आयुष्मान भारत कार्ड होने के बावजूद मरीज़ों से 2.7 करोड़ रुपये की ठगी- प्रेस रिव्यू

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भारत के सबसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में शामिल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आयुष्मान भारत स्कीम के कार्ड धारकों के साथ धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, यूपी के मेरठ ज़िले में रहने वाले लाइन मैन मोहित कुमार बीते मार्च काम के दौरान चोटिल होने के बाद इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुँचे थे.

मोहित कुमार के परिवार को उम्मीद थी कि आयुष्मान भारत स्कीम का कार्ड होने की वजह से वह इलाज में पैसे ख़र्च करने से बच जाएंगे.

लेकिन इलाज के दौरान मोहित कुमार सफदरजंग अस्पताल में डॉ मनीष रावत और उनके सहयोगियों की ओर से चलाए जा रहे स्कैम की शिकार हुए. इस वजह से मोहित कुमार को 80,000 रुपये का भुगतान करना पड़ा.

डॉ मनीष रावत इस समय न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई की ओर से की जा रही जांच में शामिल हैं. इस मामले में जांच का दायरा फैलता ही जा रहा है.

सीबीआई की ओर से कोर्ट में दिए आधिकारिक आंकड़ों की जांच और डॉक्टरों एवं मरीज़ों के साथ बातचीत में सामने आया है कि मोहित कुमार जैसे 54 मरीजों के साथ इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ठगी की गई.

इसके साथ ही पिछले दो सालों में ज़्यादातर ग़रीब परिवारों से 2.7 करोड़ रुपये ठगे गए. इस पैसे को मध्यस्थों और कंपनियों की साठगांठ से घुमाया गया था. इनमें से एक कंपनी में डॉ मनीष की पत्नी हितधारक थीं.

इन मरीज़ों से जिन मेडिकल इम्प्लांट्स के लिए पैसे लिए गए थे, उनमें से ज़्यादातर केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत स्कीम के तहत आते हैं.

चार्ज़शीट में बताया गया है, “इस मामले की जांच में सामने आया है कि डॉ मनीष रावत ने अवैध ढंग से पैसा कमाने के लिए कुछ अन्य लोगों के साथ साज़िश करके योग्य मरीज़ों को आयुष्मान भारत स्कीम के लाभों से वंचित रखा.”

डॉ रावत के वकील नवीन कुमार ने बताया है कि सफदरजंग अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों ने उनके मुवक्किल को इस मामले में ग़लत ढंग से फंसाया है.

उन्होंने ये भी कहा है कि डॉक्टरों की ओर से अपने मरीज़ों के साथ मेडिकल इम्प्लांट बेचने वाले वेंडरों की जानकारी साझा करना काफ़ी आम है.

वह कहते हैं, “डॉ मनीष ने जिन वेंडरों के नाम दिए थे, उन्होंने मरीज़ों को एमआरपी से भी कम दामों पर इम्प्लांट दिए थे.”

इस स्कीम के तहत मुफ़्त में इलाज़ करने वाले 57 फीसद अस्पताल सरकारी अस्पताल हैं. इसकी वजह से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार इन अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच सकते हैं.

राजस्थान में गैंगरेप पर राजनीतिक गतिरोध शुरू

अशोक गहलोत

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इमेज कैप्शन, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
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राजस्थान के जोधपुर में जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी परिसर में 17 वर्षीय दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, राजस्थान पुलिस ने कहा है कि कथित बलात्कारियों को घटना के दो घंटे बाद ही गिरफ़्तार कर लिया गया था. इनके नाम धर्मपाल सिंह, समंदर सिंह भाटी और भट्टम सिंह हैं. इनकी उम्र बीस से बाइस साल के बीच है.

पुलिस ने ये भी बताया है कि अभियुक्त एक छात्र नेता के लिए प्रचार कर रहे थे जो यूनिवर्सिटी संघ चुनाव में एबीवीपी का टिकट हासिल करने की कोशिश कर रहे थे.

