मध्य प्रदेश: कांग्रेस और बीजेपी में लोक-लुभावन वादों की होड़

सलमान रावी

बीबीसी संवाददाता, भोपाल

शिवराज सिंह और कमलनाथ

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इमेज कैप्शन, शिवराज सिंह और कमलनाथ

मध्य प्रदेश में विधान सभा के चुनाव नज़दीक आते आते राज्य के दो मुख्य राजनीतिक दलों के बीच घोषणाओं और वायदों की जंग छिड़ी हुई है.

मतदाताओं को रिझाने के लिए दोनों ही दलों ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है.

अब घोषणाओं की, एक तरह से कहा जाए तो प्रतिस्पर्धा जैसी चल रही है.

जानकार मानते हैं कि ये कुछ बिलकुल वैसा ही है जैसे कर्नाटक में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के चुनावों के दौरान हो रहा था.

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी एक के एक बाद एक नयी योजनाओं की घोषणा कर रही है.

चुनाव क़रीब आते ही इन घोषणाओं की रफ़्तार भी बढ़ गयी है.

यही हाल कांग्रेस का भी है जिसने भारतीय जनता पार्टी को उसी की ‘पिच’ पर चुनौती देनी शुरू कर दी है.

घोषणाएं ही घोषणाएं

शिवराज सिंह चौहान

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भाजपा भी कुछ योजनाओं को फ़ौरन लागू करने की घोषणा कर रही है तो कुछ योजनाओं को लेकर उसकी ओर से वादे किये जा रहे हैं.

उदाहरण के लिए, जैसे ही शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार कोई नयी घोषणा करती है तो उसकी काट में उसी तरह की योजना और उससे ज़्यादा लाभ पहुंचाने के दावों के साथ कांग्रेस एक नई घोषणा को लेकर मैदान में उतर जाती है.

शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए ‘लाड़ली बहना योजना’ नाम से एक ऐसी ही योजना की घोषणा की है.

राज्य के जन संपर्क विभाग का कहना है कि जून की एक तारीख़ को प्रदेश भर में इसका ‘ट्रायल रन’ भी किया गया.

इस ‘ट्रायल रन’ के क्रम में प्रदेश भर में चयनित एक करोड़ 23 हज़ार चार सौ सैंतीस महिलाओं के खातों में एक रुपये जमा कराए गए.

इस महीने की दस तारीख़ को इन सब महिलाओं के खातों में एक-एक हज़ार रुपये जमा करा दिए जायेंगे.

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इस महीने की दस तारीख़ को इन सब महिलाओं के खातों में एक-एक हज़ार रुपये जमा करा दिए जायेंगे.

मुख्यमंत्री ने अपने एक वीडियो बयान में कहा है कि जून की 10 तारीख़ को शाम के 5 बजे तक सभी चयनित महिलाओं के खातों में एक हज़ार की राशि जमा कर दी जायेगी.

शिवराज सिंह चौहान

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उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया है कि खातों में राशि आने के बाद जब वो ‘जब घर लौटें तो दिए जलायें.”

उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि जिन महिलाओं के खातों में किसी वजह ये राशि नहीं पहुँच पाई है तो वो निराश न हों क्योंकि उन्हें भी जल्द ये मिल जायेगी.

कांग्रेस भी पीछे नहीं

कमलनाथ

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वहीं, मुख्यमंत्री की इस योजना को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने भी एक घोषणा की है कि अगर प्रदेश में इस बार उसकी सरकार बन जाती है तो वो ‘नारी सम्मान योजना’ शुरू करेगी जिसमें राज्य की महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह दिए जाने का वायदा किया गया.

यानी भाजपा की घोषणा से पूरे 500 रुपये ज़्यादा.

कांग्रेस की घोषणाएं

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ये घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने मई महीने में अपने चुनावी क्षेत्र छिंदवाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की.

उनका कहना था कि इस योजना का लाभ 23 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाओं को मिलेगा.

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वो सीटें जहाँ पुरुषों से अधिक महिलाएं

शिवराज सिंह

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दोनों ही दल महिलाओं को लुभाने के लिए हर दांव का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि 5.39 करोड़ की आबादी वाले मध्य प्रदेश में महिलाओं की संख्या 2.60 करोड़ से भी ज़्यादा है.

इनमें 23 वर्ष की आयु से लेकर 60 वर्ष की आयु वाली महिलाओं की संख्या लगभग 2 करोड़ के आस पास बताई गई है.

यही नहीं, मध्य प्रदेश की विधानसभा में 18 सीटें ऐसी हैं जहां महिलाओं की जनसंख्या पुरुषों से अधिक है.

इनमें ज़्यादातर सीटें आदिवासी बहुल इलाकों की हैं जैसे थांदला, कुक्षी, पेटलावद, झाबुआ, जोबट, अलीराजपुर, पानसेमल, डिंडोरी, निवास, मंडला, बैहरबै, बालाघाट, परसवाड़ा और वारासिवनी शामिल हैं.

भारतीय जनता पार्टी के वायदे

शिवराज सिंह

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनावों से पहले और भी कई वायदों की झड़ी लगा दी है. इनमें से एक है, ‘मुख्यमंत्री युवा कौशल कमाई योजना’ जिसे मुख्य तौर पर ‘सीखो और कमाओ’ की तर्ज़ पर लागू किए जाने का प्रस्ताव है.

इस योजना में युवाओं को प्रति माह आठ से दस हज़ार रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है.

