बीजेपी क्या 2024 के लिए नए साथियों की तलाश में है?- प्रेस रिव्यू

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इस साल के आख़िर से लेकर अगले साल के बीच होने वाले पांच राज्यों के चुनावों और लोकसभा चुनाव से पहले उसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं.
एक तरफ़ नौ साल सत्ता में रहने के बाद बीजेपी चुनावों के मद्देनज़र जोड़तोड़ में लगी है, तो सत्ता से बाहर रही कांग्रेस भी सभंल-संभल कर अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रही है.
द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात के बाद अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि 2019 में एनडीए से अलग हो चुकी ये पार्टी एक बार फिर गठबंधन में शामिल हो सकती है.
सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि चंद्रबाबू नायडू मान रहे हैं कि आंध्र प्रदेश में पीएम मोदी की लोकप्रियता और पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी की मदद से वो एक बार फिर सत्ता में आ सकते हैं.
लेकिन बीजेपी फ़िलहाल उनसे हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं हैं.
हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, केंद्र की बीजेपी सरकार और आंध्र की वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के बीच अच्छा तालमेल है. संसद में महत्वपूर्ण बिल पास कराने के मामले में वाईएसआर कांग्रेस, बीजेपी की भरोसेमंद साथी रही है.
ऐसे में बीजेपी सैद्धांतिक तौर पर टीडीपी के साथ हाथ मिलाने की संभावना तो तलाश रही है लेकिन अपने भरोसेमंद साथी को भी दरकिनार नहीं करना चाहती.
हिन्दू ने लिखा है, बीजेपी के लिए तेलंगाना में संकट और बड़ा है क्योंकि एक तरफ़ यहां पार्टी नेताओं के बीच मतभेद देखने को मिल रहे हैं तो दूसरी तरफ़ यहां की सभी 119 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है.
कर्नाटक में भी बीजेपी के लिए चुनौतियां कम नहीं. हाल में हुए विधानसभा चुनावों में यहां जनता दल सेक्युलर का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. ये पार्टी अब बीजेपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आज़माना चाहती है.

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हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर इन दोनों का गठबंधन हुआ तो इससे प्रदेश में वोक्कालिगा समुदाय के वोट बीजेपी के पाले में आ सकते हैं और पार्टी प्रदेश में लिंगायत पार्टी के तौर पर बनी अपनी पहचान को थोड़ा और विस्तार दे सकती है.
सूत्रों के हवाले से लेख में कहा गया है कि जनता दल हसन, मांड्या, बेंगलुरु (ग्रामीण) और चिकबल्लारपुर सीटें अपने लिए चाहती हैं जबकि बीजेपी इस पर अभी विचार कर रही है.
बिहार में बीजेपी को उम्मीद है कि जदयू और राजद के साथ आने से नाराज़ नेता उनके खेमे में आ सकते हैं. बीजेपी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने के लिए नीतीश कुमार को आगे करने की वजह से सीएम पद पर तेजस्वी यादव की दावेदारी मज़बूत होती जाएगी जिससे जदयू के कुछ नेता नाराज़ हो सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख में लिज़ मैथ्यू लिखती हैं कि बीते वक्त में टीडीपी, उद्धव सेना, शिरोमणि अकाली दल और जदयू जैसी पार्टियों ने एनडीए से विदा ली है जिसके बाद ये चर्चा गर्म है कि बीजेपी किसी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन नहीं चाहती.

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कांग्रेस की कोशिशें
द हिंदू में ही छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार तेलंगना में भारत राष्ट्र समिति के दो पूर्व नेता पोनगुलेती श्रीनिवास रेड्डी और जुल्लपी कृष्ण राव 12 जून को कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं.
अख़बार लिखता है कि ये दोनों नेता राहुल गांधी के अमेरीका दौरे से वापस लौटने के बाद 21 जून को दिल्ली में उनसे मुलाक़ात करेंगे, जिसके बाद औपचारिक तौर कांग्रेस का दामन थाम लेंगे.
इन दोनों नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए पार्टी से निकाला गया था.
अख़बार ने एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के हवाले से लिखा है कि राज्य के क़रीब सात से आठ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार राजस्थान में कांग्रेस डिप्टी सीएम सचिन पायलट को बड़ी ज़िम्मेदारी दे सकती है. उन्हें अगले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में पार्टी पैनल का प्रमुख बनाया जा सकता है.
हाल में सचिन पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाक़ात की थी. कांग्रेस का कहना है कि उनकी 90 फीसदी मुद्दों को सुलझा लिया गया है और जो बचा है वो बड़े मुद्दे नहीं हैं.
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में बजरंग सेना नाम का एक जानामाना दक्षिणपंथी धड़ा, औपचारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गया है.
हाल में बीजेपी से निकल कर कांग्रेस में शामिल हुए दीपक जोशी की कोशिशों से गोरक्षा, गौशाला निर्माण, हिंदू साथू-संतों की रक्षा और मंदिरों में काम करने वाले पुजारियों के लिए मासिक भत्ते की मांग कर रहा ये धड़ा अब कांग्रेस में शामिल हो गया है.
इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर पटेरिया का कहना है कि वो हाल में हुए यूपी चुनावों में योगी आदित्यनाथ के लिए और 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनाव प्रचार कर चुके हैं.

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मणिपुर के लिए केंद्र ने दिया 101.75 करोड़ का राहत पैकेज
गृह मंत्री अमित शाह के मणिपुर दौरे के बाद केंद्र सरकार ने वहां हुई नस्लीय हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए 101.75 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि गृह मंत्री ने अपने दौरे के दौरान राज्य सरकार से कहा था कि हिंसा के कारण अपना घर छोड़ने को बाध्य हुए लोगों की मदद के लिए उन्हें आधिकारिक तौर पर केंद्र को पत्र लिखना चाहिए.
अख़बार लिखता है कि इस बीच मणिपुर में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी हैं. बीते 24 घंटों के दौरान यहां के इम्फाल ईस्ट से 27 बंदूकें, 245 कारतूस और 41 बम बरामद किए गए हैं.
प्रदेश के सुरक्षाा सलाहकार के अनुसार राज्य में अब तक 896 हथियार, 11,763 कारतूस और 200 अलग-अगल तरह के बम बरामद किए गए हैं.
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नेक्स्ट परीक्षा से जुड़ी ख़बर फर्जी- एनएमसी
द टेलीग्राफ़ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार बीते दिनों भारतीय सोशल मीडिया में एक रिपोर्ट साझा की गई जिसमें दावा किया गया था कि सात जून को हुई एक बैठक हुई थी जिसमें फ़ैसला लिया गया कि नेक्स्ट (नेशनल एक्ज़िट टेस्ट) की परीक्षा इस साल सितंबर में होगी. अख़बार की कहना है कि ये रिपोर्ट फर्जी थी.
अख़बार लिखता है कि नेशनल मेडिकल कमिशन के एक अधिकारी ने बताया है कि सोशल मीडिया पर एक नोटिस साझा किया जा रहा था जिसके अनुसार इस साल के आख़िर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस आयोजित करवा रहा है.
अधिकारी ने चेतावनी दी है कि एनएमसी सभी घोषणाएं अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पोस्ट करता है, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए फर्जी पोस्ट के ख़िलाफ़ एनएमसी कार्रवाई करेगा.
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