बीजेपी और एबीवीपी ने अभियुक्तों के साथ किसी प्रकार का संबंध होने के दावों का खंडन किया है.

राजस्थान के विधायक संयम लोधा (इंडीपेंडेंट) ने बीते सोमवार विधानसभा में बीजेपी को घेरते हुए कहा था कि इस मामले के तार एबीवीपी से जुड़े होने की वजह से बीजेपी विधायक इस मुद्दे को नहीं उठा रहे हैं.

इसके बाद बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में भारी हंगामा किया था. इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने लोधा की टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की थी.

जयपुर और जोधपुर में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई और बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी देखने को मिली है.

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि “बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा इस मामले पर चुप्पी बनाए हुए हैं. उन्होंने इसकी निंदा तक नहीं की है जो महिला सुरक्षा को लेकर बीजेपी की गंभीरता बयां करता है.”

उन्होंने ये भी कहा है कि “इस मामले से जुड़े अभियुक्त कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, राज्य सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि इस मामले के दोषियों को सज़ा मिलना सुनिश्चित किया जाएगा और बेगुनाह बच्ची को न्याय मिले.”

बच्ची के शोषण के मामले में महिला पायलट गिरफ़्तार

महिला पायलट

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इमेज कैप्शन, घरों में काम करने वाली महिलाओं और पायलट के बीच हुई हाथापाई से पहले की तस्वीर

दिल्ली पुलिस ने द्वारका में रहने वाली एक महिला पायलट और उसके पति को घर के काम के लिए रखी गई दस साल की बच्ची के साथ मारपीट करने के मामले में गिरफ़्तार किया है.

इनके ख़िलाफ़ बाल श्रम क़ानून के साथ-साथ आईपीसी की धाराओं 323, 324, 342, के तहत केस दर्ज किया गया है.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, द्वारका डीसीपी एम हर्ष वर्धन ने इनकी पहचान 36 वर्षीय कौशिक बागची और 33 वर्षीय पूर्णिमा बागची के रूप में की है.

कौशिक बागची एयरपोर्ट पर ग्राउंड रिपोर्ट के रूप में काम करते हैं. वहीं, उनकी पत्नी पूर्णिमा बागची इंडिगो एयरलाइंस में पायलट हैं.

इस दंपति और घरों में काम करने वाली महिलाओं के बीच मारपीट का वीडियो बीते कुछ घंटों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

इस वीडियो में घरों में काम करने वाली महिलाएं पायलट महिला को पीटते दिख रही हैं.

लेकिन इस मामले की शुरुआत दस वर्षीय बच्ची के साथ मारपीट से शुरू हुई है.

पीड़ित बच्ची के घरवालों के मुताबिक़, पायलट महिला और उसके पति ने अपने चार वर्षीय बेटे का ख्याल रखने के लिए इस बच्ची को एक महीने पहले काम पर रखा था.

इस बच्ची की चाची ने अख़बार को बताया है कि उसने बीते बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे पायलट महिला की ओर से बच्ची को पीटा जाते हुए देखा.

वह कहती हैं, “जब हमने इसकी वजह पूछी तो उसने कहा कि महिला पायलट सफाई ठीक से नहीं होने की वजह से नाराज़ थीं. जब हमने उससे घर के नीचे आने को बोला तो उसने कहा कि उसे इसकी अनुमति नहीं है.

इसके बाद हमने शोर मचाकर महिला पायलट से बच्ची को नीचे भेजने को कहा. इस पर पायलट महिला ने दूसरे फ़्लोर पर स्थित अपने फ़्लैट का दरवाज़ा बंद कर लिया. और मुख्य गेट भी लॉक कर दिया. महिला पायलट बोलती रही कि वह बच्ची के माँ-बाप से बात करेगी. लेकिन भीड़ जुटने के बाद हम बच्ची को छुड़ाने में कामयाब हुए.”

पुलिस ने बताया है कि बच्ची की मेडिकल जांच कराई गयी है जिसमें सामने आया है कि बच्ची के हाथ में जलने के निशान हैं और कुछ चोटें भी आई हैं.

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