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता अजय विश्नोई कहते हैं कि इस योजना को चुनावों की घोषणा के पहले ही लागू कर दिया जाएगा.

शिवराज सिंह

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कई और योजनाओं का वायदा भारतीय जनता पार्टी कर रही है जिसमें प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 12वीं टॉप करने वाले छात्रों को ई स्कूटी देने के वायदे के साथ-साथ ‘ग़रीबों को ज़मीन के ‘मुफ़्त भूखंड, ‘आवासीय अधिकार योजना’ और ‘मुख्य मंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ का वायदा भी है.

इस कड़ी में हाल ही में प्रदेश के बुजुर्गों को तीर्थ स्थलों को हवाई जहाज़ से दर्शन भी करवाए गए हैं.

देवास ज़िले के सोनकच्छ में एक सभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में पहले से चल रही मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह की योजना के अंतर्गत विवाहित लड़की को मिलने वाली 49 हज़ार रुपये की राशि को बढ़ाकर 51 हज़ार करने का वायदा भी किया.

भाजपा के वायदों को कांग्रेस के वायदों की चुनौती

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कांग्रेस ने भी घोषणाओं की इस प्रतिस्पर्धा में ख़ुद को कहीं भी उन्नीस नहीं रखा है.

कमलनाथ ने सबसे पहला वायदा 500 रुपये प्रति गैस सिलिंडर देने के साथ शुरू किया.

इसके अलावा पुत्रानी ‘पेंशन स्कीम’ को लागू करने और ‘100 यूनिट तक बिजली बिल माफ़ और 200 यूनिट तक बिजली बिल हाफ़’ का उनका वायदा भी बड़ा चुनावी मुद्दा बन रहा है.

किसानों की क़र्ज़ माफ़ी का वायदा तो कांग्रेस पिछले विधान सभा के चुनावों के समय से कर रही है.

कांग्रेस के विधायक पीसी शर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पिछली बार के विधान सभा के चुनावों में जीत के बाद जब कांग्रेस की सरकार का गठन हुआ था तो सरकार ने राम वनगमन पथ विकसित करने, महाकाल लोक निर्माण, ओंकारेश्वर निर्माण, मेट्रो के निर्माण जैसी योजनाओं को शुरू किया था.

इसके अलावा वो कहते हैं कि कई ऐसी योजनाएं हैं जो कांग्रेस की हैं मगर भाजपा उनकी अब घोषणा कर रही है. जैसे किसानों की ऋण माफ़ी.

वो कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी घोषणाएं और वायदे क्यों कर रही है? 20 सालों से प्रदेश में उन्होंने ही सरकार चलाई है. दो दशकों बाद भी वायदा कर रहे हैं.”

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भारतीय जनता पार्टी का पलटवार

शिवराज सिंह

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लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हितेश वाजपेयी ने बीबीसी से चर्चा के दौरान कांग्रेस की कुछ महीनों की सरकार के कार्यकाल के दौरान की गयी किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर सवाल खड़े किये.

उन्होंने कहा कि किसानों की क़र्ज़ माफ़ी कांग्रेस की सरकार ने बैंक से क़र्ज़ लेकर की थी.

वो कहते हैं, “लेकिन सरकार ने बैंकों का क़र्ज़ नहीं चुकाया है. ये धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है.”

बीजेपी का दावा है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और राज्य की सरकार की योजनाओं का दोहरा लाभ मिलेगा उनके दल को इस बार विधान सभा के चुनावों में.

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

शिवराज सिंह

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘इस तरह की योजनाओं से ‘प्रदेश के लोगों को आलसी बनाया जा रहा है जबकि राज्य पर क़र्ज़ चढ़ता ही जा रहा है.

भोपाल से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘सांध्य प्रकाश’ के संपादक संजय सक्सेना कहते हैं कि इस तरह की ‘मुफ़्त की रेवड़ियां बांटने’ की वजह से ही मध्य प्रदेश पर 3 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ चढ़ा हुआ है.

वो कहते हैं, “दो प्रमुख राजनीतिक दल दो तरीक़ों से वोटरों को रिझाने की कोशिश करने में लगे हुए हैं. एक – धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर और दूसरा मुफ़्त की रेवड़ियों का वायदा कर.

ये आदत मध्य प्रदेश में सबसे ज़्यादा शासनकाल चलाने वाले दल ने ही डाली है और लोगों को इसकी आदत पड़ गयी है.

यही वजह है कि लोग भी चुनावों के समय टकटकी लगाए बैठे रहते हैं कि कौन सा दल क्या वायदा कर रहा है.”

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भोपाल के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनीतिक विश्लेषक राजेश जोशी का माना है कि इस तरह की घोषणाओं पर ‘प्रतिबंध’ लगाया जाना चाहिए.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, “ये तो खुले आम मतदाताओं को रिश्वत देने जैसा है. चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक दलों के इस रवैये का संज्ञान लेना चाहिए और उस पर निर्देश जारी करना चाहिए."

उन्होंने आगे कहा, "राजनीतिक दल कैसे इस तरह की घोषणा कर सकते हैं. किसने उन्हें ये अधिकार दिया है कि करदाताओं के पैसों को रेवड़ियों में उड़ा दें? ये मतदाताओं को एक तरह से ख़रीद ही रहे हैं.”

जानकार ये भी कहते हैं कि मध्य प्रदेश में मतदाताओं को ‘ऐसी घोषणाओं का चस्का’ लग गया है. इस वजह से दोनों प्रमुख दल मुख्य मुद्दों को दरकिनार कर घोषणाओं में एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं.

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