रुपये फीस बकाया है. यदि निकाला जाता तो सिर्फ एक बच्चे को नहीं, बल्कि तीनों को निकाल जाता."
वंदना देवी का दावा है कि सेंट ज़ेवियर स्कूल के दो छात्र पूर्व में भी आत्महत्या कर चुके हैं.
इस दावे को नकारते हुए सुप्रिया सिंह का कहना है कि '20 साल में ऐसी एक घटना नहीं घटी. ये सिर्फ स्कूल को बदनाम करने की कोशिश है. क्योंकि पूर्व में किसी विद्यार्थी ने आत्महत्या की होती तो उस मामले में एफआईआर ज़रूर होती, आज उनके परिजन भी सामने आते लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.'
स्थानीय थाना प्रभारी आशीष कुमार का भी कहना है कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है.
प्रिंसिपल ने छात्रा की जाति से संबंधित आपत्तिजनक बातें कहीं, क्या ये सच है?
सुप्रिया सिंह का कहना है कि, 'इस स्कूल में मात्र दो प्रतिशत जनरल छात्र हैं, शेष ओबीसी एवं एससी और एसटी हैं. तो प्रिंसिपल को यदि इस पर कोई आपत्ति होती तो वह सिर्फ जनरल के दो प्रतिशत विद्यार्थियों को ही पढ़ाते.'
वंदना देवी के द्वारा जाति को लेकर लगाए गए आरोपों पर एसएसपी संजीव कुमार ने कहा कि 'जाति से संबंधित ऐसी कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है. यदि लिखित रूप से सामने आएगी तो हम इस संबंध में भी कार्रवाई करेंगे.'
बीबीसी ने शिक्षिका सिंधु के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनके पति भारत में नहीं हैं.
मृतक छात्रा की मां वंदना देवी कहती हैं कि हमारी सरकार से मांग है कि स्कूल को बंद किया जाए और आरोपी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए.

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स्कूल के पास नहीं है किसी बोर्ड से मान्यता
धनबाद के ज़िला शिक्षा पदाधिकारी बी एन राजवर कहते हैं कि स्कूल के पास मात्र यू-डीआईएसई कोड है, जो सीबीएसई बोर्ड के मान्यता की पुष्टि नहीं करता. आठवीं तक न तो सीबीएसई से न ही झारखंड एकैडमिक काउंसिल से सेंट ज़ेवियर स्कूल को मान्यता मिली है.
ज़िला शिक्षा पदाधिकारी बीएन राजवर कहते हैं कि मान्यता लेने के मामले में अतीत में स्कूल को कई पत्र लिखे गए और शिक्षा विभाग की ओर से कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.
इस संबंध में सुप्रिया सिंह कहती हैं कि मान्यता के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी की जा रही है.
मान्यता के मामले में धनबाद उपायुक्त संदीप सिंह ने कहा कि 'जांच चल रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी.'
धनबाद की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरपर्सन उत्तम मुखर्जी कहते हैं, “आज बच्चे बहुत अकेलापन महसूस करते हैं. उनकी ज़िंदगी मोबाइल के इर्दगिर्द गुज़रती है. स्कूलों में चाइल्ड साइकोलॉजी समझने वाले एक्सपर्ट की आवश्यकता है जो बच्चों के इमोशन को समझते हुए उसनकी काउंसिलिंग करें ताकि सेंट ज़ेवियर जैसी घटनाओं को रोका जा सके.”
वो सवाल करते हैं, "सेंट ज़ेवियर स्कूल के पास किसी बोर्ड की मान्यता नहीं है. इसमें ज़िला शिक्षा विभाग की उदासीनता है या उसकी मिलीभगत से ये चल रहा था?"
महत्वपूर्ण जानकारी-
मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-
समाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज-9868396824, 9868396841, 011-22574820
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000
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